दिनांक 20 जुलाई 2026 को शक्ति भवन में उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ की समस्त ऊर्जा निगमों के चेयरमैन एवं अपर मुख्य सचिव (ऊर्जा) श्रीमान डॉ. आशीष कुमार गोयल साहब की अध्यक्षता में व श्री मयूर माहेश्वरी जी प्रबंध निदेशक उत्पादन/ट्रांसमिशन निगम, श्री नीतीश कुमार जी प्रबंध निदेशक पावर कॉरपोरेशन की उपस्थिति में द्विपक्षीय वार्ता संघ के विभिन्न मांगों पर सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई।
वार्ता के दौरान संगठन द्वारा उठाई गई मांगों पर ऊर्जा प्रबंधन का रुख सकारात्मक रहा, उम्मीद है जल्द ही कई मांगों पर सका���ात्मक परिणाम दिखाई देंगे।
वार्ता में संघ की ओर से वरिष्ठ उपाध्यक्ष इंजीनियर प्रभात सिंह, महासचिव इंजीनियर जितेंद्र सिंह गुर्जर, उपाध्यक्ष इंजीनियर रणवीर सिंह, संयुक्त सचिव इंजीनियर आलोक कुमार श्रीवास्तव, संगठन सचिव इंजीनियर जगदीश पटेल, सहायक सचिव इंजीनियर निखिल कुमार, सहायक सचिव इंजीनियर सुबोध झा, क्षेत्��ीय सचिव शक्ति भवन इंजीनियर उपदेश कुमार, क्षेत्रीय सचिव लेसा, इंजीनियर देवेंद्र सिसोदिया आदि उपस्थित रहे।
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प्रेस विज्ञप्ति, विजिलेन्स , मध्यानचल मुख्यालय
दिनांक 30.06.2026 को प्रबन्ध निदेशक, मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लि0, के दिशा निर्देष एंव अपर पुलिस अधीक्षक मध्यांचल डिस्काम के नेतृत्व में विजिलेंस टीम द्वारा निम्न जिलों में विद्युत चोरी पकडी गयी, विवरण निम्नवत् हैः-
प्रभारी प्रवर्तन दल लेसा-प्रथमः-प्रभारी उ0नि0 श्री वीरेन्द्र सिंह, अवरअभियन्ता श्री राजकुमार मय टीम मु0आ0 रविन्द्र कुमार, आ0 संजीव कुमार, आ0 सद्दाम हुसैन व आ0 धर्मेन्द्र कुमार के साथ विद्युत चोरी चेकिंग के दौरान उपभोक्ता ज्ञानी चैरसिया पुत्र स्व0 लालाराम चैरसिया निवासी गोहरामऊ थाना काकोरी जनपद लखनऊ द्वारा अपने आवास में एल0टी0 लाइन से आ रही सर्विस केबिल तार को मीटर से पहले काटकर उ��में अतिरिक्त तार जोड़कर मीटर बाईपास करके एल0एम0वी0-ंउचय01 में 05 किलोवाट विद्युत भार का उपभोग में करते पाया गया।
प्रभारी प्रवर्तन दल अमेठीः- प्रभारी उ0नि0 श्री सुनील चैबे, अवर अभियन्ता श्री रविशंकर मौर्या प्रवर्तन दल अमेठी मय टीम, आ0 सुनील कुमार, आ0 बृजेष कुमार यादव, आ0 नितेष प्रताप सिंह के साथ विद्युत चोरी चेकिंग के दौरान निम्नलिखित उपभोक्ताओं द्वारा विद्युत चोरी करते पाया गयाः-
(1) उपभोक्ता कल्पनाथ दूबे पुत्र त्रियोगी नारायण दूबे निवासी-ंउचय ग्रामजामों थाना जामेां जनपद अमेठी द्वारा नजदीकी एल0टी0 लाईन से दो कोरकी एक केबिल लगाकर परिसर पर स्थापित मीटर संख्या 4223775 की इनकमिंग/आउटगोइंग केबिल काटकर मीटर गायब/हटाकर सीधी आपूर्ति से एल0एम0वी0-ंउचय01 में 07 किलोवाट विद्युत भार का उपभोग करते पाया गया।
(2) उपभोक्ता अतहर अली पुत्र जाहिद अली निवासी-ंउचय ग्राम सिंधियावां थाना जगदीशपुर जनपद अमेठी द���वारा नजदीकी एल0टी0 लाईन से दो कोर की एक केबिल लगाकर परिसर पर स्थापित मीटर संख्या 00854759 की इनकमिंग/आउटगोइंग केबिल काटकर मीटर बाईपास करते हुये सीधी आपूर्ति से एल0एम0वी0- उचय01 में 07 किलोवाट विद्युत भार का उपभोग करते पाया गया।
प्रभारी प्रवर्तन दल बदायूॅः- प्रभारी उ0नि0 श्री राकेश सिंह, अवरअभियन्ता हरीश कुमार मय टीम मु0आ0 रामनिवास, म0मु0आ0 भानू, आ0 कृष्ण मुरारी व आ0 सुनील कुमार के साथ विद्युत चेारी चेकिंग के दौरान उपभोक्ता अखिलेश पुत्र महेन्द्र निवासी मौ0 देवनगर थाना वजीरगंज जनपद बदायॅू द्वारा मीटर से पहले कट लगाकर व उसमें 02 तार जोड़कर एल0एम0वी0-उचय 01 में 05 किलोवाट विद्युत भार का उपभोग करते पाया गया।
प्रभारी प्रवर्तन दल उन्नावः- प्रभारी उ0नि0 श्री सुरेश कुमार, अवर अभियन्ता श्री दिनेश कुमार प्रवर्तन दल उन्नाव मय टीम म0उ0नि0 लक्ष्मीबाल��, मु0आ0 अमर सिंह, आ0 शैलेन्द्र कुमार सिंह व आ0 सलमान वारसी के साथ विद्युत चोरी चेकिंग के दौरान निम्नलिखित उपभोक्ताओं द्वारा विद्युत चोरी करते पाया गयाः-
(1) उपभोक्ता सुधीर कुमार द्विवेदी पुत्र स्व0 सन्तोश कुमार द्विवेदी एवं सुजीत कुमार द्विवेदी पुत्र स्व0 सन्तोश कुमार द्विवेदी निवासी बरगदही टोला मौरावां थाना मौरावां जनपद उन्नाव द्वारा मीटर काटकर बिना मीटर के एल0एम0वी0-ंउचय01 में 08 किलोवाट विद��युत भार का उपभोग करते पाया गया।
(2) उपभोक्ता अवधेष कुमार पुत्र रामपाल निवासी ग्राम व पो0 अकोहरी थाना मौरावां जनपद उन्नाव द्वारा मीटर काटकर बिना मीटर के एल0एम0वी0-ंउचय01 में 06 किलोवाट विद्युत भार का उपभोग करते पाया गया।
प्रभारी प्रवर्तन दल बलरामपुरः- प्रभारी उ0नि0 उमेर प्रताप यादव, अवर अभियनता मुनीन्दर कुमार प्रवर्तन दल बलरामपुर मय टीम मु0आ0 गोविन्दनाथ, आ0 अमित शर्मा व आ0 ज्ञानचन्द्र यादव के साथ ��िद्युत चोरी चेकिंग के दौरान निम्नलिखित उपभोक्ताओं द्वारा विद्युत चोरी करते पाया गयाः-
(1) उपभोक्ता मौलाना इस्तेकामत हुसैन पुत्र मो0 इदरीश निवासी
उतरौला थाना उतरौला बाईपास रोड निकट ग्रीन सिटी उतरौला थाना
उतरौला जनपद बलरामपुर द्वारा परिसर पर एल0एम0वी0-विधा में मीटर बाईपास करके एल0एम0वी0-01 में 06 किलोवाट विद्युत भार का उपभोग करते पाया गया।
(2) उपभोक्ता मास्टर शरीफुल हसन पुत्र मौलाना हनी�� कादरी निवासी उतरौला बाईपास रोड निकट ग्रीन सिटी उतरौला थाना उतरौला जनपद बलरामपुर द्वारा परिसर पर एल0एम0वी0-ंउचय1 विधा में मीटर बाईपास करके एल0एम0वी0-ंउचय01 में 06 किलोवाट विद्युत भार का उपभोग करते पाया गया।
प्रभारी प्रवर्तन दल अम्बेडकरनगरः-प्रभारी उ0नि0 श्री अर्केश विशन सिंह, अवर अभियनता श्री अमन सिंह प्रवर्तन दल अम्बेडकरनगर मय टीम मु0आ0 गुलाबचन्द यादव, मु0आ0 पवन कुमार गुप्ता, आ0 रविकान्त पटेल व म0अ0 सीमा के साथ विद्युत चोरी चेकिंग के दौरान निम्नलिखित उपभोक्ताओं द्वारा विद्युत चोरी करते पाया गयाः-
(1) उपभोक्ता विवेक पुत्र राम अछैवर निवासी ग्राम मिर्जापुर जंगल थाना जहाँगीरगंज जनपद अम्बेडकरनगर द्वारा आवासीय परिसर पर बिना विद्युत संयोजन एल0एम0वी0-01 में 05 किलोवाट विद्युत भार का उपभोग करते पाया गया।
(2) उपभोक्ता श्याम जी पुत्र सोमई निवासी लाडिलपुर थाना आलापुर जनपद अम्बेडकरनगर द्वारा प���िसर पर स्थापित विद्युत मीटर को बाईपास कर एल0एम0वी0-01 में 05 किलोवाट विद्युत भार का उपभोग करते पाया गया।
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अलीगंज अग्निकांड मामले में नया खुलासा: विद्युत सुरक्षा निदेशालय के अधिकारियों ने शासन को गुमराह कर अपने अधीनस्थ अधिकारियों को लगातार बचाते हुए नजर आ रहे हैं, उनके बयान देखें तो वह कभी कहते हैं कि उपभोक्ता की एनओसी से संबंधित संबंधित हमारे पास कोई अभिलेख नहीं है, कभी कहते हैं कि एनओसी ही फर्जी है, जबकि संबंधित उपभोक्ता द्वारा अपने 20 किलोवाट कमर्शियल संयोजन की विद्युत सुरक्षा से निरीक्षण कराने के लिए विद्युत सुरक्षा निदेशालय विभाग के मद में भारतीय स्टेट बैंक के चालान के रूप में ट्रेजरी में रुपए 1150 की धनराशि 23 जून 2016 को जमा कराई गई थी, उपरोक्त चालान की राशि जमा होने के उपरांत विद्युत सुरक्षा निदेशालय का दायित्व होता है कि वह परिसर का निरीक्षण कर एनओसी जारी करें अब अगर विद्युत सुरक्षा निदेशालय द्वारा अगले दिन 24 जून 2016 को निरीक्षण कर एनओसी जारी की गई है तो फिर NOC फर्जी कहां से हुई और अगर NOC फर्जी है तो फिर चालान जमा होने के बाद परिसर का निरीक्षण किस अधिकारी ने किया और उस निरीक्षण के बाद NOC निर्गत क्यों नहीं की गई, जबकि शासन का नियम है कि यदि चालान फीस जमा होने के 7 दिन के अंदर एनओसी प्राप्त नहीं होती है तो ऊर्जा निगम के अभियंता विद्युत संयोजन को ऊर्जीकृत कर सकते हैं।
यदि किसी परिसर में विद्युत सुरक्षा मानकों का अनुपाल�� नहीं किया गया, विद्युत सुरक्षा ऑडिट नहीं हुआ, संबंधित विभाग द्वारा समय-समय पर निरीक्षण नहीं किया गया, तो इन गंभीर लापरवाही की जिम्मेद���री निर्धारित कर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए थी। लेकिन विद्युत सुरक्षा निदेशालय लगातार अपने लापरवाह अधिकारियों को बचा रहा है, पहले जून 2016 फिर उसके बाद हर 3 साल अर्थात सन 2019, 2022, 2026 में परिसर का विद्युत सुरक्षा निदेशालय के अधिकारी द्वारा विद्युत निरीक्षण करना चाहिए था लेकिन किसी ने निरीक्षण नहीं किया उनकी इस लापरवाही के कारण 15 निर्दोष बच्चों की जान चली गई, जो की अत्यंत दुखद एवं पीड़ादायक है इस दुखद घटना के बाद लगातार विद्युत सुरक्षा निदेशालय अपने 04 लापरवाह अधिकारियों को बचाने में लगा है और अभी तक किसी भी अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
जबकि दूसरी ओर ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता को आनन-फानन में बिना किसी जांच के रात 12:00 बजे एमडी कार्यालय खुलवाकर निलंबन आदेश जारी किया गया।
अधिशाषी अभियंता के निलंबन आदेश में यह आरोप लगाया गया है कि संबंधित परिसर में स्वीकृत भार (लोड) से अधिक विद्युत भार लगभग तीन माह से संचालित हो रहा था, जिस पर अधिशासी अभियंता द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। यह आरोप बिल्कुल निराधार एवं तथ्यों से परे है क्यों कि उपभोक्ता क�� संयोजन की अधिकतम डिमांड माह अप्रैल 2026 में 24.30 किलोवाट, मई में 28.66 किलोवाट तथा अभी इसी माह जून 2026 में 34.18 किलोवाट आई है। नियमानुसार तीन माह अनुबंधित भार से अधिक भार प्रयोग करने की दशा में अगले माह जुलाई 2026 में उपभोक्ता को भार वृद्वि हेतु नोटिस दिया जाना न्यायसंगत था, क्योंकि जून की बढ़ी हुई डिमांड जुलाई के मास्टर डेटा में प्रदर्शित होती है। जुलाई माह में प्राप्त डेटा के अनुसार ही अधिशासी अभियंता द���वारा अपने स्तर से भार वृद्धि की कार्यवाही की जा सकती है। जुलाई माह से पूर्व बढ़ी हुई डिमांड के आधार पर अधिशाषी अभियंता को निलंबित करना सरासर गलत एवं अवैधानिक है।
अतः उपरोक्त बेहद गंभीर मामले में माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से निवेदन है कि विद्युत सुरक्षा निदेशालय की लापरवाही को नजरअंदाज कर ऊर्जा निगम के निर्दोष अधिशाषी अभियंता का किया गया अन्यायपूर्ण निलंबन आदेश को निरस्त किया ज���ये तथा विद्युत सुरक्षा निदेशालय के लापरवाह अधिकारियों पर कठोर से कठोर कार्रवाई की जाए।
~इं• जितेंद्र सिंह गुर्जर
महासचिव उ• प्र• राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ
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ऊर्जा प्रबंधन द्वारा बिजली कर्मियों पर कीगई उत्पीड़न की कार्रवाइयों के विरोध में संघर्ष का शंखनाद।
मा. मुख्यमंत्री जी से अनुरोध हैकि बिजली कर्मियों पर की गई उत्पीड़न की सभी कार्रवाइयों को निरस्त कराये जाने की कृपा करें,जिससे बिजली कर्मी निर्��ाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कराते रहे।
बिजली बिल राहत योजना 2025–26 के अंतर्गत 1.72 लाख के विद्युत बकाया को छूट में मात्र 52 हजार जमा होने पर माननीय मुख्यमंत्री जी एवं ऊर्जा मंत्री जी को आभार व्यक्त किया गया। सभी विद्युत बकायादारों से अपील है एतिहासिक छूट का लाभ उठाए #OTS@myogiadityanath@myogioffice@AKSharmaOffice
बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खुशख़बरी! विभाग लेकर आया है बिजली बिल राहत योजना 2025–26, जो 1 दिसंबर 2025 से 28 फरवरी 2026 तक लागू रहेगी। इस योजना में पहली बार 100% ब्याज माफी के साथ मूलधन पर भी भारी छूट।
#BijliBillRahatYojna#बिजली_बिल_राहत_योजना@CMOfficeUP@EMofficeUP
वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर राजधानी लखनऊ के लेसा में हजारों पदों को समाप्त किए जाने के विरोध में बिजली कर्मियों का गुस्सा फूट पड़ा। सैकड़ों बिजली कर्मियों ने शक्ति भवन मुख्यालय पर जोरदार विरोध प्रदर्शन कर अपना आक्रोश व्यक्त किया।
@narendramodi@myogiadityanath@UPPCLLKO
*बिजली कर्मियों के विरोध को देखते हुए मुंबई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 में केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर, विद्युत राज्य मंत्री श्री यशोपद नायक और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस नहीं पह���ंचे : डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट के मेजबान महा वितरण के सीएमडी और ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के अध्यक्ष भी नहीं आए : विद्युत वितरण निगमों में पीपीपी मॉडल के एजेंडा पर गम्भीर मतभेद के चलते कोई चर्चा नहीं: संघर्ष समिति ने कहा फ्लॉप रही डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट*
मुंबई में 04 एवं 05 नवंबर को हुई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 के विरोध में नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स द्वारा केंद्रीय विद्युत मंत्री को भेजे गए विरोध पत्र और विरोध प्रदर्शन की नोटिस का प्रभाव यह रहा कि बिजली कर्मियों के गुस्से को देखते हुए डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 में केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर, केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री यशोपद नायक और यहां तक कि मेजबान प्रदेश महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी नहीं आए।
निजीकरण के पीपीपी मॉडल पर गम्भीर मतभेद के चलते महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण निगम महावितरण के सी एम डी लोकेश चन्द्र आई ए एस जो आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के अध्यक्ष भी है, ने भी इस मीट से दूरी बनाई और मुम्बई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 में नहीं आए। महाराष्ट्र की प्रमुख सचिव ऊर्जा श्रीमती आभा शुक्ला आई ए एस भी मीट में नहीं आई। यह चर्चा रही कि निजीकरण के मुद्दे पर ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन के अध्यक्ष लोकेश चंद्र आई ए एस और महामंत्री यूपीपीसीएल के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल आई ए एस के बीच मतभेद उभर कर सामने आ गए हैं जिसका परिणाम यह रहा कि बहु चर्चित मुम्बई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 पूरी तरह फ्लॉप रही।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि सुधार के नाम पर ��िद्युत वितरण निगमों के निजीकरण पर देशभर के विद्युत वितरण निगमों से मुहर लगवाने की मंशा से मुम्बई में आयोजित की गई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 पूरी तरह फ्लॉप रही है। मीट में मुख्य एजेंडा विद्युत वितरण निगमों में पीपीपी मॉडल लागू करना था जिस पर बात ही नहीं हुई।
संघर्ष समिति ने बताया की नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स की ओर से केंद्रीय विद्युत मंत्���ी को एक माह पूर्व ही सूचित कर दिया गया था कि यदि निजीकरण के एजेंडा पर डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट की जा रही है तो बिजली कर्मी इसे स्वीकार नहीं करते। बिजली कर्मियों से पहले चर्चा की जाए और यदि केन्द्रीय विद्युत मंत्री नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी के पदाधिकारियों से मीट के पहले वार्ता नहीं करते और मीटिंग से निजीकरण का एजेंडा नहीं हटाया जाता तो बिजली कर्मी विद्युत मंत्री के समक्ष विरोध प्रदर्श�� करेंगे। संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मियों के विरोध का परिणाम यह रहा कि केंद्रीय विद्युत मंत्री, केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव ऊर्जा और महाराष्ट्र विद्युत वितरण निगम के सी एम डी, इनमें से कोई भी डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट में नहीं आया।
संघर्ष समिति ने बताया कि मुंबई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 की सबसे चौंकाने वाली बात कह रही कि महाराष्���्र के महावितरण के सी एम डी श्री लोकेश चंद्र आईएएस जो इस मीट के मेजबान भी थे और आयोजक भी वे मीट में नहीं आए। संघर्ष समिति ने कहा की महाराष्ट्र के विद्युत वितरण निगम के बड़े अधिकारियों ने बताया कि निजीकरण को लेकर ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के अध्यक्ष श्री लोकेश चंद्र और महामंत्री श्री आशीष गोयल जो उप्र पॉवर कॉरपोरेशन के चेयरमैन है ��े बीच में गहरे मतभेद हो गए हैं। इसी के चलते मुंबई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 पूरी तरफ फ्लॉप हो गई। उसमें केंद्रीय मंत्री से लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री तक आए और न ही अधिकांश प्रांतों के चेयरमैन और एम डी आए।
संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष ने एक साल पहले निजीकरण का निर्णय घोषित कर बिजली कर्मियों का गुस्सा बढ़ा दिया है। लगातार आंदोलन चल रहा है और क���र्य का वातावरण पूरी तरह बिगड़ चुका है। समय की आवश्यकता यह है की पावर कारपोरेशन के प्रबंधन को निजीकरण का निर्णय निरस्त कर वास्तविक सुधार कार्यक्रम पर बिजली कर्मियों से वार्ता करनी चाहिए। बिजली कर्मी सुधार हेतु लगातार प्रयत्नशील है और उसके अच्छे परिणाम भी आ रहे हैं।
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निजीकरण की प्रक्रिया में बड़े घोटाले की आशंका को देखते हुए निजीकरण का निर्णय निरस्त की मांग: संघर्ष समिति ने उठाए पांच सवाल: राज्य कर्मचारियों के साथ बिजली कर्मियों को भी बोनस दिया जाय
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के मामले में बड़े घोटाले की आशंका को देखते हुए विद्युत कर्मचारी संयु���्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी से निजीकरण के सारे प्रकरण में सीबीआई जांच की मांग की है और कहा है कि निजीकरण का निर्णय प्रदेश के व्यापक हित में तत्काल निरस्त किया जाए।
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा दीपावाली के पूर्व 15 लाख राज्य कर्मचारियों को बोनस देने की घोषणा का स्वागत करते हुए संघर्ष समिति ने मांग की है कि दीपावली पर रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में लगे बिजली कर्मियों को भी दीपावली के पूर्व बोनस दिया जाय।
संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि निजीकरण के मामले में प्रारंभ में ही जिस प्रकार अवैध ढंग से ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति की गई उससे बड़े घोटाले की आशंका बलवती हो गई थी।
संघर्ष समिति ने आज ऐसे पांच बिंदुओं को सार्वजनिक करते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि उत्तर प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति को देखते हुए निजीकरण के सारे मामले की तत्काल सीबीआई जांच कराई जाए और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया निरस्त की जाय ।
संघर्ष समिति ने कहा कि पहला बिंदु विगत वर्ष नवंबर में लखनऊ में विद्युत वितरण निगमों की डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2024 का आयोजन है जिसमें निजी घरानों ने बड़ी संख्या में भागीदारी की थी और कार्यक्रम को स्पॉन्सर भी किया था। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की पृष्ठभूमि इसी डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट में तैयार की गई थी।
इस मीटिंग में देश के इतिहास में पहली बार शीर्ष प्रबंधन द्वारा आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन बनाई गई। उप्र में निजीकरण को अंजाम देने के दृष्टिकोण से उप्र पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल को इसी मीटिंग में ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन का जनरल सेक्रेटरी बनाया गया और उप्र में ग्रेटर नोएडा में काम कर रही न��जी कम्पनी एन पी सी एल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पी आर कुमार की डिस्कॉम एसोशिएशन का ट्रेजरार बनाया गया।
दूसरा बिन्दु ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति में हितों के टकराव को शिथिलता देना है। इसके साथ ही झूठा शपथ पत्र देने और अमेरिका में पेनल्टी लगने की बात स्वीकार कर लेने के बाद भी ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट ग्रांट थॉर्टन को नहीं हटाया गया और इसी कंसल्टेंट से निजीकरण के डॉक्यूमेंट तैयार कराए गए।
तीसरी बात बिडिंग हेतु तैयार किए गए आर एफ पी डॉक्यूमेंट के लिए ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 को आधार माना गया जो डॉक्यूमेंट आज तक पब्लिक डोमेन में ही नहीं है। इसके पूर्व सितंबर 2020 में ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट जारी किया गया था जिस पर ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन सहित कई संस्थानों की आपत्ति आई थी। इन आपत्तियों का आज तक निस्तारण नहीं किया गया है और गुपचुप ��ंग से उत्तर प्रदेश में निजीकरण के पहले ड्राफ्ट बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 जारी कर दिया गया। ड्राफ्ट बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 को न पब्लिक डोमेन में रखा गया है न इस पर किसी की आपत्ती मांग की गई है। उत्तर प्रदेश में निजीकरण करने के लिए यह सब मिली भगत का बड़ा खेल है।
��ौथा बिंदु यह है कि निजीकरण के सारे प्रकरण में कॉर्पोरेट घरानों को विश्वास में लेकर पूरी कार्यवाही की जा रहा है। टाटा पावर के सीईओ प्रवीर सिन्हा ने कई बार बयान देकर इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने कहा है कि उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के आर एफ पी डॉक्यूमेंट उनसे चर्चा करके बनाया गए हैं। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि उप्र में बिजली के निजीकरण को ल��कर कार्पोरेट घरानों के बीच 'कार्टेल' बन गया है जो बहुत गम्भीर बात है।
पांचवा बिंदु यह है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम को कौड़ियों के मोल निजी घरानों को बेचने के लिए इक्विटी को आधार मानकर बेचने की कोशिश की जा रही है। इक्विटी को लॉन्ग टर्म लोन में कन्वर्ट किए जाने के बाद 42 जनपदों की बिजली व्यवस्था मनचाहे कॉर्पोरेट घरानों को कौड़ियों के दाम मिल जाएगी।
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विजया दशमी के पहले बोनस देने के बजाय पॉवर कॉरपोरेशन की बड़े पैमाने पर अभियंताओं और कर्मचारियों को जबरन सेवा निवृत्ति देने और अनुशासनात्मक कार्यवाही करने की ��ैयारी : निजीकरण के लिये उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां करने का आरोप
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि मा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के निर्देश के अनुसार नवरात्र में निर्बाध बिजली आपूर्ति में लगे बिजली अभियंताओं और कर्मियों को विजया दशमी के पूर्व बोनस देने के बजाय पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन ने बड़े पैमाने पर अभियंताओं और कर्मचारियों को जबरन सेवा निवृत्���ि देने और अनुशासनात्मक कार्यवाही करने की तैयारी शुरू कर दी है जिससे बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा व्याप्त हो गया है।
संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि अधीक्षण अभियंता और मुख्य अभियंता की पूरी सूची जारी कर इनके विरुद्ध चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाहियों की अद्यतन स्थिति तत्काल मांगी गई है जिसका उद्देश्य बड़े पैमाने पर अभियंताओं को जबरन सेवा निवृत्त करना है।
संघर्ष समिति ने कहा कि 24 सितंबर को जारी किए गए पत्र में तीन दिन के अंदर 27 सितंबर तक अनुशासनात्मक कार्रवाइयों की अद्यतन स्थित मांगी गई है। संघर्ष समिति ने कहा कि अधीक्षण अभियंता और मुख्य अभियंता पदों की पदोन्नतियां के लिये चयन पहले ��ी हो चुका है। ऐसे में सभी अधीक्षण अभियंताओं और सभी मुख्य अभियंताओं की सूची जारी कर उनके बारे में अनुशासनामक कार्यवाहियों की अद्यतन स्थिति मांगने के पीछे जबरन सेवा निवृत्ति देना ही एकमात्र उद्देश्य दिखाई देता है।
संघर्ष समिति ने कहा कि शक्ति भवन के कॉरिडोर से मिल रहे समाचारों के अनुसार निजी घरानों को सहूलियत देने के लिए अभियंताओं और कर्मचारियों की बड़ी पैमाने पर जबरन सेवा निवृत्ति क��� छटनी की जानी है।
संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कारपोरेशन प्रबन्धन विगत कई महीनों से लगातार बिजली कर्मियों का अलग-अलग तरह से उत्पीड़न कर रहा है। अभी भी हजारों बिजली कर्मचारियों को फेशियल अटेंडेंस के नाम पर 3 माह से रुका वेतन नहीं दिया गया। बड़े पैमाने पर बिजली कर्मियों को दूर दराज स्थानों पर स्थानांतरित किया गया, हजारों संविदा कर्मियों को डाउनसाइजिंग के नाम पर निकाला गया और अब जबरन सेवानिवृत्ति देने की प्रक्रिया की जा रही है।
संघर्ष समिति ने कहा की बिजली कर्मी निजीकरण के विरोध में आंदोलनरत हैं किंतु वह आम जनता को किसी प्रकार की तकलीफ नहीं होने दे रहे हैं बिजली कर्मी नवरात्र, दशहरा और दीपावली पर जनता को कोई तकलीफ नहीं होने देंगे, यह संघर्ष समिति का निर्णय है ।
संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कार्पोरेशन प्रबंधन की निजीकरण हेतु की जा रही दमनकार�� नीतियों के विरोध में आंदोलन तेज करने का फैसला दशहरे के बाद लिया जाएगा जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी ।
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के आज 307 वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
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केन्द्रीय विद्युत मंत्रालय, केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण और आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की मिलीभगत से संपूर्ण ऊर्जा क्षेत्र के निजीकरण की साजिश : संघर्ष समिति ने सार्वजनिक किये डॉक्यूमेंट: राष्ट्रीय स्तर के आन्दोलन की तैयारी
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन केंद्रीय विद्युत मंत्रालय और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के साथ मिली भगत में अपना समांतर सेक्रेटेरिएट चला रहा है और संपूर्ण ऊर्जा क्षेत्र के निजीकरण की गुपचुप योजना तैयार की जा रही है। संघर्ष समिति ने इस बाबत ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के सचिवालय के पत्र व्यवहार को आ��� यहां सार्वजनिक किया।
संघर्ष समिति ने बताया कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के डायरेक्टर जनरल श्री आलोक कुमार ने 09 सितंबर देश के सभी ऊर्जा निगमों के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशकों को एक पत्र भेजा है जिस पत्र से बिल्कुल स्पष्ट हो जाता है की केंद्रीय विद्युत मंत्रालय और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की शह पर ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन ऊर्जा निगमों के कार्य में सीधे दखलंदाजी कर रहा है। श्री आलोक कुमार अपने पत्र में देश के विभिन्न ऊर्जा निगमों से डाटा ऐसे मांग रहे हैं मानो वही देश के विद्युत मंत्री बन गए हों।
संघर्ष समिति ने कहा कि यह बहुत ही गंभीर मामला है और अब यह बिल्कुल स्पष्ट हो गया है ��ि ऊर्जा क्षेत्र के निजीकरण के लिए ही ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन बनाया गया है और यह एसोशिएशन सरकार और निजी घरानों के बीच बिचौलिए का काम कर रही है।
ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने कहा कि फेडरेशन और नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स इस मामले को केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर के सामने शीघ्र रखेगी।
उन्होंने बताया कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के सेक्रेटेरिएट की दखलंदाजी तत्काल बंद न की गई और ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन से जुड़े हुए ऊर्जा निगमों के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक पद से न हटाए गए तो देश के 27 लाख बिजली कर्मचारी और इंजीनियर इसके विरोध में सड़क पर उतरकर आंदोलन प्रारंभ करने हेतु बाध्य होंगे।
संघर्ष समिति ने कहा की पत्र में ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के डायरेक्टर जनरल श्री आलोक कुमार ने लिखा है कि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने 08 सितंबर को एक मीटिंग किया था जिसमें ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन को भी बुलाया गया था । इस मीटिंग में केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन से यह कहा कि वह विद्युत वितरण, ट्रांसमिशन और उत्पादन में कॉस्ट रिडक्शन के लिए केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण को एक सुझाव दें। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की मीटिंग में यह भी तय हुआ कि इस बाबत ऑल इंडिय�� डिस्कॉम एसोशिएशन देश के सभी ऊर्जा निगमों से इनपुट डाटा मांगे और प्रस्ताव बनाए। इसी आधार पर श्री आलोक कुमार ने देश के सभी ऊर्जा निगमों के चेयरमैन से इस संबंध ��ें डाटा मांगा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि यह सारे घटनाक्रम बहुत ही गंभीर है और सरकारी काम में सोसाइटी एक्ट के अंतर्गत रजिस्टर्ड एक संस्था की इस प्रकार की दखलंदाजी देश के इतिहास में पहली बार हो रही है।
संघर्ष समिति ने आश्चर्य व्यक्त किया कि कि यह सब केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के इशारे पर हो रहा है। श्री आलोक कुमार ने पत्र में इस बात का भी उल्लेख किया है कि ऑल ���ंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन ने अप्रैल 2025 में केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के सामने भी एक प्रेजेंटेशन किया था।
संघर्ष समिति ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में ऑल इंडियाडिस्कॉम एसोसिएशन का प्रादुर्भाव अचानक नहीं हुआ है बल्कि यह एक सोची समझी रणनीति के तहत निजीकरण को अंजाम देने हेतु बनाई गई संस्था है। सबसे आपत्तिजनक बात यह है कि महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के ऊर्जा निगमों के अध्यक्ष ऑल इंडिया डिस्कॉम ��सोशिएशन के शीर्ष पदाधिकारी भी बने हुए हैं जिससे यह मामला सीधे तौर पर हितों के टकराव का बनता है।
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मेरठ में हुए चिन्तन मंथन शिविर में निजीकरण का विकल्प खारिज करने का संकल्प : पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के साथ कई बड़े शहरों के फ्रेंचाइजी के समाचार से बिजली कर्मियों का गुस्सा फूटा
उप्र राज्य विद्युत प���िषद अभियंता संघ के तत्वावधान में मेरठ में आयोजित "चिन्तन मंथन शिविर - संदर्भ निजीकरण" में ��भियंताओं ने पॉवर कारपोरेशन द्वारा दिए गए निजीकरण के विकल्प को एक स्वर में खारिज कर दिया और संकल्प लिया कि निजीकरण के विरोध में आन्दोलन और तेज किया जायेगा तथा निजीकरण के विरोध में संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया जाता।
चिन्तन मंथन शिविर में मुख्य वक्ता आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने पावर कारपोरेशन के चेयरमैन डॉ आशीष गोयल द��वारा पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के बाद दिए जाने वाले विकल्पों का विस्तार से विश्लेषण कर उसे खारिज कर दिया । उन्होंने विकल्प के तीनों बिन्दुओं निजी कंपनी की नौकरी ज्वॉइन कर लें, अन्य निगमों में वापस आ जाएं और स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति ले लें, का विश्लेषण करते हुए यह बताया कि तीनों ही विकल्प बिजली कर्मियों के भविष्य को बर्बाद कर देंगे अतः निजीकरण किसी स्थिति में स्���ीकार्य नहीं है।
पूर्व दिल्ली विद्युत बोर्ड के इ सत्यपाल और इ यशपाल शर्मा जो ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के संरक्षक और सेक्रेटरी (मुख्यालय) है, ने निजीकरण के बाद दिल्ली में बिजली कर्मियों और अभियंताओं की हो रही दुर्दशा के बारे में विस्तार से बताया और कहा कि निजीकरण बहुत ही भयावह है ��तः पूरी शक्ति से संघर्ष की तैयारी करिये।
मेरठ में शिविर के दौरान ही यह जानकारी मिलने से कि, पश्चिमांचल के बड़े शहरों में अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी होने जा रहा है, अभियंताओं में गुस्सा फूट पड़ा। शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि यह पुख्ता जानकारी मिली है कि जिन जिन शहरों में वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग सिस्टम लागू किया जा रहा है उन सभी शहरों के अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी का टेंडर भी पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के टेंडर के साथ ही जारी किया जाएगा।
उप्र राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ के महासचिव जितेन्द्र सिंह गुर्जर ने कहा कि चिन्तन मंथन शिविर का मुख्य उद्देश्य अभियंताओं को निजीकरण के विरोध में निर्णायक संघर्ष के लिये प्रशिक्षित करना है। उन्होंने कहा कि ऐसे पांच शिविर डिस्कॉम स्तर पर आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि अभियन्ता संकल्प लेक�� सामने आएं तो उप्र में पॉवर सेक्टर में निजी घरानों को रोकना कोई कठिन काम नहीं है। उन्होंने कहा कि निजीकरण के विरोध में निर्णायक संघर्ष किया जाएगा।
अभियन्ता संघ के उपाध्यक्ष कृष्णा सारस्वत, उपाध्यक्ष मनोज कुमार सिंह, संयुक्त सचिव आलोक श्रीवास्तव, संगठन सचिव जगदीश पटेल, सहायक सचिव निखिल कुमार, संघर्ष समिति पश्चिमांचल के संघर्ष समिति के संयोज�� सी पी सिंह ने शिविर को संबोधित किया।
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वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग कर पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के साथ पांच शहरों के निजीकरण की भी तैयारी : निजी���रण के विरोध में प्रांत व्यापी आंदोलन जारी
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने आरोप लगाया ��ै कि पांच शहरों की वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग कर पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के समानांतर इन शहरों के निजीकरण की भी तैयारी चल रही है। निजीकरण के विरोध में लगातार चल रहे आंदोलन के 295 वें दिन आज बिजली कर्मियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां कहा कि विदित हुआ ��ै कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के आरएफपी डॉक्यूमेंट पर विद्युत नियामक आयोग द्वारा लगाई गई आपत्तियों का जवाब तैयार कर लिया गया है और आरएफपी डॉक्यूमेंट के अनुमोदन के लिए पावर कॉरपोरेशन किसी भी समय विद्युत नियामक आयोग में जा सकता है जिससे निजीकरण की प्रक्रिया तीव्र गति से आगे बढ़ाई जा सके।
संघर्ष समिति ने विद्युत नियम आयोग के अध्यक्ष श्���ी अरविंद कुमार से अपील की है कि यदि पावर कारपोरेशन का निजीकरण का आरएफपी डॉक्यूमेंट अनुदान के लिए आता है तो पहले तो उसे अस्वीकृत कर दिया जाए और अगर उस पर चर्चा भी की जाती है तो उसके पहले विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधियों से चर्चा की जाए क्योंकि निजीकरण से बिजली कर्मचारियों का भविष्य अंधकारमय होने जा रहा है।
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के समानांतर उत्तर प्रदेश के पांच अन्य शहरों के निजीकरण की तैयारी भी अंदर-अंदर की जा रही है। संघर्ष समिति ने कहा कि कानपुर, मेरठ, अलीगढ़, बरेली और लखनऊ शहर की बिजली व्यवस्था का ऊर्ध्वाधर पुनर्गठन (वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग) करने के पीछे मुख्य उद्देश्य इन शहरों की बिजली व्यवस्था का निजीकरण किया जाना है।
संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल जो ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के महामंत्री के रूप में काम करने में अधिक रुचि ले रहे हैं, उन्होंने आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की वेबसाइट पर निजीकरण पर अपन��� उपलब्धियां गिनाने के क्रम में स्वयं एक नया पॉइंट जोड़ा है जिसमें इस बात को लिखा है कि पूर्वांचल विद्युत निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के साथ सुधार हेतु कानपुर, मेरठ, अलीगढ़, बरेली और लखनऊ की बिजली व्यवस्था की वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग की जा रही है। इससे बिल्कुल साफ हो जाता है कि इन शहरों के निजीकरण की साथ-साथ तैयारी चल रही है।
संघर्ष समिति ने कहा कि सरकारी क्षेत्र में र���ते हुए देश के जिन शहरों में भी बिजली व्यवस्था में सर्वाधिक सुधार किया गया उनमें से किसी भी शहर में इस प्रकार तुगलकी फरमान जारी कर वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग जैसी विचित्र व्यवस्था नहीं लागू की गई। संघर्ष समिति ने उदाहरण देकर कहा बेंगलुरु, पटियाला, पुणे, हैदराबाद, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम, गुड़गांव, हिसार आदि ऐसे कई शहर ��ै जहां बिजली व्यवस्था में गुणात्मक सुधार किया गया है और यह सब सरकारी क्षेत्र में चल रही व्यवस्था के अंतर्गत ही किए गए हैं।
बिजली के निजीकरण का विरोध में लगातार चल रहे आंदोलन के 295 वें दिन आज बिजली कर्मियों ने वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मु���ादाबाद में बड़ी सभाएं कर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
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'अभियन्ता दिवस’ पर बिजली अभियन्ताओं ने ‘भारत रत्न’ सर एम0 विश्वेश्वरैया जी को याद किया:बिजली व्यवस्था में लगातार हुए सुधार को देखते हुए पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल वितरण निगम के निजीकरण का प्रस्ताव निरस्त करने की मांग: विकसित भारत के संकल्प को सफल बनाने के लिए ऊर्जा निगमों में चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशकों के पदों पर विशेषज्ञ अभियन्ताओं को तैनात किये जाने की मांग:
प्रदेश के बिजली अभियन्ताओं ने अभियंता दिवस के अवसर प�� मा. मुख्यमंत्री जी से मांग की है कि उत्तर प्रदेश में बिजली व्यवस्था में लगातार हो रहे सुधार को देखते हुए पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए। विकसित भारत के संकल्प को सफल बनाने के लिए ऊर्जा निगमों में चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशकों के पदों पर विशेषज्ञ अभियन्ताओं की ही तैनाती की जाये। इससे प्रदेश की जनता को निर्बाध सस्ती बिजली मिल सकेगी एवं ऊर्जा निगमों के बढ़ते घाटे पर अंकुश लग सकेग��। अभियन्ताओं ने यह मांग आज ‘भारत रत्न’ सर एम0 विश्वेश्वरैया के 164वें जन्म दिवस पर अभियन्ता संघ द्वारा हाईडिल फील्ड हॉस्टल में आयोजित परिचर्चा कार्यक्रम में की गयी।
‘अभियन्ता दिवस’ समारोह में ‘भारत रत्न’ सर एम0 विश्वेश्वरैया एवं अन्य महान अभियन्ताओं के सराहनीय कार्यों पर प्रकाश डालते हुए विद्युत अभियन्ता संघ के महासचिव जितेन्द्र सिंह गुर्जर ने बताया कि देश में सबसे पहले 400के0वी0 पारेषण ल���इन व उपकेन्द्र की परिकल्पना, निर्माण व संचालन का यशस्वी कार्य, 100 मेगावाट एवं 200 मेगावाट की तापीय इकाईयाँ डिजाइन करने व सफलतापूर्वक संचालित करने वाला अग्रणी उ0प्र0 बिजली बोर्ड ही है। विगत जून माह में 31486 मे0वा0 से अधिक बिजली का सफलतापूर्वक पारेषण व वितरण किया गया है जो अब तक का एक रिकॉर्ड है। हाल ही में पारेषण निगम को राष्ट्र स्तर पर स्टेट ट्रांसमिशन कम्पनी ऑफ द इयर का अवॉर्ड भी मिला है जो कि बिजली व्यवस्था में हुए गुणात्मक सुधार का उदाहरण है।
विद्युत अभियन्ता संघ के महासचिव जितेन्द्र सिंह गुर्जर ने आगे बताया कि वर्तमान में प्रदेश में बिजली के 09 निगम हैं तथा इन सभी निगमों के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक आईएएस ��ैं। कई विकसित देशों में तकनीकी विभागों का नेतृत्व उन्हीं तकनीकी विशेषज्ञों को दिया जाता है जिन्होंने उस क्षेत्र में कार्य किया हो। देश की नवरत्न एवं महानवरत्न कंपनियों की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कामयाब प्रतिद्वंदिता का सबसे बड़ा राज यही है कि इन सब में प्रबंध के शीर्ष पद पर विशेषज्ञ हैं। इससे नीति बनाने और उसके क्रियान्वयन में संतुलन रहता है। अतः ऊर्जा निगमों व अभियन्ताओं की दिशा व दशा ���ुधारने हेतु प्रदेश सरकार प्रदेश हित में ऊर्जा निगमों में चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशकों के पदों पर विशेषज्ञ अभियन्ताओं की तैनाती किये जाने के सम्बन्ध मेंं कदम उठायें।
पदाधिकारियों ने कहा कि बिजली कर्मियों का मुख्य उद्देश्य हर घर हर गांव तक सस्ती बिजली पहुंचाना है। बिजली कर्मी सीमित संसाधनों के बावजूद उत्तर प्रदेश के 3 करोड़ 63 लाख उपभोक्ताओं तक निर्बाध बिजली आपूर्ति का कार्य कर रहे हैं। व���गत 08 वर्षों में एटी एण्ड सी हानियां 42 प्रतिशत से घटकर 15 प्रतिशत पर आ गयी हैं जो राष्ट्रीय मापदण्ड है। एटी एण्ड सी हानियों में चालू वित्तीय वर्ष में और कमी आने की सम्भावना है। सार्वजनिक क्षेत्र में उप्र में ��िजली व्यवस्था में लगातार सुधार हो रहा है तब पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए। उल्लेखनीय है कि निजीकरण के पीछे मुख्य कारण घाटा बताया जा रहा है जो पूरी तरह गलत है और पॉवर कारपोरेशन झूठे आकड़ों के आधार पर घाटा बता रहा है। इसके अतिरिक्त किसानों, बुनकरों आदि को मिलने वाली सब्सिडी और सरकारी विभागों के राजस्व बकाये को भी पॉवर कारपोरेशन घाटे में जोड़कर दिखा रहा है।
विकसित भारत के लिए सार्वजनिक क्षेत्र में पॉवर सेक्टर बनाये रखना जरूरी है। मा0 मुख्यमंत्री जी से अपील की कि प्रदेश की जनता को सस्ती बिजली उपलब्ध कराने के संकल्प को पूरा करने के लिए अनपरा व ओबरा में प्रस्तावित 800-800 मेगावाट की परियोजना को प्रदेश के ही उत्कृष्ट अभियन्ताओं द्वारा उ0प्र0 राज्य विद्युत उत्पादन निगम के पूर्ण स्वामित्व में स्थापि�� की जाये। पारेषण में टैरिफ बेस्ड कंपीटीटिव बिडिंग (टीबीसीबी) को बंद कर नई बनने वाली पारेषण की सभी परियोजनाओं, सब स्टेशन और लाईनों को यूपी ट्रांसकों को देने की भी मांग की गई।
लखनऊ में आयोजित अभियंता दिवस समारोह में उपस्थित अभियन्ताओं नें भारत रत्न सर एम0 विश्वेश्वरैया के चित्र पर माल्��ार्पण एवं पुष्प अर्पित कर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
बिजली के निजीकरण में किस प्रकार से घोटाला किया जाता है इसकी छोटी सी झलक है इसको गौर से समझने का प्रयास करिए....
एक बड़े घोटाले के तहत सन 2010 में आगरा शहर की बिजली व्यवस्था टोरेंट पावर कंपनी को हैंडोवर की गई थी, उसके पश्चात जब 2015 में सी ए जी की जांच हुई और जांच के पश्चात CAG ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि "आगरा फ्रेंचाइजी की बिडिंग हेतु बनाए गए आर एफ पी में दर्शाए गए आंकड़े और परामर्शदाता द्वारा आंकलित आरक्षित दरें भ्रामक थी और गलत अवधारणाओं पर आधारित थी तो बिडिंग की संपूर्ण प्रक्रिया को ही निरस्त किया जाना चाहिए था और सही किए गए आंकड़ों के आधार पर एक नई निविदा को आमंत्रित करने की शुरुआत करनी चाहिए थी"।
कैग की रिपोर्ट में घोटाले के कई बिंदु उजागर किए गए हैं जिन्हें दबा दिया गया है।
सी ए जी द्वारा उठाया गया एक और सबसे प्रमुख बिंदु यह है कि दक्षिणांचल विद���युत वितरण निगम ने टी एंड डी हानियां 28.22% और संग्रहण क्षमता 82.34 प्रतिशत के आर एफ पी में दिए गए मूल आंकड़ों के स्थान पर टी एंड डी हानियां 44.85% और संग्रहण क्षमता 74.77% को अभिसूचित किया जिसका न तो कोई आधार था न कोई तर्कसंगतता। टी एंड डी हानियां 28.2% के स्थान पर 44.85% बता देने से टोरेंट पावर को बहुत सस्ती दरों पर पॉवर कॉरपोरेशन बिजली दे रहा है और आज तक अरबों रुपए प्रतिवर्ष का घाटा हो रहा है।
सी ए जी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि बीड मूल्यांकन प्रक्रिया में भारी अनियमितता होने के कारण अनुबंध के 18 वर्षों में पावर कारपोरेशन को 4601 करोड़ रुपए की हानि होगी। संघर्ष समिति ने कहा कि टोरेंट पावर कंपनी को लागत से कम मूल्य पर बिजली देने में पावर कारपोरेशन को 14 वर्षों में 3432 करोड रुपए की हानि हो चुकी है। इससे स्पष्ट होता है कि कैग ने अपनी रिपोर्ट में गलत अनुबंध के करण घाटे का सही मूल्यांकन किया था।
वर्तमान में पावर कॉरपोरेशन ₹5.55 प्रति यूनिट बिजली खरीद कर टोरेंट पावर को मात्र ₹4.36 प्रति यूनिट के हिसाब से दे रहा है जिससे पावर कारपोरेशन के राजस्व को अरबों का घाटा हो रहा है और टोरेंट पावर कंपनी का मुनाफा बढ़ रह�� है।
सी ए जी ने आगरा की बिजली व्यवस्था टोरेंट पावर को देने की बिडिंग की संपूर्ण प्रक्रिया को ही दस साल पहले गलत करार देते हुए इसे निरस्त किए जाने की अनुशंसा की थी किंतु कैग की रिपोर्ट को दबा दिया गया जिसका दुष्परिणाम यह है कि गलत करार से पावर कारपोरेशन को प्रतिवर्ष अरबों रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कि आगरा फ्रेंचाइजी की बिडिंग में किए गए घोटाले और कैग की अनुशंसा दबा देने के मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और घोटाला करने वालों पर कड़ी कार्यवाही की जाय।
उपरोक्त घोटाले को देखते हुए पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया तत्काल निरस्त करने की कृपा करें।
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स्टेट ट्रांसमिशन कंपनी ऑफ द ईयर का पुरस्कार मिलने के बावजूद निजीकरण के चलते यूपी पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी का अस्तित्व खतरे में : टीबीसीबी बन्द कर राज्य के सभी ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट यूपी ट्रांस्को को देने की मांग
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि स्टेट ट्रांसमिशन कंपनी ऑफ द ईयर का अवार्ड मिलने के बावजूद ट्रांसमिशन में चल रहे निजीकरण से यूपी पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी का अस्तित्व ही खतरे में है। संघर्ष समिति ने कहा कि यदि ट्रांसमिशन में निजीकरण को न रोका गया तो यूपी पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी कुछ ही वर्षों में समाप्त हो जाएगी और इसकी श्रेष्ठता इतिहास की बात हो जाएगी।
संघर्ष समिति ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि यूपी पावर ट्रांसमिशन कंपनी को राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने के बाद प्रदेश की सभी ट्रांसमिश की परियोजनाए यूपी पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी को ही प्रदान की जाए।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि उत्तर प्रदेश में ट्रांसमिशन के क्षेत्र में जबरदस्ती थोपे गए टैरिफ बेस्ड कंपीटीटिव बिडिंग (टीबीसीबी) के कारण नई बनने वाली ट्रांसमिशन की सभी परियोजनाएं, सब स्टेशन और लाइनें निजी क्षेत्र में जा रही है। उन्होंने बताया कि एक समय उत्तर प्रदेश ट्रांसमिशन के क्षेत्र में देश का सबसे अग्रणी प्रान्त था। देश में सबसे पहले 400 केवी और 765 केवी ट्रांसमिशन के सब स्टेशन और लाइन बनाने और संचालन करने का कार्य उत्तर प्रदेश ने हीं किया।
अब यही यूपी ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन, जिसे स्टेट ट्रांसमिश�� कंपनी ऑफ द ईयर का अवार्ड मिला है, 220 केवी और ऊपर की क्षमता का एक भी सबस्टेशन या लाइन नहीं बना सकता कयोंकि यह निर्णय है कि 220 केवी और इससे अधिक क्षमता के सब स्टेशन और लाइनें टैरिफ बेस्ड कॉम्पिटेटिव बिडिंग के नाम पर बनाई जाएगी। स्वाभाविक है कि जब यूपी ट्रांस्को से 220 केवी और ऊपर का ट्रांसमिशन का कार्य छीन लिया गया है तो यह सारा काम या तो पावर ग्रिड के पास जा रहा है या निजी क्षेत्र में मुख्यतः अदानी ट्रांस्को के पास जा रहा है।
इसके अतिरिक्त 100 करोड रुपए से अधिक की 132 केवी की ट्रांसमिशन परियोजनाओं का कार्य भी टीबीसीबी के नाम पर निजी घरानों के पास ही जा रहा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश का ट्रांसमि���न का नेटवर्क देश का सबसे बड़ा ट्रांसमिशन का नेटवर्क है किन्तु टीबीसीबी के चलते अब उप्र के ट्रांसमिशन नेटवर्क का बहुत बड़ा भाग निजी घरानों के पास है। निजी घरानों के ट्रांसमिशन चार्जेज काफी अधिक हैं।
संघर्ष समिति ने कहा कि प्रदेश में बिजली उत्पादन की दो तिहाई से ज्यादा की आपूर्ति निजी क्षेत्र से होती है । ट्रांसमिशन में भी बड़े पैमाने पर निजी क्षेत्र के आने से निजी क्षेत्र से मिलने वाली महंगी बिजली पर निजी घरानों को ट्रांसमिशन चार्जेज भी अधिक देने पड़ रहे हैं। इससे सबसे बड़ा नुकसान यह है कि इससे प्रदेश की जनता को मिलने वाली बिजली की कीमत बढ़ जाती है।
संघर्ष समिति ने बताया कि उत्तर प्रदेश में नई बनने वाली ताप बिजली परियोजनाओं मुख्यतया 1980 मेगावॉट की घाटमपुर , 1320 मेगावॉट की मेजा, 1320 मेगावॉट की बारा और 1320 मेगावॉट की खुर्जा तापीय परियोजनाओं से उत्पन्न होने वाली बिजली के निष्क���सन हेतु बनने वाली ट्रांसमिशन लाइन और सब स्टेशन सब निजी क्षेत्र मुख्यतया अदानी ट्रांस्को के पास हैं।
उन्होंने ��हा कि उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम की नई बनी ताप बिजली परियोजनाओं ओबरा सी और जवाहरपुर से निकलने वाली पॉवर ट्रांसमिशन लाइन भी अदानी ट्रांस्को और पॉवर ग्रिड के पास हैं।
संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश में सर्वाधिक बिजली आपूर्ति करने वाला प्रदेश है किन्तु यह गंभीर चिंता की बात है कि उत्तर प्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी देश में श्रेष्ठतम होते हुए भी उप्र का ट्रांसमिशन का सारा नेटवर्क निजी घरानों के नियंत्रण में जा रहा है। इसे हर हाल में रोका जाना चाहिए।
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कॉर्पोरेट घरानों से मिली भगत और बड़े घोटाले की आशंका को देखते हुए निजीकरण का निर्णय निरस्त की मांग: संघर्ष समिति ने निजीकरण पर उठाए पांच सवाल
ऊर्जा निगमों के निजीकरण के मामले में पावर कार्पोरेशन प्रबंधन क��� निजी घरानों से मिली भगत और बड़े घोटाले की आशंका को देखते हुए विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी से निजीकरण के सारे प्रकरण में सीबीआई जांच की मांग की है और कहा है कि निजीकरण का निर्णय प्रदेश के व्यापक हित में तत्काल निरस्त किया जाए।
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि निजीकरण के मामले में प्रारंभ में ही जिस प्रक���र अवैध ढंग से ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति की गई उससे बड़े घोटाले की आशंका बलवती हो गई थी।
इसे देखते हुए संघर्ष समिति ने प्रारंभिक तौर पर ही निजीकरण के सारे मामले में बड़े भ्रष्टाचार की आशंका जताई थी। समिति ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ने वाली सबसे बड़ी संस्था ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया से भी इस बाबत विचार विमर्श किया। विस्तृत विचार विमर्श के बाद ऐसे तथ्य सामने आए हैं जिससे ऐसा लगता है कि निजीकरण के मामले में बहुत बड़ा घोटाला और भ्रष्टाचार होने जा रहा है।
संघर्ष समिति ने ��ज ऐसे पांच बिंदुओं को सार्वजनिक करते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि उत्तर प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति को देखते हुए निजीकरण के सारे मामले की तत्काल सीबीआई जांच कराई जाए।
संघर्ष समिति ने कहा कि पहला बिंदु विगत नवंबर में लखनऊ में विद्युत वितरण निगमों की मीटिंग है जिसमें निजी घरानों ने बड़ी संख्या में भागीदारी की थी और कार्यक्रम को स्पॉन्सर भी किया था। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की पृष्ठभूमि यही तैयार की गई थी। इस मीटिंग में देश के इतिहास में पहली बार शीर्ष प्रबंधन द्वारा डिस्कॉम एसोशिएशन बनाई है। निजीकरण को अंजाम देने के दृष्टिकोण से पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल को इसी मीटिंग में डिस्कॉम एसोशिएशन का जनरल सेक्रेटरी बनाया गया।
दूसरा बिन्दु ट्रांजैक्��न कंसल्टेंट की नियुक्ति में हितों के टकराव को शिथिलता देना है। इसके साथ ही झूठा शपथ पत्र देने और अमेरिका में पेनल्टी लगने की बात स्वीकार कर लेने के बाद भी ग्रांट थॉर्टन को नहीं हटाया गया और इसी कंसल्टेंट से निजीकरण के डॉक्यूमेंट तैयार कराए गए।
तीसरी बात बिडिंग हेतु ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 को आधार माना जा रहा है जो डॉक्यूमेंट आज तक पब्लिक डोमेन में ही नहीं है। इसके पूर्व सितंबर 2020 में ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट जारी किया गया था जिस पर ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन सहित कई संस्थानों की आपत्ति आई थी। इन आपत्तियों का आज तक निस्त���रण नहीं किया गया है और गुपचुप ढंग से उत्तर प्रदेश में निजीकरण के पहले ड्राफ्ट बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 जारी कर दिया गया। ड्राफ्ट बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 को न पब्लिक डोमेन में रखा गया है न इस पर किसी कीआपत्ती मांग की गई है। उत्तर प्रदेश में निजीकरण करने के लिए यह सब मिली भगत का बड़ा खेल है।
चौथा बिंदु यह है कि निजीकरण के सारे प्रकरण में कॉर्पोरेट घरानों को विश्वास में लेकर काम किया जा रहा है। टाटा पावर के सीईओ प्रवीर सिन्हा ने हाल ही में तीसरी बार बयान देकर इस बात की पुष्टि की है जिसमें उन्होंने कहा है कि उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के डॉक्यूमेंट उनसे चर्चा करके बनाया गए हैं।
पांचवा बिंदु यह है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम को कौड़ियों के मोल पूर्व निर्धार��त निजी घरानों को बेचने के लिए इक्विटी के आधार पर बेचने की कोशिश की जा रही है। इक्विटी को लॉन्ग टर्म लोन में कन्वर्ट किए जाने के बाद 42 जनपदों की बिजली व्यवस्था मनचाहे कॉर्पोरेट घरानों को कौड़ियों के दाम मिल जाएगी।
संघर्ष समिति के पदाधिकारी ने कहा कि यह सब बहुत ही गंभीर मामला है। उत्तर प्रदेश में बिजली की लाखों करोड़ रुपए की परिसंपत्तियों को लूट से बचाने के लिए माननीय मुख्यमंत्री जी को तत��काल हस्तक्षेप कर सारी प्रक्रिया रोकनी चाहिए और चल रहे घोटाले की उच्च स्तरीय सीबीआई कराई जानी चाहिए।
संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मचारी, किसान, उपभोक्ता, व्हीसल ब्लोअर, सरकारी कर्मचारी, राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन सब मिलकर निजीकरण के पीछे हो रहे भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करते रहेंगे।
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निजीकरण की सारी प्रक्रिया निरस्त करने की मांग : स्टैण्डर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 सार्वजनिक कर किसानों, उपभोक्ताओं और कर्मचारियों की राय ली जाय: निजीकरण के बाद भी सरकार को निजी कंपनियों को कई साल तक अरबों खरबों रुपए की वित्तीय सहायता देनी पड़ेगी
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की चल रही पूरी प्रक्रिया को प्रबंधन और निजी घरानों के बीच मिली भगत बताते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि निजीकरण का निर्णय निरस्त किया जाय और स्टैंडर्ड बिडिंग ड���क्यूमेंट 2025 जिसके आधार पर निजीकरण किया जा रहा है,उसे सार्वजनिक कर इस पर उपभोक्ताओं और बिजली कर्मियों की राय ली जाय।
संघर्ष समिति ने बताया कि निजीकरण हेतु तैयार किया गया स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 पूरी तरह एक तरफा है और निजी कंपनियां के पक्ष में बनाया गया है। उन्होंने बताया कि केन्द्रीय विद्युत मंत्रालय के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 का पालन करने पर सरकार को निजी कंपनियों को ट्रांजिशन सपोर्ट के नाम पर न्यूनतम 05 से 07 वर्ष तक सस्ती दरों पर बिजली आपूर्ति करनी पड़ेगी और इस एवज में अरबों रुपए खर्च करने पड़ेंगे । यह अवधि तब तक और बढ़ाई जा सकती है जब तक निजी कंपनियां मुनाफे में न आ जाय।
संघर्ष समिति ने कहा कि इसके अतिरिक्त निजी कंपनियों को सारी जमीन बेहद कम दाम पर मुहैया कराई जाएगी । निजी कंपनियों को क्लीन बैलेंस शीट दी जाएगी और घाटे और दे��दारियों का सारा बोझ सरकार अपने ऊपर ले लेगी।
कर्मचारियों की सेवान्त सुविधाओं के भुगतान हेतु निजी कंपनियों को अधिकृत किया जा रहा है कि वह इसे ए आर आर के जरिए उपभोक्ताओं के टैरिफ पर पास ऑन करेंगे।
संघर्ष समिति ने कहा कि स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 एक ऐसा डॉक्यूमेंट है जिसके आधार पर निजीकरण करने के बाद भी सरकार को प्रतिवर्ष अरबों खरबों रुपए निजी कंपनियों को देना पड़ेगा, घाटे का सारा दायित्व सरकार उठाएगी और आम उपभोक्ता���ं के टैरिफ में कर्मचारियों के टर्मिनल बेनिफिट्स का भार जोड़ा जाएगा।
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि प्रबंधन और शासन के कुछ उच्च अधिकारी निजी घरानों के साथ मिले हुए हैं और सरकार को अंधेरे में रखकर निजीकरण थोपना चाहते हैं जिससे सरकार पर वित्तीय बोझ भी बढ़ेगा और आम उपभोक्ताओं का टैरिफ भी बढ़ेगा।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां ��ताया कि भारत सरकार ने 14 मई 2025 को विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण हेतु स्टैंडर्ड बिल्डिंग डॉक्यूमेंट 2025 जारी किया है।
संघर्ष समिति ने कहा कि यह जानकारी मिली है कि पावर कारपोरेशन ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु जो आरएफपी डॉक्यूमेंट बनाया है वह स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 पर आधारित है। इसके पूर्व जब ट्रांजैक्शन कंसलटेंट का चयन किया ग���ा था तब लिखा गया था कि निजीकरण का आधार स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2020 है।
संघर्ष समिति ने कहा कि ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट के चयन और आरएफपी डॉक्यूमेंट तैयार किए जाने के बीच ��िजीकरण का आधार स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2020 से बदलकर स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 हो गया है । ऐसे में निजीकरण की सारी प्रक्रिया तत्काल निरस्त की जाए और पहले स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 सार्वजनिक किया जाय जिसके आधार पर प्रदेश के 42 जनपदों की बिजली व्यवस्था निजी घरानों को दी जा रही है।
संघर्ष समिति के आह्वान पर आज लगातार 278 वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
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उप्र पॉवर कॉरपोरेशन और विद्युत वितरण निगमों ने डिस्कॉम एसोशिएशन को एक करोड़ 30 लाख 80 हजार का भुगतान किया:घाटे के नाम पर निजी��रण की दलील देने वाले किस मद में डिस्कॉम एसोशिएशन को कर रहे हैं भुगतान-संघर्ष समिति
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने आज खुलासा किया कि विगत 03 जून 2025 को उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन और उप्र के पांचो विद्युत वितरण निगमों ने ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन को एक करोड़ 30 लाख 80 हजार रुपए का भुगतान किया है। संघर्ष समिति ने सवाल किया है कि एक ओर पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन घाटे के नाम पर विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण की दलील दे रहा है और दूसरी ओर एक निजी संस्था ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन को करोड़ों रुपए का चंदा दे रहा है, यह बहुत गम्भीर मामला है।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के गठन से लेकर उप्र पॉवर कॉरपोरेशन और विद्युत वितरण निगमों द्वारा डिस्क��म एसोशिएशन को चंदा देने के मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाय।साथ ही हितों के टकराव को देखते हुए उप्र पॉवर कॉरपोरेशन के चेयरमैन डॉ आशीष गोयल को निर्देश दिया जाय कि वे या ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के महामंत्री का पद छोड़ दें या पॉवर कॉरपोरेशन के चेयरमैन के पद से उन्हें हटा दिया जाय।
संघर्ष समिति ने कहा कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन का गठन और ��ंदे की ऊपर से दिखाई दे रही रकम "टिप ऑफ द आईस बर्ग" है। संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के पीछे मेगा घोटाला है। संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश के ऊर्जा निगमों को बहुत बड़े घोटाले से बचाने के लिए पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय तत्काल निरस्त किया जाय।
संघर्ष समिति ने य��� आरोप पुनः लगाया है कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन विद्युत वितरण निगमों में समानांतर प्रशासनिक व्यवस्था का संचालन कर रही है और विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण में पूरी मदद कर रही है।
संघर्ष समिति ने कहा कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के गठन के पीछे देश के बड़े कॉर्पोरेट घरानों का हाथ है और इस एसोसिएशन का गठन विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण हेतु किया गया है।आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन क��� कोषाध्यक्ष पद पर इसीलिए निजी क्षेत्र के प्रतिनिधि को नियुक्त किया गया है। इस एसोसिएशन में निजी क्षेत्र की कई विद्युत वितरण कंपनियां सम्मिलित हैं और उप्र सहित अन्य प्रांतों में निजीकरण हेतु दस्तावेज तैयार कराने में उनकी अहम भूमिका है।
संघर्ष समिति ने बताया कि उप्र पॉवर कॉरपोरेशन ने आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की सदस्यता लेने के लिये 10 लाख रुपए और 01.80 लाख रुपए जी एस टी मिलाकर 11.80 लाख रुपए का भुगतान किया है। इसके अतिरिक्त इनीशियल कॉन्ट्रिब्यूशन के रूप में 10 लाख रुपए का अलग भुगतान किया है।इस प्रकार उप्र पॉवर कॉरपोरेशन ने आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन को कुल 21.80 लाख रुपए का भुगतान विगत 03 जून 2025 को किया।
उप्र पॉवर कॉरपोरेशन के निर्देश पर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम,दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम,पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम,मध्यांचल विद्युत वितरण निगम और केस्को ने इसी प्रकार ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन को अलग-अलग 21 लाख 80 हजार रुपए का भुगतान 03 जून 2025 को किया है।
इस प्रकार उप्र पॉवर कारपोरेशन लिमिटेड और उप्र के विद्युत वितरण निगमों ने कुल मिलाकर एक करोड़ 30 लाख 80 हजार रुपए का भुगतान ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन को किया।
संघर्ष समिति ने कहा है कि पावर कॉरपोरेशन यह बताये कि एक करोड़ तीस लाख अस्सी हजार रुपए के भुगतान हेतु पॉवर कारपोरेशन और विद्युत वितरण निगमों ने उप्र राज्य विद्युत नियामक आयोग से पूर्व अनुमति ली है या नहीं।और यदि अनुमति नहीं ली है तो इस चंदे की धनराशि को खर्च में जोड़कर उपभोक्ताओं पर भार डालने का आधार क्या है ? संघर्ष समिति ने कहा कि घाटे के नाम पर एक निजी संस्था को करोड़ों रुपए का चंदा देना और उसका बोझ आम उपभोक्ताओं पर डालना कितनी नैतिकता है?
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निजीकरण की प्रक्रिया पर संघर्ष सम���ति ने उठाये सवाल : बिडिंग डॉक्यूमेंट के अनुसार निजीकरण के बाद सरकार निजी घरानों को आर्थिक सहयोग देती रहेगी तो जनता पर यह भार क्यों डाला जा रहा है:
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की सारी प्रक्रिया पर सवाल उठाया है। संघर्ष समिति ने कहा है कि स्टैण्डर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट के अनुसार निजीकर�� के बाद भी सरकार निजी घरानों को आर्थिक सहयोग देती रहेगी तो निजीकरण से क्या लाभ होने जा रहा है ?
संघर्ष समिति ने एक बार पुनः प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी से अपील की है कि तमाम घोटालों से भरे निजीकरण की सारी प्रक्रिया बहुत ही संदेहास्पद है। अतः वे प्रभावी हस्तक्षेप कर निजीकरण को निरस्त करने की कृपा करें।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केन्द्��ीय पदाधिकारियों ने ��ज यहां बताया कि भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय द्वारा सितंबर 2020 में जारी ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट की धारा 2.2 (बी) में लिखा है कि जिस विद्युत वितरण निगम का निजीकरण किया जा रहा है अगर वहां औसत बिजली विक्रय मूल्य और औसत राजस्व वसूली में अधिक अन्तर है तो निजीकरण के बाद सरकार निजी विद्युत कम्पनी को सब्सिडाइज्ड रेट पर बिजली आपूर्ति तब तक सुनिश्चित करेगी जब तक निजी कम्पनी मुनाफे में नहीं आ जाती।
संघर्ष समिति ने कहा कि बिडिंग डॉक्यूमेंट की उक्त धारा के अनुसार सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि निजी कम्पनी को सब्सिडाइज्ड रेट पर सरकार कितने वर्ष बिजली आपूर्ति कराएगी और इस हेतु सरकार को कितने अरब रुपए की धनराशि खर्च करनी पड़ेगी।
संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश के सरकारी विद्युत वितरण निगमों के घाटे का सबसे बड़ा कारण बहुत महंगी दरों पर निजी विद्युत उत्पादन घरों से बिजली खरीद के करार है। ऐसे बिजली क्रय करार भी हैं जिनसे बिना बिजली खरीदे प्रति वर्ष 6761 करोड रुपए फिक्स चार्ज देना पड़ रहा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण के ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट के अनुसार सरकार निजीकरण के बाद निजी घरानों को महंगे पावर परचेज एग्रीमेंट के एवज में सब्सिडाइज्ड बल्क पावर सप्लाई करेगी और इसका खर्चा सरकार उठायेगी। संघर्ष समिति ने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि सब्सिडाइज्ड बल्क सप्लाई का प्रतिवर्ष कितना खर्चा आएगा और यह कितने वर्ष तक जारी रखा जाएगा ।
संघर्ष समिति ने कहा कि इसके अलावा स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट की धारा 1.1 (ई) के अनुसार निजी कंपनियों को क्लीन बैलेंस शीट दी जाएगी और घाटे तथा देनदारियों का सारा उत्तरदायित्व भी सरकार का होगा ।
संघर्ष समिति ने कहा कि बिडिंग डॉक्यूमे���ट की धारा 1.1 (एफ) के अनुसार सरकार 05 से 07 वर्ष तक या और अधिक समय तक निजी घरानों को वित्तीय सहायता भी सरकार देगी और यह सहायता तब तक देती रहेगी जब तक निजी कंपनियां आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर न हो जाए और मुनाफा न कमाने लगे।
संघर्ष समिति ने कहा कि बिडिंग डॉक्यूमेंट के अनुसार 42 जनपदों की सारी जमीन मात्र ₹1 प्रतिवर्ष की लीज पर दी जाएगी। वाराणसी, आगरा, गोरखपुर, प्रयागराज, कानपुर और अन्य स्थानों पर जिनका निजीकरण किया जा रहा है जमीन बेशक कीमती है उसे मात्र 01रुपए की लीज पर दिए दिया जाना कौन सा रिफॉर्म है ?
संघर्ष समिति ने कहा कि यदि यही सब करना है तो सरकारी क्षेत्र के विद्युत वितरण निगमों को लगातार सुधार के बाद कौड़ियों के मोल बेचने की जरूरत क्या है ?
बिजली के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 272 दिन पूरे हो जाने पर आज भी समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर बिजली कर्मियों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
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