RPF को बुलाओ या TTE को मैं नहीं उठूंगा! जो करना है कर लो!
नियमों की धज्जियां उड़ाते लाल टी शर्ट पहने हुए पढ़े-लिखे अंकल को देखिए,
जिन्हें दूसरों की कन्फर्म सीट पर डाका डालने में जरा भी झिझक नहीं हुई।
जब असली टिकट वाले पैसेंजर ने इज्जत से अपनी रिजर्वेशन सीट मांगी,
तो इन अंकल का स्वाभिमान और अहंकार सातवें आसमान पर पहुंच गया।
कानून को अपनी जेब में लेकर घूमने वाले इन अंकल ने कैमरे के सामने चौड़े में बोले कि
आरपीएफ को बुलाओ या टीटी को, मैं तो अपनी जिद्द से एक इंच भी नहीं हिलने वाला।
रेलवे प्रशासन से बस इतनी ही गुजारिश है कि नियमों का पाठ पढ़ाने वाले
ऐसे विशिष्ट अतिथियों की हेकड़ी को सही कानूनी इलाज के जरिए ही शांत किया जाए,
ताकि बाकी यात्रियों का सफर सुरक्षित रह सके और ऐसे लोगों के लिए एक एग्जांपल सेट हो।
बेंगलुरु में राज्यपाल के काफिले के लिए 30 मिनट तक ट्रैफिक रोका गया।
इस दौरान अपनी गर्भवती पत्नी को अस्पताल ले जा रहा एक व्यक्ति जाम में फंस गया और विरोध में बैठ गया।
ये VVIP संस्कृति अब खत्म होनी चाहिए, उस व्यक्ति को पूरा समर्थन।
चले तो चांद तक,
नहीं तो शाम तक।
मुजफ्फरनगर में O General के खराब AC से दुखी एक ग्राहक ने अपने AC का जनाजा निकाला, तो शोरूम मालिक आकर पीड़ित व्यक्ति से भिड़ गया।
पुलिस ने दोनों का शांति भंग में चालान काट दिया।
😌 दिल दहला देने वाला।
बांग्लादेश के शरियतपुर ज़िले के जजीरा में, एक 10 साल का हिंदू लड़का अपनी माँ के बेजान शरीर को एक साइकिल वैन पर लादकर पुलिस स्टेशन ले जाता है। जिहादियों ने उसके अपने ही बच्चों के सामने उसकी बेरहमी से बलात्कार और हत्या कर दी थी।
अब दो छोटे बच्चे अनाथ हो गए हैं और इंसाफ़ की गुहार लगा रहे हैं। दुनिया बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों को नज़रअंदाज़ करना कब बंद करेगी?
एक ज़माना था जब हर कोई हिंदू था; देखिए, बहुत पहले एक बर्बर रेगिस्तानी पंथ में धर्मांतरण करने के बाद अब वे हिंदुओं के साथ क्या कर रहे हैं।
#Bangladesh
एक माँ हर रात डर के साथ सो रही है… कि कहीं सुबह उसकी बच्ची साँस लेती मिले या नहीं… 💔
ये सिर्फ डर नहीं, एक माँ की टूटती हुई दुनिया है।
जिस घर में बच्चों की हँसी गूंजनी चाहिए, वहाँ अब हर पल दुआएँ और आँसू हैं…
भारत की आबादी 140 करोड़ है, और इस बच्ची के इलाज में सिर्फ़ 9 करोड़ रुपये लगने हैं।
अगर ये संदेश 9 करोड़ लोगों तक भी पहुँच जाए और हर व्यक्ति सिर्फ़ ₹1 मदद कर दे, तो एक मासूम की ज़िंदगी बच सकती है। 🙏
अगर आप आर्थिक मदद नहीं कर सकते, तो कृपया इस पोस्ट को रीट्वीट और शेयर ज़रूर करें।
किसी का एक शेयर भी उस बच्ची की साँसों की वजह बन सकता है…
बेजान शरीर है—
न बोल सकते हैं, न सुन सकते हैं, न चल सकते हैं और न कोई इसरा कर सकते हैं ।
घर वालों की उम्मीद है कि कभी ठीक होंगे—
बेटी पापा का इलाज कराने के लिए शोसल मीडिया का सहारा लेती है! सोचिए आर्थिक स्थिति क्या होगी?
पत्नी दिन रात सेवा करती है, रिश्ते नाते सब दूर हो गए हैं! परिवार की हालत क्या होगी यह समझ सको शायद!😭
ऐसे लोगों की पैसे से मदद सब कर सकते हैं, उनकी पोस्ट को वायरल करो —
हमारे देश में ऐसे बहुत लोग हैं जो किसी की पीड़ा समझकर उनकी आर्थिक मदद करेंगे या शोसल मीडिया से ही कुछ अर्निंग हो सकती है!
हरियाणा पुलिस का एक जवान Passenger Bus में अपना ID Card दिखाकर फ्री में जाने की कोशिश कर रहा था।
लेकिन Conductor ने साफ बोल दिया —
“पैसे देने होंगे, बिना टिकट बस आगे नहीं जाएगी।”
जवान टिकट लेने को तैयार नहीं था।
फिर बस में बैठे लोग खुद उसके पैसे देने लगे… लेकिन साहब तब भी अलग ही रौब में बैठे रहे।
@UPPCLLKO आपूर्ति संबंधित के संबंध में आपकी शिकायत संख्या DV20052603215 दर्ज हो गई है –UPPCL
Ratri main kareeb 3 baje se ek phase nahi aa raha hai bahut dikkat h bina light ke is tapti garmi main kripya dhyan de
इतने छोटे बच्चे पर इतना गुस्सा… ये देखकर दिल कांप उठता है। 🥺
बच्चे गलती कर सकते हैं, लेकिन मार कभी समाधान नहीं होती। 🙏
हर माता-पिता के लिए ये एक सीख है —
अपने गुस्से को मासूम बच्चों पर कभी मत उतारिए। 😔🙏
Share it.
यह माताजी मथुरा रेलवे स्टेशन पर है । कहती हैं कि बीकानेर की हूं बेटा छोड़ गया है , कोई इन्हें जानता पहचानता हो तो इस नंबर पर संपर्क करें +919411064684
पोस्ट को अधिक से अधिक फॉरवर्ड कर इनकी मदद करें ।
इस मां ने जान की परवाह किये बिना, अपने दो बच्चों की जान बचा ली। साथ में दो महिलाएं और थीं उनकी जान भी बच गयी।
वायरल वीडियो बिहार के शाहपुर पटोरी रेलवे स्टेशन का है, जहां तीन महिलाएं दो बच्चों को साथ लेकर रेलवे लाइन क्रॉस कर रही थीं। तभी ट्रेन आ गयी, महिलाएं बच्चों सहित मलहरा के नीचे दबाकर बैठी थीं। ट्रेन निकलते समय महिला घायल भी हुई है।
कर्नाटक के एक गरीब किसान की English सुनिए ❤️
पेड़ कटने से बचाने के लिए किसान स्थानीय सरकारी दफ्तर में अर्जी देने गया था।
लेकिन अधिकारी ने कहा — “English में बात करो…”
फिर जो हुआ, उसने सबका दिल जीत लिया 🥰
उस किसान ने टूटी-फूटी ही सही, लेकिन पूरे आत्मविश्वास के साथ English में अपनी बात रखी।
भाषा नहीं, हौसला बड़ा होता है 🙌
आज मैं पंजाब नेशनल बैंक में गया था. मैं ₹ 1 लाख का चेक लेकर बैंक काउण्टर पर पहुँचा, एक महिला कर्मचारी थी. उन्होंने कहा 30 हज़ार रुपये से ज़्यादा नहीं मिलेगा. दो दिन बाद यानी सोमवार को आना,
मैंने बताया घर में शादी है, जरूरत है.
यही बात मैंने मैनेजर को भी बताया, मैनेजर ने कैश देने से इनकार कर दिया. मैं फिर से अपनी बात रख ही रहा था इतने में बैंक में काम करने वाला एक प्राइवेट कर्मचारी मुझसे बेहद सख़्त लहजे में अभद्र तरीके से बात करने लगता है.
मैंने सिर्फ़ लाइन में बोला -
भाई साहब twitter पर मेरे 50 हज़ार फॉलोअर्स है, अब आप लोग तय कर ले की कैश अभी देंगे या बाद में बुला देंगे.
क्योंकि कैश तो देना ही पड़ेगा, मैं भीख मांगने नहीं आया हूँ,
मेरी बात सुनने ही बैंक मैनेजर को दिन में तारे दिखने लगे, उन्होंने मेरा चेक लिया, उसे बाद बैंक औपचारिकताओं को पूरा करके तुरंत ₹1 लाख रुपये दे दिया.
मेरी तरह और 3-4 लोग बैंक में कैश की लाइन में थे. और सब को जानबूझ परेशान किया जा रहा था क्योंकि बैंक वाले भारी भरकम कैश बड़े व्यापारियों को दे देते है जिसके एवज में उन्हें कमीशन मिल जाता है.
एक बात तो तय है कि अगर आप शिक्षित है तो आपका शोषण नहीं हो सकता. बाक़ी @pnbindia को ऐसे मामलों में बैंक कर्मचारियों पर कड़ी कार्यवाही करनी चाहिए.
अति आवश्यक सूचना- कृपया अधिक से अधिक Share करें ⚠️
ये लगभग 16 वर्ष का अज्ञात मरीज है, जो बीते साल 2025 में 7 अगस्त को बाराबंकी में ट्रेन से गिर गया था। उसे उसी दिन KGMU, लखनऊ में भर्ती कराया गया।
इनके सिर में गंभीर चोट थी और 8 अगस्त को ऑपरेशन किया गया।
वर्तमान में ये लड़का ठीक से बोल नहीं पा रहा है, जिससे इसका नाम पता से जुड़ी किसी के पास जानकारी नहीं पहुंच पा रही है।
🙏आप सभी से विनम्र निवेदन है कि इस बच्चे की फोटो और जानकारी को पूरे उत्तर प्रदेश, विशेष रूप से बाराबंकी क्षेत्र के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अधिक से अधिक साझा करें, ताकि इनके परिवार तक यह सूचना पहुँच सके और वे अपने बच्चे को पहचानकर अपने साथ ले जा सकें।
@Uppolice@Barabankipolice
होटल के मालिक की उस वक़्त आँखें खुली की खुली रह गईं और विश्वास नहीं हुआ जब इतनी सारी लड़कियों को इस भेष में देखा🥰🥺
दरअसल एक स्कूल में नाटक में भाग लेने वाली कुछ छात्राएं प्रोग्राम खत्म होते ही एक होटल में उसी ड्रेस में पहुंच गईं
होटल मालिक ने तुरंत मुस्कुराकर कहा ये तो मेरा सौभाग्य है,
जो कि पहली बार इतनी सारी साक्षात् देवियों का आगमन मेरे होटल में हुआ है।
मालिक ने कहा बिना कोई पैसे लिए आज इन्हें वो सब खिलाओ जो होटल में मौजूद हो और इनकी इक्षा हो।
छात्राओं की मानों लॉटरी लग गई।
ओडिशा.. में एक आदमी को अपनी ही मरी हुई बहन की कब्र खोदकर उसको बैंक ले जाना पड़ा, सिर्फ इसलिए ताकि वो साबित कर सके कि उसकी बहन अब जिंदा नहीं है,
ये व्यक्ति अपनी बहन के खाते से ₹20,000 निकालने की कोशिश कर रहा था, लेकिन बैंक अधिकारी बार-बार यही कह रहे थे कि अकाउंट होल्डर को खुद आना पड़ेगा, उसने कई बार समझाया कि उसकी बहन की मौ*त हो चुकी है, लेकिन सिस्टम ने उसकी बात सुनने से साफ इनकार कर दिया, आखिरकार मजबूर होकर और सही कागजी कार्रवाई की जानकारी ना होने की वजह से उसने ये कदम उठाया,
बैंक के अधिकारी उसे यह गाइड कर सकते थे की मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा कर लाओ
लेकिन बैंक के कर्मचारी इतने संवेदनहीन हो चुके हैं यह दृश्य आज हमको देखना पड़ रहा है
सोचिए, एक भाई को किस हद तक धकेल दिया गया कि उसे अपनी बहन की कब्र तक खोदनी पड़ी, हमारा सिस्टम कई बार इंसानियत से कितना दूर हो जाता है, जहां कागज और नियम, इंसान की हालत और दर्द से ज्यादा बड़े हो जाते हैं...
शरीर से मांस का एक-एक कतरा गल चुका था। पसलियां बाहर आ गई थीं। हिलने-डुलने तक की ताकत नहीं बची थी।
जब अंग्रेजों ने देखा कि यह 25 साल का लड़का टूट नहीं रहा, तो उन्होंने जबरदस्ती नाक में नली ठूंसकर दूध पिलाने की कोशिश की। वह नली खाने की नली की जगह फेफड़ों में चली गई।
दूध फेफड़ों में भर गया। वो तड़पते रहे, खून की उल्टियां करते रहे, लेकिन अनशन नहीं तोड़ा।
13 सितंबर 1929 को लाहौर जेल में एक क्रांतिकारी ने अपने प्राण त्याग दिए। 63 दिन... जी हाँ, 63 दिन तक बिना अन्न का एक दाना खाए।
इतिहास के पन्नों में अक्सर हम भगत सिंह की फांसी की बात करते हैं, लेकिन उस साथी को भूल जाते हैं जिसने भगत सिंह की बाहों में दम तोड़ा था।
आज हम बात कर रहे हैं 'यतींद्र नाथ दास' की, जिन्हें दुनिया 'जतिन दा' के नाम से जानती थी।
पेशे से वो बम बनाने में माहिर थे, लेकिन उनका हथियार बना उनका अपना शरीर।
वो चाहते तो माफी मांग सकते थे, खाना खा सकते थे। लेकिन मांग सिर्फ एक थी - "भारतीय राजनीतिक कैदियों के साथ जानवरों जैसा सलूक बंद करो।"
अंग्रेजों को लगा कि भूख इसे तोड़ देगी। लेकिन उन्हें नहीं पता था कि यह शरीर मिट्टी का नहीं, फौलाद का बना है।
जब जतिन दा की हालत बिगड़ने लगी, तो अंग्रेजों ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। जेल के डॉक्टर और सिपाहियों ने उन्हें दबोच लिया। नाक से नली डाली। दर्द से वो चीखते रहे, लेकिन उनका संकल्प नहीं डिगा।
उनकी शहादत की खबर जब बाहर आई, तो पूरा देश रो पड़ा था।
कहा जाता है कि जब उनका शव लाहौर से कलकत्ता ले जाया जा रहा था, तो हर स्टेशन पर हजारों लोग फूल लेकर खड़े थे। कलकत्ता में उनकी अंतिम यात्रा में 6 लाख से ज्यादा लोग शामिल हुए।
सुभाष चंद्र बोस ने खुद उनके पार्थिव शरीर को कंधा दिया था।
लेकिन आज? आज कितने लोग उस 63 दिन की तपस्या को याद करते हैं?
मरते वक्त जतिन दा ने कहा था, "मैं कोई साधु नहीं हूँ, मैं बस एक साधारण इंसान हूँ जो अपने देश की गरिमा के लिए मरना चाहता है।"
आजादी चरखे से आई या बिना खड्ग-ढाल के, यह बहस का विषय हो सकता है। लेकिन यह सच है कि आजादी की नींव में जतिन दा जैसे नौजवानों की गल चुकी हड्डियां गड़ी हैं।
हमें यह आजादी खैरात में नहीं मिली, इसके लिए किसी ने अपनी जवानी के 63 दिन भूखे रहकर कुर्बान किए हैं।
हर भारतीय का कर्तव्य है कि वो जाने कि जिस हवा में वो सांस ले रहा है, उसकी कीमत क्या थी।
इस जानकारी को साझा करें ताकि आने वाली पीढ़ियां जान सकें कि असली 'हीरो' कौन थे।
यह पोस्ट केवल उन भूले-बिसरे नायकों को नमन करने के लिए है।
ट्रेन के दरवाजे के पीछे लिखे नंबर पर कॉल लगाया,,,"आप रेनू जी बोल रहीं है"
डरी ओर सहमी सी आवाज में रिप्लाई आया "जी हां, लेकिन आप कौन ओर आपको मेरा ये नंबर कहा से मिला"
"दरअसल वो ट्रेन,,,, दरअसल वो ट्रेन के डिब्बे में किसी ने आपका नंबर आपके नाम से लिख रखा है, शायद आपका कोई अच्छा दुश्मन या फिर कोई बुरा दोस्त होगा, जो भी हो, मुझे आपसे ये कहना था कि हो सके तो ये नंबर चेंज करवा लीजिये या फिर किसी अच्छे से जवाब के साथ तैयार रहिये, वैसे अब तक जितने कॉल्स आ गए, आ गए,,,,आज के बाद किसी का नही आएगा क्योंकि ये नंबर मैं डिलीट कर चुका हूं।
रेनू जी अब मैं फ़ोन रखता हूं अपना ख्याल रखियेगा।"
तब उसने मुझे बोला कि नए नए अनजाने नंबर और उनपे गंदे ओर भद्दे बातो की वजह से मैं बहुत परेशान थी,,आप जो भी हो आपने मेरी बहुत बड़ी हेल्प की है क्योंकि मुझे तो समझ ही नही आ रहा था कि ऐसे कॉल क्यों आ रहे है।
तभी से मुझे एक ओर दिशा मिली और मैं सार्वजनिक स्थानो पे लिखे ऐसे नंबर को मिटाने में लग गया हूं, ताकि किसी ना किसी को तो बचाया जा सके।
माना कि हम किसी बुराई की वजह नही है पर किसी अच्छाई की वजह तो बन ही सकते है।मेरा आप सभी से निवेदन है कि अगर आप कही भी इस तरह के नंबर ओर नाम देखो तो तुरंत मिटा दो ताकि एक अनजान खतरों से किसी की बहन बेटियो की हेल्प कर सको।
एक अकेले के साथ अगर लाखो का साथ मिल जाएगा तो स्थिती जल्दी बदलने लगेगी।