रिक्तता में लिप्त जीवन
क्यों वही राहें निहारे
युगों से अविचल अकेला
किसलिए चाहे सहारे
विदित हो यदि पक्ष सारे
शून्य को फिर क्यों पुकारे
साध सकता है कहां तक
मुट्ठियों में काल तारे
जल कहां तक बह गया है
तू खड़ा अब भी किनारे
क्यों रे मन ?
खुशग़ुमाँ-
हाँ ठीक है, मैं अपनी अना का मरीज़ हूँ,
आख़िर मेरे मिज़ाज़ में क्यूँ दख़्ल दे कोई।
बदग़ुमाँ-
मैं क्या करूँ, कि मैं अपनी अना का क़ैदी हूँ,
उसे ये कहना, कि ले जाये आप आ के मुझे।
उपलब्धियों की शौर्य गाथा
कुछ ने कही कुछ मौन रहे
अंबर शिखर पर विदित कुछ
नींव के कंकण सदा शत-गौण रहे
दिग्विजय का प्रबल परचम
मनोहारी है अरु वीभत्स है
ज्ञान के गहरे सरोवर
शिथिल है संतप्त है
मैं अकिंचन
न ज्ञान में न शौर्य में
मेरी कहानी भ्रमित भ्रम मुझसे कहे
किसी को उसकी उपलब्धि पर आप शुभकामनाएं दें उसकी पोस्ट पर और आप तो मानते हैं आप उसके घनिष्ठ हैं लेकिन वह उस पर प्रतिक्रिया न दे तो आप क्या समझेंगे व्यस्त ? लेकिन वो दूसरों को धन्यवाद दे रहा है या आप इसे अभिमान समझेंगे?
बुकनू बनाने का फॉर्मूला नोट कर लो मित्रों !!
कुछ चीजें तेल में तल लिया जाता है
छोटी बड़ी हरड़ वायु भिड़ंग आंवला बहेड़ा मरोड़ फली सोंठ हल्दी बाकी सब पैन या कढ़ाई में कल्हार ली जाती है नमक आदि बाद में सबको पीसकर !!
एक ही कालखंड में हर बात से सहमत और हर बात से असहमत होकर जीवनयापन ही अजीत भारती है !
हमने जो राम की छवि अपने मन में बनाई वो उस छवि से बहुत अलग होगी जो हमारे पूर्वजों के मन में रही।
ईश्वर और उनकी छवि में कला का योगदान है और रहेगा , कला काल के अनुसार बदलती है और बदलती रहेगी
रद्दी! AI और ड्रोन का धनिया अश्विनी वैष्णव बोए जा रहे हैं। द्रौपदी के ब्लाउज की दोनों बाँहे देखिए। यह भी पूछिए ऐसे सिले वस्त्र उस कालखंड में होते भी थे? ऋषि के बॉडी का अनुपात देखिए, उनके दंड की ऊँचाई देखिए। सरकार को धर्म के नाम पर कूड़ा बेचने की जगह, कुछ गंभीर कार्य करना चाहिए। इनके वश का नहीं लगता मुझे। ये सब बन कैसे रहा है! बाक़ी बातों पर कुछ कहूँगा तो विवाद हो जाएगा।