हलीमा और उसकी माताजी वाले प्रकरण में रामपुर पुलिस द्वारा आरंभिक जाँच के बाद, जब मानवाधिकार आयोग के @KanoongoPriyank वहाँ गए, तो स्थिति समझ कर एक SIT गठित कराने की घोषणा की।
अब प्रतीत होता है कि इसमें कुछ होगा नहीं। इतने FIR हैं, और एक छोटे प्यादे को आनन-फानन में पकड़ कर जेल में डाल दिया, अब जाँच चल रही है। जाँचों का क्या होता है हम सब जानते हैं।
एक रैंडम FIR होता है और कर्नाटक पुलिस घर आ जाती है। यहाँ दर्जन भर हैं, और कुछ नहीं हो रहा। @officeofvijay1 ने FIR की पूरी सूची पोस्ट कर रखी है, पर ‘पहुँच’ के आगे सब बेकार हो जाता है। उसकी माँ भटक रही है, वीडियो पर बता रही है कि क्या हुआ, उसे संभवतः आने वाले समय में या तो मार दिया जाएगा, या पागल बता दिया जाएगा।
मुझे सुबह कहीं से सूचना मिली कि इसमें भाजपा के एक राज्यमंत्री जी अब इन्वॉल्व्ड हो चुके हैं। इम्तियाज हुसैन को जब रामपुर और हायकोर्ट से राहत नहीं मिली तो केस बिजनौर पुलिस के यहाँ ट्रांसफर करा लिया गया, जहाँ उसे दोषमुक्त कर दिया गया। (बिजनौर वाली बात मैंने अभी सत्यापित नहीं की है।)
प्रतीत होता है, इस केस में पैसा इतना घुस चुका है कि हम केवल ट्वीट और पोस्ट करते रह जाएँगे। यह दुर्भाग्य है कि इसमें नेता, पत्रकार, आयोग, पुलिस, न्यायालय, एक्टिविस्ट सब लगे हुए हैं, पीड़िता का अपहरण तक हो जाता है, पर @Uppolice गंभीर नहीं दिखती।
हर दिन रामपुर पुलिस, ‘उक्त प्रकरण में जाँच हो रही है’ का जेपेग फाइल चिपका कर निकल जाती है। यह केस 150 बीघे भूमि से आरंभ हो कर मदरसे में बंधक बना कर माँ के सतत गैंगरेप, हत्याओं और अंततः बेटी के बलात्कार का है।
@myogiadityanath@CMOfficeUP@dgpup से आग्रह है कि इसकी पूरी जाँच हो। अपनी ही पार्टी के जो नेता इसमें घुसे हैं, उनका नाम मैं आप तक साझा कर दूँगा। संभव है, पूरी सूचना सत्यापित होने पर, मैं नाम सार्वजनिक ही कर दूँ।
तैयारी यहाँ तक की है कि पीड़िता लड़की का चरित्रहनन किया जा सके क्योंकि उसके पहले के किसी वीडियो में वो सात सेकेंड के लिए कुछ बोल रही है, जिसका संदर्भ कुछ और है।
ऐसे केस में जब कुछ होता नहीं, तो आप सोचने लगते हैं कि हम यह लड़ाई लड़ ही क्यों रहे हैं। कोई भी बड़ा पोर्टल, कोई भी RW का पोर्टल इसे छू तक नहीं रहा। मैंने पूरी थ्रेड दे दी, कल @rai_kaushlesh ने हलीमा की माँ का साक्षात्कार किया, पर आपको ये स्टोरी कहीं नहीं दिखेगी।
पोर्टलों के मालिक बिक जा रहे हैं, पार्टी के नेता बिक जा रहे हैं। मुझे आशा कम ही है, पर मैं और विजय जैसे लोग, जो भी बन सकेगा हम करेंगे। इसमें हम दोनों को पुलिस के सीनियर अधिकारी द्वारा ‘मैनेज करने’ के प्रयास हुए हैं।
ऐसा नहीं है कि हलीमा हमें 75 बीघा प्लॉट लिख देगी या इम्तियाज से हमारी व्यक्तिगत शत्रुता है। हम बस एक स्टोरी के पीछे हैं, और हमसे जो बन पड़ेगा, वो हम करेंगे। एक रास्ता इसे योगी जी तक ले जाना है, दूसरा एक और है। देखते हैं, कहाँ तक जाता है।