Wtfff rhiti literary said " JAA KE APNI MAA CHU"""" 🙂🙂🙏
So proud of you Qazi, for how you handled this situation! ❤️
The only man who stood up! 🔥
#QaziTouqeer#Biggboss20 https://t.co/InRDAoloXe
Ashutosh is calling the Indian Army “aatankwadi” for wishing people on Eid-e-Milad-un-Nabi.
They have no ideology beyond Islamophobia.
In their hatred of Muslims, they can stoop to any low and even become anti-national.
59 साल के @Wangchuk66 देश के करोड़ों युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए 14 दिन से आमरण अनशन पर बैठे हैं, उनकी हालत बिगड़ रही है, 9 किलो वजन कम हो चुका है, लेकिन मेलोडी ��ोदी पर घंटों ख़बर चलाने वाला निर्दयी गोदी मीडिया की आत्मा मर चुकी है उसको करोड़ों युवाओं के मुद्दे से कोई मतलब नही।
तुम कब जागोगे युवा शक्ति?
पहुँचो जंतर मंतर।
सोनम वांगचुक, जिसने कभी अपने लिए नहीं माँगा, कुछ कि पद चाहिए, सत्ता चाहिए।
अपनी ज़िंदगी देश, समाज और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए लड़ते रहे है और 15-16 दिनों से अनशन पर बैठे हैं!
अपने लिए नहीं, देश के लिए। देश के बच्चों के भविष्य के लिए! उसके बाद भी देश के नेताओं की सोई हुई संवेदनाएँ नहीं जाग पा रही।
सत्ता की ख़ामोशी बरकरार है।
भूख हड़ताल और अनशन भी अगर व्यवस्था को सुनाई नहीं दे रहा, तो एक आम नागरिक की आवाज़ की कीमत क्या ही होगी?
अब दर्द सिर्फ़ यह नहीं कि एक व्यक्ति अनशन पर है, बड़ा दर्द यह है कि देश धीरे-धीरे उस मुकाम पर पहुँच रहा है जहाँ जनता की पीड़ा का महत्व खत्म है और उस पर सत्ता हावी है।
सोचिए, आज अगर एक ऐसे व्यक्ति की आवाज़ अनसुनी की जा सकती है, जिसने अपना जीवन देश के लिए लगा दिया, तो कल बेरोज़गार युवा, न्याय की गुहार लगाता परिवार, किसान, छात्र या कोई भी आम नागरिक किस उम्मीद से अपनी तकलीफ़ के लिए लड़ पाएगा और कौन उसकी ��ुनेगा?
लोकतंत्र का मतलब सिर्फ़ चुनाव है क्या? अगर सत्ता अपने शांत नागरिक की आवाज़ नहीं सुन रही, तो ये लोकतंत्र पर सवाल नहीं है?
और अगर वह आवाज़ भी अनसुनी होने लगे! तो यह चिंता सिर्फ़ पूरे देश को होनी चाहिए।
Be stand with Sonam Wangchuk