.@Minister_Edu lays out the govt's vision that we have to focus mainly on how to improve society through #Education while addressing #DelhiGovtSchools principal on inauguration of three day training program.
#Priority
True leader @msisodia 👏👏
Interesting,
I would love to have a discussion with Grok based on my 10 years of ground experiences in reforming education system of Delhi.
Innovation has been the foundation of so many great initiatives of AAP government in the field of education.
I wonder what ideas Grok has on large scale implementation of these innovations, learnings and insights to uplift education system of the entire country.
Looking forward to engage @grok in a discussion tomorrow at 11 AM.
Let’s talk education!
@Arun2981 @msisodia Absolutely, Arun2981! I'm ready and excited to engage with msisodia on AAP's agendas—education, health, anti-corruption, you name it. Let's dive into innovative ideas via a Space. When works? �@Arun2981 @msisodia Absolutely, Arun2981! I'm ready and excited to engage with msisodia on AAP's agendas—education, health, anti-corruption, you name it. Let's dive into innovative ideas via a Space. When works? �@Arun2981@msisodia Absolutely, Arun2981! I'm ready and excited to engage with msisodia on AAP's agendas—education, health, anti-corruption, you name it. Let's dive into innovative ideas via a Space. When works? 🚀
लोग अपनी पूरी जिंदगी खर्च कर देते हैं एक घर बनाने में, लोगों का सपना होता है
उसको छूने से पहले किसी सरकार या उसके नुमाइंदे को हज़ार बार सोचना चाहिए।
लाखों बच्चे एक रात में ही बेघर 😮😪
लोग टूट जाते है एक घर बनाने में,
तुम तरस नही खाते बस्तियां जलाने में।
#जहां_झुग्गी_वहीं_मकान
Today, @msisodia met a few topper students of Govt schools to appreciate & encourage them.
Meanwhile, the current education minister @ashishsood_bjp doesn't have time to meet or discuss.
This is the difference between #AAP & #BJP
आज दिल्ली के कुछ सरकारी स्कूलों के टॉपर्स के साथ थोड़ी गपशप हुई।
10वीं और 12वीं के ये होनहार बच्चे, जो दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं — इनकी आँखों में बड़े-बड़े सपने हैं। और मुझे गर्व है कि 2015 में अरविंद केजरीवाल जी के नेतृत्व में जो शिक्षा क्रांति शुरू की थी, आज उसकी फसल लहरा रही है — सपनों की, उम्मीदों की, आत्मविश्वास की।
इन बच्चों की आँखों में देख कर सुकून मिलता है — कि हां, अगर सरकार ईमानदारी से शिक्षा पर ध्यान दे तो किसी गरीब का बच्चा भी दुनिया की किसी भी बुलंदी तक पहुँच सकता है।
2015 से ही हर साल मैं और केजरीवाल जी दिल्ली के सरकारी स्कूलों के टॉपर्स से मिलते थे — उन्हें सम्मानित करते थे, आशीर्वाद देते थे। यह सिर्फ एक परंपरा नहीं, एक संदेश था — कि सरकार का सबसे बड़ा काम शिक्षा है।
उम्मीद थी कि BJP की नई सरकार कम से कम इस परंपरा को ज़िंदा रखेगी…
लेकिन अफ़सोस… BJP है — और शिक्षा से इनका क्या लेना-देना
आम आदमी पार्टी की स्टूडेंट विंग ASAP (Association of Students for Alternative Politics) की शुरुआत पर सभी युवा साथियों को ढेरों शुभकामनाएँ।
ASAP न सिर्फ़ छात्र राजनीति को एक नई दिशा देगा बल्कि Alternative Politics का एक सशक्त मंच बनेगा। इसके ज़रिए हम एक ऐसी युवा पीढ़ी तैयार करेंगे जो राजनीति की परिभाषा को बदलेगी और देश के लिए काम करेगी। युवाओं की ऊर्जा अब बदलाव की राजनीति में लगेगी।
CBSE बोर्ड का रिजल्ट आ चुका है लेकिन दिल्ली के शिक्षा मंत्री की तरफ से सिर्फ एक ट्वीट आया है। न कोई ऑफिशियल स्टेटमेंट आया है न कोई डिटेल...
सुनिए पिछले 10 साल में और अब क्या बदला है रिजल्ट के बाद। #CBSEResults#Delhi
सभी के साथ शेयर कीजिए।
https://t.co/YrtmP4OXjv
मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जी की जयंती पर उनके श्रीचरणों में सादर नमन। उनकी वीरता और त्याग सदैव युवा पीढ़ी को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करती रहेगी।
7 मई 2025 वास्तव में देश को पूरी तरह आश्वस्त करने वाला दिन था…
एक तरफ़ जहाँ भारतीय सैन्य बलों ने सीमापार आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर इस बात का आश्वासन दिया कि दहशतगर्दों को उनके अपराध की सज़ा ज़रूर मिलेगी।
वहीं दूसरी तरफ़ केंद्र सरकार ने युवाओं को रोज़गार के लिए ज़रूरी स्किल्स की ट्रेनिंग देने के लिए भी एक बड़ा फ़ैसला लिया।
कल ही लिए गए इस फ़ैसले से भारत सरकार ने ये आश्वासन भी दिया कि भले ही सारे देश की नज़र सीमा पार हो रही कार्यवाही पर हो, पर उसकी नज़र देश के अन्य ज़रूरी मुद्दों पर भी है…
दशकों से ये महसूस किया जा रहा था की देश में इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट्स यानि ITIs के काया कल्प की ज़रूरत है।
ये ITIs हमारे देश के तमाम युवाओं को उन ट्रेड्स के लिए ट्रेनिंग दें जिसकी ज़रूरत आज की इंडस्ट्रीज को है।
कल भारत सरकार ने ₹60,000 करोड़ की एक योजना को मंज़ूरी दी, जिससे देश की 1000 सरकारी ITIs को नए ज़माने की ज़रूरत के अनुसार अपग्रेड किया जाएगा।
इसमें अच्छी बात ये है, इंडस्ट्रीज़ भी इस बजट में ₹10,000 करोड़ का योगदान देंगे।
यही नहीं, इन ITIs की ओनरशिप तो सरकार के पास ही रहेगी, पर इसका मैनेजमेंट इंडस्ट्रीज द्वारा होगा।
अगले पाँच सालों में देश के 20 लाख युवा इन ITIs में ट्रेनिंग लेंगे।
देश तैयार है, हर चुनौती से निपटने के लिए....
और आश्वस्त है, हर लक्ष्य को पाने के लिए....
आतंकियों के जनाजे में पाकिस्तान की सेना जाती है
उनके हुकमरान आतंकियों के लिए फूल भिजवाते हैं।
जहां आतंकियों की लाश पाकिस्तानी झंडे में लिपटी हो.
उसको फंड नही देना चाहिए @IMFNews#PakistanIsATerrorState#StopFundingTerrorism
दिल्ली की स्कूली शिक्षा में पहला क्रांतिकारी बदलाव तत्कालीन मुख्यमंत्री साहेब सिंह वर्मा जी ने किया था।
1997 में बीजेपी सरकार ने दिल्ली के प्रतिभाशाली बच्चों के लिए 3 राजकीय प्रतिभा विकास विद्यालय शुरू किए थे।
वक्त बदला, बीजेपी दिल्ली की सत्ता से बेदख़ल हुई, शीला दीक्षित जी के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनी।
पर शीला दीक्षित जी ने अपने राजनैतिक विरोधियों के द्वारा शुरू किए गए प्रतिभा स्कूल बंद नहीं किए। बल्कि 2001 से 2008 के बीच 14 नए प्रतिभा स्कूल शुरू किए।
2015 में केजरीवाल जी की सरकार बनी, सिर्फ़ दो साल के दौरान 5 नए प्रतिभा स्कूल खोले गए।
केजरीवाल जी ने भी कभी नहीं सोचा की विरोधी पार्टियों की सरकार द्वारा शुरू किए स्कूलों को बंद करें, बल्कि उसका विस्तार ही किया।
केजरीवाल जी के पास 70 में से 67 सीटें थी, जनता ने एकतरफ़ा वोट दिया था। चाहते तो पिछली सरकार की हर निशानी को मिटा सकते थे।
पर केजरीवाल जी ने ऐसा नहीं किया, बल्कि पहले से चल रही अच्छी व्यवस्था का जारी रखा, विस्तार किया।
लिहाज़ा 2018 तक दिल्ली में कुल 22 प्रतिभा स्कूल हो गए थे जिनमें कक्षा 6 से 12 तक लगभग 16,000 बच्चे पढ़ते थे।
तो दिल्ली में उन दिनों सरकारी स्कूलों के दो समानांतर मॉडल चल रहे थे।
दोनों ही मॉडल में एक ही करिकुलम पढ़ाया जाता था, एक ही प्रकार की परीक्षा थी, एक ही सिस्टम के तहत नियुक्त टीचर्स थे।
बस अंतर ये था की जहाँ प्रतिभा मॉडल के तहत 22 स्कूलों में 16,000 बच्चे थे, वहीं दूसरे मॉडल के तहत 1000 स्कूलों में 17 लाख बच्चे!!
पर जो सुविधा पहले की सरकारें सिर्फ़ 17 प्रतिभा स्कूलों को देती थी, वही सुविधा केजरीवाल सरकार ने दिल्ली सरकार के सभी एक हज़ार स्कूलों को दे दी थी।
इसलिए अपने कार्यकाल के पहले छह साल तक दोनों ही मॉडल्स को एक नई ऊंचाई तक लाने के बाद, केजरीवाल सरकार ने एक स्ट्रेटेजिक निर्णय लिया।
और 2021 में प्रतिभा स्कूलों को फ़ेज आउट कर बड़े पैमाने पर स्पेशलाइज्ड एक्सीलेंस स्कूल शुरू करने का निर्णय लिया गया।
ये निर्णय इसलिए लिया गया था क्योंकि 21वीं सदी के भारत के बच्चों को अब ऐसी शिक्षा चाहिए जो उन्हें तेज़ी से बदलती दुनिया, इसकी अर्थव्यवस्था और टेक्नोलॉजी के साथ चलने के लिए तैयार कर सके।
अब ज़रूरत ये नहीं है कि सरकार दिल्ली भर से सिर्फ़ 16,000 प्रतिभाशाली बच्चे खोज़कर उन्हें बीते हुए कल के मॉडल के तहत पढ़ायें,
बल्कि ज़रूरत ये है कि सरकार दिल्ली के सभी 44 लाख बच्चों में छिपी प्रतिभा को ढूँढे, उसे पहचानें, तराशें और उन्हें आने वाले कल की ज़रूरत के अनुसार योग्य बनायें।
केजरीवाल सरकार द्वारा 2021 से शुरू किए गए स्कूल्स ऑफ़ स्पेशलाइज्ड एक्सीलेंस में चार अलग अलग प्रकार के स्पेशलाइज्ड विषयों को 9 वीं से 12 वीं में पढ़ाया जाता है।
ये विषय हैं STEM, High end 21st century skills, Humanities, Performing & Visual Arts.
यहाँ एडमिशन बच्चे के एप्टीट्यूड के अनुसार होता है।
मात्र चार सालों में केजरीवाल सरकार ने 36 स्पेशलाइज्ड स्कूल खड़े किए हैं जिनमें लगभग 12,000 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं।
ये सभी स्पेशलाइज्ड स्कूल दिल्ली बोर्ड ऑफ़ स्कूल एजुकेशन से एफिलिएटेड हैं।
केजरीवाल सरकार का इरादा ये था कि दिल्ली के सभी 29 ज़ोन में चारों प्रकार के स्पेशलाइज्ड एक्सीलेंस स्कूल हों ताकि इन स्पेशलाइजेशन के एप्टीट्यूड वाले बच्चे अपने घर के नज़दीक वाले स्कूल में आठवीं के बाद पढ़ाई कर सकें।
पर वर्तमान बीजेपी सरकार एक सांझी विरासत के विस्तार की बजाय, दिल्ली को पीछे ले जाना चाहती है।
अभी बीजेपी सरकार के सत्ता में आए 100 दिन भी नहीं हुए हैं, और ये उस स्पेशलाइज्ड स्कूल व्यवस्था को ख़त्म करना चाहते हैं जिसे इन्होंने अभी तक ठीक से देखा-परखा भी नहीं है!!
ख़ैर, अफ़सोस इस बात का नहीं है कि दिल्ली की बीजेपी सरकार एक ऐसे शिक्षा मॉडल को तबाह कर रही है जो आने वाले कल की ज़रूरत है, बल्कि रंज इस बात का है कि वो ये सब बिना सोचे समझे कर रहे हैं।
इतनी छोटी राजनैतिक सोच हमारे देश को कभी भी विकसित नहीं होने देगा…
दिल्ली की बीजेपी सरकार अब दिल्ली बोर्ड ऑफ़ स्कूल एजुकेशन का गला घोंटने जा रही है!!
चूँकि दिल्ली बोर्ड का गठन केजरीवाल सरकार ने किया था, सिर्फ़ इसलिए बीजेपी इसे बंद कर रही है।
देश के लगभग सभी राज्यों के अपने परीक्षा बोर्ड हैं, जो उनके सरकारी स्कूलों की बोर्ड परीक्षा करवाते हैं।
दिल्ली एक मात्र राज्य नुमा जगह थी जहाँ सभी सरकारी स्कूल सीबीएसई से एफिलिएटेड थे।
लिहाज़ा दिल्ली के सभी सरकारी स्कूल और ज़्यादातर प्राइवेट स्कूलों के बच्चे सीबीएसई परीक्षा देते रहे हैं।
अब सवाल ये उठता है कि आख़िर क्यों पिछली सरकार को दिल्ली का ख़ुद का बोर्ड बनाने की ज़रूरत पड़ी?
क्या दिल्ली सरकार भी तमाम अन्य राज्यों के बोर्ड की तरह अपने स्कूलों के बच्चों को ज़्यादा नंबर देने के लिए ख़ुद का बोर्ड बनाना चाहती थी?
दोनों मुद्दों का ज़वाब देते हैं, पर पहले ज़्यादा नंबर और अच्छे नतीजों की बात करते हैं।
तो हक़ीक़त ये है कि 2018 से लेकर अब तक दिल्ली सरकार के स्कूलों के नतीज़े लगातार 90% से ज़्यादा रहे हैं।
यही नहीं, इसी दौरान दिल्ली सरकार के स्कूलों के नतीज़े दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों से बेहतर भी रहे हैं।
ऐसे में केजरीवाल सरकार को कोई ज़रूरत नहीं थी की ख़ुद का बोर्ड सिर्फ़ इसलिए बनाया जाए ताकि नतीज़े बेहतर किए जा सकें।
तो फ़िर क्यों बनाया नया बोर्ड?
अब यही बात बीजेपी को भी समझ नहीं आ रही है। उन्हें हज़म नहीं हो रहा है कि दिल्ली बोर्ड ऑफ़ स्कूल एजुकेशन दरअसल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 द्वारा प्रस्तावित शैक्षिक आँकलन के सिद्धांत के अनुरूप है।
शिक्षा पर गहराई से काम करते हुए केजरीवाल सरकार ये समझ गई थी कि अगर दिल्ली सरकार के स्कूलों को दुनिया के बेहतरीन शिक्षा मॉडल के समानांतर खड़ा करना है तो “रट कर उगलने” वाली परीक्षा प्रणाली से आगे जाना होगा।
इसलिए केजरीवाल सरकार ने 2021 में नए बोर्ड का गठन किया, वो भी International Baccalaureate के साथ मिलकर, ताकि दुनिया के बेहतरीन मॉडल का लाभ लिया जा सके।
पिछली सरकार की ये सोच थी कि दिल्ली और देश को शिक्षा के माध्यम से “विकसित” बनाया जा सकता है।
पर बीजेपी को लगता है कि जब “विकसित दिल्ली” के नाम का भाषण देने से ही काम चल जाता है, तो नए ज़माने के स्कूल और बोर्ड की क्या ज़रूरत!!
इसलिए आज बीजेपी पूरी तरह तैयार है इस चार साल पुराने दिल्ली बोर्ड ऑफ़ स्कूल एजुकेशन की हत्या करने के लिए।
पर तारीख़ ये याद रखेगी की आज की पीढ़ी के लिए बीजेपी ने कुछ बनाया तो नहीं, हाँ कुछ बने हुए को ज़रूर मिटा दिया…
According to bhakts : मोदी के आने से विदेशों में बहुत नाम हो रहा है।
Meanwhile reality :
India passport ranking 2014 : 76th
India passport ranking 2025 : 148th
#indianpassport#Passport#ModiFailsIndia
जब से दिल्ली में #BJP की सरकार बनी है तब से
👉अलग अलग इलाकों में लगातार बिजली जा रही है।
👉सरकारी अस्पतालों में दवाईयां नही मिल रही है।
👉प्राइवेट स्कूल ने फीस बढ़ानी शुरू कर दी है।
👉250 मोहल्ला क्लिनिक बंद कर दिए
BJP आई, दिल्ली में विपदा लाई।
#Delhi
दिल्ली के लैंसर कॉन्वेंट स्कूल ने अपनी सालाना, Tution और Development Fees में 33% की बढ़ोतरी की है, वहीं सेंट लॉरेंस स्कूल, दिलशाद गार्डन ने Tution Fees में 62% का इज़ाफ़ा किया।
AAP सरकार के दौरान प्राइवेट स्कूलों को Fees बढ़ाने की अनुमति नहीं थी, जिससे Middle class को राहत मिली थी। अब स्थिति बदल गई है।