जो ग़रीबों के लिए लगते थे नारे बिक गए
और इस सरकार के सारे इदारे बिक गए
लोग जिनके हाथ में हमने दिया अपना नसीब
चंद सिक्कों के लिए रहबर हमारे बिक गए
कल तलक ही गा रहे थे गीत जो सद्भाव के
आज वो नफ़रत से सौदा कर के प्यारे बिक गए
आज जुम्मन ने दबाया वोट करने को बटन
कल चला मालूम उसको वोट सारे बिक गए
कोई भी किरदार ऊंचा देखने मिलता नहीं
क्या उठा के अब चलेंगे सर तो सारे बिक गए
और अब शायर करे क्या देश की हालत बयां
शेर कहने को सभी जब इस्तिआरे बिक गए
- Gaurav Tripathi Poetry
[Hindi Ghazal, Hindi Poetry, Gaurav Tripathi Poet]
मेरे हिसाब से CJP का प्रदर्शन सफल रहा।
आम आदमी के लिए नहीं, सरकार के लिए।
जब स्टॉक मार्केट में हर्षद मेहता लेवल का स्कैम हुआ हो, और कोई उसकी बात न कर रहा हो, तो ये प्रदर्शन सरकार के लिए सफल ही माना जाएगा न?
बाकी इस्तीफ़ा तो घुइयां मिलेगा।
आदमी और हादसा
देश में जब भी कोई होता है हादसा,
एक दिन को आदमी होता है ग़मज़दा।
भूल के फिर हादसे के पीछे की वजह,
लेता है उठा वो अपने धर्म की ध्वजा।
जाता है फिर काम पे जब खीजता हुआ,
रास्ता भी मिलता है उसको खुदा हुआ।
रास्ता वो जिसके बने रहने का खर्चा,
काट के दिया था उसने अपनी तनख़्वाह।
शाम को जब लौटता है वो थका हुआ,
सोचता है जाम में घंटों फँसा हुआ,
आ गया है वक़्त, अब वो लेगा छुट्टियाँ,
पर उसे तो ट्रेन में मिलती नहीं जगह।
पाता है टिकट वो करके ख़र्चा एक्स्ट्रा,
ढूँढ़ता है रहने को फिर सस्ती-सी जगह।
सस्ती-सी जगह जहाँ अगर हो हादसा,
पहुँचे न पुलिस, न कोई दमकल वहाँ।
फैल जाएं आग की बाँहें जहाँ-तहाँ,
आदमी को भागने की न मिले जगह।
धीरे-धीरे साँस अपनी छोड़ता हुआ,
पढ़ने लगे फिर वो अपने धर्म की दुआ।
उसको बचाने को पर आए नही ख़ुदा,
रह जाए वो बन के अगले दिन की सुर्खियाँ।
पढ़ के सुर्खियों में फिर एक और हादसा,
एक और आदमी हो जाए ग़मज़दा।
- गौरव त्रिपाठी
Hindi Poetry by Gaurav Tripathi Poetry
#gaathiwrites
नई पीढ़ी से अब घबरा रहा है
सितमगर बूढ़ा होता जा रहा है
वही जो बाँटती है सोच सबकी
उसी रेखा को खींचे जा रहा है
डरा है जड़ पकड़ ले ना ज़मीं पे
उगी आवाज़ को दफ़्ना रहा है
कमी उसकी न ज़ाहिर हो सभी को
नया नाटक वो देता जा रहा है
सुना कर के कसीदे रोज़ अपने
तुम्हारे कान को फुसला रहा है
बग़ावत के कभी आसार ना हों
नए क़ानून यूं बनवा रहा है
वहां पर दफ़्न है तहज़ीब अपनी
जहां कालीन वो बिछवा रहा है
- गौरव त्रिपाठी
Hindi Ghazal by Gaurav Tripathi Poetry