रूबरु महबूब से इज़हार हो जब प्यार का
दिल में सरगम बज उठे आसार हो जब प्यार का ..
भीख उल्फ़त की किसी से मांगना वाजिब नहीं
हर गली कूचे में इक बाज़ार हो जब प्यार का ..
वज़ह कोई हो नहीं सकती कि दिल मैं तोड़ दूँ
सामने मेरे खड़ा हक़दार हो जब प्यार का ... !!
#naaz