In alignment with the Ministry of Health and Family Welfare, Government of India, the Department of Obstetrics and Gynecology, AIIMS Patna under the guidance of Executive Director & CEO Prof. Dr. Gopal Krushna Pal, spearheaded efforts to promote #familyplanning and raise awareness about various #contraceptive options. They also highlighted the National Family Planning Helpline (Toll-Free No. 1800-11-6555) by launching the SUGAM model IEC- Information, Education and Communication Material.
Money is not Everything.
Statement is given by a Bank Staff who would have joined bank to earn money.
Banking job is getting worst day by day.
@aiboc_in@TheOfficialSBI kindly look into this.
मोदी जी, किनारे रहना भी सीखिए
चंद्रयान 3 मिशन की कामयाबी के फौरन बाद नरेंद्र मोदी ने जिस तरह 15-20 मिनट का भाषण दिया वो किसी भ�� लिहाज़ से जायज़ नहीं लगा। ये एक देश की उपलब्धि से पहले हमारे वैज्ञानिकों की उपलब्धि थी। जो लोग इस मिशन में लगे रहे। जिन्होंने इसे कामयाब बनाने केे लिए अपनी ज���िंदगी के इतने साल दिए ये मौका उनके बोलने का था। पहली लाइम लाइट उनको मिलनी चाहिए थी। मगर बाकी नेताओं की तरह नरेंद्र मोदी को भी लगा कि नहीं इतनी बड़ी कामयाबी के फौरन बाद बोलकर लाइमलाइट मैं ले लूं। अरे भाई, आप तो साल भर अलग-अलग कार्यक्रमों में, अलग-अलग मौकों पर चर्चा में रहते ही हैं। दसियों योजनाओं के लिए आपकी सरकार, आपकी पार्टी और लोग भी आपको श्रेय देते ही हैं मगर कल की सफलता के लिए तो पहले उन लो���ों को बोल लेने देते जो इस सफलता के पहले हकदार थे। मोदी अगर दो घंटे बाद भी इस पर कोई वीडियो स्टेटमेंट जारी कर देते तब भी कोई फर्क नहीं पड़ना था। हकीकत तो ये है कि इतनी बड़ी सफलता पर थोड़े इंतज़ार के बाद अगर वो आते तो जनता में उनको सुनने का ज़्यादा उत्साह रहता। लेकिन नहीं, उन्हें ��़रूरी लगा कि इतनी बड़ी कामयाबी के बाद देश की एक सौ चालीस करोड़ जनता वो सारी तुकबंदियां सुने जो पहले से लिखी ली गईं थी वरना उसे लिखने वाला कॉपी एडिटर बुरा मान जाता।
क्या किसी बड़े क्रिकेट टूर्नामेंट में जीत के बाद क्रिकेट कप्तान की बजाए क्या देश का पीएम प्रेस कॉन्फ्रेंस करने आता है? मैच टीम ने खेला होता है। जीती वो होती है। हीरो खिलाड़ी बने होते हैं इसलिए कप्तान या खिलाड़ी ही आगे रहते हैं और क्रिकेट बोर्ड और सरकारों काम उनको बाद में सम्मानित करने का होता है। उस पर भी आप देखिए धोनी जैसे खिलाड़ी टीम को ये संस्कार देकर गए कि ऐसे मौकों पर कप्तान को पीछे हट जाना चाहिए। ये धोनी से मिली सीख ही है कि उनके बाद कोहली और रोहित भी टूर्नामेंट जीतने पर टीम के सबसे युवा खिलाड़ी को सबसे बीच में रखते हैं। मगर नहीं, जिस कप्तान ने टूर्नामेंट जितवाया वो उस वक्त की लाइमलाइट छोड़ने को तैयार है मगर जिन नेताओं का क्रिकेट से दूर दूर तक कोई नाता नहीं, उन्हें हर पोस्ट मैच Ceremony मेंन इनाम देने के बहाने टीवी पर आना होता है। यही वजह है कि शरद पवार जैसे लोग रिकी पोंटिंग के हाथों धकिया दिए गए थे।
लेकिन हमारे नेताओं को ये बात कभी समझ नहीं आती। चुनावी राजनीति छोड़िए नेताओं को लगता है कि हर छोटी-बड़ी उपलब्धि, हर कामयाब इंसान के साथ खुद को जोड़कर उस पूरे माहौल का फायदा उठाकर अपनी छवि चमकाई जाए।
जब क्रिकेट मैच की जीत के बाद पीएम कप्तान की जगह प्रेस कॉन्फ्रेंस करने नहीं आ जाते तो वैज्ञानिक उपलब्धियों के वक्त पीछे रहना तो और ज़्यादा ज़रूरी हो जाता है। क्या सरकार वैज्ञानिकों को परफॉर्मर न मानकर अपना मुलाज़िम मानती है? क्या उसके अंदर ये भाव है कि हम इन्हें तनख्वाह देते हैं तो उनकी उपलब्धियों का श्रेय लेने का पहला हक हमारा है?
आप किसी की शादी ��ें भी जाते हैं तो इस बात का ख्याल रखते हैं कि इतना भी तैयार न हो जाएं कि खुद दुल्हे लगने लगें। क्योंकि आपको भी पता है कि आज दूल्हा कौन है। आज किसको लाइम लाइट मिलनी चाहिए। आज किसका दिन है। तो क्या ये बात देश के पीएम को नहीं पता थी कि कल किसका दिन था...कल किसको लाइमलाइट मिलनी चाहिए थी।
न्यूज़ चैनल्स वालों की भी अज्ञानता या संवेदनहीनता देखिए, जब तक पीएम बोल रहे थे तब तक ज़्यादातर चैनल्स उनकी बात ���ुना रहे थे और जैसे ही मिशन से जुड़े अलग-अलग वैज्ञानिक अपनी बात रखने लगे ये लोग अपने रिपोर्टर्स के पास चले गए। एंकर खुद चिल्ला-चिल्लाकर लाइम लाइट लेने लगे। कोई ढोल नगाड़ों की ‘rich visuals’ दिखाने लगा और वैज्ञानिकों की प्रेस कॉफ्रेंस में गए भी तो बीच-बीच में।
अरे भाई, ये बात क्यूं समझ नहीं आती कि विक्रम लैंडर को चांद पर उतरता देख घर बैठे एक आम हिंदुस्तानी भावुक हो गया तो वही आम हिंदुस्तानी ��े भी तो देखना-सुनना चाहता है कि जिन लोगों ने इस मिशन को कामयाब मनाया वो क्या कहना चाह रहे हैं। उनके क्या इमोशन्स हैं।
नरेंद्र मोदी को भी ये बात अच्छे से समझनी चाहिए कि 2014 में जनता ने अगर उन्हें देश का पीएम बनाया तो इसलिए क्योंकि जनता यूपीए की कई बुराइयों से परेशान थी। जिसमें यूपीए में शामिल दलों का भ्रष्टाचार, अलग-अलग दलों में फैला परिवारवाद, नेताओं की आत्ममुग्धता वो कारण थे जिससे जनता बुर��� तरह चिढ़ी हुई थी। इन सालों में मोदी जनता को ये यकीन दिलाने में कामयाब हुए हैं कि मैंने कोई भ्रष्टाचार नहीं होने दिया, वो ये भी दिखाने में सफल रहे हैं कि मैं बहुत मेहनती हूं। मगर यही मोदी जब देश के सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम का नाम अपने नाम पर रखने देते हैं, यही मोदी कोरोना के वक्त मारे गए लोगों का, सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलकर घर जाने वाले मज़दूरों का 'मन की बात' में ज़िक्र तक नहीं करते, सरकार स��� ल��कर पार्टी तक हर वक्त खुद को ही केंद्र में रखते हैं तो वैसे ही आत्ममुग्ध और पकाऊ लगते हैं जैसे वो नेता लगते थे जिनसे ऊबकर जनता ने उन्हें चुना था।
बात तो ये कल ही बुरी लगी थी मगर ये सोचकर तब कुछ नहीं बोला कि इतनी बड़ी उपलब्धि के बाद नकारात्मक बात को चर्चा में लाकर कहीं एक बड़ी उपलब्धि से उसकी लाइम लाइट न छीन लूं और मोदी जी की तरह मैं भी ऐसी गलती नहीं करना चाहता था।
@nirajbadhwar
5 Su!cides in last 7 Days in 3 PSBs
3 - 'Su!c!ide' Bank of India
1 - 'Canada' Bank
1 - Bank of 'Bharat'
Due to toxic culture & work pressure.
PS: Plz Don't write Banks name, it ruin bank's image & can affect quarter Business, departed souls may take rebirth. 😓 🤐
पिछले 48 घंटों में 3 बैंककर्मियों के आत्महत्या की चिंताजनक खबर मिली है!
नौकरी न मिलने के कारण आत्महत्या तो देश में आम बात है। अब नौकरी मिलने के बाद हो रहे तनाव से भी लोग जान गंवाने लगे हैं।
जरूरी है कि रिक्त पदों को तुरंत भरा जाए, बैंक मैनेजमेंट सुधरे और काम का बेवजह दबाव घटे।
इस वीडियो में कुछ ऐसा है जो हमको झकझोर गया। देश के करोड़ों लोग इसी असहनीय पीड़ा में हैं।
एक तरफ काम ���ंधा रोजगार नही है, दूसरी ओर बेतहाशा महँगाई। आम जनता की रोजी रोटी पर जानलेवा हमला हुआ है।
जिस सरकार को यह पीड़ा महसूस न हो, उसे उखाड़ फेंकना सिर्फ जिम्मेदारी नही, हमारा धर्म है।