ये पोस्ट लिखते वक़्त मेरे हाँथ काँप रहे हैं और इस बात की संभावना है कि पढ़ते वक़्त आप विचलित हो जायें, लेकिन NDA सरकार मौन है।
11 जून की रात सोमा (बदला हुआ नाम) घर के शौचालय गईं, जिसमें केवल एक पर्दा लगा था। आरोप है कि गाँव के ही रामू महतो, सूरज महतो और नीतीश महतो ने उन पर हमला किया। उनकी साड़ी खोलकर मुंह और हाथ बाँध दिए, ब्लाउज़ फाड़ दिया, छाती पर ब्लेड से वार किए और दुष्कर्म किया।
सोमा दर्द से कराह रही थी। उनके पति को लगा कि बिल्ली आवाज कर रही है तो उन्होंने बिल्ली समझकर दो बार डाँटा, लेकिन फिर उन्हें शक हुआ। उन्होंने बाहर आने के लिए कमरे का दरवाज़ा खोलना चाहा तो वह बाहर से बंद था। जिसके बाद उन्होंने बगल वाले घर में फोन किया। इसके बाद दरवाज़ा खुला और सब लोग सोमा की हालत देखकर रोने लगे। सोमा के पति अपनी ई– रिक्शा से सोमा को स्थानीय थाने लेकर गए। इसके बाद जो हुआ वो और डरावना है। सोमा के अनुसार "उन्हें थाने से भगा दिया और कहा कि पहले जाकर इसका इलाज़ कराओ” बेगूसराय पुलिस ने ख़ुद थानाध्यक्ष राजीव कुमार की 'लापरवाही, उदासीनता और संवेदनहीनता' मानते हुए उन्हें निलंबित कर दिया है।
डॉक्टरों ने सोमा के प्राइवेट पार्ट से 3–4 इंच लंबा लकड़ी का टुकड़ा निकाला। इतने जघन्य अपराध के बावजूद रामू और प्रदीप महतो को थाने से ही बेल मिल गई।
सम्राट चौधरी विभिन्न मंचों से महिलाओं के खिलाफ अपराध पर सख्त कार्रवाई की बात करते हैं, लेकिन सोमा के साथ हुई घटना ने पुलिस व्यवस्था और पूरे सिस्टम की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या न्याय और कार्रवाई का पैमाना जाति देखकर तय किया जा रहा है? अगर नहीं, तो फिर इतने गंभीर मामले में आरोपियों को इतनी आसानी से राहत कैसे मिल गई?
प्रिय ग़ाज़ियाबाद पुलिस, इस तरह एक पूरे समुदाय के नरसंघार के लिये खुलेआम भड़काने की घटना तो आतंकवाद की श्रेणी में आती है।
रासुका और UAPA जैसी धारायें भी कम हैं एैसे लोगों के लिये, उम्मीद है आप संविधान सम्मत काम करेंगे।
@ghaziabadpolice@Uppolice
चौकीदार ने क्या किया
बड़ा बेटा कारोबार संभालो
मझला बेटा टैक्स का भार संभालो
छोटा बेटा देश का भार संभालो
छोटे बेटे ने चीढते हुए पूछा
आप क्या करोगे
भाषण बाजी और विदेश यात्रा ...
मैं संगठन सृजन अभियान में बतौर पर्यवेक्षक उज्जैन गयी थी।बच्चे-बच्चे की ज़ुबान पर ज़मीन घोटालों की बात थी
खास तौर से 2028 के सिंहस्थ के लिए किए जा रहे 7,379 करोड़ के विकास के संदर्भ में
Indian Express ने भांडा फोड़ किया है कि मोहन यादव और परिवार ने उनके CM बनने के बाद से 253 एकड़ ज़मीन खरीदी है
आज उज्जैन में इनके पास कुल 245 plot और 335 एकड़ ज़मीन है
गौरतलब है कि ये सारी ज़मीन उज्जैन के उन इलाकों में खरीदी गई हैं, जहां मध्यप्रदेश सरकार Infrastructure Development का काम ज़ोर-शोर से कर रही है
मोहन यादव, उनकी पत्नी सीमा यादव , बेटा वैभव यादव, बहू शालिनी यादव बड़े भाई नारायण यादव समेत पूरे कुनबे ने सस्ती जमीनें खरीदकर एक massive Land Bank बना कर भ्रष्टाचार की नयी इबारत लिखी है..
तैयारी है सरकारी खजाने से इलाके के विकास की कई गुना कीमत वसूलने !
Indian Express ने देश के सामने तथ्य रख दिए हैं
देखना ये है कि कितने Media House इस बड़े खुलासे पर मोहन यादव को कठघरे में खड़ा करते हैं ?
कितने एंकर आज इस मुद्दे पर बहस करते हैं ?
(मैंने उज्जैन की अपनी प्रेस वार्ता में भी मुख्यमंत्री और उनके परिवार द्वारा ज़मीन हथियाने का उल्लेख किया था, जो कि ज़्यादातर अख़बारों ने छापने की हिम्मत नहीं दिखायी)
4th पिल्लर आज बेरिकेटिंग के उस पार खड़ा है ,
जिम्मेदारी तय न हो सवाल न पूछे जाए इस लिए मीडिया को 100 मीटर से अधिक दूरी पर ही रोक दिया गया।
@yadavakhilesh जी सही कहते थे बीजेपी वाले लोकतंत्र को खत्म कर देंगे।