देेश में जब पांच सौ मामले थे तब सरकार रेल के डिब्बो को आईसोेलेशन वॉर्ड बना रही थी आज बीस लाख से ज़्यादा हो चुके हैं अस्पतालों में बेड खाली नहीं है अब ये ट्रेन के डिब्बे कहां गायब हो गए
मुसलमाँ और हिन्दू की जान
कहाँ है मेरा हिन्दोस्तान
मैं उस को ढूँढ रहा हूँ
जहाँ थे 'तुलसी' और 'कबीर'
'जायसी' जैसे पीर फ़क़ीर
जहाँ थे 'मोमिन' 'ग़ालिब' 'मीर'
जहाँ थे 'रहमन' और 'रसखा़न'
मैं उस को ढूँढ रहा हूँ
~ अजमल सुल्तानपूरी
Zee News ने 'जमाती मानसिकता' बताते हुए एक ख़बर प्रकाशित की. बताया कि दो मुस्लिम युवक "गैरधर्म के लोगों को इंसानी शरीर की गंदगी खिला देते थे." जबकि ये 2015 की ख़बर थी जो रेस्टोरेंट के वर्कर्स की साफ़-सफ़ाई से जुड़ी हुई थी. #AltNewsFactCheck | @Priyankajha0
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संबित पात्रा, रोहित चहल, तारिक़ फ़तह, सुरेश चव्हाणके सहित कई लोगों ने ये वीडियो शेयर करते हुए दावा किया कि ये व्यक्ति फलों पर पेशाब छिड़क रहा था. पुलिस की जांच में ये दावा फ़र्ज़ी निकला. यहां तक कि FIR में भी इस बात का ज़िक्र नहीं है. | @Priyankajha0
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@sakshijoshii इस नफरत के ज़हर को बहुत वक्त पहले से ही लोगो के ज़हन मे भरा जा रहा है जो उनके दिमागों मे पेवस्त हो चुका है और अब अपना असर दिखा रहा है अगर इसको फैलने से नही रोका तो ये इंसानियत के लिए नासूर बनके उभरेगा ।
जब मुख़्तार अब्बास नकवी और शहनवाज़ हुसैन जैसे मुसलमान नेताओं को भाजपा अपना पक्ष रखने के लिये आगे करे तो समझ जाइए की लतियाये जाने की पूरी संभावना है।
#Islamophobia_In_India
शेक्सपीयर ने कहा था नाम में क्या रखा है
पता नहीं कैसे कह दिया
भारत में तो काफी कुछ नाम में ही रखा है। नाम देख कर ही डिसाइड किया जाता है कि किस पर हल्ला मचाना है और किस पर चुप्पी साधनी है।
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