उत्तर प्रदेश की सरकार ने सेवारत शिक्षकों के लिए Special Tet के फॉर्म निकाले हैं।
लेकिन तुष्टिकरण और जातिवाद की राजनीति यहां भी हाबी है
Gen , OBC 1000 और Sc St 500 रू फीस
अब पूंछना ये था जो शिक्षक बन गया उसको जाति के नाम पर फीस में रियायत क्यों?
@myogiadityanath@CMOfficeUP
सुप्रीम कोर्ट के वकील AP सिंह ने
सरकार की जातिवादि नीतियों की खोली पोल
दो दोस्त बाइक पर जा रहे थे एक दलित एक सवर्ण
दोनों की हत्या हुई सरकार ने दलित को 10 लाख का
चेक दिया वही सवर्ण को कफ़न के लिए भी पैसे नहीं
सवर्ण से ऐसा भेदभाव
टैक्स सवर्ण भरते लेकिन फायदा दलित क्यों.?
A Brahmin family struggling with hunger in Bargadia village...
The most heartbreaking thing is that...
For months, the children's plates have had no dal or vegetables—just dry rice, salt, and a little oil.
This woman named Arpita Pandey is living in such poverty with her three innocent children that calling it "poor" would be an understatement. This family is extremely impoverished. The condition of the house is so dire that the walls are crumbling, the roof has caved in places, and the entire structure looks like a ruin.
The most heartbreaking thing is that these three young children aren't going to bed hungry today, but have been doing so for months. Their daily meal is just dry rice mixed with salt and a bit of oil. No dal, no vegetables, no milk... just that one plate, which isn't enough to satisfy hunger but barely keeps them alive.
When Arpita Pandey tearfully shared her plight, it sent shivers down the soul 🥹💔
This family from Bargadia village in Ayodhya is now in your sight. If you want to help, step forward and lend a hand.
Because after seeing these innocent faces fighting hunger, staying silent is impossible.
Janmashtami is tomorrow yet NSE and BSE will trade as usual.
The 2026 calendar has holidays for Good Friday, Bakri Id, Muharram, Mahavir Jayanti, Guru Nanak Jayanti and Christmas but not for the birth of Shri Krishna.
Welcome to 'secular' India
🚨 बरगदिया गाँव में भूख से जूझता एक ब्राह्मण परिवार …
सबसे दर्दनाक बात ये है कि …
बच्चों की थाली में महीनों से दाल-सब्जी नहीं, सिर्फ सूखे चावल, नमक और थोड़ा तेल है। 😢
अर्पिता पांडे नाम की यह महिला अपने तीन मासूम बच्चों के साथ ऐसी गरीबी में जी रही हैं, जिसे “गरीब” कहना भी कम होगा। यह परिवार महा-गरीब है। घर का हाल इतना बुरा है कि दीवारें टूट-फूट चुकी हैं, छत कहीं-कहीं धँसी हुई है और पूरा मकान खंडहर जैसा लगता है।
सबसे दर्दनाक बात यह है कि इनके तीन छोटे-छोटे बच्चे आज नहीं, बल्कि कई महीनों से भूखे पेट सो रहे हैं। उनका रोजाना का भोजन सिर्फ सूखे चावल में नमक और थोड़ा तेल मिलाकर बनाया जाता है। न दाल, न सब्जी, न दूध… सिर्फ वही एक थाली जो भूख मिटाने के बजाय सिर्फ जिंदा रहने के लिए काफी है।
जब अर्पिता पांडे ने रो-रोकर अपना दुख सुनाया तो रूहें थर्रा गई 🥹💔
अयोध्या के बरगदिया गाँव का यह परिवार अब आपकी नजर में है। अगर आप मदद करना चाहते हैं, तो आगे बढ़कर हाथ बढ़ाएँ।
क्योंकि भूख से लड़ते इन मासूम चेहरों को देखने के बाद, चुप रहना संभव नहीं।
@BJP4India@CMOfficeUP@yadavakhilesh@highcourtadvo@shalabhmani
क्या UP सरकार ने हाई कोर्ट में अपने ही द्वारा दिये गए Undertaking का उल्लंघन किया है?
UP में 91% आरक्षण का मामला - तथ्य:
1. UP के 4 मेडिकल कॉलेज (अंबेडकर नगर, कन्नौज, जालौन और सहारनपुर) में 91.76% आरक्षण लागू किया गया था।
SC=72.94%
ST=5.88%
OBC=12.95%
UR=8.24%
2. इस आरक्षण व्यवस्था को 2025 में इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी गई।
सरकार ने तर्क दिया कि ये चारों मेडिकल कॉलेज Special Component Plan (SCP) के तहत बनाए गए हैं, जिसका उद्देश्य अनुसूचित जाति के लिए विशेष प्रावधान करना था। इसलिए SC के लिए अधिक आरक्षण दिया गया।
3. इलाहाबाद हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने सरकार के इस आदेश को रद्द कर दिया और कहा कि आरक्षण की सीमा को इस तरह नहीं बढ़ाया जा सकता।
4. इसके बाद UP सरकार ने सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ अपील की। जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजिव शुक्ला की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई की।
डिवीजन बेंच ने उस समय आरक्षण के मूल विवाद पर अंतिम फैसला नहीं दिया। चूंकि 2025–26 में एडमिशन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी, इसलिए उस साल की पुरानी सीट व्यवस्था को जारी रहने दिया गया।
5. UP सरकार ने हाई कोर्ट में Undertaking दी कि 2026–27 के शैक्षणिक सत्र से सही और कानूनी आरक्षण व्यवस्था लागू की जाएगी।
लेकिन 2026–27 में सरकार ने फिर वही पुरानी सीट व्यवस्था लागू कर दी है।
अब सवाल ये है कि अगर हाई कोर्ट में उत्तरप्रदेश सरकार ने खुद Undertaking दी थी कि 2026–27 से सही आरक्षण व्यवस्था लागू की जाएगी, तो फिर पुरानी 91% आरक्षण व्यवस्था को लागू करना, उस Undertaking का उल्लंघन क्यों न माना जाए?
@myogiadityanath@myogioffice
यह न्यायसंगत नहीं है।
अगर सरकार ने हाई कोर्ट में कोई Undertaking दी है, तो सरकार खुद अपनी ही Undertaking से पीछे कैसे हट सकती है?
Any student from UP, who is affected by UP govt's reservation matrix (91% reservation) in 2026-27 academic year (MBBS), please connect with me immediately 🙏
Such devilish pogrom of Hindus is going on in Islamic Bangladesh..
Muslims are doing genocide of Hindus ..
But what does Mohan Bhagwat and Modi go and say ?
“There is no Hindutva without Muslims “
“Any Hindu who denies Islam is not a Hindu”
“Islam will always remain in India”
And in the end they say
Ye “Bharat Buddha ka desh hai”
These sanghis are leading Hindu society to same destiny as those of in Bangladesh
Atrocity Act अब कई मामलों में असली अत्याचार रोकने का कानून कम, राजनीतिक हथियार ज्यादा बन गया है।
हिंदू देवी-देवताओं पर गाली-गलौज चले — कोई केस नहीं लेकिन वहीं अंबेडकर या किसी दलित नेता की आलोचना हो तो तुरंत SC/ST Act लग जाता है।
ये डबल स्टैंडर्ड ही असली समस्या है। कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए, न कि किसी एक समुदाय के लिए हथियार।
उत्तर प्रदेश पुलिस की बर्बरता देखिए 👇
आज जनपद फर्रुखाबाद में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दौरा था, फर्रुखाबाद के ही जहानगंज थाना क्षेत्र में एक गांव में 9 महीने पहले 10 साल के मासूम की हत्या हो गई थी उसका खुलासा अभी तक नहीं हो पाया था।
मासूम का परिवार @myogiadityanath से मिलना चांह रहा था, इस बात की भनक जहानगंज थाने की थाना इंचार्ज को लग गई, तो देखिए कैसे पीड़ित परिवार पर ही थाना इंचार्ज मारपीट कर रोंक रही हैं और परिवार को अपनी पीढ़ा बताने से घर में ही डिटेन कर दिया।
अब @adgzonekanpur से कहना है कि @fatehgarhpolice का इतना नाइंसाफी रवैया कि पहले तो मासूम की हत्या का खुलासा अभी तक नहीं हो पाया उपरांत पीड़ित परिवार को डिटेन करके उसके साथ हांथापाई करना और मुख्यमंत्री जी न मिलने जाने देना कहां का इंसाफ है? क्या ऐसा थाना प्रभारी का रवैया संदेह के दायरे में आता है या अनुशासन हीनता कहा जाएगा या फिर गुंडई या तानाशाही या फिर वर्दी की हनक?
Nagpur Police has banned DJs, DJ vehicles, and laser lights from September 4 to November 1.
• Just a few days ago, Muslims in Nagpur celebrated Eid Milad-un-Nabi with DJs and laser lights.
• Now, just before Ganpati and Dahi Handi, Nagpur Police has banned DJs.
Why do these restrictions come only before Hindu festivals?