घुटनों से रेंग्ते रेंग्ते कब पैरो पे खड़ा हुआ...
तेरी ममता की छाओं में जाने कब मैं बड़ा हुआ...
काला टिका, दुध मलाई आज भी सब कुछ वैसा है...
मैं ही मैं हूं हर जगह, प्यार ये तेरा कैसा है...
कितना भी बड़ा क्यूँ ना हो जाऊं मैं माँ...
लेकिन आज भी मैं तेरा बच्चा हूँ...
तुम कहते हो कि तुम्हें बारिश से प्यार है
लेकिन उसमें चलने के लिए तुम छाता इस्तमाल करते हो,
तुम कहते हो तुम्हें हवा से प्यार है
लेकिन जब वो आती है तो तुम खिड़कियां बंद कर लेते हो, इसीलिए मैं डरता हूं जब तुम कहते हो कि तुम मुझे प्यार करते हो।
मंदिर में दाना चुगकर चिड़िया,
मस्जिद में पानी पीती है
मैंने सुना है राधा की चुनरी
कोई सलमा बेगम सिती है
एक रफी था महफ़िल में,
रघुपति राघव गाता था
एक प्रेमचंद जो
बच्चो को ईदगाह सुनाता था
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भगवान का दिया कभी अल्प नहीं होता,
जो टूट जाये वो संकल्प नहीं होता,
हार को जीत से दूर ही रखना,
क्योकि जीत का कोई विकल्प नहीं होता |…
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#Mahashivratri#Mahadev