स्कॉटलैंड के ग्लासगो में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने कुल 39 पदक जीते जिसमें 13 स्वर्ण पदक भी शामिल है।
राज्यवार भारत के एथलीट का प्रदर्शन👇
हरियाणा एथलीट— 11 मेडल (13 में से 7 गोल्ड)
गुजरात एथलीट— 0 मेडल
केंद्रीय खेल बजट हरियाणा— 60 करोड़
केंद्रीय खेल बजट गुजरात— 450 करोड़
इसके बावजूद सबसे ज्यादा बजट लेकर एक भी पदक न जीतने वाले प्रदेश गुजरात को "कॉमनवेल्थ गेम्स 2030" की मेजबानी दी गई है और हरियाणा को नजरअंदाज किया गया।
गुजरात के एथलीट किसी भी टूर्नामेंट में एक भी पदक जीत नहीं जीत पाते— तो इनको दिए गए बजट का आखिर होता क्या है..??
भाजपा के कार्यकर्ताओं के लिए पद से कहीं अधिक महत्वपूर्ण देश, हमारी युवा पीढ़ी और विद्यार्थी हैं। आज केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री @dpradhanbjp जी का अपने पद से इस्तीफा इसी को दर्शाता है।
मोदी सरकार देश के युवाओं की भावनाओं का सम्मान करती है और पेपर लीक के विरुद्ध आवश्यक सुधारों के लिए कटिबद्ध है। पेपर लीक के दोषियों को कठोर दंड मिले, इसके लिए मोदी जी द्वारा लिए गए निर्णय सराहनीय हैं। मुझे पूर्ण विश्वास है कि इन कदमों से NEET परीक्षा में सफल हुए विद्यार्थियों के साथ पूरा न्याय होगा।
धर्मेंद्र प्रधान जी ने अपने कार्यकाल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के प्रभावी क्रियान्वयन, मातृभाषाओं में परीक्षाओं की व्यवस्था, पीएम श्री विद्यालयों के विस्तार, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने, कौशल विकास एवं उद्योग-अकादमिक समन्वय को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। परीक्षा प्रणाली को अधिक समावेशी और छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में भी उनके प्रयास उल्लेखनीय रहे हैं। उनका कार्यकाल भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प के प्रति उनके समर्पण का परिचायक है।
छुट्टी का अर्थ क्या है?
विदेश यात्राएँ भी, मंदिर दर्शन भी, लक्षद्वीप के समुद्र तट भी देखे गए, समुद्र के भीतर की तस्वीरें भी आईं।
अगर विदेश यात्रा, धार्मिक यात्रा, समुद्र तट पर जाना, प्रकृति के बीच समय बिताना, अच्छा भोजन करना और आराम करना भी छुट्टी नहीं है,
तो फिर मुझे लगता है इस देश में कोई भी छुट्टी नहीं ले रहा।
हर आदमी काम ही कर रहा है - कोई मनाली में काम कर रहा है, कोई गोवा में, कोई परिवार के साथ, कोई दोस्तों के साथ।
2014 से 2026 के बीच प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च हुए। असली बहस यह है कि इन दौरों से भारत को कितना निवेश मिला, कितने रोजगार बने और व्यापार हितों को कितना लाभ हुआ?
देश का आम आदमी नहीं देखता कि नेता ने कितने घंटे काम किया, वह देखता है कि उसके जीवन में क्या बदला।
जिस युवा का पेपर लीक हो गया, जिस किसान को फसल का दाम नहीं मिला, जिस मरीज को अस्पताल में बेड नहीं मिला, जिस परिवार की नौकरी चली गई - उसे 18 घंटे और 20 घंटे के से क्या फर्क पड़ता है?
18 घंटे काम करने का काम का परिणाम क्या निकला? शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, न्याय और नागरिक सुरक्षा के मोर्चे पर देश कहाँ पहुँचा।
युवा पूछ रहा है कि डिग्री के बाद नौकरी कब मिलेगी?
आम आदमी भी अपनी नौकरी में भी 12-14 घंटे खटता है, मजदूर धूप में पूरा दिन काम करता है, किसान बिना रविवार के खेत में उतरता है।
सवाल यह नहीं कि किसने कितने घंटे काम किया। सवाल यह है कि उस काम का परिणाम क्या निकला।
अगर काम का पैमाना सिर्फ घंटे हैं, तो इस देश का सबसे बड़ा कर्मयोगी शायद वह मजदूर है जो रोज़ दो वक्त की रोटी के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक देता है।
राजेश ये तुम्हारी सादगी नहीं, डर है। तुम्हारे पास बेसिक फोन हैं ! सच सच बता दो। किससे डर कर तुमने स्मार्ट फोन की जगह बेसिक फोन रखा है? उससे तो नहीं जो फोन में पेगासस लगा देता है! 15 लाख करोड़ का बिज़नेस करते हो और फोन 1500 सौ वाला! नहीं राजेश, तुम्हें स्मार्ट फोन रखना चाहिए। Oppo का स्मार्ट फोन लो और जियो का कनेक्शन और उस पर लगाओ यू ट्यूब और सुनो वो वाला गाना- बाग़ों में बहार है? है । तुम भी आठ संपादकों को बुलाओ और सच बता दो 15 लाख करोड़ के राज़ क्या हे ? लेकिन राजेश बेसिक फोन बदल लेना। वो इसमें भी कटिया लगा कर सुन लेता है !
Will AI finally take Mr. Nags’s job? 𝗟𝗮𝘀𝘁 𝗡𝗮𝗴𝘀 𝘅 𝗩𝗶𝗿𝗮𝘁 𝗩𝗶𝗱𝗲𝗼?? 🤯🤯🤯
In this episode of 𝗥𝗖𝗕 𝗜𝗻𝘀𝗶𝗱𝗲𝗿 𝘄𝗶𝘁𝗵 𝗠𝗿. 𝗡𝗮𝗴𝘀 𝗳𝘁. 𝗩𝗶𝗿𝗮𝘁 𝗞𝗼𝗵𝗹𝗶 the OG legends of ‘uru talk about haircuts, speculations on Social Media, and Virat’s debut in Sandalwood 😎😂!
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1962 के रेंजांग ला (रेंजागल) युद्ध की गाथा भारतीय इतिहास का वह स्वर्ण अध्याय है, जहाँ 13 कुमाऊँ रेजिमेंट की C कंपनी के 120 अमर सैनिकों (जिनमें से 114 अहीर वीर थे) ने बर्फ़ से ढके मोर्चे पर 3000 चीनी सैनिकों से लड़ते हुए देश की सीमाओं की रक्षा की।
इन वीर जवानों ने “अंतिम आदमी, अंतिम गोली” तक डटे रहकर अमर शौर्य का इतिहास रचा। आज भी भारतीय सेना में रिजांग ला का नाम वीरता के पर्याय के रूप में लिया जाता है।
अब जब इस अमर बलिदान पर आधारित फिल्म “120 बहादुर” बनाई जा रही है,
हम यह @excelmovies से सम्मानजनक और ऐतिहासिक माँग करते हैं कि इसका नाम बदलकर “अहीर रेजिमेंट” रखा जाए — क्योंकि यह सिर्फ़ एक युद्ध की कहानी नहीं, बल्कि अहीर वीरों की अमर पहचान और गौरवशाली इतिहास का प्रतीक है।
@FarOutAkhtar हम आपसे आग्रह करते हैं कि इस फिल्म को उसका सच्चा नाम और ऐतिहासिक सम्मान दें।
#Rename120BahadurToAhirRegiment
#RezangLaWar
#AhirRegiment
#जयअहीररेजिमेंट
@rajuparulekar My Grandfather was in the Military
My Father was in the Airforce
My brother is serving in the Airforce
And we all family members as Soldier blood want fight.... Fight against terrorism 🇮🇳