@tiwari_080 खुशियां तो साझा मित्रों के साथ होती ही हैं... लेकिन दुःख व्यक्तिगत होते हैं उनको व्यक्त उन्हीं के सामने करना चाहिए जो थोड़ी भी भावना रखें...हर किसी से नहीं साझा कर सकते!
@_harihardas दुर्घटनाओं का जिक्र बार बार नहीं करना चाहिए...हो गया तो हो गया...एक जिन्दगी है...35 कट चुकी है 15-20 और बची(एक पल का भरोसा नहीं) होगी वो भी गुजर जाएगी...😬
‘जिमि प्रति लाभ लोभ अधिकाई...’ जब कोई वस्तु नहीं मिलती तब तक उसके मिलने की चाह भी बनी रहती और जैसे ही वो प्राप्त हो जाती उसकी उत्सुकता भी क्षीण हो जाती है... इच्छाओं की कोई सीमा नहीं वो पूरी न हों क्रोध, ईर्ष्या, जलन...पूरी हो जाएं तो अभिमान।
नित नई चाह और उसकी पूर्ति की आह!