जब से मातंग समाज ने अनु��ूचित जाति आरक्षण उप वर्गीकरण का मुद्दा उठाया है तब से आंबेडकरी नीलचट्टे हमारे जाति के महापुरुषों का अपमान सार्वजनिक करने लगे हैं!
यह चित्र किसी बुद्ध विहार में लगा था! ऐसा ही वंचित समाज ने आत्मसात करना चाहिए अंबेडकर की फोटो अपने घर में क्यों ही लगाए!!
पटाक्षेप पटाक्षेप पटाक्षेप
करणी सेना जिलाध्यक्ष सचिन राघव पर हमले का पटाक्षेप हो गया।
यही वो वीडियो है जिसकी वजह से सचिन राघव को भीम आर्मी के गुंडों द्वारा मारा गया है। वाल्मीकि समाज का अपमान का तो केवल बहाना था ताकि वाल्मीकि समाज बदनाम हो और काम इन गुंडों का हो जाए।
इस वीडियो में देख सकते है कि सचिन किस तरह दलित समाज की लड़की की शादी में बढ़ चढ़कर मदद कर रहा हैं। यही ब��त भीम आर्मी के गुंडों को खल गई।
उन्हें लगा अगर क्षत्रिय और दलित एकं हो गए उनकी राजनीति खत्म हो जाएगी। इसी डर की वजह से दलित क्षत्रिय एकता को तोड़ने के लिय सचिन पर हमला लिया है।
अरे मनोज सिंह काका ये भी तो बता दे कि PDA समाज के लोगों की हत्या PDA के लोग ही कर रहे हैं
सपा नेता पवन यादव की हत्या हिस्ट्रीशीटर “लल्ला यादव”ने ही की है
हाल ही मे जौनपुर में विशाल यादव की हत्या करने वाले भी यादव ही थे
2 दिन पहले PDA के उमेश चौरसिया (OBC)की हत्या PDA के विपिन यादव और विवेक यादव ने की थी
ज्यादातर अपराधी अखिलेश यादव के सजातीय है जो PDA के लोगो की हत्या कर रहे हैं
जानकारी पूरी दिया करो काका जी
हिंदुओं आपके सुन कर होश उड़ जाएंगे कि उत्तर प्रदेश के हमीरपुर की तहसील में सिर्फ सरकारी काम ही नहीं बल्कि सैकड़ों मजहबियों द्वारा तहसील में स्थित मजहबी स्थल में नमाज भी हो रही है |
तिल ऐसी ही स्थिति उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के जिलाधिकारी कार्यालय की थी जहां अवैध मजहबी स्थल बनवा कर कई साल नमाज पढ़ी गई जिसको अब एसडीएम कोर्ट के आदेशों के बाद तोड़ दिया गया |
अब मुद्दा यह है कि जिस तहसील में सिर्फ सरकारी काम होने चाहिए वहां वैध रूप से मजहबी स्थल किसने बनवाया | और मजहबी स्थल बनने के बाद बिना किसी रोक टोक नमाज कैसे होती रही |
सरकारी तहसील के परिसर में सिर्फ मज़हबी स्थल ही नहीं बल्कि वजू के लिए भी जगह बताई जा रही है जो सरकारी जमीन पर होना सरकारी अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है |
सुदर्शन न्यूज ने यह ���ामला अपने नेशनल मीडिया चैनल पर चलाया है | अब देखना यह है कि आखिर कब तक इस बात का निर्णय होगा कि कार्यवाही किस पर हो |
अलीगढ़ पुलिस और उत्तरप्रदेश पुलिस को खुली चुनौती.
उपद्रवी भीड़ ने पहले हिंदूवादी नेता सचिन राघव और सचिन के भाई के साथ बीच सड़क पर मारपीट की और मॉब लिंचिंग का प्रयास किया.
उसके बाद अब वही भीड़ और उस भीड़ के समर्थक थाना घेरने पहुँच गए.
अलीगढ़ पुलिस जिसे खोज रही थी, वो खुद थाने पर पुलिस के इकबाल को ललकारने पहुँच गए.
यही मामला उल्टा होता तो पुलिस अबतक सबको जेल में डाल देती और बिना अनुमति प्रदर्शन करने के आरोप और सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में सबपर एफआईआर दर कर देती.
लेकिन इस मामले में अलीगढ़ पुलिस की स्याही सूख गई है. मारपीट और मॉब लिंचिंग के प्रयास करने के बाद उसका समर्थन करते थाने पर पुलिस को चुनौती देने वालों के खिलाफ़ न एफआईआर हो रही और न सख़्त कार्रवाई!
उत्तरप्रदेश शासन द्वारा पोषित उपद्रवी एवं हिंसक भीड़ को उत्तरप्रदेश में 'जय भीम' के नारे लगाते हुए कुछ भी करने की छूट है?
क्या पुलिस और प्रशासन खुद इस मामले में उपद्रवी एवं हिंसात्मक भीड़ पर सख़्त कार्रवाई न करके अलीगढ़ को जातिगत टकराव की तरफ़ ले जा रहा है?
@cmofficeup@uppolice@dgpup
इस वीडियो को आधार बनाकर आज सचिन राघव की भीमवादियों द्वारा मॉबलीचिंग का प्रयास किया गया लेकिन पुलिस के मौके पर पहुंचने से दंगाई वहां से भाग निकले, इस विडियो में सुंदर राघव द्वारा बोला गया है:-
जब हम सरकार की नीतियों का विरोध करते है तो क्षत्रिय बन जाते है,
जब हम हिंदू त्यौहार पर पूजा पाठ करते है तो ब्राह्मण बन जाते है,
जब कोई गाय किसी नाले में गिरती है ओर हम उसे बाहर निकालते है तो हम भंगी बन जाते है,
इस वीडियो में सुंदर राघव ने खुद को भंगी बोला है ना कि किसी sc-st के व्यक्ति को, उसने तो ये संदेश दिया है कि अगर आप नालियो की साफ सफाई का कार्य करते हो तो खुद को छोटा महसूस म�� करो जब कोई गाय नाली में गिर जाती है तो हम भी नाली में उतरकर उसे बचाते है यहां सुंदर राघव की सोच छोटी नहीं है सोच उन लोगों की छोटी है जो साफ सफाई करने वालो को छोटा समझते है, इन भीम आर्मी वालो को सिर्फ वाल्मीकि समाज ओर राजपूत समाज में झगड़ा करवाना था।
क्या अब भीड़ ही सड़कों पर न्याय करेगी?
फिर न्यायालय और संविधान किस लिए है
यूपी के अलीगढ़ में क्षत्रिय करणी सेना के जिला अध्यक्ष सचिन राघव के साथ मारपीट की गई, जुलूस निकाला, कपड़े फाड़े 'जय भीम' के नारे लगवाए। और माफ़ी मंगवाई।
Hello @aligarhpolice@Uppolice अलीगढ़ में करणी सेना के जिला अध्यक्ष सचिन राघव के साथ भीड़ ने जो अमावनीय कृत्य किया है उससे सवर्ण समाज में काफी रोष व्याप्��� है। वहीं ये ब्यक्ति गुस्से की आग को और ज्यादा भड़काने का कार्य कर रहा हैं।
अतः आग्रह है की ऐसे लोगों पर कड़ी कार्यवाही करें।
गोरखपुर (जयंतीपुर) में कार्तिकेय मिश्रा 'शुभम' की नृशंस हत्या अत्यंत दुखद है। हमारी मांग है कि पुलिस आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार करे, पीड़ित परिवार को सुरक्षा मिले और दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई की जाए।
@gorakhpurpolice@myogiadityanath
भीड़ आर्मी के नीले ग्वार वाल्मीकियो का नाम लेकर वाल्मीकियो की छबि
खराब करने का काम कर रहे हैँ.
वाल्मीकि समाज कभी भी कोई गैर
संवेधानिक कार्य नही करता
जो भी मेरे वाल्मीकि समाज के भटके
हुए नौजवान हैँ भीड़ आर्मी और
सभी नफरती नीले ग्वारों से दूर रहे 🙏
मिशनरी साजिशों के ख़िलाफ़ उठाई आवाज तो स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती को बेरहमी से किया गया क़त्ल
आदिवासियों को कन्वर्जन से बचाने वाले हिंदू संत की बर्बर हत्या में शामिल थे माओवादी और ईसाई अपराधी
स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या का पूरा मामला समझा रहे हैं @Anurragmishra
This Chandrashekhar Ravan gang is worse than Jihadis. Most are converts, anti-Hindu at heart, and hide behind a Hindu Dalit identity to enjoy the privileges. Hope @myogiadityanath’s government identifies each of them and treats them well.
भीम आर्मी के गुंडों ने अलीगढ़ में सचिन राघव को पीटा, हत्या का प्रयास किया, अपमानित किया। और अब पुलिस स्टेशन भी घेर कर बैठ गए हैं। क्या सवर्णों की यही स्थिति बनी रहेगी? क्या सवर्ण होना और सड़क पर निकलना भी अपराध हो गया है?
हमारी बहन-बेटियों पर हर दिन टिप्पणी होती है, सरकार सोई रहती है। अब भीड़ बना कर घे���ा और पीटा जा रहा है। ध्यान रहे, जिस दिन सवर्ण ने इन्हीं गुंडों की तरह कानून से डरना बंद कर दिया, वह दिन बहुत विकट होगा समाज के लिए।
अब यादव समाज भी खुलकर SC/ST एक्ट के खिलाफ मैदान में आ चुका है!
पटना में हुई यादव समाज की बैठक में SC/ST एक्ट के खिलाफ आवाज़ उठाई गई और GC/OBC एक्ट की मांग की गई!
बदलाव की शुरुआत हो चुकी है!
क्षत्रिय करणी सेना के जिलाध्यक्ष सचिन राघव को भीम आर्मी वालों ने दौड़ा-दौड़ा कर पीटा
इनको अब किसी एक्ट की जरूरत नहीं है अब ये फुल सक्षम हैंगे
अब तो स्वर्णो को इनसे बचने के लिए कोई एक्ट लाना चाइए
कोर्ट से मेरी यही अपील है कि जज केवल कानून में लिखे प्रावधानों और मामले में प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर निर्णय दें, न कि अपनी विचारधारा या व्यक्तिगत धारणा के आधार पर।
मुझे केवल इस मामले में कहे गए शब्दों और प्रस्तुत कानूनी बिंदुओं के आधार पर परखा जाए; न उससे अधिक, न उससे कम।
“I should be tried based on the words that I have spoken, not on my behaviour outside the court, and not on my behaviour ten years ago.”
नौटंकी देखो इसी। इसका जन्म ही एड़ी उचका-उचका कर नाचने के लिए हुआ है। आइसक्रीम खा रहा है तीस रुपए की। मर्चेंट फीस लगनी है ₹2,000 से ऊपर पर।
सड़कों पर ये पहले भी नाचा करता था, अब प्रवक्तई छोड़ कर कंटेंट क्रिएशन की दुनिया का अभिनव अरोड़ा बनना च���ह रहा है।