1. जैसाकि सर्वविदित है कि श्री आकाश आनन्द, अपने रिश्तेदार श्री अशोक सिद्धार्थ द्वारा राजनीति से संन्यास लिये जाने के उपरान्त, अब बी.एस.पी. के राष्ट्रीय संयोजक के रूप में काफी सूझबूझ व परिपक्वता (मैच्युरिटी) प्रदर्शित करते हुये बी.एस.पी. पार्टी व मूवमेन्ट के कार्यों को, परिवार व रिश्ते-नाते आदि के ऊपर प्राथमिकता देते हुये, अपनी ज़िम्मेदारी को निभाने में काफी मेहनत व तेज़ी से लग गये हैं, जबकि ’बहुजन समाज’ के लोगों को उनसे पूरी अपेक्षा भी है।
2. इसी क्रम में श्री आकाश आनन्द आगामी दिनांक 28 अक्तूबर 2026 को ज़िला बुलन्दशहर में, 02 नवम्बर को जिला सहारनपुर में, 20 नवम्बर को ज़िला अयोध्या में, 22 नवम्बर को ज़िला आगरा में तथा दिनांक 29 नवम्बर 2026 को ज़िला कानपुर नगर में बी.एस.पी. द्वारा आयोजित जनसभा को सम्बोधित करेंगे।
3. साथ ही, आगामी 26 नवम्बर 2026 को ’संविधान दिवस’ के मौक़े पर पंजाब स्टेट में बी.एस.पी. द्वारा आयोजित ’विचार संगोष्ठी समारोह’ में वे मुख्य अतिथि के रूप में अपने विचार व्यक्त करेंगे। इसके बाद वे देश में दलितों, अति-पिछड़ों व अन्य उपेक्षित बहुजनों के मसीहा परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के महापरिनिर्वाण (पुण्यतिथि) दिवस पर आगामी 06 दिसम्बर 2026 को उत्तराखण्ड राज्य के ज़िला हरिद्वार में आयोजित विचार संगोष्ठी समारोह/जनसभा को भी सम्बोधित करेंगे।
4. इस प्रकार से श्री आकाश आनन्द द्वारा बी.एस.पी. पार्टी व मूवमेन्ट के कार्यों में पूरे जी-जान से अब लग जाने से एक बार पुनः यह साबित होता है कि पिछले दिनों जो भी अप्रिय घटनाक्रम हुये है तो उसके लिये श्री आकाश आनन्द कम व उनके रिश्तेदार श्री अशोक सिद्धार्थ ज़्यादा ज़िम्मेवार हैं, तभी इनको पार्टी से बाहर करके राजनीति से भी सन्यास लेने की सलाह दी गयी।
5. किन्तु स्वार्थी तत्वों द्वारा लोगों को क़िस्म-क़िस्म के हथकण्डे अपनाकर वरग़लाने का काम अभी भी लगातार जारी है, जिससे पार्टी के सभी लोग ज़रूर सावधान व सतर्क रहें और श्री आकाश आनन्द को साैंपे गये सभी पार्टी कार्यक्रमों को पूरे तन, मन, धन से लग कर उन्हें जरुर सफल बनायें।
6. साथ ही, इन अफवाहों पर बिल्कुल भी ध्यान ना दें कि श्री आकाश आनन्द की तरह श्री अशोक सिद्धार्थ को भी पूर्व की तरह पार्टी में पुनः वापस ले लिया जायेगा। ऐसी अफवाहों में रत्ती भर भी सच्चाई नहीं है अर्थात् अब श्री अशोक सिद्धार्थ को किसी भी स्थिति में व किसी भी क़ीमत पर फिर से पार्टी में पुनः वापिस नहीं लिया जायेगा।
7. यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि श्री आनन्द कुमार के छोटे बेटे श्री ईशान आनन्द, जो वकालत की अपनी पढ़ाई लंदन से पूरी कर चुके हैं, वे भी मेरे (पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष के) दिशा-निर्देशन में, एक सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में बी.एस.पी. के दिल्ली स्थित केन्द्रीय कार्यालय में ख़ासकर पार्टी के चुनाव व अन्य पेपरवर्क आदि से सम्बंधित कार्यों में भी सहयोग करेंगे।
यूपी-नई दिल्ली सीमा पर ग्रेटर नोएडा में संभवतः ज़हरीला खाना खाने से एक ही परिवार के पाँच लोगों की मौत हो जाने की ख़बर अति-दुखद व चिन्तनीय भी है। सरकार इस घटना की सही से जाँच कराके इसके दोषियों के ख़िलाफ ज़रूर सख़्त कार्रवाई करे।
1. उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड एवं पंजाब राज्य में होने वाले आगामी विधानसभा आमचुनाव में पार्टी के अच्छे व दमदार उम्मीदवारों के चयन सहित सघन ज़मीनी तैयारियों आदि के बीच यहाँ जातिवादी मीडिया/सोशल मीडिया द्वारा भी, अभी से ही षडयंत्र के तहत धनबल के दुरुपयोग के सहारे फेक व ध्यान भटकाने वाला, सर्वे/सर्वेक्षण आदि का मिथ्या प्रचार शुरू कर दिया गया है, जिसमें स्वाभाविक तौर पर बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) को निशाना बनाया जाना यह अति-दुखद एवं दुर्भाग्यपूर्ण है।
2. वैसे यहाँ यह कड़वी वास्तविकता भी उल्लेखनीय है कि जातिवादी मीडिया द्वारा चुनाव के दौरान बी.एस.पी. के विरुद्ध हमेशा ही मिथ्या व अनर्गल प्रचार किया जाता है तथा फेक व प्रायोजित सर्वे/सर्वेक्षण आदि में हमेशा कम व कमज़ोर करके आँका जाता रहा है। यहाँ तक कि सन 2007 में भी इनका बर्ताव ऐसा ही जातिवादी व द्वेषपूर्ण रहा था जबकि बी.एस.पी. ने तमाम लोगों के क़यासों व उम्मीदों पर पानी फेरते हुये पूर्ण बहुमत की अपनी सरकार बनायी थी और फिर यूपी में सबके साथ न्याय करने हेतु ’क़ानून द्वारा क़ानून का राज’ कायम करने सहित ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ के नये संवैधानिक कल्याणकारी युग की शुरूआत हुई थी।
3. इसीलिय यूपी में पहले सपा और अब भाजपा राज से त्रस्त सर्वसमाज से तथा ख़ासकर ’बहुजन समाज’ के लोगों से यही अपील है कि वे विरोधी पार्टियों तथा जातिवादी तत्वों के साम, दाम, दण्ड, भेद आदि हथकण्डों सहित सभी प्रकार के मिथ्या व दुष्प्रचार आदि से ज़रूर सावधान रहें और अपनी मा. बहनजी के नेतृत्व में पाँचवीं बार बी.एस.पी. की सरकार बनाने में पूरे जी-जान से लगातार लगे रहें, जिसमें ही सबका हित निहित व सुरक्षित भी है।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अभी हाल ही में अगले छह महीने के अन्दर एक लाख लोगों को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की गयी है, किन्तु यह बेहतर होता कि जिन भी सरकारी विभागों में अस्थायी तौर पर लोग वर्षों से कार्यरत हैं उन्हें भी स्थायी नौकरी की व्यवस्था में शामिल किया जाये।
वैसे भी बी.एस.पी. ख़ासकर सरकारी तंत्र में आउटसोर्सिंग एवं संविदा आदि की शोषणकारी व्यवस्था के विरुद्ध है और इसीलिये पार्टी की माँग है कि सरकारी नौकरी बहाली के क्रम में एनआरएचएम के अन्तर्गत विगत अनेक वर्षों से निरन्तर सेवा दे रहे है समस्त एनआरएचएम संविदाकार्मिकों को भी स्वास्थ्य विभाग में नियमित किया जाये तो यह उचित होगा, जो वे लोग अपने स्थायीकरण आदि की माँगों के समर्थन में पिछले कई दिनों से लखनऊ के मान्यवर श्री कांशीराम जी ईको गार्डेन के पास धरना पर हैं।
देश में जाति के आधार पर सदियों से तोड़े व पछाड़े गये ख़ासकर ’बहुजन समाज’ के करोड़ों दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों एवं अन्य कमज़ोर तबक़ों आदि को उनके वोट की ताक़त के माध्यम से सत्ता की मास्टर चाबी देकर उन्हें शोषित से शासक वर्ग बनाने हेतु इनके मसीहा परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के आत्म-सम्मान व स्वाभिमान के रुके एवं बिखरे हुये कारवाँ को आगे मंज़िल तक पहुँचाने के लिये बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) के जन्मदाता एवं संस्थापक मान्यवर श्री कांशीराम जी को आज उनके महापरिनिर्वाण दिवस पर बी.एस.पी. परिवार की ओर से उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि व अपार श्रद्धा-सुमन अर्पित।
मान्यवर श्री कांशीराम जी के मिशनरी संकल्प का ही यह सुखद परिणाम था कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल व महत्वपूर्ण राज्य में मेरे नेतृत्व में बी.एस.पी. की चार बार सरकार बनी और इसके माध्यम से ’सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक मुक्ति’ के ऐतिहासिक कार्य करके ’बहुजन समाज’ में समय-समय पर जन्मे महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों में भी ख़ासकर महात्मा ज्योतिबा फुले, श्री नारायणा गुरु, राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज व बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर आदि के समता व समानता के हक़ के लिये उनके अतुलनीय संघर्ष व बहुमूल्य योगदान को ज़मीनी स्तर पर उतारकर संविधान के पवित्र मंशा की पूर्ति की गयी।
यही नहीं बल्कि इन महापुरुषों की प्रेरणा से, यूपी में सर्वसमाज के हित में अपराध नियंत्रण व क़ानून व्यवस्था के मामलों में क़ानून द्वारा क़ानून का राज क़ायम करके तथा जनहित, जनकल्याण एवं विकास के मामलों में भी, बेहतरीन सरकार देकर मान्यवर श्री कांशीराम जी को सच्ची श्रद्धांजलि व श्रद्धा-सुमन अर्पित किया गया।
1. जैसाकि यह विदित है कि श्री आकाश आनन्द को कल बी.एस.पी. में वापिस लेकर व पार्टी का पुनः राष्ट्रीय संयोजक बनाकर इनको पार्टी के कार्यो में लगा दिया है।
2. लेकिन आज अधिकांशः मीडिया में इस बात को काफी बढ़ा-चढ़ाकर लिखा है कि श्री आकाश आनन्द को चार बार पार्टी से निकालकर अब पुनः पार्टी में वापिस ले लिया है और इनको फिर से पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक बना दिया है।
3. जबकि इस सम्बन्ध में इनको मैं यह भी अवगत कराना चाहती हूँ कि श्री आकाश आनन्द की शादी होने से पहले ही वे पार्टी में काफी सक्रिय भूमिका निभा रहे थे, जिसकी वजह से इनको पार्टी से कभी भी नहीं निकाला गया है।
4. लेकिन इनका रिश्ता श्री अशोक सिद्धार्थ के साथ होने के बाद से फिर इन्होंने अपने ख़ुद के स्वार्थ मे श्री आकाश आनन्द की इमेज को काफी कुछ ख़राब करने का प्रयास किया है।
* जिसके कारण फिर श्री आकाश आनन्द में सुधार लाने के ख़ास उद्देश्य से इनको पार्टी से कई बार निकालना भी पड़ा है और ग़लती का एहसास होने के बाद फिर इनको वापिस भी लेना पड़ा है।
5. लेकिन मुझे पूरा भरोसा है कि श्री अशोक सिद्धार्थ के संन्यास लेने के बाद से अब ऐसी कोई भी स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिये कि पार्टी को फिर से इनको अलग करना पडे़।
6. अर्थात् जिस प्रकार से इन्होंने शादी से पहले पार्टी को कभी भी कोई शिकायत का मौक़ा नहीं दिया है, जिसके कारण इनको कभी भी पार्टी से निकालना नहीं पड़ा है और अब श्री अशोक सिद्धार्थ के संन्यास लेने के बाद तो कोई सवाल ही पैदा नहीं होता है कि इनको अब आगे कभी भी पार्टी से निकालने की ज़रूरत पडे़गी और अब वे राजनीति में आगे ही बढ़ेंगे, ऐसी सभी को पूरी-पूरी उम्मीद भी है।
7. इसलिए मीडिया को यह सब सच्चाई को उजागर करते हुये तब इनके बारे में पार्टी से कई बार निकालने का उल्लेख करना चाहिये तो यह बेहतर होगा।
1. जैसाकि सर्वविदित है कि परमूपज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर व उनके परम अनुयायी मान्यवर श्री कांशीराम जी की देश भर में बहुजन-हित हेतु ज़बरदस्त त्याग-तपस्या, आजीवन कड़ा संघर्ष व उनके उच्च आदर्श हमेशा ही प्रेरणा के स्त्रोत रहे हैं, जिस पर चलकर ही बी.एस.पी. ने देश की राजनीति में अभूतपूर्व सफलतायें अर्जित की हैं और अब ख़ासकर आगामी यूपी विधानसभा आमचुनाव को लेकर सर्वसमाज के साथ उत्साहपूर्ण ज़बरदस्त तैयारी भी की जा रही है।
2. यहाँ यह भी कहना हैं कि मेरा निजी नहीं बल्कि पूरा ’बहुजन समाज’ ही मेरा विराट परिवार है और उनका हित व कल्याण मेरे लिये सर्वोपरि है और हमेशा ही रहेगा। इसी को मद्देनज़र रखते हुये व ख़ासकर पार्टी में अनुशासन बनाये रखने के लिये ही मेरे द्वारा पिछले कुछ दिनों में, अनेकों सख़्त फैसले भी लिये गये हैं और इसको लेकर मेरे अपने भाई-बहन व उनके परिवार के लोग कभी भी अपवाद नहीं रहे हैं, जो कि जग-ज़ाहिर है।
3. वैसे तो श्री आकाश आनन्द का व्यक्तित्व पार्टी में काफी हद तक ठीक ही रहा है, लेकिन इनको लेकर पिछले दिनों कुछ ऐसे कारण भी रहें हैं जिसकी वजह से पार्टी संगठन में कई बार कुछ ज़रूरी परिवर्तन भी करने पड़े हैं और फिर अन्ततः श्री आकाश आनन्द के ससुर श्री अशोक सिद्धार्थ को राजनीति से संन्यास लेने के लिए मजबूर भी होना पड़ा है।
* जिसके बाद से श्री आकाश आनन्द के व्यक्तित्व व कार्यशैली आदि में काफी कुछ बदलाव भी लोग देख रहे हैं, जिसका ख़ास प्रमाण पार्टी में वापिसी हेतु अभी हाल ही में सोशल मीडिया ’एक्स’ पर किया गया उनका एक पोस्ट भी है, जिसकी काफी चर्चा भी है।
4. इसको लेकर पार्टी के अधिकांशः लोगों का यही कहना है कि श्री आकाश आनन्द के अनुरोध को स्वीकार करते हुये उनकी पूर्व की दी गई ज़िम्मेवारियों के साथ इनको पार्टी में पुनः कार्य करने का मौक़ा दिया जाये, जिसके लिए इनके पिता के साथ-साथ इनके छोटे भाई श्री ईशान आनन्द ने भी अपनी सहमति जताई है। वास्तव में श्री ईशान आनन्द ने तो अपनी मिशनरी भावना प्रदर्शित करते हुये यह भी कहा है कि वे बिना किसी पद के ही पार्टी में मा. बहनजी के दिशा-निर्देशन में जो भी उनको कार्य सौंपे जायेंगे तो उसे वे अपनी पूरी ईमानदारी व निष्ठा से ज़रूर निभायेंगे।
5. ऐसे में अब पार्टी काफी सोच-विचार करने के बाद पार्टी व मूवमेन्ट के हित में श्री आकाश आनन्द को पुनः बी.एस.पी. का राष्ट्रीय संयोजक (नेशनल कन्वेनर) बनाकर इनको फिर से पार्टी में कार्य करने का मौक़ा दे रही है। उम्मीद है कि श्री अशोक सिद्धार्थ द्वारा राजनीति सेे संन्यास लेने के बाद से अब पार्टी में सब कुछ ठीक व सुचारू ढंग से चलेगा और पार्टी संगठन में भी बार-बार परिवर्तन नहीं करना पड़ेगा, हालाँकि यह काफी कुछ श्री आकाश आनन्द के ऊपर भी निर्भर करेगा।
6. इन्ही कुछ ज़रूरी बातों के साथ ही अब मैं पार्टी व मूवमेन्ट के हित में आज लिये गये इस फैसले के साथ ही श्री आकाश आनन्द के राजनैतिक उज्जवल भविष्य की कामना के साथ ही इनको (श्री आकाश आनन्द) व इनके छोटे भाई श्री ईशान आनन्द को तथा इनके पिता श्री आनन्द कुमार को भी अपना बहुत-बहुत प्यार व आशीर्वाद देती हूँ। इतना ही नहीं बल्कि पिछले दिनों हर परिस्थिति में मेरा साथ निभाने के लिए ख़ासकर ’बहुजन समाज’ के सभी लोगों का व अपने सभी शुभचिन्तकों आदि का भी मैं पूरे तहेदिल से व सम्मान के साथ उनका आभार भी प्रकट करती हूँ।
बी.एस.पी. द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति-दिनांक 04.10.2026
(1) बी.एस.पी. प्रमुख बहन कु. मायावती जी द्वारा उत्तराखण्ड स्टेट के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ अहम बैठक में ख़ासकर चुनाव आयोग के एसआईआर पुनरीक्षण के बाद वोटर लिस्ट की ताज़ा स्थिति तथा यूपी व पंजाब के साथ वहाँ होने वाले आगामी विधानसभा आमचुनाव हेतु अच्छे व दमदार उम्मीदवारों के चयन की प्रगति समेत अन्य चुनावी तैयारियों की भी गहन समीक्षा की गयी।
(2) विशेषकर ग़रीबों, युवाओं, महिलाओं व कमज़ोर तबकों के लोग वोट देने के संवैधानिक अधिकार से वंचित ना रह जायें, इसके लिये उनके नाम वोटरलिस्ट में शामिल करने का प्रयास पार्टी स्तर पर लगातार जारी रखने का निर्देश।
(3)उत्तराखण्ड सरकार की विभिन्न ग़रीब व जनविरोधी कार्यशैली की तीव्र निन्दा। राज्य सरकार जनहित व जनकल्याण पर कम ध्यान देकर बड़े-बड़े पूंजीपतियों व धन्नासेठों के हित के प्रति ज़्यादा समर्पित लगती है, जो अहम चुनावी मुद्दा।
लखनऊ, 4 अक्तूबर 2026, रविवार: बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) की राष्ट्रीय अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री व पूर्व सांसद बहन कु. मायावती जी ने बी.एस.पी. उत्तराखण्ड स्टेट के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ आज यहाँ अहम बैठक में ख़ासकर चुनाव आयोग के एसआईआर पुनरीक्षण के बाद वोटर लिस्ट की ताज़ा स्थिति तथा यूपी व पंजाब के साथ वहाँ होने वाले आगामी विधानसभा आमचुनाव हेतु अच्छे एवं दमदार पार्टी उम्मीदवारों के चयन की प्रगति समेत अन्य और भी चुनावी तैयारियों की गहन समीक्षा की गयी।
बी.एस.पी. सेन्ट्रल कैम्प कार्यालय, माल एवेन्यू में आयोजित इस बैठक में वोटरलिस्ट की एसआईआर उपरान्त पोलिंग बूथ स्तर तक की कमेटियों के पुनर्गठन को युद्ध स्तर पर पूरा किये जाने की स्थिति की समीक्षा की गयी तथा कमियों को समयबद्ध तरीक़े से पूरा करने के निर्देश दिये गये। उल्लेखनीय है कि एसआईआर उपरान्त लगभग 9 लाख वोटरों के नाम वोटरलिस्ट से हटा दिये गये हैं, किन्तु विशेषकर ग़रीब, युवा, महिलायें व कमज़ोर तबकों के लोग वोट देने के अपने संवैधानिक अधिकार से वंचित ना रह जायें इसके लिये उनके नाम वोटरलिस्ट में शामिल करने का प्रयास पार्टी स्तर पर ज़रूर जारी रहना चाहिये।
बैठक में उत्तराखण्ड सरकार की ख़ासकर ग़रीब व जनविरोधी कार्यशैली की तीव्र निन्दा करते हुये कहा गया कि भाजपा सरकार जनहित व जनकल्याण पर कम ध्यान देकर बड़े- बड़े पूंजीपतियों व धन्नासेठों के हित के प्रति ज़्यादा समर्पित लगती है, जिनके धनबल पर भी वे लोग चुनाव को अपने पक्ष में प्रभावित करते रहते है, जो अहम चुनावी मुद्दा भी है।
यूपी की तरह ही सघन चुनावी तैयारियों के साथ-साथ बहुजन समाज पार्टी के जन्मदाता एवं संस्थापक मान्यवर श्री कांशीराम जी की आगामी 9 अक्टूबर को पुण्यतिथि को, पूर्व के निर्देशानुसार, पूरी मिशनरी भावना से आयोजित करने पर बल देते हुये मा. बहनजी ने कहा कि यूपी-दिल्ली सीमा पर बी.एस.पी. सरकार द्वारा स्थापित भव्य ’बहुजन प्रेरणा केन्द्र’ में रख-रखाव का सरकारी कार्य जारी रहने के दौरान लोगों की भीड़ एकत्र होने पर किसी दुर्घटना आदि की संभावना से बचने के लिये इस वर्ष वहाँ कार्यक्रम आयोजित नहीं किये जा रहे हैं। इसीलिये पूरे यूपी के सभी मण्डलों के लोग राजधानी लखनऊ आकर यहाँ विशाल गुम्बद आकार के भव्य ’मान्यवर श्री कांशीराम जी स्मारक स्थल’ पर अपने श्रद्धा-सुमन अर्पित करेंगे, जबकि अन्य राज्यों के लोग ज़ोन-स्तर पर खुली संगोष्ठी आयोजित कर मान्यवर श्री कांशीराम जी, को अपने श्रद्धा-सुमन व भावभाीनी श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
जारीकर्ता:
बी.एस.पी. यूपी स्टेट कार्यालय
12 माल एवेन्यू, लखनऊ
1.जैसाकि यह सर्वविदित है कि बी.एस.पी. किसी भी छोटे-बड़े चुनाव में विरोधी पार्टियों में भी ख़ासकर समाजवादी पार्टी (सपा) की तरह अपने परिवार, सगे-सम्बंधी, भाई-भतीजों, क़रीबी रिश्ते-नातेदारों के साथ ही विशेषकर बड़े-बड़े पूँजीपतियों व धन्नासेठों आदि को टिकट नहीं देती है, यानी चुनावों में उनके धनबल का सहारा नहीं लेती है, बल्कि पार्टी में कार्यरत सर्वसमाज में से केवल ग़रीब, मध्यम वर्ग व कमज़ोर तबक़ों के कर्मठ अम्बेडकरवादी लोगों को ही अपनी पार्टी का उम्मीदवार बनाती है, अर्थात बी.एस.पी. की राजनीति परिवारवाद व धनबल से मुक्त व पाक-साफ है, जबकि वहीं दूसरी तरफ सपा ठीक इसके विपरीत कार्य करती है, जो अपने आपको समाजवादी व कथित ’पीडीए’ (PDA) की पार्टी होने का राजनीतिक ढोंग व छलावा करती हुई ज़्यादा नज़र आती है।
2.इसका एक और ख़ास व ताज़ा उदाहरण यह है कि सपा ने यूपी से राज्यसभा के लिये द्विवार्षिक चुनाव में श्री रामगोपाल यादव को फिर से पर्चा भरवाया है जो सपा मुखिया के नज़दीकी रिश्तेदार हैं, जबकि सपा ने अपनी पार्टी का दूसरा उम्मीदवार श्री धनराज परिमल नाथवानी को बनाया है, जो चर्चित उद्योग घराने से सम्बद्ध हैं। लोगों की राय में सपा का तीसरा उम्मीदवार पहले की तरह संभवतः ’फेस सेविंग’ व चुनाव हारने के लिये होगा।
3.तो इस प्रकार का है सपा, उसका ’पीडीए’ (PDA) व उस पार्टी का समाजवाद अर्थात् सपा को चुनाव में वोट तो ’पीडीए’ का चाहिये, लेकिन सांसद व विधायक आदि ज़्यादातर अपने परिवार वालों को व बड़े-बड़े पूँजीपतियों को बनाती है। अतः जनता इनके ’पीडीए’ के बहकावे में ना आये तो यह सही।
4.वास्तव में यह कोई नई बात नहीं है बल्कि सपा का इस प्रकार का दोहरा चाल, चरित्र व चेहरा हमेशा से ही रहा है और इसीलिये ख़ासकर अपरकास्ट समाज के ग़रीबों तथा ’बहुजन समाज’ अर्थात दलितों, आदिवासियों, अति-पिछड़ों, मुस्लिम एवं अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक समाज के समस्त लोगों को अब ख़ासकर यूपी विधानसभा आमचुनाव से पहले ही ज़रूर पूरी तरह से सचेत/सतर्क हो जाना चाहिये कि उन सबका हित अम्बेडकरवादी बी.एस.पी. में ही निहित व सुरक्षित है, बाकी सब छलावा ही छलावा है।
1.जैसाकि यह विदित है कि पिछले कुछ दिनों से देश के विभिन्न भागो में भारी वर्षा व आँधी, तूफान आदि के कारण जनता काफी मुश्किल दौर से गुजर रही है। ऐसे कुदरती विकट हालात में सम्बन्धित सभी राज्य सरकारों को प्रभावित लोगों की हर स्तर पर पूरी-पूरी मदद करनी चाहिये। बी.एस.पी. की यह मांग है।
2.इसके साथ ही महाराष्ट्र राज्य के काफी इलाको में सूखे की मार झेल रहें लोगों व खासकर किसानों के प्रति राज्य सरकार को केवल औपचारिकता नहीं बल्कि पीडि़तों की जमीनी स्तर पर सही से मदद करके किसानों को फौरी राहत देने का प्रयास करना चाहिये।
3.इसी परिपेक्ष्य में यहाँ मैं यह भी कहना चाहूँगी कि देश में बी.एस.पी. संगठन को तैयार करने व सर्वसमाज में पार्टी के जनाधार को बढ़ाने के लिए अब पार्टी संगठन को तीन सेक्टरों में बांट दिया गया है।
*जिसके तहत सेक्टर नं.-1 में 10 राज्य आते है। जिनको बी.एस.पी. राज्यसभा सांसद श्री रामजी गौतम व श्री सुरेश राव ये दोनों केन्द्रीय सेक्टर प्रभारी मिलकर यहाँ पार्टी के सभी कार्य देख रहें हैं।
*सेक्टर नं.-2 में 9 राज्य आते है। जिनको पार्टी के पूर्व राज्यसभा सांसद श्री राजाराम व पूर्व विधायक श्री अतरसिंह राव ये दोनों केन्द्रीय सेक्टर प्रभारी मिलकर यहाँ पार्टी के सभी कार्य देख रहें हैं।
*सेक्टर नं.-3 में उत्तर प्रदेश व उत्तराखण्ड प्रदेश आते है जिनको लखनऊ पार्टी केन्द्रीय कैम्प कार्यालय 9 माॅल एवेन्यू द्वारा सीधा देखा जा रहा है।
4.ऐसे में लोगों के कुदरती मार पड़ने से खासकर सेक्टर नं.-1 व सेक्टर नं.-2 के इन चारों केन्द्रीय सेक्टर प्रभारियों से यह अपील की जाती है कि वे अपने-अपने सेक्टर के अन्तर्गत आने वाले सभी राज्यों में,
*जहाँ-जहाँ भारी वर्षा व तूफान आदि के कारण जबरदस्त जानी, माली, तबाई मची हुई है, वहाँ अपनी पार्टी के लोग भी अपनी सामर्थ के हिसाब से उनकी मदद जरुर करें।
*लेकिन इसके लिए इनको कोई भी अलग से धन इकट्ठा नहीं करना है। ताकि इसकी आड़ में कोई भी नाजायज फायदा ना उठा सके।
5.साथ ही जरुरत पड़ने पर ज्यादा प्रभावित प्रदेशों में, मैं बी.एस.पी. के राष्ट्रीय प्रभारी श्री ईशान आनन्द को भी भेज सकती हूँ। और इस मामले में खासकर सेक्टर नं.-3 के दोनों राज्यों में मेरी खुद भी पैनी नजर है। जहाँ मैं खुद भी ऐसे क्षेत्रों का दौरा कर सकती हूँ।
6.अन्त में मेरा केन्द्र सरकार से भी अनुरोध है कि वे देश के ज्यादा प्रभावित हो रहे राज्यों में, वहाँ कि सरकारों की समय से पूरी-पूरी मदद जरुर करें, जो यह उचित होगा।
1. यूपी के आगामी विधानसभा आमचुनाव की तैयारी हेतु समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख का प्रचारित ’पीडीए रथ’ सपा के अपने लाल रंग का कम तथा आरएसएस/भाजपा के ’भगवा’ रंग का (भगवाकरण) ज़्यादा है, तो ऐसे में लोगों में चर्चा यही है कि यह सब उनका वोटों के स्वार्थ की ख़ातिर गिरगिट की तरह लगातार रंग बदलना है या फिर मुसलमानों पर से सपा प्रमुख का वोट पाने का भरोसा उठ जाना है?
2. वैसे भी यूपी के ख़ासकर मुस्लिम समाज को इस कड़वी हकीकत का पूरी तरह से अहसास है कि पिछले चुनावों में सपा को उनके द्वारा अधिकांश एकतरफा वोट देने के बावजूद भी यह पार्टी (सपा) यूपी व केन्द्र की सत्ता में भाजपा को सरकार बनाने से नहीं रोक पाती है तो इस पार्टी को बार-बार वोट देकर अपना वोट ख़राब क्यों किया जाये और इस मामले में अब वे अपरकास्ट में से ख़ासकर ब्राह्मण समाज की तरह ही अपना रवैया काफी तेज़ी से बी.एस.पी. के पक्ष में बदल रहे हैं।
3. क्योंकि बी.एस.पी. यूपी में खासकर अपराध नियंत्रण व शान्ति-व्यवस्था के मामलों में क़ानून द्वारा क़ानून के राज के साथ ही व्यापक जनहित, जनकल्याण एवं विकास के मामलों में भी बेहतरीन आयरनलेडी राज यहाँ कई बार स्थापित करके दिखा चुकी है और जिसकी सर्वसमाज के हित व कल्याण में प्रदेश को सख़्त ज़रूरत भी है।
4. इसके साथ ही, सपा को यह भी जनता को ज़रूर बता देना चाहिये कि अब इनके ’पीडीए’ की असली वास्तविकता क्या है? क्योंकि चुनावी स्वार्थ में अब तक इन्होंने कभी ’पीडी’ को ’पिछड़ा, दलित’ बताया तो कभी ’पीडी’ को ’पण्डित’ बताया है और कभी अपने आपको ’अम्बेडकरवादी’ दर्शाने के चक्कर में बी.एस.पी. का ’नीला’ रंग वाला वस्त्र धारण कर तस्वीरें खिंचवाई है, किन्तु इसको लोगोें ने फौरन ही फेक अम्बेडकरवादी कहकर रिजेक्ट भी कर दिया।
5. जबकि इसके विपरीत, बी.एस.पी. सर्वसमाज हेतु ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की नीति व सिद्धान्त वाली अम्बेडकरवादी पार्टी है तथा सभी को रोटी-रोज़गार-युक्त आत्म-सम्मान व स्वाभिमान आदि का जीवन जीने की पक्षधर है। इसीलिये सर्वसमाज में बी.एस.पी. का अपना सम्मान है।
1. आज मेरा पुनः पार्टी के लोगों से यही कहना है कि मेरे ख़ुद के अनुभव को मद्देनज़र रखते हुये यदि इनको राजनीति में कामयाब होना है और समाज के लिए कुछ करना है तो उन्हें मेरी तरह अपने भाई-बहिनों व नज़दीकी रिश्ते-नातों आदि के मोह से ऊपर उठकर अपनी पूरी ईमानदारी व निष्ठा से कार्य करना है,
* इसीलिए बी.एस.पी. के जन्मदाता एवं संस्थापक मान्यवर श्री कांशीराम जी ने राजनीति में आने के बाद, फिर अपने सभी नज़दीकी रिश्ते-नातों आदि को राजनीतिक लाभ देने से हमेशा दूर रखा है। उन्हें केवल निःस्वार्थ भावना से पार्टी संगठन में कार्य करने की ही इजाज़त दी है। इतना ही नहीं बल्कि इन्होंने अपनी पूरी ज़िन्दगी, अपना ख़ुद का परिवार ना बनाकर, ’बहुजन समाज’ के हित व कल्याण के लिए ही समर्पित की है।
2. जिनसे प्रेरित होकर फिर मैंने भी उन्हीं के ही पदचिन्हों पर चलने का फैसला लिया और अपनी पूरी ज़िन्दगी ’बहुजन समाज’ के लिए समर्पित कर दी है।
* लेकिन मैं एक लड़की होने की वजह से फिर मजबूरी में मुझे अपने किसी ना किसी भाई-बहिन आदि को हमेशा अपने साथ रखना पड़ा है, जिसके तहत् ही मेरा छोटा भाई श्री आनन्द कुमार यह पिछले काफी वर्षों से मेरी सेवा में कार्यरत है।
3. और इनके विशेष आग्रह करने पर फिर इनके परिवार में से मुझे इनके बड़े बेटे श्री आकाश आनन्द को राजनीति में आगे करना पड़ा है।
* जिनकी शादी होने के बाद से अब श्री आकाश आनन्द का क़दम-क़दम पर ऐसा रवैया व गतिविधियाँ आदि रही हैं कि जिसकी वजह से अभी कुछ दिन पहले फिर से इनको पार्टी से अलग भी करना पड़ा है।
* अर्थात् अब वह अपने ससुर श्री अशोक सिद्धार्थ के जंजाल में पूरी तरह से फंस चुके हैं, जिसे अब पार्टी में वापिस लेना यह पार्टी के लिए बहुत बड़ा विश्वासघात ही होगा, जो मैं यह पार्टी विरोधी ग़लत कार्य कदापि नहीं कर सकती हूँ।
4. ऐसे में अब मैं श्री आनन्द कुमार के परिवार में से किसको पार्टी में आगे करूँ या ना करूँ, यह मेरे लिए पिछले कुछ समय से काफी दुविधा सी बनी हुई है, जिस पर विराम देते हुए अब मैंने हर पहलू पर काफी गम्भीरता से सोच-विचार करने के बाद यह फैसला लिया है कि इनके परिवार में से ऐसे किसी सदस्य को अब पार्टी में आगे किया जाये, जो आकाश के नक्शेकदम पर बिल्कुल भी ना चले।
5. और जहाँ तक आगे चलकर, इनकी बेटी की मदद लेने का सवाल है तो इनकी शादी होने के बाद, फिर इनका मामला भी यदि श्री आकाश आनन्द की तरह ही निकल गया तो यह भी पार्टी हित में सही नहीं होगा।
* ऐसी सम्भावना को भी ध्यान में रखकर अब पार्टी हित में यही उचित होगा कि श्री आकाश आनन्द व इनकी बहिन को भी अब पार्टी की कोई भी ज़िम्मेवारी देने से इन दोनों को एकदम दूर रखा जाये अर्थात् अब इनके इस फैसले में कोई भी फेरबदल नहीं किया जायेगा।
6. और अब इन दोनों के स्थान पर श्री आनन्द कुमार के परिवार में से केवल श्री ईशान आनन्द को ही, पार्टी में सम्मानजनक ज़िम्मेवारी देकर इनको आगे किया जायेगा, जिसका श्री आकाश आनन्द व इनकी बहिन की तरह कभी भी कोई चक्कर नहीं रहेगा। अभी तक ऐसा ही लग रहा है। आगे तो कुछ भी नहीं कहा जा सकता है
7. फिर भी यदि इन्होंने पार्टी विरोधी ऐसा कोई भी गम्भीर कृत्य किया तो फिर इनको भी पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जायेगा, लेकिन तब ऐसी स्थिति में श्री आनन्द कुमार के परिवार में से अन्य किसी भी सदस्य को पार्टी की कोई भी छोटी-बड़ी ज़िम्मेवारी नहीं दी जायेगी।
* बल्कि इसके स्थान पर, तब फिर पार्टी में ही कार्यरत दलित वर्ग के किसी भी एक मिशनरी व वफादार कार्यकर्ता को ही आगे कर दिया जायेगा। इसलिए देश व जनहित के ज़रूरी मुद्दों के साथ-साथ इस ख़ास मुद्दे को भी लेकर अब दिनांक 23 सितम्बर की बी.एस.पी. की अत्यन्त ज़रूरी ऑल-इण्डिया की बैठक बुलाई गई है ताकि फिर पार्टी के लोग अपनी पार्टी के कार्यों में पूरे जी-जान से जुट जायें।
8. अन्त में अब मैं यही कहना चाहती हूँ कि ख़ासकर परिवार को लेकर पार्टी व मूवमेन्ट के हित में मैंने यह फैसला मान्यवर श्री कांशीराम जी से प्रेरित होकर तथा परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर जी के भी लिखे गये एक पत्र से प्रभावित होकर लिया है, जिस पत्र का सारांश इस प्रकार से है:
9. बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने, दिनांक 23 फरवरी सन् 1956 को 26 अलीपुर रोड, सिविल लाइन्स, नई दिल्ली से बम्बई में अपने पुत्र श्री यशवन्त बी. अम्बेडकर को पत्र में लिखा है कि,
* मुझे तम्हें सूचित करना है कि श्री उपशम के कई पत्राचार मिले हैं कि तुम उन्हें बौद्ध भूषण प्रिन्टिंग प्रेस के एकाउण्टेन्ट व कैशियर के रूप में उनकी ड्यूटी नहीं करने दे रहे हो।
* तुम्हें ऐसा लगता है कि ऐसा करके तुम प्रेस को अपने कब्जे में ले लोगे। मैं तुम्हें आगाह कर रहा हूँ कि प्रेस पब्लिक प्रापर्टी है, ना तुम्हारा है और ना मेरा, और एक पब्लिक अकाउण्ट में किसी भी प्रकार की अनियमितता की अनुमति देना संभव नहीं है।
* तुम्हारा आचरण उचित नहीं रहा है...अगर तुमने मेरी अन्तिम व फाइनल निर्देश की परवाह नहीं कि तो फिर मैं तुम्हें प्रेस से निकाल-बाहर करूंगा और इस चेतावनी के नहीं मानने पर फिर मैं आपके विरुद्ध अभियोजन (मुक़दमा) (prosecute) भी करूंगा।
10. संक्षेप में अब मैं अपने ख़ुद के बारे में भी यही कहना चाहती हूँ कि समस्त ’बहुजन समाज’ ही मेरा असली परिवार है तथा सत्ता की मास्टर चाबी के ज़रिये ही उन्हें ’शोषित से शासक वर्ग’ बनाकर उनका हित व कल्याण सुनिश्ति करना ही मेरा मिशनरी लक्ष्य व मेरी प्रतिज्ञा भी है, जिसके लिए मैं अपने भाई-बहिनों आदि के ख़िलाफ भी किसी भी हद तक जा सकती हूँ, जैसाकि बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने उदाहरण पेश किया, यही मेरा भी संकल्प है।
1. बहुचर्चित सामाजिक न्याय की ज़रूरत व माँग भी यही है कि यूपी सरकार माननीय न्यायालय में यदि इस बात की पुरज़ोर पैरवी करती कि एससी समाज के हित व कल्याण हेतु ’स्पेशल कम्पोनेन्ट प्लान’ के धन से ज़िला सहारनपुर, अम्बेडकरनगर, क़न्नौज व जालौन में बनाये गये मेडिकल कालेजों में एससी वर्ग हेतु अतिरिक्त आरक्षण की व्यवस्था 50 प्रतिशत के सामान्य आरक्षण से अलग है और इस व्यवस्था से स्पेशल कम्पोनेन्ट प्लान की भरपूर उपयोगिता साबित होती है, तो शायद माननीय कोर्ट इस पर ज़रूर सकारात्मक विचार करता और इस पर रोक नहीं लगाता।
2. किन्तु अब जबकि मा. हाईकोर्ट ने इस पर पाबन्दी लगा दी है और मेडिकल दाख़िला भी अब यहाँ इससे प्रभावित है, तो ऐसे में यूपी सरकार तुरन्त मा. सुप्रीम कोर्ट में आपेक्षित राहत के लिये अपील करे तो यह उचित होगा।