आप कौन हैं मैं नहीं जानती,मैं कौन हूँ आपलोग नहीं जानते पर यदि आप हिंदू और हिंदुत्व की बात करते है,तो हम एक है…
जय हिंद,जय भारत@IND_vivekpandey @anoopghoshalbjp @iAjaySengar
श्रीमद्भागवत कथा में एक हाथ में महादेव का डमरू और त्रिशूल,
कंधे पर प्रभु श्रीराम के नाम वाला रामनामी भगवा गमछा और पीछे जय श्री कृष्णा जी के भजन..
अखिलेश यादव का ये स्वरूप लोगों को लग रहा एकदम नया और अनोखा..
सत्य साबित हो रहे हैं वीर सावरकर अपनी भविष्यवाणी में..
@yadavakhilesh@samajwadiparty
‘दिल्ली पुलिस कौन होती है परमिशन देने वाली?’: सौरव दास
10 अक्टूबर को जंतर-मंत�� पर होने वाले CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर प्रवक्ता सौरव दास ने ‘परमिशन’ शब्द के इस्तेमाल पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार के खिलाफ प्रदर्शन के लिए सरकार से अनुमति मांगना उन्हें अजीब लगता है। दास के मुताबिक, दिल्ली पुलिस का काम नागरिकों की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और ट्रैफिक व्यवस्था ��नाए रखना है।
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ज़ुबैर और ध्रुव राठी फैक्ट चेकिंग और यूट्यूबर का काम छोड़कर अब इस्तीफ़ा-इस्तीफा खेलने लगे क्या?
ये एक एक्टर भी इस वीडियो में है क्या नाम है? मैं सच में नाम भूल गया हूँ जाकर अभी किसी से पूछूंगा
CJP ने अब ख��ुद से ही ख़ुद को एक्सपोज कर दिया।
दिल्ली की सड़कों पर कांग्रेस के प्रथम परिवार का आचरण निहायत ही दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। इससे स्पष्ट है कि उन्हें संवैधानिकता से नहीं, केवल अराजकता से मतलब है।
संवैधानिक अधिकार नहीं, खानदानी अहंकार बोल रहा है। जनाधारविहीन कांग्रेस ने अपने आचरण से साबित कर दिया है कि अराजकता ही उसका एकमात्र सहारा रह गय�� है।
कांग्रेस पार्टी से मैं कहना चाहता हूं उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी आपको 50 सीटों के लायक समझती है, जबकि आप 50 घंटे से अधिक इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में फुटेज खा चुके हैं।
यानी मीडिया में फ़ुटेज खाने की चाहत में जितने घंटे की फुटेज मिली है उतनी सीटों के लायक भी आपका सहयोगी आपको उत्तर प्रदेश में देने नहीं समझता।
यह मीडिया में हल्ला और ज़मीनी हकीकत और आसमानी अहंकार का अंतर है।
स्नेह, विश्वास, संस्कार एवं आत्मीयता के पावन पर्व रक्षाबंधन की प्रदेश वासियों को हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं।
आइए, भाई-बहन के अटूट प्रेम के प्रतीक इस पवित्र पर्व पर हम सभी अपनी सनातन सांस्कृतिक विरासत एवं पारिवारिक मूल्यों को सुदृढ़ करने हेतु संकल्पित हों।
अभी आलोक शर्मा जी ने तथ्यों से विपरीत जाकर केवल राजनीतिक जवाब दिया। मैं समझ सकता हूं कि उनके मन में इतना आक्रोश क्यों है। 2016 से पहले, जब तक नीट नहीं था, प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में यूजी सीटें 20–50 लाख रुपये और पीजी सीटें 50 लाख से 1 करोड़ रुपये तक बिकती थीं। जाकर जांच कर लीजिए, ऐसे संस्थानों केl अधिकांश मालिक इन्हीं की पार्टियों से जुड़े थे और सैकड़ों करोड़ रुपये प्रतिवर्ष कमाते थे।
प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के 2016 से नीट लागू करने के बाद सामान्य और निम्न मध्यम वर्ग के बच्चों को भी मेरिट के आधार पर प्रवेश मिलने लगा और करोड़ों का यह कारोबार बंद हो गया। यही कारण है कि आज नीट बंद करने की मांग उठाई जा रही है।
152 पेपर लीक के मामलों में कई राज्यों के मामले शामिल हैं। नड्डा जी ने भी इसका उल्लेख किया। सचिन पायलट और उनकी ही पार्टी के विधायकों के खिलाफ देशद्रोह के मुकदमे दर्ज हुए थे। इसका नीट से क्या संबंध है? प्रधानमंत्री मोदी जी और अमित शाह जी को गाली देना, उमर खालिद, प्रेमानंद महाराज या भगवान राम पर टिप्पणी करना, इनका प्रवेश परीक्षा और शिक्षा व्यवस्था से क्या संबंध है?
नीट इंजीनियरिंग और मेडिकल के छात्रों की परीक्षा ��ै, जिसमें फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स, जूलॉजी और बॉटनी जैसे विषय होते हैं। इन विषयों का इन राजनीतिक मुद्दों से क्या संबंध है? सरकार चर्चा के लिए तैयार है, फिर चर्चा से परहेज़ क्यों?