@newsSChaudhry @IYC@INCIndia अगर बीजेपी का कार्य आपको नहीं दिखता तो सूरदास जी आपका कुछ नहीं हो सकता....
या गुलामी की इतनी आदत पड़ चुकी हैं...कि आँख के अंधे...नाम नैन सुख 😁😆
#जासूसी के केस में केजरीवाल हमेशा के लिए जेल जाएगा......
CBI, ED के बाद अब NIA की होगी एंट्री,
केजरीवाल ने जो जासूसी वाला देशद्रोह का महापाप किया हैं, उसे सुनकर देशवासियों के होश उड़ जाएँगे।
इसके पाप इस तरह है:
१. कंजरिवाल ने “War Against Country” की तर्ज़ पर भयानक साज़िश रची। इस आत्ममुग्ध बौने ने मोसाद और क��जीबी कि तर्ज पर Semi Spy और Semi Military Organization “Feed Back Unit” बनाने कि पूरी तैयारी की।
२. ना किसी से इसने सरकारी या केबिनेट की इजाज़त ली... 17-18 रिटायर्ड नमक हराम नौकरशाहों को इसके लिए नियुक्त किया गया, जिनके ज़रिए वो देश के सभी उच्चपद के लोगों की जासूसी कर सके, यें उनके फ़ोन टॅप कर रहा था।
३. जिनकी जासूसी ये कर रहा था वो थे, देश के प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, जानेमाने सुप्रीम कोर्ट के जज, हाई कोर्ट जज जस्टिस, वकील, नौकरशाह, जल, थल और वायु सेना के अधिकारी, विपक्ष के राजनेता उतना ही नहीं खुद की पार्टी के नेताओ, उनकी पत्नी, बेटी इन सबके फ़ोन टॅप करके जासूसी कर रहा था।
४. ये साज़िश तब उजागर हुई जब, इससे भी ज़्यादा भयानक जासूसी की साज़िश को अंजाम देने के लिए इसने “Military Grade Snooping Device” का ऑर्डर इजराइल को दिया। ये बौना पेगासस के पिताजी को ला रहा था।
५. इजराइल की उस कम्पनी ने ये कह कर इस Device को देने से मना कर दिया कि वो किसी भी राज्�� सरकार को ये नहीं दे सकती, उसके लिए उनको केंद्र की अनुमति दिखानी होगी।
६. बस फिर क्या, केजरीवाल ने सोचा, समझदार तो सिर्फ़ एक मैं हूँ, किसी कों क्या पता चलेगा, ऐसा मान कर उसने गृहमंत्रालय से ये कह कर Device को ख़रीदने के अनुमति माँगी की ये हमको ऐसे ही फ़ीड बैक यूनिट के लिए चाहिए।
७. जैसे ही ये अर्ज़ी मोटाभाई तक पहुँची, उनके होश उड़ गए… देश का एक मुख्यमंत्री देश के ख़िलाफ़ जासूसी की साज़िश करने के लिए उनसे ये कैसी अनुमति माँग रहा हैं।
बस इसके बाद गिरगिट की चाल सारी उलटी पड गई, गृहमंत्रालय ने तुरंत जाँच के आदेश दिए। उसमें ऐसे ऐसे तथ्य सामने आए की अब इस केजरी माफिया का बचना नामुमकिन है।
८. क़रीब 700 लोगों की जासूसी ये करवा चुका हैं, इसमें सबसे बड़ी भूमिका निभाई देश के प्रमुख मीडिया हाउस ने...
इन मिडीया दलालों ने निश्चित किया कि केजरीवाल से संबंधित कोई भी कमी, साज़िश, नाकामी और धोखाधड़ी की न्यूज�� उनके चॅनल पर ना आये । बराबर केजरीवाल का महिमामंडन इनके चॅनलो पर होता रहेगा, जिसके लिए इनको मोटी रक़म मिलती रहेगी।
अब देखिए बहुत जल्दी धमाके पर धमाके होंगे।
पंजाब में हुई अमृतपाल की गिरफ्तारी से ऑपरेशन शुरू हो चुका है।
(साभार /इंटरनेट)
@janakraj13 आज अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी पर मिर्ज़ा ग़ालिब का वो शेर याद आ गया..
"ये बंद कराने आये थे ,
तवायफों के कोठे मगर
सिक्को की खनक देखकर ,
खुद ही मुजरा कर बैठे ...!
केजरीवाल ने किस तरह से भारत के शानदार लोकतंत्र को शर्मसार किया है सोचिए
भारत में इसके पहले कई मुख्यमंत्री गिरफ्तार किए गए है :- बीएस यदुरप्पा, मधु कोड़ा, शिबू सोरेन, लालू प्रसाद यादव, जयललिता और उमा भारती
यह सभी मुख्यमंत्री तब गिरफ्तार हुए जब भारत में कांग्रेस सत्ता में थी
इसमें से उमा भारती तो सिर्फ इसलिए गिरफ्तार हुई क्योंकि उन्होंने हुबली में तिरंगा झंडा फहराया था जिस पर बाद में वक्फ बोर्ड ने यह कहा कि जिस जगह पर तिरंगा झंडा फहराया गया वह वक्फ बोर्ड की प्रॉपर्टी है और वक्फ बोर्ड की प्रॉपर्टी में बिना वक्फ बोर्ड की परमिशन से कोई तिरंगा नहीं फहरा सकता
लेकिन तब लोकतंत्र इतना खूबसूरत होता था और लोगों की आंखों में इतनी शर्म और हया होती थी कि जैसे ही उन्हें पता चलता था कि उन्हें गिरफ्तार कि���ा जाएगा वह तुरंत इस्तीफा दे देते थे ताकि भारत का संविधान और भारत का लोकतंत्र शर्मसार ना हो
लेकिन केजरीवाल पहला ऐसा निर्लज बेशर्म बेहया कमी-na दोगला इंसान है जो दांत चियारकर भ्रष्टाचार के वह भी शराब घोटाले के केस में जेल जा रहा है और जिस केस में इसका डिप्टी मनीष सिसोदिया डेढ़ साल से जेल में सड़ रहा है
हर बार जमानत याचिका यह कहकर कोर्ट खारिज करती है कि आपके खिलाफ बहुत सारे सबूत हैं
फिर भी बेशर्म केजरीवाल ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं दिया
📢 कबूतरबाज जब अपने कबूतरों को उड़ाते हैं तो कुछ कबूतर इतनी ऊँचाई पर चले जाते हैं कि आँखों से दिखना बन्द हो जाते हैं। कबूतरबाज इसको *'आकाशबन्द होना'* कहते हैं।
उस वक्त किसी के लिये यह अनुमान लगाना मुश्किल ही होता है कि कबूतर की वास्तविक स्थिति क्या है?
वह जानता है उसका *कबूतर चाहे जितना भी ऊँचा उड़ ले मगर बैठेगा अपने ही 'अड्डे' पर*।
(अड्डा उसको कहते है जो कबूतरबाज अपनी छत पर दो खड़े बाँसों पर दो बेड़े बाँस बाँधकर खड़ा किया गया होता है जिस पर कबूतर बैठते हैं।)
वापस आकार बैठता भी अपने अड्डे पर है।
कभी-कभी अपने साथ किसी अन्य आकाशबन्द कबूतर को भी साथ लेकर उड़ता दिखायी देता है।
जब कभी कबूतर मालिक को अपने कबूतर के साथ दूसरे कबूतर को ���डते देखता है तो अपने कबूतर व साथ उड़ रहे कबूतर का ध्यान आकर्षित करने के लिये अपने अन्य कबूतरों को भी दरबे से बाहर निकालकर अपनी छत पर लगे अड्डे बैठा देता है।
जमीन पर दाना-पानी डालता है।
(इस प्रक्रिया को *'भड़ी मारना'* कहते है जो नये कबूतर को बहकाने के लिये किया जाता है।)
अक्सर ऐसा होता है कि साथ उड़ रहा कबूतर इस भड़ी में फँसकर अपना अड्डा छोड़कर नये साथी कबूतर के अड्डे पर बैठ जाता है।
थोड़ी देर ��लग-अलग हिकमत से अड्डे का मालिक ज़मीन पर उतार ही लेता है कबूतर को।
अगर कोई हिकमत न काम आ रही हो तो इस नये कबूतर के पंख पर लग्गी की सहायता से *'लासा'* मार देता है।
(लासा एक प्रकार का लसलसा पदार्थ होता है जो कबूतरबाज गुड़ या शक्कर से बनाते हैं)
जब कबूतर के पंख पर लासा लग जाता है तो पंख चिपक जाते हैं और कबूतर चाहकर भी उड़ नहीं पाता है। उड़ने की कोशिश भी करे तो ज़मीन पर गिर जाता है।
जमीन पर आने के बाद कबू��र मालिक के हाथों में आ जाता है।
इसके बाद मालिक इस नये कबूतर के पंख काटकर दरबे में डाल देता है।
अब तक कबूतर को असलियत समझ में तो आ गयी होती है कि जिस ऊँचे अड्डे और दाना-पानी को देखकर अपने नये साथी कबूतर के अड्डे पर उतर गया उसकी असलियत क्या है।
मगर अब तो उसके पंख भी काट दिये गये।
एक-दो दिन तक दाना-पानी भी नहीं खाता है।
साथ में बन्द पुराने कबूतर उसके साथ मारकाट भी करते रहते हैं। इस मारकाट के समय ��ह पुराना कबूतर जिसके साथ वह इस नये अड्डे पर उतरा है अलग बैठकर आँख बन्द करके उड़ान की थकान उतार रहा होता है।
दो-चार दिन बाद उसी घर में दाना पानी लेने ही लगता है।
इस बीच अड्डे का मालिक किसी मादा/नर कबूतर के साथ उसका जोड़ा भी बना देता है।
महीनों बाद जब तक इस नये कबूतर के पंख उड़ने लायक होते है तब तक उसके दरबे में एक जोड़ी अण्डा भी हो जाता है।
अब पंख मिले तो अण्डों की वजह से भी अपने पुराने घर वापस न���ीं जा पाता है।
एक-दो महीने बाद वह भी इसी अड्डे से उड़कर आकाशबन्द होता है।
मौका मिलते ही किसी नये-नये आकाशबन्द हुए कबूतर को भी अपने साथ इसी नये अड्डे पर उतार देता है।
दूशरे कबूतर द्वारा लाये गये नये कबूतर को डराने के लिये दरबे में मारकाट करता है।
*आप और आपके बच्चे भी एक कबूतर हैं, नये वाले कबूतर।*
आपके आसपास खुरार्ट कबूतर/ कबूतरियाँ उड़ रही हैं।
*अपने अड्डे को पहचाने रहिये। अपने अड्डे के प्��ति प्रतिबद्ध रहिये।*
क्योंकि #जावेद_अख्तर खूब ऊँचा उड़ा, लम्बे समय तक आकाश बन्द रहा... मगर उतरा अपने ही अड्डे पर।
#राहत_इंदौरी भी आकाशबन्द रहा, मगर उतरा अपने ही अड्डे पर।
#मुफ्ती_मोहम्मद_सईद भी ठीक समय पर अपने अड्डे पर ही उतरा।
#हामिद_अंसारी ने तो दूसरों के अड्डेवाले न जाने कितने कबूतरों को ठिकाने लगाने के बाद उतरा अपने ही अड्डे पर।
इन्हीं खुरार्ट कबूतरों के साथ कुछ कबूतर/कबूतरियाँ भी उनके अड्डे पर उतर गये
लम्बी list है और लम्बी ही होती जानी है।
बस आप अपने आपको मजबूत रखिये। 🌏
@ocjain4 सच में बहुत ही सही कहा..👌🏻👏🏻
मैं भी राष्ट्रवादी हूँ और बीजेपी को मोदीजी की वज़ह से बहुत पसंद करती हूँ...
शुरुआत हुई अटलबिहारी वाजपेयी जी से..🌷🌷🌷🌷🌷🌷
मैं कुछ भी नहीं हूं।
मैं बस एक सामान्य इंटरनेट उपयोगकर्ता हूं जो भाजपा को लगभग शून्य महत्व देती है।
पार्टी में मुझे शायद ही कोई जानता हो.
आईटी सेल कोर टीम में रहना तो भूल जाइए, मैं बीजेपी की प्राथमिक सदस्य भी नहीं हूं।
2 रुपए तो छोड़िए, मुझे बीजेपी से 2 पैसे भी नहीं मिलते।
और मैं अकेली नहीं हूं, मेरे जैसे हजारों लाखों लोग हैं जो सिर्फ विचारधारा के लिए बीजेपी का समर्थन करते हैं
हम सिर्फ़ राष्ट्रवादी है
@Raajputob बहुत ही सही लिखा 🙏🏻👌🏻👏🏻
2010 में हम लोग मुंबई में थे हमारे घर के पीछे ही बम विस्फोट हुए थे....
शब्दों में बता नहीं पाऊँगी ... कितन��� डर से कांप गए थे...
भय इतना अंदर बैठ गया था कि उधर जाने में भी डर लगने लगा था ।
मैं किसी पार्टी का ना तो भक्त हुँ और ना ही कोई एजेंट ही हूँ। मैं केवल भारत का एक आम नागरिक हुँ। और होश संभालने से लेकर आजतक हमारे आसपास में जो कुछ हुआ है या देखा है उसके आधार पर अपने मन की बात आपको बता रहा हूँ। और मुझे विश्वास है कि जब आप पढ़ेंगे तो आपको भी लगेगा कि हाँ ये बात सत्य है।
हमारे पास खबरें कमो बेस अखबारों के माध्यम से ही आती थी। TV उतना नहीं थे जितने आज हैं। मोबाईल बहुत कम लोगों के पास ही होती थी। किसी तरह से कोई खबर आई लोगों को पता चला। जो कुछ सोचना था पढ़कर सोचा और अपने कामों में लग गए।
1990 में इतना भयावह तरीके से कश्मीर से हिन्दुओं को भगाया गया। सेना थी पुलिस थी और भारत के लोग थे मगर कुछ ना हुआ। बलात्कार हुए, असंख्य हत्याएं हुई। अंजाम देने वाले कश्मीर के मजहबी उन्मादी लोग थे। पाकिस्तानी या आतंकवादी भी थे इस घटना में मगर वो कम ही थे। नतीजा कमाया हुआ या पुरखों की संपत्ति परिवार आदि सब खत्म हो गया। और जो वहां से सब छोड़कर भागे वे आज तक संघर्ष कर रहे हैं।
साल 1990 अयोध्या राम मंदिर के लिए संघर्ष। ये घटना भी भ���रत के लिए एक कलंक ही है। यहाँ भी हिन्दुओं को खूनी संघर्ष झेलना पड़ा। सैकड़ों हत्याएं हुई, दंगे हुए, पुलिस की कार्रवाई में कई हिन्द मरे। और ये काले अध्याय के रूप में हमेशा याद किया जाएगा।
इसी तरह साल था 1992 अखबार कि एक खबर ने कोहराम मचा दिया। बच्चियों के अचानक किए जा रहे आत्महत्या ने इस मामले की पोल खोली। खासकर धन्यवाद उस अखबार का जिन्होंने अनगिनत बच्चियों को इस दलदल में फंसने से बचा लिया। मगर ��ब तक आंकड़ों के मुताबिक इसमें अजमेर में रह रही सैकड़ों बच्चीयां फंस चुकी थी।
साल था 2002 करीब 2000 की संख्या में उन्मादी भीड़ बेसब्री से ट्रेन का इंतजार कर रही थी। ये घटना गोधरा रेलवे स्टेशन गुजरात की है। ट्रैन साबरमती एक्सप्रेस। उपलब्ध आंकड़े के मुताबिक लगभग 59 कारसेवकों को उन्मादी भीड़ ने जिंदा जला दिया था।
जिसके वजह से गुजरात में दंगे भी हुए और लगभग 1500 से 2000 के आसपास के लोगों को अपनी जान गवानी ��ड़ी।
इसके अलावे देश विभाजन में अनुमानित लाखों लोग, UP का मुजफ्फराबाद के दंगे और भागलपुर के दंगे आदि में लोगों ने अपनी जानें गवाई।
ये सब क्यों हुए? जबकि देश मे कोर्ट थे, पुलिस थी, सेना थी और तमाम राज्य और केंद्र सरकारें भी थी। सोचियेगा जरूर😥
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उपर जिक्र घटनाओं के दौरान केन्द्र में सरकार किसकी थी ?
शायद सबको मालूम ही होगा। और अगर नहीं मालूम है तो जान लीजिए कि देश में कोंग्रेस की सरकार थी।😥
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हम या आप घर मे इसीलिए सुकून से हैं कि भीड़ तंत्र समझ गया है कि थोड़ी भी गरबरी हुई तो चिन्हित कर लिए जाएंगे और सजा के अलावे भारपाई भी करनी होगी। इसका उदाहरण दिल्ली दंगा या हल्द्वानी हिंसा से ले सकते हैं। क्योंकि इसमें शामिल लोग और दंगाई या उनके परिजन आज तक रो रहे हैं।😀😀
अरे मैं तो अपने आस पास के लोगों या सोशल मीडिया पर कुछ लोगों की धमकी सुन सुन कर थक चुका हुँ की हमारा भी दिन आएगा। या यूँ ��ह लीजिए कि उनको विश्वास है कि मोदी जी की सरकार जाएगी।😥
मेरे कहने का मतलब ये है कि सरकारें किसी की भी रहे पर हर व्यक्ति खुद को सुरक्षित महसूस करना चाहिए। पर मेरा मानना है कि आम लोगों की सुरक्षा में तमाम सरकारें विफल रही हैं। या इनके द्वारा हिन्दुओं को मूली के भाव मे आंका गया है।
आज हर जाती के लोग झंडा लेकर सड़क पर इसीलिए अपनी मांग लेकर निकल जाते हैं क्योंकि आप अब आजाद हैं और आपको महसूस हुआ है कि आप भी देश के नागरिक हैं। या इसे ऐसा भी कहें कि हिन्दुओं को सम्मान और अपनी बात बोलने का अधिकार मिला। क्योंकि जहाँ तक मैंने अपने जीवन काल मे ऐसा होते नहीं देखा था।
अब आते हैं सीधे मुद्दे पर👇👇
पैसों की भूख और आपका सपना आपकी मेहनत से ही सफल होता है। जितना मेहनत करेंगे और विवेक का इस्तेमाल करेंगे। उतने ही या उससे ज्यादा पैसे भी मिलेंगे और अच्छी कमाई भी होगी। अगर आपको लगता है कि फलानी सरकार आएगी ���र आप अमीर हो जाएंगे🤔 ये भ्रम आज से छोर दीजिएगा। क्योंकि सरकार के पास पैसा हम टैक्स के रूप में देते हैं। जिसे सरकार देश की तरक्की और गरीब कल्याण की योजनाओं पर खर्च करती है।🙏🙏 इसीलिए जागरूक बनिए और सरकार चुनिए जो बेहतर हो महसूस करिए।
और जब अच्छा लगे तो उसे वोट करिए🙏🙏
गृहयुद्ध...?
लोग यह सोचकर बैठे है कि देश गृहयुद्ध के किनारे खड़ा है और बहुत जल्द देश मे गृहयुद्ध छिड़ेगा। विशेषकर तब जब देश मे UCC, CAA लागू होगा। POK के विलय के समय जब पाकिस्तान भारत से युद्ध छेड़ देगा। या फिर तब... जब देश को हिन्द��राष्ट्र घोषित किया जाएगा।
देश की बहुसंख्यक आबादी यही सोचकर बैठी है कि एक न एक बार तो देश मे भीषण रक्तपात और दंगे होंगे। किन्तु आप मेरी यह बात नोट करके रख लीजिए कि उक्त सभी कार्य होंगे और बहुत जल्दी होने जा रहे है वह भी अगले एक दो वर्षों में मगर बिना किसी रक्तपात और दंगो के... क्योंकि...
यह असली साबरमती का संत नरसंहार और रक्तपात से बचने के लिए ही इतना समय ले रहा है। आज एक चक्रवर्ती सम्राट की ताकत ��खने वाला समर्थ शासक सत्ता की हनक के बल पर क्या नहीं कर सकता था।
किन्तु... उसे पता था कि यदि जोश में और ताकत के जोर पर यदि कुछ किया तो विप्लव तय है यह अलग बात है कि उसे कुचल भी दिया जाएगा। मगर वह व्यक्ति बिना उपद्रव के बिना रक्तपात के हमारे स्वप्न और उसके संकल्प को पूर्ण करने की ठानकर बैठा हुआ है।
आप स्वयं ही सिंहावलोकन कीजिए...
क्या 370 हटने पर कहीं कोई गड़बड़ी हुई?
राम मंदिर बनने पर कहीं कुछ भी हु��?
तीन तलाक बेन होने पर कहीं कुछ हुआ?
पाकिस्तान को हिजड़ा और कंगाल बनाने में कहीं कुछ मालूम पड़ा?
चीन को उसकी औकात याद दिलाने में कहीं कुछ हुआ?
मिशन अज्ञात के सफलतापूर्वक क्रियान्वयन में कहीं कुछ छींटे भी उस तक आए क्या?
तो आप खुद अंदाज लगा लीजिए कि वह बारिश के पहले पाल बांधने में कितना कुशल है। उसे इसमें पूरी महारत हासिल है। पर हाँ, आपको सावधान सतर्क और अपने आपको और अपनों को सुरक्षित करने की आवश्यकता से मैं इनकार नहीं कर रहा हूँ।
बस दो काम हमें करने है... समर्थवान राजा के साथ डटकर खड़े रहना और अपने समाज को जागृत बनाए रखना
मोदी दक्षिण भारत के दौरे पर लगातार रहे हैं। वे एक अत्यंत दृढ़ संकल्प व्यक्ति हैं। वे जो ठान लेते हैं उसे पूरा करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ते हैं।
भाजपा क��� लिए दक्षिण में पहले कर्नाटक का द्वार खुला। वहां लोकसभा के पिछले कई चुनावों से भाजपा ही बड़ी संख्या में सीटें जीतती आ रही है। विधान सभा के चुनावों में कांग्रेस भी सत्ता में आ जाती है। इस बार भी लोकसभा के चुनाव में बीजेपी अपने बेहतर प्रदर्शन का रिकॉर्ड बना कर ही रहेगी।
तेलांगना में अभी प्रदेश में कांग्रेस का शासन है। परन्तु लोकसभा में भाजपा अच्छा करेगी।
तमिलनाडू में भाजपा कितनी सीटें जी�� पाएगी यह तो कहना मुश्किल है। पर यह बात स्पष्ट होती जा रही है कि भाजपा का वोट प्रतिशत काफी बढ़ने जा रहा है। तमिल जन मानस हिन्दुत्व की ओर लौट रही है। द्रविड़ राजनीति अब बैकफुट पर आ रही है। इसमें मोदी की भूमिका तो है ही। किन्तु कहां के युवा भाजपा अध्यक्ष की अतिशय विशिष्ट भूमिका भी तो है ही। आगे तमिलनाडु दक्षिण का उत्तर प्रदेश हो जाएगा। ऐसा अब कहा जाने लगा है।
आंध्र में वर्तमान मुख्यमंत्री और उ��के विरोधी चंद्रा बाबू नायडू दोनों भाजपा से गठबंधन करना चाहते हैं। अभी तक भाजपा निर्णय पर पँहुची नहीं है।
केरल में प्रधानमंत्री ने महिलाओं के बीच अच्छी खासी पैठ बना ली है। वर्तमान चुनाव में इसका कितना असर होगा अभी नहीं कहा जा सकता है।
कुल मिलाकर दक्षिण में भाजपा अच्छी तरह प्रवेश कर रही है।
मोदी है तो मुमकिन है।
राम राम 🙏🚩🚩