क्या #ArtificialIntelligence हमारी #मातृभाषा और संस्कृति का 'साइलेंट किलर' बन रहा है? 🤖📉
तकनीक की अंधी दौड़ में हम सुविधा तो पा रहे हैं, लेकिन क्या अपनी पहचान खो रहे हैं? इस पर आपकी क्या राय है? नीचे लिंक पर मेरा पूरा लेख पढ़ें और अपने विचार साझा करें👇
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सोचिए, अगर आज देश में कोई मजबूर और कमजोर सरकार होती, तो वह अब तक अमेरिका के दबाव में आकर घुटने टेक चुकी होती।
लेकिन आज का भारत अपनी शर्तों पर व्यापार करता है। हम जिससे चाहते हैं उससे तेल खरीदते हैं, और अपनी मुद्रा (Rupee) में खरीदते हैं।
यही है असली आर्थिक स्वतंत्रता! 🇮🇳
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रूस के साथ रुपया-रूबल व्यापार: जब पश्चिम ने रूस पर प्रतिबंध लगाए, भारत झुका नहीं। मोदी जी ने रूस से सस्ता तेल खरीदा और पेमेंट 'रुपये' में करने का सिस्टम बनाया। आज जब खाड़ी देशों में युद्ध हो रहा है, त�� रूस से आ रहा तेल हमारी महंगाई को कंट्रोल कर रहा है।
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आज भारत की 'डी-डॉलराइजेशन' (De-Dollarization) रणनीति हमारी ��बसे बड़ी ढाल बन गई है।
अगर आज हम सिर्फ डॉलर (USD) पर निर्भर होते, तो तेल के दाम 150 रुपये/लीटर पार कर चुके होते और देश में भयंकर महंगाई आ जाती।
तर्कों और उदाहरणों से समझिए सरकार का 'मास्टरस्ट्रोक': ?
🧵👇अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण दुनिया के 30% तेल व्यापार का रास्ता 'हर्मुज जलडमरूमध्य' बंद होने की कगार पर है। पश्चिमी देशों और डॉलर पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं में हाहाकार मचा हुआ है।
लेकिन भारत शांत और सुरक्षित है। क्यों? क्योंकि मोदी सरकार ने इसका इंतजाम सालों पहले कर लिया था।