यही जंतर - मंतर के आंदोलन का हासिल है . देश भर के युवाओं/छात्रों को अपनी आवाज़ बुलंद करने टेम्पलेट मिला है . सरकारों को झुकाने तरीका समझ में आया है . खासकर शिक्षा को लेकर Gen Z और Gen Alfa अब खुद अपनी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हो रहे हैं .
गुरुग्राम के DTP आर एस बाठ की भाषा सुनिए , कैसे एक गरीब आदमी से बदतमीजी करते हुए धमका रहे है ,
" तेरी ड्यूटी लगा दूंगा रोड़ पर , तू मुझे बताएगा , तेरे खिलाफ़ FIR करवा दूंगा , तू एक नौकर मुझे सिखाएगा , तू शहर मे एक दुकान पर काम करता है तू मुझे बताएगा , मैं आर एस बाठ हूं , तू मुझसे पूछेगा , चल सॉरी लिखकर दे , तेरे खिलाफ़ FIR करवा दूंगा , काम मे बाधा डालने वाली " ,
एक दुकान पर बाहर अतिक्रमण हटाने के दौरान दुकान मलिक जो रिटायर्ड पुलिस थे उनके पैर मे लग गयी , इसके बाद दुकान पर काम करने वाले नौकर ने कहा आप सही से काम करो , इस पर DTP सर ने गरीब युवक को धमकी दे डाली , दुकान पर काम करने की वजह से उसे नीचा दिखाया गया , क्या देश मे गरीब होना अपराध है क्या ?
पहली बार देख रहा हूं,
की किसी देश का प्रधानमंत्री खुद अपनी कार ड्राइव कर रहा है और खुद दरवाजे खोल कर उतर भी रहा है।
बालेंद्र शाह आप गज़ब हो भाई।
युगांडा वाला तो पहले गुलदस्ता लेता है फ़िर सेल्यूट करवाता है। फ़िर धीरे धीरे नाराज़ फूफा की तरह ऑफिस की तरफ जाता है।
पत्रकार — डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने पर आप क्या कहेंगे?
अंधभक्त — यह अमेरिकी प्रोपेगैंडा है।
पत्रकार — कैसे?
अंधभक्त — पहले हमें $1 के बदले सिर्फ़ ₹60 मिलते थे, अब $1 के बदले ₹95 मिलते हैं। तो क्या बेहतर है, 60 या 95?
यह कैसा ब्रेनवॉशिंग है भाई? 😭
आप भी जानिए कि किस तरह “चिली” की “तानाशाह सरकार” द्वारा स्कूलों के प्राइवेटाइजेशन के बाद स्कूली बच्चों की “पेंगुइन क्रांति” ने जन्म लिया.
यह आंदोलन लगभग एक दशक तक लगातार चलता रहा, और अंततः इसी से उभरकर एक छात्र “चिली” का राष्ट्रपति बना. इसके साथ ही, छात्रों के शिक्षा से जुड़ी समितियों में सदस्य बनने की प्रक्रिया भी शुरू हुई.
सच ही है, झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए.
Caste census is as good as dead. The Govt has taken a technical decision so as to design caste census to fail. The real problem is not technical complexity, but political will, or rather political ill-will.
The political game is clear: the PM will throw up his arms and tell OBC voters, “Look, we tried, but nothing came out of this exercise,” while winking to his core “upper” caste vote bank: “Don’t worry, we’ve managed it.” Saanp bhi mar gaya, lathi bhi nahin tooti.
Read: https://t.co/liOQdfyVQN
नोएडा का एयरपोर्ट देख लिया हो तो अब जैसलमेर का रेलवे स्टेशन भी देख लीजिए
जिस रेलवे स्टेशन का उद्घाटन अभी जुलाई 2026 में ही हुआ है उसकी तस्वीरें देखकर सवाल उठना स्वाभाविक है। करोड़ों रुपये खर्च करके नई सुविधाओं और आधुनिक विकास के नाम पर तैयार की गई परियोजनाओं की असली स्थिति उद्घाटन के कुछ ही समय बाद सामने आने लगी
अस्पताल में बेड हो ना हो
लेकिन
सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास का बोर्ड चमकते रहना चाहिए
Welcome to “Governance by marketing”
👏👏👏well done young lady
देखो यूपी मे ये सब क्या हो रहा है , एक दिव्यांग व्यक्ति चल नहीं सकता लेकिन उसको इस लेवल पर मज़बूर किया जा रहा है कि वो इस अवस्था मे इस लाचारी मे ऑफिस के चक़्कर काटे , अधिकारियो से मिन्नते करे ,
दीनानाथ मिश्रा जी सच कहे तो आपका दुख देखा नहीं जा रहा है , लेकिन आप हिम्मत वाले हो , दिव्यांग आप नहीं बल्कि हमारा सिस्टम है जो आपको आपको परेशान कर रहा है ,
आपने दो अलग-अलग ईंधन को अलग-अलग कटोरी में रख कर जलाया और दिखाया कि पेट्रोल ज़्यादा कार्बन छोड़ता है और इथेनॉल काफ़ी कम। क्या यही पेट्रोल जब BS-VI इंजन की प्रक्रिया से गुज़रता है, तब भी इतना ही कार्बन छोड़ता है, जितना आपने कटोरी में जलाकर दिखाया? दूसरा सवाल , क्या होता है जब पेट्रोल और इथेनॉल को मिलाया जाता है? क्या इथेनॉल गंगा जल की भाँति पेट्रोल को प्रदूषण मुक्त कर देता है? उसे अच्छा बना देता है? इसका उत्तर जानना चाहूँगा। बड़ा मुद्दा यहाँ मिलावट को लेकर है, पेट्रोल और इथेनॉल की अलग-अलग प्रॉपर्टी को लेकर नहीं है।
जब E20 आप कार में डालते हैं तब कार्बन कितना कम होता है? क्या इसे भी आप दो कटोरी के इस्तेमाल से दिखा सकते हैं? E20 का इंजन के कल-पुर्ज़ों से लेकर पाइप पर क्या असर पड़ता है? माइलेज घटने की बात मंत्री ही मान चुके हैं। उन्हें बताना चाहिए कि वे मार्जिनल कमी के नतीजे पर कैसे पहुँचे? कितनी कारों का सर्वे हुआ? E20 भराने के बाद मारुति की कार का माइलेज और महिंद्रा की कार का माइलेज क्या समान से मार्जिनली कम होता है? क्या हर ब्रांड और मॉडल की कार का माइलेज समान रूप से कम होता है? आपने इस वीडियो में नहीं बताया। जैसा कि आपने लिखा है कि बाकी जानकारी बाद में। तो इंतज़ार रहेगा।
गरीब बच्चों की थाली में नमक-रोटी, और हमारे नेता AC कमरों में शाही भोजन का आनंद ले रहे हैं।
एक तरफ भूख, दूसरी तरफ ऐशो-आराम, यही हमारे सिस्टम की कड़वी सच्चाई है।