कल रात स्वाति मालीवाल को नींद नहीं आई होगी…
वो इसलिए क्योंकि बार-बार उनके मन में ये सवाल ज़रूर उठ रहे होंगे कि, क्या माँ-बाप के विचार/व्यवहार के लिए उनके बच्चों को ज़िम्मेदार ठहराया जाना सही है?
अगर स्वाति मालीवाल स्वयं अपने पिता के दुष्कर्मों के लिए ज़िम्मेदार नहीं हैं तो फिर आतिशी अपने परिजनों के दशकों पुराने राजनैतिक विचारों के लिये आज कैसे ज़िम्मेदार हो सकती हैं?
ये मुद्दा तो महाभारत युग में ही सेटल हो गया था कि पारिवारिक रिश्ता किसी को स्वामित्व का लाइसेंस नहीं देता है।
धर्मराज युधिष्ठिर का अपनी पत्नी और भाइयों को दांव पर लगाना गलत माना गया था क्योंकि रिश्ते से जुड़े होने की वजह से किसी के अस्तित्व की स्वतंत्रता समाप्त नहीं होती है।
इसलिए चाहे स्वाति मालीवाल हों या आतिशी, सभी अपने ख़ुद के विचार और व्यवहार के लिए जवाबदेह हैं, न की अपने जन्मदाताओं के।
अब अगर अपने ख़ुद के व्यवहार की बात करें तो एक बात स्पष्ट है कि फ़िलहाल स्वाति मालीवाल एक मुश्किल दौर से गुज़र रही हैं।
उनकी मुश्किल भावनात्मक है, और राजनैतिक भी।
वो उनसे इत्तेफाक न रखने वाले पुरुषों में आज भी अपने दानवी पिता को देख रहीं हैं और पुराने साथियों के जीवन की घटनाओं में अपनी नई राजनीतिक मंज़िल तलाश रही हैं।
आसान नहीं है इन दोनों मनःस्थित को बैलेंस करना।
ख़ैर, जो उनके साथ बचपन में हुआ उसके लिए वो क़तई ज़िम्मेदार नहीं हैं पर जो वो अब दूसरों के साथ कर रही हैं, उसकी पूरी ज़िम्मेदारी ताउम्र सिर्फ़ उन्हीं की होगी।
उम्मीद है की जल्द ही वो अपने मन की गाँठों को खोल पाने में सफल होंगी।
जब ऐसा होगा, तब कुछ और हो न हो, ज़मीर पर बिना बोझ के वो चैन से सो ज़रूर सकेंगी…
@RailwaySeva When the train reaches Viramgam Gujrat (Veraval Pune exp 11087) why stay at Viramgam for more than 40 min. Each station train stop 20 to 30 minutes