इस आंदोलन और इससे जुड़ी बहस ने एक बहुत अच्छा काम किया- बहुत से तथाकथित मित्रों,सहकर्मियों, पूर्व मित्रों,सहकर्मियों का असली चेहरा दिखा दिया..और मुझे ये अहसास करा दिया कि आप भले ही हिंसा और अभद्रता के खिलाफ हमेशा खड़े रहें..अब यही नया दौर है..आपको नहीं पसंद तो आप बाहर हो जाइए..ये सब तो अब ऐसे ही चलेगा..एक दूसरे पर हमले,ओछी टिप्पणियां,गाली गलौज,मतलब के रिश्ते..हर वक्त Whataboutery.. अगर आपने बोला कि ये सब गलत है तो आपको गलत ठहरा दिया जाएगा..आप पर व्यक्तिगत हमले किए जाएंगे..आपका चरित्र हनन किया जाएगा...
तो चलिए...अगर यही सब सही..
तो हम इस बदलते दौर का हिस्सा नहीं...😊🙏
I would rather live peacefully with the values that I have lived my life with,rather than getting disturbed with such toxic personal attacks🙏
राष्ट्रवाद का मार्ग अकेला और कठिन है।
इस मार्ग पर देश की सरकार भी आपके साथ नहीं है।
अराजकता, उद्दंडता और हिंसा इस देश में अपराध नहीं है। मेरी बेटी मास्टर्स के लिए स्नातक के बाद विदेश जाना चाहती है, मैं मना करता था। आज @narendramodi जी ने मुझे बताया कि मैं ग़लत था। भारत मानसिक रूप से आज भी जिस रूप में विदेशी हमें देखते थे ऐसे ही पत्ते पहनने वाले ऐसे नेटिव्स का देश है जो ना नैतिक शासन चला रहा है न चलाने में सक्षम ही है। भारत भीड़तंत्र का देश है।
Dear Nationalist Hindus,Your vote has no value in this country. You democratically elect a government, only for someone to force it to resign through hunger strikes and street protests.
If the crowd on the streets decides who stays in power instead of the people through elections, then what's the point of voting?
That's why I've decided I'll never vote again. 🙏
इस चूतिये अभिजीत दीप्के के दवाब में धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया है
ये दुर्भाग्य है भारत का कि कुछ ब्लैकमेलरों के कारण Dharmendra Pradhan जैसे विजनरी शिक्षा मंत्री को Resign करना पड़ा है
इस्तीफे की टाइमिंग बहुत गलत है, आज भेड़ियों के मुंह में खून लग गया है