ऑनलाइन खरीदारी में सामान समय पर न मिले या खराब/��लत मिले, तो परेशान न हों। अपने अधिकार जानें और शिकायत के समाधान के लिए राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915 पर कॉल करें या 8800001915 पर WhatsApp करें।
~ @jagograhakjago द्वारा जनहित में जारी।
डॉक्टर साहब की गलती बस इतनी थी… कि उन्होंने इंसानियत दिखाई और वकील साहब को अपने छत पर AC लगाने दिया।
कुछ साल पहले पड़ोसी वकील ने कहा – “AC लगाना है, आपकी छत की तरफ रहेगा, अनुमति दे दीजिए।”
डॉक्टर स��हब ने बिना सोचे हाँ कर दी… क्योंकि लगा, पड़ोसी हैं – साथ देना चाहिए।
सालों तक चुप रहे…
पानी गिरता रहा, गर्म हवा आती रही, परेशानी होती रही... लेकिन उन्होंने कभी शिकायत नहीं की।
आज जब वकील साहब से सिर्फ इतना कहा कि अब इसे हटा दीजिए या सही जगह लगा दीजिए, हमें अब अपने छत की जरूरत पड़ेगी।
तो जवाब मिला –
“नहीं हटेगा… जो करना है कर लो।”
तब डॉक्टर साहब को समझ आया –
हर कोई आपकी अच्छाई को समझे, ये ज़रूरी नहीं। कुछ लोग उसे आपकी कमजोरी समझ लेते हैं।
आप पूरा वीडियो देखिये,
उसके बाद डिसाइड करें कि क्या डॉक्टर साहब ने इंसानियत दिखाकर गलत किया?
थाने में वीडियो-फोटो बनाना अपराध नहीं, नागरिक का अधिकार है: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट में एक सुनवाई के दौरान न्याय की वह तस्वीर उभरी, जो पूरे देश में पारदर्शिता और नागरिक अधिकारों की मिसाल बन गई है।
माननीय जस्टिस निरजर एस. देसाई की अदालत में जब पुलिस पक्ष की महिला अधिवक्ता ने तर्क दिया कि थाने के अंदर आम नागरिक वीडियो रिकॉर्डिंग या फोटोग्राफी नहीं कर सकते, तो न्यायाधीश ने सख्त स्वर में पूछा – “बताइए, किस कानून की धारा के तहत वीडियोग्राफी प्रतिबंधित है?”
यह सवाल केवल एक वकील से नहीं, बल्कि पूरे पुलिस तंत्र से था। मा��ला हिरासत में यातना से जुड़ा था। पुलिस ने अपने बचाव में कहा कि शिकायतकर्ता लोग घटना की वीडियो बना रहे थे। जस्टिस देसाई ने इस दलील को पूरी तरह खारिज करते हुए तीखे सवाल पूछे। उन्होंने पूछा कि अगर पुलिस अपना कानूनी काम कर रही है तो वीडियो से उसे क्या आपत्ति हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के 80 प्रतिशत CCTV कैमरे काम नहीं कर रहे हैं, फिर नागरिकों को रिकॉर्डिंग करने से कैसे रोका जा सकता है।
जब सरकारी वकील ने बार-बार CCTV का हवाला दिया, तो कोर्ट ने साफ कहा कि यह तर्क तभी दिया जा सकता है जब 100 प्रतिशत CCTV कार्यरत हों। लेकिन हकीकत यह है कि 80 प्रतिशत कैमरे खराब पड़े हैं।
भरी अदालत में न्यायाधीश ने स्पष्ट घोषणा की कि थाने में वीडियोग्राफी या फोटोग्राफी करना कोई अपराध नहीं है। कोई भी पुलिसकर्मी या सरकारी कर्मचारी आम नागरिक को सबूत के रूप में वीडियो बनाने या फोटो खींचने से नहीं रोक सकता। थाना ���ार्वजनिक स्थान है।
यह बयान न केवल उस मामले में निर्णायक साबित हुआ, बल्कि पूरे देश के लिए एक मजबूत संदेश बन गया। सोशल मीडिया पर वायरल हुई इस क्लिप को देखकर लाखों नागरिकों ने न्यायाधीश की तार्किक और साहसिक बहस की सराहना की।
यह फैसला इसलिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पुलिस जवाबदेही मजबूत होगी और हिरासत में मारपीट या दुरुपयोग के खिलाफ ठोस सबूत आसानी से तैयार किए जा सकेंगे। साथ ही नागरिकों के अधिकारों को भी मजबूती मिली है। थाना किसी प्रतिबंधित स्थान की श्रेणी में नहीं आता, इसलिए Official Secrets Act भी यहां लागू नहीं होता।
थाने या किसी सरकारी कार्यालय में शांतिपूर्वक, बिना ड्यूटी में बाधा डाले रिकॉर्डिंग करना कानूनी है। लेकिन हमेशा सावधानी बरतें – शांत रहें, आक्रामक न हों और यदि जरूरी हो तो दूसरे व्यक्ति की मदद लें।
यह सुनवाई सिर्फ एक मुकदमे क�� नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक सशक्तिकरण की बड़ी जीत है। जस्टिस निरजर एस. देसाई ने एक बार फिर साबित किया कि अदालत आम आदमी की आवाज और संवैधानिक मूल्यों की रक्षक है।
जागरूक रहिए। सजग रहिए। जब हर नागरिक अपने अधिकारों को जानता और इस्तेमाल करता है, तभी लोकतंत्र सही मायने में मजबूत होता है।
~ साभार: @NCIBHQ
यह यूपी के एक स्कूल का बुक चार्ट है –
इसे देखकर आप खुद तय कीजिए कि क्या आज के समय में विद्यालयों का मुख्य उद्देश्य वास्तव में शिक्षा का प्रसार ��वं विद्या दान रह गया है, या फिर यह धीरे-धीरे एक व्यवसाय में बदलता जा रहा है।
मैं अक्सर कहता आ रहा हूं कि,
हमारे देश में प्राइवेट स्कूल और प्राइवेट क्लिनिक/हॉस्पिटल सबसे बड़े “स्कैम” बनते जा रहे हैं। अगर समय रहते सरकार द्वारा इनपर ठोस कार्यवाही न की गई तो आने वाले कुछ वर्षों में नागरिकों को आर्थिक रूप से विकलांग करने में इनकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी।
आज स्कूलों की स्थिति यह है कि –
जहां किताबों की वास्तविक कीमत लगभग 500 रुपये होती है, वहीं अभिभावकों को मजबूरी में वही किताबें 5000 रुपये तक में खरीदनी पड़ती हैं। ठीक इसी तरह स्वास्थ्य क्षेत्र में भी आम लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। कई मामलों में 100 रुपये की दवा से ठीक होने वाली बीमारी के लिए मरीजों को 2 से 3 हजार रुपये तक की जांच और 4 से 5 हजार रुपये तक की दवाइयों (डॉक्टर की फीस अलग) पर खर्च करने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
सबसे ��िंताजनक बात यह है कि,
इन सब स्थितियों से सरकार अनभिज्ञ नहीं है, फिर भी इस पर प्रभावी कार्रवाई का अभाव दिखाई देता है। ऐसे में आम नागरिक के पास खुद को असहाय एवं ठगा महसूस करने के सिवा कोई विकल्प नजर नहीं आता।
आज जरूरत इस बात की है कि,
शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मूलभूत क्षेत्रों को मुनाफाखोरी से बचाया जाए और इन्हें वास्तव में सरकार के देखरेख में नियंत्रित किया जाना चाहिए, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।
~ साभार: @NCIBHQ
क्लास 3 के बच्चे की किताब,
दस प्रतिशत डिस्काउंट के बाद मात्र 23993/– रुपए
मुझे ये समझ नहीं आ रहा कि –
ये प्राइवेट स्कूल वाले किताबें बच्चों को पढ़ाते या या चासनी बनाकर पिलाते है?
#viralvídeo#privateschool
आज का सबसे बड़ा सवाल यही है –
क्या हम बच्चों को पढ़ा रहे हैं, या सिर्फ किताबों के बोझ तले दबा रहे हैं?
क्लास 1 के बच्चे के बैग में 15–20 किताबें ठूंस दी जाती हैं, मानो ज्ञान का वजन किलो में नापा जाता हो। लेकिन यही बच्चे 20 साल बाद डिग्री लेकर भी बेरोज़गारी की लाइन में खड़े नजर आते हैं। तो समस्या कहां है?
समस्या यह है कि हमने शिक्षा को समझने के बजाय “दिखाने” का माध्यम बना दिया है। ज्यादा किताबें = अच्छी पढ़ाई, इस गलत धारणा ने पूरे सिस्टम को खोखला कर दिया है। ��सल में बच्चे को समझ, कौशल और सोचने की क्षमता चाहिए न कि हर विषय की मोटी-मोटी किताबें।
इस स्कैम में दोषी सिर्फ स्कूल नहीं हैं,
बल्कि हमारे देश का पूरा शैक्षणिक सिस्टम ही दोषी हैं। प्राइवेट स्कूल शिक्षा के नाम पर किताबों का कारोबार चला रहे हैं। 300–500 रुपये में आने वाली किताबों का सेट, कमीशन के खेल में 5–6 हजार तक पहुंचा दिया जाता है। और दुखद यह कि इनमें से कई किताबें सालभर खुलती तक नहीं हैं। इसके ब��वजूद भी न तो शिक्षा मंत्रालय के कान में जू रेंगता हैं और न ही जनपद स्तरीय पदाधिकारियों को कुछ दिखाई पड़ता है।
आज हर माता-पिता मजबूर हैं –
क्योंकि “अच्छी शिक्षा” के नाम पर सवाल उठाने से डरते हैं। स्कूल जानते हैं कि यही डर उनका सबसे बड़ा बिज़नेस मॉडल है। और इसी डर व बिजनेस मॉडल के बीच में हम बच्चों को “भविष्य” देने के लिए आज ही उनका बचपन और सोचने की आज़ादी छीन रहे हैं। ��म सिर्फ किताबों का बोझ बढ़ रहा है, लेकिन समझ और कौशल से बच्चों को बहुत दूर कर रहे हैं।
~ साभार: @NCIBHQ
महत्वपूर्ण जानकारी
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अगर आप डिजिटल फ्रॉड का शिकार हुए है तो आपको ये जानकारी होना अति आवश्यक है। आरबीआई के प्रस्ताव के अनुसार अब ऑनलाइन ठगी के मामलों में ग्राहकों को ₹50,000 तक की डिजिटल धोखाधड़ी होने पर 85% तक या अधिकतम ₹25,000 तक मुआवजा बैंक को देना होगा।
इस नियम की सबसे अहम बात –
अगर बैंक द्वारा साइबर ठगी का शिकार होने पर ग्राहक पर लापरवाही का आरोप लगाया जाता है, तो इसे भी साबित करने की जिम्मेदारी बैंक की ही होगी।
यानी डिजिटल भुगतान के दौर में अब उपभोक्ताओं की सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है।
~ साभार: @NCIBHQ
Risk Management 💯
Importance of Cutting Losses Early in Trading nicely explained 👇
Courtesy : Price Action Trading Book 📘 by Sunil Gurjar
#Trading#RiskManagement
7. MAZDOCK - 80% IN FEW DAYS
- Prove leader
- Tightness + volume dryup
8. RVNL - 40% IN FEW DAYS
- Strong sector
- Tightness near highs
- Volume dryup
9. IREDA
4. 5-6% Stop Loss:
Successful monster stock trades often come with tight stop losses of 5-6%. This ensures risk is controlled, while allowing the stock room to move.
Why it matters:
Risk Management: Limits potential losses if the setup fails.
Tight Base Structure: Shallow bases tend to have smaller pullbacks.
Key Insight:
Place stops just below recent support levels or NRIB zones.
ADANIPOWER - 180% IN 16 WEEKS
- Linear upmove
- Base near 21ema
- Volume dryup at right side of the base
3. NRIB (Narrow Range Inside Bars):
Narrow range inside bars (NRIB) represent tight trading activity within a base. These patterns often precede explosive moves as the price compresses, signaling reduced volatility and potential for a breakout.
Why it matters:
Volatility Contraction: Price compresses, indicating an imminent directional move.
Institutional Footprint: Smart money often accumulates during low-volatility periods.
Key Insight:
Identify multiple consecutive narrow-range days, especially near the breakout point.
ADANIGREEN - 150% IN FEW WEEKS
- Linear upmove
- Base near 21ema
- Volume dryup at right side of the base
#DarvaX High Dry Fry PatterN
Stock Moves 20 to 50% on Huge Volumes
Then Correction Takes Place and Stock Falls
10 to 20% From High Peak
After that Correction is Over .. Then Comes Small Baby Candles Cluttering Together 🤝
#DarvaXClassRooM 🕯️
For DarvaX Stop Loss Rules ☀️
Pls Follow Below Easy Rules 👇
1) 5 EMA - If u are Very Short Term Trader
2) 10EMA - If u are Swing Trader
3) 20 EMA - If u are Positional Trader
4) 200 EMA - Investors
Price Should Close Below EMA on DCB for Exits 🙌
#NotesforAlertDarvaXians ✍️