#Beltron में खोट तो है. नहीं तो नाराजगी और असंतोष इतना नहीं होता. हमने कल बताया था, बिहार सरकार मैनपावर आउटसोर्सिंग में बेल्ट्रॉन की मोनोपॉली तोड़ने पर विचार कर रही है. विभागों को दायित्व मिल सकता है. बस इस सूचना ने बेल्ट्रॉन से संबद्ध हजारों कर्मियों को खुश कर दिया. कमेंट्स से स्पष्ट होने लगा कि कथित शोषण से ये मुक्ति चाहते हैं. लेकिन, बेल्ट्रॉन का कंपनियों के साथ गड़बड़झाला ऐसा है कि पूछिए मत. आरोप और शिकायतें सुना रहे लोग, सरकार को ध्यान देना चाहिए.
हमने तो कहा ही है बिहार सरकार अभी परिवर्तन की अवस्था में है. इसलिए, नई सरकार के बनने के बाद सच-झूठ / जाल-फरेब सब बयां करेंगे. खैर, कल के पोस्ट पर आई टिप्पणियों के अवलोकन से ये बातें सरकार के संज्ञान में जरुर आनी चाहिए –
1. बहाल कर्मी बेल्ट्रॉन की वर्तमान व्यवस्था से मुक्ति चाहते हैं. वह बेल्ट्रॉन को एसएससी की तरह जरुर मानने को तैयार हैं, लेकिन किसी निजी कंपनी के गुलाम नहीं होना चाहते.
2. कर्मियों की आउटसोर्सिंग की जिम्मेवारी अलग-अलग विभागों को मिले, तो ये अधिक खुश होंगे. वे सरकार को मालिक मानना चाहते हैं.
3. वेतन भुगतान में विसंगति की शिकायत है. लेकिन इसका निपटारा इतना आसान नहीं है, यह हम भी समझते हैं. पर, सरकार से विचार की अपेक्षा सभी रखते हैं.
4. इन्हें गुस्सा तब आता है, जब बेल्ट्रॉन कहता है, कंपनी से बात करो. और, कंपनी इन्हें सुनने को तैयार नहीं होता. कोई रिस्पांस सिस्टम नहीं है.
5. शिकायत है, सरकार को नियमानुकूल जांच करना चाहिए जीएसटी मामले की. वैसे भी मानदेय कम है, फिर 18 प्रतिशत की जीएसटी कटौती इसलिए हो रही, क्योंकि ज्ञात- अज्ञात कारणों से सरकार ने इन्हें निजी कंपनी के हवाले कर रखा है.
6. कम मानदेय, फिर भी बहुत देरी से भुगतान- बड़ा दर्द है. बेल्ट्रॉन कंपनी को पैसा देती है, फिर कंपनी अपनी सुविधा देखती है.
7. बहुतों ने कमेंट्स कर यह शिकायत की है कि फरवरी महीने का पेमेंट अब तक नहीं हुआ है. होली-ईद-नवरात्र सब ऐसे ही. जबकि इन्हीं डाटाकर्मियों ने सरकार के आदेश पर सभी परमानेंट कर्मियों की सैलरी होली के कारण फरवरी माह में ही तैयार की थी. सोचें, दूसरे की सैलरी बना रहे, खुद नहीं पा रहे.
8. बहुत सारे यह भी बता रहे कि उनका यूटीआर मार्च के पहले हफ्ते के बाद ही आ गया, लेकिन पेमेंट अब तक अप्राप्त है.
9. नौकरी की आस लगाए आवेदक बेल्ट्रॉन से इस बात की अपेक्षा भी रखते हैं कि वह 4808 क्वालिफाइड कैंडिडेट्स का पैनल तुरंत जारी करे.
आज के लिए इतना ही. इस पोस्ट के बाबत बेल्ट्रॉन व अन्य किसी भी पक्ष का जवाब मिलता है, तो उसे भी अवश्य अपडेट करेंगे.
#ManpowerOutsourcing #NitishKumar #SamratChoudhary #BiharNews #DataOperator #ज्ञानेश्वर_की_डायरी
बिहार में सालों से Manpower Outsourcing का मतलब एक ही नाम रहा #Beltron.
सरकारी दफ्तरों में कंप्यूटर ऑपरेटर से लेकर डेटा एंट्री तक, हजारों युवा बिहार सरकार के तमाम विभागों का काम संभालते हैं.
अब खबर है कि सरकार Beltron की ये मोनोपॉली तोड़ने जा रही है. यानी अब सिर्फ एक एजेंसी नहीं, कई कंपनियां इस काम में आएंगी.
सवाल ये है- क्या इससे सिस्टम बेहतर होगा? या फिर बेल्ट्रोन कर्मियों की नौकरी और सुरक्षा पर नया खतरा खड़ा होगा?
हकीकत ये है कि ये कर्मचारी सालों से कम सैलरी, अस्थायी नौकरी और अनिश्चित भविष्य के साथ काम कर रहे हैं. और अब अगर नया सिस्टम आया, तो सबसे पहले असर इन्हीं पर पड़ेगा. है कि नहीं?
सरकार कह रही है- प्रतिस्पर्धा आएगी, पारदर्शिता बढ़ेगी. लेकिन कर्मचारी पूछ रहे हैं- हमारी गारंटी कौन देगा?
तो असली मुद्दा यही है —
मोनोपॉली टूटनी चाहिए, या फिर सरकार को उनका समायोजन करना चाहिए?
सबसे सबसे बड़ा सवाल तो यही है न भाई.
@officecmbihar@NitishKumar@samrat4bjp
#Beltron कर्मियों की बीस साल की प्रतीक्षा और धैर्य को पुरस्कृत करने का समय आ गया है. बिहार की नई सरकार को अपनी पहली उपलब्धि के रूप में बेल्ट्रॉन कर्मियों का समायोजन दर्ज करना चाहिए.
https://t.co/45zNpQSAGA
बिहार में #Beltron के लिए ठेके पर कर्मचारियों का इंतज़ाम करनेवाली कंपनी #Urmila का गोरखधंधा बेलगाम है. अभी कुछ पुराने सबूत फिर सामने आए हैं. बवाल फिर है. लेकिन सवाल ये है कि ये कौन है जिसने उर्मिला को अभयदान दे रखा है.
https://t.co/W7wIdui7Fy
@mmalayanil सर हमलोग डाटा एंट्री ऑपरेटर परिवार दिनांक 17/07/25 से लगातार हड़ताल पे हैं किंतु सरकार की ओर से कोई भी सकारात्मक पहल नहीं की जा रही हैं जबकि हमलोग सरकार के महत्वपूर्ण कार्यों में अहम भूमिका निभाते हैं, यह तो सरसर नाइंसाफी हैं
@beltron कर्मियों का इंतज़ार क्या क़यामत तक चलेगा? मुझे उसको परमानेंट नहीं करने का कारण आज तक समझ नहीं आया. महत्वपूर्ण बात यह भी है कि अगर वे सीधे सरकारी विभाग के तहत आ जाते हैं तो सालाना 100 करोड़ की बचत भी हो सकती है.
@NitishKumar@SanjayJhaBihar
#Beltron कर्मियों की लड़ाई अब नतीजे तक आई! पिछले कुछ वर्षों से जिन 20 हज़ार लोगों के अधिकार की आवाज़ उठाता रहा हूँ उनके लिए आज मेरे यूट्यूब चैनल पर फिर कुछ ज़रूरी…
सुप्रीम कोर्ट में बिहार सरकार,पुलों के गिरने पर जिस तरह से फ़ज़ीहत झेली, बलिहारी है. हज़ारों करोड़ बह गए, बेईमानों के पेट भर गए- लेकिन बेल्ट्रॉन कर्मचारियों को सरकार के तहत नहीं लेंगे.
स्कूल-अस्पताल-भवन-सड़क, हर जगह लोगों के पैसों की लूट को कैसे मैनेज किया जाए, इसमें दिमाग़ खपेगा, लेकिन बीस हज़ार परिवारों को चैन की नींद आए,इसका फ़ैसला नहीं किया जाएगा.
#beltron #bridge #SC #bihar
कल मैंने #FactsnFigures में #Beltron कर्मचारियों को नियमित नहीं किए जाने के बिहार सरकार के फैसले को समझना चाहा. दस्तावेज़ बहुत सारे मँगवाए, कई घंटे पढ़ा और पता चला कि जिन लोगों से बीस साल से डेटा एंट्री ऑपरेटर के तौर पर काम लिया जा रहा है, अगर उनको सरकार के तहत कर दिया जाए तो करोड़ों रुपए के जो वारे-न्यारे हो रहे हैं,वह रुक जाएगा. फिर जिनकी बल्ले बल्ले चल रही है,उनका क्या होगा? इसलिए फैसला है अड़े रहो. कम से कम मुझे तो यही लगा.
शनिवार को #Facts_n_Figures में
लंबे समय से हर शर्त पर खरा उतरने के बावजूद 20 साल से एक फैसले के इंतज़ार के खड़े 20 हज़ार #Beltron कर्मियों के लिए एक अभियान फिर. समझ से परे है सरकार के बेपरवाही और ऐसी नाइंसाफी.
न्यूज़ चैनल के हितों और ज़रूरतों के लिहाज से हर लड़ाई अभियान की तरह लड़ना संभव नहीं होता. बिहार में #Beltron कर्मियों के समायोजन के लिए मैंने इंडिया न्यूज़ पर कई शोज़ किए. उससे हलचल हुई. लेकिन नतीजा नहीं निकल पाया. बेल्ट्रोन कर्मियों की तरह कई और मामले हैं जिन पर मोर्चाबंदी समाधान के लिए ज़रूरी है. इसीलिए मैंने चैनल की जगह ख़ुद का अभियान छेड़ने का फ़ैसला किया. लंबे समय से मैं यह मानता रहा हूँ कि सिर्फ़ राजनीति की रस्सी थाम कर आप पत्रकारिता के साथ इंसाफ़ नहीं कर सकते. आम आदमी की बेहतरी की राह में बेहिसाब कबाड़ हैं. उनकी सफ़ाई भी ज़रूरी है.
#campaign #ranayashwant #youtube #forbetterindia
#बेल्ट्रॉन कर्मचारियों की माँग का मैंने लगातार समर्थन किया है. १५-२० साल से सरकारी दफ्तरों में ज़िम्मेदारी का काम निभाते रहे बीस हज़ार कर्मी किसी बारात में चोरी से खाना खाने आए लोगों की तरह हर वक्त भला क्यों डरे रहें? इम्तिहान देते हैं, इंटरव्यू देते हैं,नौकरी लेते हैं और ऐसी कि जब चाहें निकाल दें. अछूत सा बर्ताव क्यों होता रहा है जबकि उनके हाथ रोक देने से सरकार रुक जाएगी!