@ChapraZila यह औरत पहले से ही सिंदूर और बिना चूड़ी के रह रही है जब कि इसका पति जिंदा है। अभी तक इन लोगों का तलाक नहीं हुआ है तो समझ लीजिए की कितनी बड़ी फ्रॉड है। विक्टिम कार्ड खेल रही है ये।
अर्थी से पहले कुर्सी और चिता की आग के सामने शपथ
अजीत पवार की प्लेन दुर्घटना में मौत को अभी तीन दिन ही हुए थे कि खबर आने लगी कि उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री होंगी।
और उन्होंने अभी आज शाम पाँच बजे शपथ ले भी लीं।
एक तरफ़ अजीत दादा का असमय चले जाना और वहीं उनकी चिता की अग्नि के बुझने से पहले ही यह तय होने लगना कि अब कुर्सी पर कौन बैठेगा यह सामान्य भारतीयों और उनके शासकों की सोच व संवेदनाओं के बीच की उस खाई को दिखाता है, जो समाज के सामने सदियों से मौजूद है।
अगर किसी सामान्य भारतीय के घर में शोक होता है तो परिवार अशुद्ध (सूतक) हो जाता है। शुभ कार्य (शादी, उत्सव), नए कपड़े, नई चीज़ें खरीदना और मनोरंजन वर्जित हो जाता है। कुछ दिनों तक घर में खाना नहीं बनता; पड़ोसी या रिश्तेदार भोजन लाते हैं। पुरुष मुंडन कराते हैं और तेरहवीं के बाद कर्मकांड के पश्चात ही स्थिति कुछ सामान्य होती है। इसके बाद भी कुछ महीनों तक धार्मिक और वैवाहिक कार्यक्रमों पर रोक रहती है।
वहीं जब किसी राजनेता के यहाँ शोक होता है, तो अर्थी उठने से पहले ही कुर्सी की बातें होने लगती हैं।
इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी को उसी शाम राष्ट्रपति ज्ञानी ज़ैल सिंह द्वारा प्रधानमंत्री की शपथ दिलाया जाना।
जम्मू-कश्मीर में मुख्यमंत्री शेख़ अब्दुल्ला की मौत के बाद उनके बेटे फारूक अब्दुल्ला का उसी शाम मुख्यमंत्री की शपथ लेना, और अब सुनेत्रा पवार का तीन दिन के राजकीय शोक के बाद उपमुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठना।
ये सब दर्शाता है कि आम आदमी और हमारे राजनेताओं की सोच और कार्यशैली में कितना बड़ा अंतर है। और शायद इसी लिए आम आदमी आम ही रह जाता है, क्योंकि वह स्वयं से पहले समाज और “चार लोग क्या कहेंगे” की बातों में उलझा रहता है, जबकि देश पर राज करने वालों को इससे घंटा भर भी फर्क नहीं पड़ता और वे सत्ता की मलाई चाटने में लगे रहते हैं।
Hey @TataCLiQFashion@TataCLiQCare my order falsely marked DELIVERED. Item NOT received. Complaints get ignored with copy-paste replies: “wait a few days, our team is checking on this”. This is straight-up customer harassment after online payment.
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@amitkvikram बात ठंड की भी नहींहै। विद्यालय में 25 दिसंबर से 31 दिसंबर तक शीतकालीन अवकाश है। इस अवकाश के बीच में भी यह लोग ट्रेनिंग रख दिए हैं। फिर काहे का अवकाश
माननीय ACS महोदय शिक्षा विभाग, बिहार आपसे अनुरोध है कि शीतकालीन अवकाश (25–31 दिसंबर) में विभिन्न जिलों में जारी किए जा रहे शिक्षकों के आवासीय प्रशिक्षण के आदेशों को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए । @BiharEducation_@NitishKumar@samrat4bjp@sunilkbv
𝗣𝗮𝘁𝗶𝗲𝗻𝘁 𝗗𝗼𝗺𝗲𝘀𝘁𝗶𝗰 𝗖𝗮𝗽𝗶𝘁𝗮𝗹 must be 𝗥𝗲𝘄𝗮𝗿𝗱𝗲𝗱, 𝗻𝗼𝘁 𝗣𝗲𝗻𝗮𝗹𝗶𝘀𝗲𝗱.
I explained in Parliament how Investment in India remains heavily taxed, and why it needs to change.