#India: We are concerned by reports of mass detentions of demonstrators, protest leaders, members of civil society organisations, lawyers and journalists, before and during today’s large-scale demonstrations in Delhi.
We call on the authorities to ensure that the right to peaceful assembly is fully respected and fulfilled.
https://t.co/tqrQyZoXBJ
All countries should immediately STOP ALL FLIGHTS to and from Russia
Don’t wait until this becomes another pandemic.
If it turns out to be nothing, at worst it’s just a two week flight restriction. If it’s something serious, it would be distrarous.
दिल्ली पुलिस की सारी बहादुरी छात्रों और महिला पत्रकारों पर लाठी चलाने के लिए है.
कहाँ हैं मोदीजी? अपने ये कबूलनामा सुना या नहीं? योगीजी! आपने सुना?
@narendramodi@myogiadityanath
Mr PM @narendramodi, this man is saying he has the गूदा to break open Nishu’s father’s head and admit it on camera.
Will the PM order Delhi Police to arrest this man for the crimes he’s admitting? Or should Indians accept a lawless system?
Cockroaches have the गूदा to ensure justice for Nishu’s father.
23 जून को जंतर-मंतर की घटना पर पुलिस कहती है कि संजय कुमार की चोटें सामान्य थीं और खोपड़ी में दरार की बात निराधार है। लेकिन आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज के बयान में वह खुद “7 टांके”, “मरने की स्थिति” और “307 बनता था” जैसी बातें कह रहा हैं।
वह यह भी दावा कर रहा हैं कि संजय कुमार की बेटी निशु, थाने के बाहर खड़े होकर कह रही थी कि “अगर मेरे बाप ���ो इंसाफ नहीं मिला तो हम जहर खाकर मर जाएंगे।” साथ ही उनका दावा है कि वे जेल तक नहीं गए और “कपिल मिश्रा अपने बड़े भाई हैं”, “चिराग पासवान अपने बड़े भाई हैं” तथा “सबका सपोर्ट है।"
तो सवाल है कि अगर घायल की हालत इतनी गंभीर थी और 7 टांके लगे थ��, तो पुलिस की MLC में चोटें सामान्य कैसे बताई गईं? अगर धारा 307 का मामला बनता था, तो आरोपी जेल क्यों नहीं गया?
“कपिल मिश्रा के फोन के बाद छोड़ने का दावा सच है या झूठ? क्या पुलिस इसकी निष्पक्ष जांच करेगी? जब राजनीतिक संरक्षण का इतना स्पष्ट दावा सामने आ रहा है, तो पुलिस यह क्यों नहीं स्पष्ट कर रही कि इस मामले में किसी अनुचित प्रभाव या हस्तक्षेप की कोई भूमिका थी या नहीं?”
आखिर पुलिस के रिकॉर्ड और आरोपी ��्वतंत्र भारद्वाज के बयान में इतना बड़ा अंतर क्यों है? हमें इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और अपने पीड़ित परिवार को न्याय दिला कर रहेंगे। जय भीम, जय भारत।।
BJP सरकार और दिल्ली पुलिस की गुंडई 👇
4PM की पत्रकार शाहीन ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से सवाल पूछा तो दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लि��ा और मारपीट की।
शाहीन का कहना है- जब पुलिसवालों को पता चला कि वो मुसलमान हैं तो उन्हें और बेरहमी से मारा गया। उनके शरीर पर जख्म हैं.. कैमरापर्सन भी बेसुध पड़ी है।
एक पत्रकार के साथ ऐसा बर्ताव कतई सही नहीं है, दोषी पुलिसवालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
हालांकि, इसकी उम्मीद कम है, क्योंकि- BJP सरकार में सवाल पूछना गुनाह हो चला है।
बात तो ऐसे कर रहा जैसे प्रधानमंत्री ने व्हाट्स एप किया हो। अब मोदी जी पर निर्भर करता है कि वे स्वतंत्र का कितना साथ देते हैं। इ��ी से पता चल जाएगा कि तीन बार के प्रधानमंत्री के पास कैसे लोग हैं। प्रधानमंत्री की ये हालत हो गई है कि वो ऐसे लोगों के साथ खड़े रहें तो उससे अच्छा है ये कुर्सी छोड़ देनी चाहिए। जिस कुर्सी पर बैठ कर आप वैज्ञानिक से लेकर समाजसेवी, उद्योगपति से लेकर अपनी पार्टी के कार्यकर्ता की सोहबत पा सकते हैं अगर स्वतंत्र की सोहबत उनके लिए, गृहमंत्री के लिए, चिराग़ पासवान के लिए ज़रूरी बन जाए तो सबको अपना पद छोड़ देना चाहिए। संसद मार्ग थाने का नाम स्वतंत्र भारद्वाज थाना होना चाहिए। दिल्ली पुलिस का नाम स्वतंत्र भारद्वाज पुलिस होना चाहिए।
निशु, घबराने की ज़रूरत नहीं है। मैं तुम्हारे साथ हूँ।
साफ है कि तुम्हें इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि तुम अपने समुदाय और छात्रों के हक़ की आवाज��� उठाती हो।
अमित शाह की दिल्ली पुलिस एक तरफ़ छात्रों के साथ अमानवीय बर्बरता करती है। दूसरी तरफ़ एक दलित लड़की के पिता का सिर फोड़ने वाला अपराधी खुलेआम घूम रहा है।
@narendramodi जी, @AmitShah जी - ऐसे अपराधी को आपका और आपकी पार्टी के लोगों का संरक्षण क्यों है? अब भी कार्रवाई होगी या किसी को बचाते रहेंगे?
निशु, तुम्हारी लड़ाई अकेली नहीं है। हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक न्याय नहीं मिल जाता।
जय भीम। जय संविधान��
This guy is openly admitting that he attacked people at Jantar Mantar and that BJP leaders provided him immunity from police action afterwards.
How much more openly does someone have to admit it before @DelhiPolice takes action?
When this attack happened, I personally went to the DCP and asked him to arrest these goons. The DCP replied, “We can’t arrest people randomly.”
I told him, “The attack happened right in front of the police. How can you say you can’t arrest them?”
To which the DCP replied, “You are free to go to the courts”
Such is the attitude of Delhi Police.
यह स्वतंत्र भारद्वाज है
शान से बता रहा है कि स्टूडेंट प्रोटेस्ट में प्रदर्शनकारी के पिता पर हमला किया - उन्हें 60 टांके लगे और वह मौत के कगार पर थे
307 के अंतर्गत हाफ मर्डर का मामला बनता था. लेकिन वह जेल नहीं गया - रात भर बेख़ौफ़ घूमता रहा
कपिल मिश्रा के एक फोन के बाद उसे राहत मिल गई
आगे बताता है कि कपिल मिश्रा, चिराग पासवान ही नहीं मोदी जी भी उसके “बड़े भाई” हैं, सबका समर्थन प्राप्त है