🥀السلام علیکم و رحمتہ اللہ و برکاتہ 🥀
किसी चीज का हद से ज्यादा शौक, दिलचस्पी, निस्बत और हद से ज्यादा मुहब्बत का नाम इश्क है.....!
इश्क़ मुहब्बत का इंतेहाई मर्तबा है,
जब इश्क़, मुहब्बत का आला मर्तबा है तो उसकी हकदार सबसे आला जात है जो की अल्लाह पाक♥️ है....!!
जो रोज़ हिंदू और मुसलमान के नाम पर ज़हर घोलते हैं, नफ़रत फैलाते हैं - यह उनके लिए है
कल जब दिल्ली में आग लगी तो इन लोगों ने अपनी जान की बाज़ी लगा कर बहुत सारे लोगों को बचाया
अरमान
शोएब
सलाउद्दीन
इसरार
वसीम रजा
मुस्तकीम
मोहम्मद वकार
मोहम्मद अफ़ज़ल
मोहम्मद अनीश
रियाजुद्दीन
Dr. Namira Siddiqui from Maharashtra has secured the first rank in the country in NEET MDS. Dr. Namira Siddiqui said, ‘I scored 802 marks and achieved All India Rank 1 in NEET MDS.
"छाछ का क्या बोले छलनी का बोले जिसमें 72 छेद"
तुम वह हो जो बिना होमवर्क के न्यूज़ देते हो, फर्जी न्यूज़ देते हो, नोट में चिप लगा देते हो
टीचर्स ने मोर्चा खोल दिया है अंजना के खिलाफ
@AdarshSri1994@AshrafFem ये सवाल तो हिंदुओं से भी है कि हिंदू इतनी आसानी से बेवकूफ बनते ही क्यों हैं
80 लोगों को 20 लोगो से डराकर 150 करोड़ वाली देश को 24 करोड़ वाली टुच्ची सी देश से डराकर वोट लेते हैं और बेवकूफ बनते हैं और इसी बेवकूफी के बीच वो देश बेच देते हैं
Muslim Man Anish (36) Dies in Police Custody at Jahangirpuri Police Station, North West Delhi.
His relatives allege that he was taken to the police station and assaulted for several hours.
*सांप्रदायिक दल से गठबंधन पर मौलाना बदरुद्दीन अजमल क़ासमी को जमीयत उलेमा-ए-हिंद का नोटिस, 24 घंटे में स्पष्टीकरण तलब*
नई दिल्ली, 4 अप्रैल 2026: जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने अपनी घोषित सिद्धांतगत और संगठनात्मक नीति के तहत मौलाना बदरुद्दीन अजमल क़ासमी से हालिया चुनावी अभियान के दौरान एक सांप्रदायिक राजनीतिक दल के साथ कथित गठबंधन और खुले समर्थन के संबंध में 24 घंटे के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना मोहम्मद हकीमुद्दीन क़ासमी द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि जमीयत ने आज़ादी के तुरंत बाद कार्यकारिणी की ऐतिहासिक बैठक, दिनांक 17 और 18 अगस्त 1951, जिसकी अध्यक्षता मौलाना सैयद हुसैन अहमद मदनी ने की थी, चुनाव और मतदान के संबंध में एक स्पष्ट, सिद्धांतगत नीति को अनुमोदित किया था। इस नीति की पुष्टि बाद की अनेक बैठकों में भी बार-बार की जाती रही है।
नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि जमीयत की नीति के अनुसार उसके सदस्यों और पदाधिकारियों के लिए यह अनिवार्य है कि वे किसी भी सांप्रदायिक दल से किसी प्रकार का संबंध, राजनीतिक सहभागिता या समर्थन न रखें। इसके विपरीत, उन्हें केवल ऐसी राजनीतिक शक्तियों और दलों के साथ रहने का निर्देश दिया गया था जो राष्ट्रीय एकता, संवैधानिक मूल्यों, लोकतांत्रिक सिद्धांतों और देश की बहुलतावादी सामाजिक संरचना की रक्षा के पक्षधर हों।
जमीयत के अनुसार हालिया चुनावी अभियान में मौलाना बदरुद्दीन अजमल क़ासमी द्वारा एक सांप्रदायिक दल के साथ राजनीतिक गठबंधन किए जाने तथा उसकी खुली हिमायत किए जाने की बात सामने आई है, जो जमीयत उलेमा-ए-हिंद की घोषित नीति और उसके मूल सिद्धांतों से स्पष्ट विचलन माना जा रहा है।
इसी संदर्भ में उनसे कहा गया है कि वे 24 घंटे के भीतर अपना लिखित उत्तर केंद्रीय कार्यालय को भेजें और यह स्पष्ट करें कि उक्त कदम किन उद्देश्यों, परिस्थितियों और आधारों पर उठाया गया। नोटिस में यह भी कहा गया है कि यदि प्राप्त उत्तर संतोषजनक नहीं पाया गया, तो संगठनात्मक नियमावली के अनुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने अपने बयान में पुनः दोहराया है कि वह अपने अकाबिर द्वारा निर्धारित सिद्धांतगत रुख, संवैधानिक मूल्यों की रक्षा तथा सांप्रदायिक राजनीति के हर स्वरूप के विरोध के अपने रुख पर पूरी दृढ़ता के साथ कायम है।
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प्रिय संपादकगण
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भवदीय
नियाज़ अहमद फ़ारूक़ी
सचिव, जमीअत उलमा-ए-हिंद