हमें किसी के “वंदे मातरम्” पढ़ने या गाने पर आपत्ति नहीं है, लेकिन मुसलमान केवल एक अल्लाह की इबादत करता है और अपनी इबादत में अल्लाह के सिवा किसी दूसरे को शामिल नहीं कर सकता। और “वंदे मातरम्” का अनुवाद शिर्क से संबंधित मान्यताओं पर आधारित है, इसके चार श्लोकों में देश को देवता मानकर “दुर्गा माता” से तुलना की गई है और पूजा के शब्दों का प्रयोग हुआ है। साथ ही “माँ, मैं तेरी पूजा करता हूँ” यही वंदे मातरम् का अर्थ है। यह किसी भी मुसलमान की धार्मिक आस्था के खिलाफ है। इसलिए किसी को उसकी आस्था के खिलाफ कोई नारा या गीत गाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। क्योंकि भारत का संविधान हर नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19) देता है।
वतन से प्रेम करना अलग बात है, उसकी पूजा करना अलग बात है। मुसलमानों की देशभक्ति के लिए किसी के प्रमाण-पत्र की आवश्यकता नहीं है। स्वतंत्रता संग्राम में उनकी कुर्बानियाँ इतिहास के सुनहरे पन्नो में दर्ज हैं।
हम एक खुदा (अल्लाह) को मानने वाले हैं, अल्लाह के सिवा न किसी को पूजनीय मानते हैं और न किसी के आगे सजदा करते हैं। हमें मर जाना स्वीकार है, लेकिन शिर्क (खुदा के साथ किसी को शामिल करना) कभी स्वीकार नहीं!
#ArshadMadani
@JitendraNTyagi देख लो ये होता है 'गोबर खाने से...अक्ल ने काम करना 'कम कर दिया ना। अल्लाह ने औरतों को मर्दों के अधीन बना कर, मर्दों को औरतों का 'मुहाफिज़ बना दिया। अच्छा एक बात बताओ, क्या तुम्हारे पिता तुम्हारी माँ के पति थे, या तुम्हारी माँ तुम्हारे पिता की पत्नी थी...दिमाग हो तो बताना जरूर..!!
नाबालिग मुस्लिम बच्चे साहिल की गोली मारकर हत्या। 💔
दिल्ली के मान सरोवर पार्क में…
सिर्फ 14 साल का एक बच्चा, साहिल।
फटा‑पुराना कुर्ता पहने, बारात में उड़े हुए दस‑बीस के नोट उठा रहा था।
उसे क्या पता था कि उसकी ज़िंदगी की आख़िरी शाम यही होगी।
एक Cisf का जवान—जो दूल्हे का रिश्तेदार था—
बिना पल भर सोचे उसके सिर में गो*ली मार दी।
साहिल वहीं गिर पड़ा
बस एक सवाल
“गलती थी, तो पकड़कर थाने ले जाते… सिर में गो*ली क्यों मार दी मेरे बच्चे को बच्चे की मां ने कहा।
और जवाब…
किसी के पास नहीं है।
ये धर्म का मामला नहीं था,
ये अमीरी‑गरीबी का, ताक़त और लाचारी का मामला था।
एक तरफ़ वर्दी और हथियार,
दूसरी तरफ़ एक 14 साल का मासूम।मुस्लिम बच्चा
खबर दो मिनट चली,
इंसाफ़ का शोर एक पल भी नहीं।
जैसे उसकी जान की कोई कीमत ही नहीं थी।
कभी‑कभी लगता है, हमारे सिस्टम की खामोशी ही सबसे बड़ी गवाही है…
कि कल फिर कोई साहिल होगा।
इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।🥹
अल्लाह मासूम साहिल को जन्नत आता फरमाएं 🤲
@AchAnkurArya नहीं,,उनके कहने का मतलब है। कि दुनिया कहाँ से कहाँ पहुंच गई, (मतलब अक्ल और समझदारी में) और मेरे भारत के हिन्दू भाई आज भी 'गोबर को 'पुण्य समझ कर 'खा रहे हैं...कमाल है भाई 🤣🤣
@BHUPENDER_HRD खतरे में" लेकिन किस से...??
.......................और क्यों...??
हिन्दू कभी भी खतरे में नहीं थे।
किसी भी वक़्त में खतरे में नहीं थे।
तो अब ऐसा क्या हो गया...??
@news24tvchannel मौलाना अरशद मदनी साहब ने जो कहा 'बिल्कुल सच कहा और सही कहा...और रही बात इलियासी साहब की, तो ये बात तो सबको पता है कि ये जनाब RSS के पालतू हैं..!!
देख रहे हो विनोद....
अपने जेम्स बॉन्ड अजीत डोभाल खुलेआम बोल रहे है कि पाकिस्तान जासूसी के लिए मुसलमानों से ज्यादा हिंदुओं को रखता है!
राइट विंग वाले नकली देशभक्त किधर मर गए कुछ बोल नहीं रहे है! https://t.co/gDoYklbAQm
@jpsin1 सहनशीलता और बर्दाश्त का दूसरा नाम ही "इन्सानियत है,,
"भाई ये धरती सिर्फ मरने वालों की है, जीने वालों के लिए तो मात्र जीवन यापन का जरिया है। और जब 'मरना ही सच है, तो फ़िर 'अच्छा इंसान बनके मरने में क्या बुराई है। ये दोनों 'माँ बाप अच्छे ही तो हैं, तभी तो....!!