For weeks, 24-year-old Ketan Agrawal was busy planning the perfect birthday for the woman he loved.
Friends say he was deeply in love with his fiancée, Siya Goyal, and wanted to make her special day unforgettable.
But what Ketan believed would be a celebration of love allegedly turned into a deadly betrayal. According to investigators, Siya was allegedly involved in a relationship with another man, Chetan Chaudhary, even as preparations for her marriage to Ketan were underway.
Police suspect that the duo conspired to eliminate Ketan, a plan that allegedly culminated on June 18, Siya's birthday.
What has shocked many is a social media post shared by Siya exactly a month before Ketan's death. On May 18, she uploaded a "Birthday Countdown" story on Instagram, showcasing Ketan's efforts to make her birthday memorable. The videos portrayed a happy couple deeply in love, with Ketan going out of his way to surprise her.
To friends and followers, it looked like a picture-perfect relationship. Investigators now believe the reality may have been very different.
मोहन यादव के भाई हैं निलेश.एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज थे.पिछले साल इस्तीफा दिया.एडिशनल एडवोकेट जनरल बना दिए गए.कहते हैं एमपी का क़ानून मंत्रालय वही चलाते हैं.ये महज़ संयोग नहीं है कि इस विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी का पद महीनों से खाली है.रिपोर्ट के मुताबिक 108 एकड़ जमीन उनके नाम है
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव पर 'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट गंभीर है। इसमें बताया गया है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके परिवार/रिश्तेदारों ने उज्जैन में 168 एकड़ के 137 भूखंड ख़रीदे।
फ़िलहाल इन ज़मीनों की क़ीमत ₹45 करोड़ हैं, लेकिन ढाँचागत विकास के बाद दाम किस तरह कई गुना बढ़ जाते हैं वो हमें अच्छी तरह मालूम है। उज्जैन में कई परियोजनाएँ चल रही हैं। ये सारी ख़रीद उन्हीं इलाक़ों में हुई हैं। सबसे अधिक 92 एकड़ भूमि तो पिछले साल ख़रीदी गई है।
स्वयं मोहन यादव, उनकी पत्नी सीमा, पुत्र वैभव, बहू शालिनी, बड़े भाई नारायण यादव, उनकी पत्नी रेखा, इन दोनों के बेटे अभय, CM के दूसरे भाई नंदलाल, बहन कलावती, चचेरे भाई गोविन्द व नीलेश - इन सबपर सवाल उठे हैं। परिवार की कई कंपनियाँ भी हैं जिनके नाम पर संपत्ति ख़रीदी गई।
2028 में सिंहस्थ कुंभ को लेकर भी कई विकास कार्य चल रहे हैं। CM बनने के बाद हुई ख़रीद में 111 एकड़ तो केवल नई सड़क-लिंकों/राजमार्गों के पास हैं। हाँ, बचाव में ये तर्क दिया जा सकता है कि परिवार पहले से रियल एस्टेट के कारोबार में है। लेकिन, ये भी सामने आया है कि 85 एकड़ तब ख़रीदे गए जब वो राज्य के शिक्षा मंत्री थे। ऊपर से लगभग हर ख़रीद उन क्षेत्रों में है जिन्हें कृषि से आवासीय/वाणिज्यिक उपयोग में परिवर्तित करने के लिए चिह्नित किया गया है। 2023 के बाद परिवार की भूमि-जोत दोगुनी हुई है।
माना कि चल-अचल संपत्ति के कारोबार में मोहन यादव और उनके नाते-रिश्तेदार पूर्व से ही हैं, लेकिन इस रिपोर्ट को लेकर उन्हें सफाई देनी चाहिए ताकि दूध का दूध व पानी का पानी हो।
एमपी के मुख्यमंत्री मोहन यादव के बारे में ये बातें कई बार कही गईं. पर इस रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है कि मोहन यादव और उनके परिवार ने कैसे उज्जैन में जमीन में इन्वेस्टमेंट किया है
Ladies & Gentlemen
The moment the nation has been waiting for has arrived!
Vaibhav Sooryavanshi in #TeamIndia jersey. Witness this incredibly special moment ❤️
आज खेसारी लाल यादव शहीद भरत तिवारी के परिवार से मिलने गया है। बिहार के 80% से ऊपर यादव इंफ़्युलेंसर्स ने भरत के बारे में सकारात्मक लिखा है। उससे भी आश्चर्यजनक बात थी कि जातीय दुराग्रह को पीछा छोड़ा यादवों ने कमेंट बॉक्स में ज्यादातर जगहों पे सकारात्मक प्रतिक्रिया ही दी है।
इसिलिए भाजपा नेताओं के चीयरलौंडा अनिल पैंसठ या यूपी के चंद वज्रमूर्खों को टिप्पणियों को गंभीरता पूर्वक नहीं लेना चाहिए।
किसी वर्ग से सम्मान का व्यवहार सत्य और सिद्धांत के आधार पर ही दीर्घकालीन ही हो सकता है ना कि किसी तीसरे को गाली देने के लिए इक्कठा होने के एकता नाम पर।
लिबरलों के जिन मुद्दों पर कांग्रेस की दुर्गति होनी है। कांग्रेसी सबसे पहले उसे लपककर लेते हैं। फिर कहते हैं कि वोट टाइम तो जनता भाजपा को ही वोट देती है। तो हम क्यों जनता के साथ खड़े हों।
कल से सारे बड़े कांग्रेसी सिंपथाइजर सुहरावर्दी के लिए आँसू बहाएँ जा रहे हैं , जिसने लीग के आह्वान पर सर की उपाधि लौटा दी थी।उसी मुस्लिम लीग का सदस्य था जिसका जन्म ही गांधी , मौलाना आजाद, नेहरू , पटेल इत्यादि का विरोध करते हुए हुआ था। उसी के लीगी भांजे ने कोलकाता में लाखों हिंदुओं का कत्ल कराया था।
राहुल गांधी ने इन सबके मुद्दों पर खेलना छोड़ दो। लिबरल ख़ुद नंगे हैं और तुम्हें भी नंगा कर देंगे। कांग्रेस ने वर्षों बाद आम जनता का NEET का मुद्दा अच्छे से उठाया तो पूरी सरकार की फटी पड़ी थी। एक एक पेपर स्टूडेंट के सामने खुला और वापस सील हुआ। ऐसे मुद्दों पर प्रेशर बनाओ।
बिहार में पाँच हज़ार करोड़ प्लस का बजट है , नदी तटबंध , बाढ़ पुनर्वास इत्यादि जैसे कई योजनाओं में जो हर साल शुद्ध रूप से यहाँ के नेताओं , अधिकारिओं और ठेकेदारो के जेब में जा रहा है। यहाँ आओ , भरत तिवारी जिस कारण हेतू बलिदान दिया है। उसका मूल विषय यह है। उसके गांव में जाओ , लोगों से मिलो और इन सब मुद्दों पर संघर्ष करो।
दादी इंदिरा को सिर्फ सोशल मीडिया पर याद करने से क्या होगा। इंदिरा वो थी कि जब बेलच्छी में नरसंहार हुआ और वहाँ जाने का रास्ता नहीं था तो हाथी पर बैठकर पीड़ितों के घर चली गई थी। उनके जैसा कुछ करो तब जनता से अपने पीछे आने की अपेक्षा करो।
बिहार पुलिस ने कहा कि भरत तिवारी ‘मानसिक विक्षिप्त’ था। सच ही कहा। कोई सिरफिरा ही होगा जो ‘तिवारी’ होकर दलित-पिछड़ों की बस्तियों के लिए लड़ रहा था। पागल ही होगा जो अपनी पदयात्रा के दौरान यह कहे कि वह संयोग से अवश्य ब्राह्मण है, किंतु उसके लिए यह मायने नहीं रखता। उसे हिंदुओं को एकजुट करना है।
जहाँ तुम्हारे विचारों की एहमियत तुम्हारी जाति से तय होती हो, वहाँ तुम जाति से ऊपर उठकर अपने प्राणोत्सर्ग भी कर दोगे, तब भी तुम्हारी मृत्यु पर अट्टाहास करने वाले कम नहीं होंगे।
भरत आखिरी क्षणों में जैसी ‘बहकी-बहकी’ बातें कर रहा था, सिवाय गोली के उसे और क्या ‘उपहार’ मिल सकता था?
इंस्टाग्राम के आकाश में भरत की फ़ोटो के साथ क्रांतिकारी नगमें गूँज रहे हैं। कुछ दिनों के बाद एल्गोरिदम की चक्की में पिसकर धूल हो जाएँगे। माँ ने अपना लाल खोया। पिता ने अपना सहारा। सिस्टम ने यह संदेश पहुँचा दिया कि आँख दिखाई तो भून दिए जाओगे। मुकदमा फाइलों में दबकर रह जाएगा।
Americans are going to regret this statement so badly one day.
JD Vance says:
“I have joked that I have two very, very important people in my life. An Indian and a Pakistani. The Indian is my wife, and the Pakistani is Field Marshal Munir.”
9⃣4⃣ runs
2⃣9⃣ balls
🔟 fours
8⃣ sixes
Vaibhav Sooryavanshi was at his brutal best in the #TriNationSeries Final 👏🫡
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#SLAvINDA
रात में घर में घुसकर एक पत्रकार के घर में @bihar_police दारू पकड़ रही है ?
कितना दारू वाला इसी पुलिस के संरक्षण में पल रहा है ये कौन नहीं जानता है ? हर शराबी को पता किस गांव में किसके घर दारू मिल रहा है और पुलिस पत्रकार को परेशान करने आ गई या डराने?
साले पुलिस वाले का सस्पेंशन होना चाहिए ।
भाजपा राज में सच बोलना, सच के लिए लड़ना - अपनी मृत्यु को दावत देना है।
ऐसे ही झारखंड में हाथी उड़ाओ भाजपा राज में सैंकड़ों निर्दोष आदिवासियों की हत्या की गई - कुछ भी इल्जाम लगा कर।
आठ वर्ष पूर्व हमारें यहाँ एक भूमिहार RTI एक्टिविस्ट की हत्या हुई थी। जब RTI एक्टिविज्म पीक पर था तब वह सरकारी कार्यों पर RTI डाला करते थे। कोई पुत्र नहीं था , सामाजिक और गर्म मिज़ाज आदमी थे। ख़ुद के भाई से भी ज़मीनी विवाद था।
हालाँकि एक अफ़वाह यह भी थी कि RTI डाल के बाद में वह पचास हज़ार - लाख रुपये में डील कर लेते हैं। मगर फिर भी वह पचास के आसपास जनकार्यों के मुकदमे लड़ रहे थे।
उनके RTI के वजह से प्रखंड के शिक्षा विभाग में उथल-पुथल मचा हुआ था। कई सारे नियुक्त शिक्षकों को नौकरी गंवानी पड़ी थी। कई राशन डीलरों के लाइसेंस कैंसिल हुए थे।प्रखंड के ढेर सारे मुखिया सब के ऊपर भी उन्होंने RTI डाला हुआ था।
मृत्यु के पंद्रह दिन पहले उनके भाई से झगड़ा हुआ और भाई घर में घुसकर उनके कागजातों की सारी फाइल्स लेकर भाग आया। वह FIR का प्रयास करते रहे लेकिन थानाध्यक्ष और डीएसपी पंचायती बैठा के मामला को हल कर पर अड़े रहे। अंततः उन्हें फाइल नहीं मिली।
फाइल नहीं मिला तो उन्हें खतरे का अंदेशा होने लगा। एक नेवता में घबराये हुए लग रहे थे तो कुछ करीबी लोगों ने कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि मेरा हथियार ले लिया है सब, अब कभी भी मेरी हत्या हो सकती है।
उसी शादी के न्योता से लौटते हुए अगले दिन उनकी हत्या हो गई। पत्नी ने कहा कि हत्या सुनियोजित ढंग से हुई इसमें पहले थानाध्यक्ष की मिलीभगत से घर से फाइल निकलवाया गया और बाद में गोली मरवा दी गई।
मरने पर हंगामा हुआ , कई लोगों पर नामजद FIR हुआ। उनकी मूर्ति उनके ही ज़मीन में बना दी गई। आज वे सभी नामज़द अभियुक्त जेल से बाहर हैं और सामान्य जीवन जी रहे हैं। थानाध्यक्ष - डीएसपी भी किसी और जगह बैठकर ऐश कर रहे होंगे।
भोजपुर की घटना पर पूर्व विधायक राजन तिवारी ने सिटी लाइव पे कहा है कि भरत तिवारी जब एसडीएम के यहाँ जब अपने गांव की माँग को लेकर पहुंचा तो एसडीएम ने उससे अभद्र व्यवहार किया। उसके बाद उसने ईगो में आकर असलहा ख़रीदा।
लोग सही बता रहे हैं कि उसका असलहा ख़रीदना , पुलिस पर फायर खोलना ग़ैर-क़ानूनी कृत्य है। मगर एसडीएम का जनता से दुर्व्यहवार करना कौन सा संवैधानिक कृत्य है? अगर वह उनके ऑफिस की मर्यादा ही तोड़ रहा था तो संवैधानिक रास्ते तो यही बताता है कि एसडीएम को FIR दर्ज कराना चाहिए था बजाय उसके साथ अभद्रता करने।
दरअसल यूपीएससी और पीएससी के परिणाम के जश्न के नाम पर हम हर साल संविधान पढ़के देश को दीमक के तरह चूसने वाले गुंडे पैदा कर रहे हैं। जबतक इन दीमकों का स्थाई इलाज नहीं होता तबतक कहीं से कोई युवा फ्रस्ट्रेट होकर भरत तिवारी बनने को निकलता रहेगा। अपनी आवाज अंग्रेजों से लड़ने वाले क्रांतिकारियों में ढूंढता रहेगा। इस को रोकना है तो स्टेट को किसी भरत तिवारी से नहीं ऐसे दीमकों से बचने का उपाय ढूँढना पड़ेगा।
आज़ादी के पचहत्तर वर्ष हो गए, अब तो नागरिक को नागरिक समझों सालों। तुम्हारे पास पॉवर है तो ईगो दिखाओगे और जिस दिन पॉवरलेस आदमी अपना ईगो दिखाने लगेगा। वह तुम्हें सनकी लगने लगेगा।