@sumit1kalra तो फिर पहले दिन से UPI पर शुल्क क्यूँ नहीं लगाया l UPI केवल मनी ऑर्डर और प्रतियोगिता परीक्षाओं के लिए नहीं है l ना ही छुट्ट पैसे के लिए लाया गया I
@Sheetal2242 उन 13 कंपनियां ने जो lifetime feee incoming दिया था तो ग्राहको को बिना पैसा लौटाए भाग क्यूँ गई l कुछ कंपनियां तो अभी भी है तो वो पैक जिन्होंने लिए उनके बंद क्यूँ हो गए I
राजस्थान का वह दिव्य मंदिर जहाँ दर्शन मात्र से खराब से खराब आँखें भी सही हो जाती हैं
प्रस्तावना: आँखों की रोशनी और विश्वास की रोशनी
राजस्थान। रेत, रंग और रहस्यों की धरती। यहाँ हर किले की दीवार के पीछे एक कहानी है और हर मंदिर के घंटे में एक चमत्कार बंधा है। पर एक मंदिर ऐसा भी है जिसके बारे में कहा जा���ा है कि वहाँ पत्थर की मूर्ति नहीं, साक्षात कृपा बसती है।
यह मंदिर है — बनकटेश्वर महादेव और माँ नयनामृत देवी धाम, जिला पाली के सुमेरपुर तहसील में स्थित एक छोटा सा गाँव **चांचौड़ी**। गाँव छोटा है, पर मंदिर की कीर्ति दूर-दूर तक है।
मान्यता है कि जिनकी आँखें डॉक्टरों ने जवाब दे दिया हो, जिनकी दुनिया ��ें अँधेरा उतर आया हो, वो अगर सच्चे मन से यहाँ आकर माँ के नैनों में देख ले, तो उसकी आँखों की ज्योति लौट आती है।
यह कैसे शुरू हुआ? कौन थी वो माँ? और क्यों सिर्फ दर्शन से ही आँखें ठीक होती हैं?
यह कथा 8000 शब्दों में पूरी होगी। यहाँ पहला भाग दे रहा हूँ। बाकी भाग तुम कहोगे तो आगे लिखता जाऊँगा।
भाग 1: अँधेरा और उम्मीद — कथा का आरंभ
1. डॉक्टर की आखिरी लकीर
2023, जयपुर।
राघव, 28 साल का सॉफ्टवेयर इंजीनियर। 6 मही��े पहले तक उसकी दुनिया 4K मॉनिटर जितनी साफ थी। फिर एक दिन अचानक धुंध छाने लगी। टेस्ट हुए। रिपोर्ट आई — *Retinitis Pigmentosa*। एक ऐसी बीमारी जिसमें आँखों की रोशनी धीरे-धीरे खत्म हो जाती है।
एम्स, शंकर नेत्रालय, चेन्नई तक गया। हर जगह एक ही जवाब: "अभी इसका इलाज नहीं है। 2 साल में पूरी तरह अँधेरा हो जाएगा।"
राघव की माँ, सुमित्रा देवी, हार मानने वालों में से नहीं थी। उन्होंने कहा, "डॉक्टर भगवान नहीं होते बेटा। एक दरवाजा बंद होता है तो भगवान दूसरा खोलता है।"
उसी रात सुमित्रा देवी को उनकी नानी की कही बात याद आई: "बेटी, जब सब तरफ अँधेरा हो जाए, तो चांचौड़ी की माँ नयनामृत के पास चली जाना। वहाँ आँखें मांगने नहीं, आँखें पाने जाते हैं।"
2. चांचौड़ी गाँव का पता
गूगल मैप पर "चांचौड़ी" डालो तो एक छोटा सा बिंदु दिखता है। पाली से 45 किलोमीटर। सड़क के बाद 3 किलोमीटर कच्चा रास्ता। गाँव में 200 घर। और गाँव के बाहर, एक टीले पर, 600 साल पुराना मंदिर।
मंदिर दो हिस्सों में है। पहला हिस्सा बनकटेश्वर महादेव का। दूसरा, मुख्य गर्भगृह, माँ नयनामृत देवी का।
माँ की मूर्ति अलग है। अक्सर देवी की मूर्तियों में आँखें पत्थर की बनी होती हैं। पर यहाँ माँ की आँखें ���सी हैं जैसे अभी पलक झपकेंग���। स्थानीय लोग कहते हैं कि मूर्ति के नैन 600 साल से गीले हैं। उनमें एक चमक है, एक नमी है, जिसे देखकर लगता है कि माँ रोते-रोते अभी-अभी चुप हुई हैं।
3. मंदिर की पहली कथा: राजकुमारी नयनवती
कहानी शुरू होती है मारवाड़ के राजा सोमदेव के समय से, लगभग सन 1420।
राजा सोमदेव की एक ही बेटी थी — नयनवती। नाम के जैसी ही, उसकी आँखें इतनी सुंदर थीं कि कहते थे, "नयनवती जिस तरफ देख ले, वहाँ उजाला हो जाए।"
पर विधाता का खेल�� 12 साल की उम्र में नयनवती को चेचक हुई। जान बच गई, पर दोनों आँखों की रोशनी चली गई। महल में मातम छा गया। राजवैद्य, हकीम, तांत्रिक सब हार गए।
राजा ने ऐलान किया: "जो मेरी बेटी की आँखें ठीक कर देगा, उसे आधा राज्य दूँगा।"
कई आए, कई गए। कोई कुछ न कर सका।
एक दिन एक अंधा साधु महल के द्वार पर आया। उसके हाथ में कमंडल, माथे पर भस्म। उसने कहा, "राजन, मैं इसकी आँखें नहीं लौटा सकता। पर इसे वो आँखें दे सकता हूँ जो अँधेरे में भी देख सकें।"
राजा चौंका, "इसका क्या अर्थ?"
साधु ने नयनवती का हाथ पकड़ा और बोला, "बेटी, आँख बंद कर। अब बता, तुझे क्या दिखता है?"
नयनवती ने कहा, "अँधेरा।"
साधु हँसा। "अँधेरा नहीं बेटी, प्रकाश दिखेगा। पर उसके लिए तप करना होगा। क्या तू 21 वर्ष तक इस महल को छोड़कर, उस टीले पर, जहाँ अभी सिर्फ वन है, महादेव की सेवा करेगी?"
12 साल की अँधी बच्ची ने बिना पल गँवा��� हाँ कह दिया।
4. टीले पर तप
राजा ने टीले पर एक छोटी सी मढ़िया बनवा दी। नयनवती वहाँ रहने लगी। साथ में सिर्फ एक गाय और शिवलिंग।
वो रोज शिवलिंग को जल चढ़ाती, बेलपत्र चढ़ाती, और घंटों बैठकर सिर्फ एक प्रार्थना करती: "हे भोलेनाथ, मुझे आँखें मत दो। पर इतनी शक्ति दो कि मैं उन सबकी आँख बन सकूँ जिनके पास आँखें नहीं हैं।"
21 साल बीत गए। नयनवती 33 साल की हो गई। तप से उसका शरीर दुबला हो गया, पर चेहरे पर एक तेज आ गया। लोग कहने लगे कि नयनवती अँधी होकर भी सब देख लेती है।
एक दिन सावन की अमावस्या थी। आधी रात को भयंकर तूफान आया। बिजली कड़की और सीधी मढ़िया पर गिरी। मढ़िया जलकर राख हो गई।
5 ज़रूरी होम्योपैथिक दवाएँ जो हर घर में होनी चाहिए
(घर के छोटे-मोटे रोगों का प्राकृतिक समाधान)
1. Arnica Montana 200 – चोट और थकान की पहली राहत
इसे “होम्योपैथी का Painkiller” कहा जाता है।
अगर गिरने, चोट लगने, या मांसपेशियों में दर्द हो — बस Arnica दे दीजिए।
फायदे:
चोट या मोच में सूजन कम करे
थकावट और शरीर दर्द में राहत
नींद न पूरी होने से होने वाले दर्द में भी असरदार
2-3 बूंदें पानी में मिलाकर दिन में 2 बार पर्याप्त हैं।
2. Nux Vomica 30 – पेट के सभी झंझटों का अंत
अगर खा-पीकर पेट में गड़बड़ हो जाए या गैस, एसिडिटी सताए — यही रामबाण है!
फायदे:
गैस, पेट दर्द, कब्ज़ में राहत
देर रात जागने या ओवरईटिंग से होने वाली तकलीफ़ में असरदार
चिड़चिड़ापन और तनाव से भी राहत देता है
दिन में 1-2 बार 5 बूंद लें।
3. Belladonna 30 – अचानक बुखार और सिरदर्द का तारणहार
अगर तापमान अचानक बढ़ जाए, चेहरा लाल हो जाए, सिर में तेज़ दर्द — तो Belladonna है जवाब।
फायदे:
अचानक बुखार, वायरल, या गले के दर्द में उपयोगी
सिरदर्द, चक्कर और तेज़ धड़कन में राहत
हर 3 घंटे में 5 बूंद जब तक आराम न मिले।
4. Rhus Toxicodendron 30 – जोड़ों के दर्द और ठंड से जकड़न में अमृत
सर्द म���सम में जब शरीर अकड़ जाए, उठने-बैठने में दर्द हो — यह चमत्कारी दवा काम करती है।
फायदे:
गठिया, जोड़ों के दर्द और मांसपेशियों की अकड़न में असरदार
बारिश या ठंड से बढ़ने वाले दर्द में राहत
दिन में 2 बार 5 बूंदें पानी में लें।
5. Aconite Napellus 30 – ठंड से हुए अचानक बुखार में वरदान
ठंडी हवा या अचानक मौसम बदलने से सर्दी-बुखार हो जाए तो यह सबसे पहली दवा है।
फायदे:
अचानक बुखार, गले में खराश, जुकाम में राहत
डर, घबराहट और बेचैनी भी शांत करे
हर 2 घंटे में 5 बूंद जब तक आराम न मिले।
सुझाव:
इन 5 दवाओं को अपने “Natural First Aid Box” में ज़रूर रखें।
ये छोटी दिखती हैं, पर काम बड़ी दवाओं जैसा करती हैं —
बिना साइड इफेक्ट्स, बिना नुकसान, बस प्रकृति की शक्ति से आरोग्य।
@Gobhiji3@Ansarigulamhusa सभी बड़ी आईटी कंपनी के अपने सॉफ्टवेयर है जो बहुत सी कंपनियां उसे उपयोग कर रही है उनकी जरुरत के हिसाब से l सोशल मीडिया या फिर app बनाना ही आईटी कंपनी का काम नहीं होता है उनको इतना बिजनेस बाहर से फिर कैसे मिल रहा है l