“सरलीकरण-हकदारों के सपनों की ��ुहीम”
सरलीकरण की मुहीम आज से शुरू होने वाली कोई नई पहल नहीं है। यह एक लंबे समय से चली आ रही मुहीम है, जिसके तहत राजस्थान में सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों की सहभागिता से समय-समय पर सरलीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम संभव हुए हैं।
विधानसभा और लोकसभा चुनावों के दौरान भी अनेक जनप्रतिनिधियों ने विधायक एवं सांसद निर्वाचित होने के बाद सरलीकरण के इस महत्वपूर्ण विषय को सदन और सरकार के पटल पर मजबूती से रखने का विश्वास दिलाया था।
इसी क्रम में कुछ समय पूर्व प्रदेश के 75 से अधिक पक्ष एवं विपक्ष के विधायकों ने EWS सरलीकरण हेतु मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष को पत्र लिखकर राजस्थान विधानसभा से ���स हेतु केन्द्र को प्रस्ताव भिजवाने हेतु आग्रह किया था।
यह केवल किसी एक व्यक्ति या संगठन की मुहीम नहीं, बल्कि उन सभी हकदारों के सपनों और अधिकारों से जुड़ी मुहीम है, जो व्यवस्था में सरलीकरण और न्यायपूर्ण अवसर की उम्मीद रखते हैं। हमारा प्रयास है कि उनकी आवाज मजबूती से उठे और सरलीकरण की दिशा में ठोस एवं प्रभावी समाधान का मार्ग प्रशस्त हो।
आओ साथ चलें.......!
#सरलीकरण
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"समय और श्रम बचाने की कोशिश में औद्योगिक सभ्यता ने मनुष्य की संघर्ष शक्ति को निर्बल और उसकी दूरदृष्टि को सीमित बना दिया है। भौतिक प्राप्तियों में इस सभ्यता ने आश्चर्यजनक सफलता पाई है, लेकिन उन्हीं मापदण्डों से मानसिक और आध्यात्मिक प्राप्तियों का प्रयत्न 1/2
"पश्चिम की किसी क्रांति ने मनुष्य को अब तक स्थाई एकता का एक भी आधार प्रदान नहीं किया है। सच तो यह है, कि विज्ञान की प्रेरित क्रांतियों ने मानव एकता को निराश ही किया है। हमारी भाव-दृष्टि को अब ऐसी क्रांति की आकांक्षा करनी है, 1/2
"प्रतिहिंसा की भावना ही समाज की आत्म-रक्षक शक्ति है। यह जरूरी नहीं है, कि आक्रमण की भीषणता के अनुरूप ही प्रतिहिंसा और बदले की विकरालता हो। यह तो काल-परिस्थितियों के कारण घटती हुई अथवा बढ़ती हुई हो सकती है, किन्तु उक्त भावना का अस्तित्व नष्ट नहीं होना चाहिए।" 1/2
"साधारण कोटि के जीव अपनी निर्बलताओं को ही श्रेष्ठतायें समझकर उनसे दूर होने का यत्न ही नहीं करते। इसलिए श्रेष्ठ व��्तुओं के सामने से होकर गुजरने पर भी वे अपनी ही निर्बलताओं से चिपके रहने में अधिक सुरक्षा का अनुभव करते हैं।"
पूज्य श्री तनसिंह जी की 'डायरी' से साभार
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"जब हमारा वैयक्तिक जीवन समाज की एक खुली पुस्तक के रूप में जन-समुदाय के समक्ष आता है, तब ही हममें वह अकाट्य प्रभावशीलता उत्पन्न होती है, जिसके स्पर्श मात्र से प्रत्येक लोह कंचन की भाँति निखर आता है।"
पूज्य श्री तनसिंह जी ('गीता और समाज सेवा' पुस्तक से साभार)
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शक्तावतों का गुड़ा (सलूंबर) में चार दिवसीय प्रशिक्षण शिविर सम्पन्न
उदयपुर संभाग के सलूंबर प्रांत के शक्तावतों का गुड़ा में श्री क्षत्रिय युवक संघ का चार दिवसीय प्रशिक्षण शिविर 18 से 21 सितंबर तक आयोजित हुआ। 1/2
"कर्मशक्ति के प्राणवान रहने तक ही व्यक्ति शिक्षण के पद पर आसीन रहने का औचित्य सिद्ध कर सकता है।"
पूज��य श्री तनसिंह जी ('शिक्षक की समस्याएँ' पुस्तक से साभार)
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आजोदर (रानीवाडा) में चार दिवसीय मातृशक्ति प्रशिक्षण शिविर प्रारंभ
जालोर संभाग के रानीवाड़ा प्रांत के आजोदर गांव में श्री क्षत्रिय युवक संघ का चार दिवसीय प्रशिक्षण शि���िर 19 सितंबर को प्रारंभ हुआ जिसका संचालन रश्मि कंवर देलदरी द्वारा किया जा रहा है। 1/2
"प्रगति का अर्थ सतत् प्र��ाण है और किसी भी पीढ़ी को हर मंजिल के बाद नये संघर्षों की तैयारी में जुट जाना चाहिए, क्योकि साधना की अन्तिम मंजिल अस्तित्व का ही मिलन और विलय है।"
पूज्य श्री तनसिंह जी ('साधक की समस्याएँ' पुस्तक से साभार)
#ShriKYS
"दूसरों की असुविधा दूर करने के लिए हमारी सुविधाओं का त्याग करना पड़ता है। साधना तो इससे भी एक कदम आगे की बात बताती है, कि दूसरों की सुविधा के लिए हमें अपना हक भी छोड़ना पड़े तो प्रसन्नता पूर्वक छोड़ना चाहिए। 1/2
नेतावल खेड़ा(चित्तौड़गढ़)में चार दिवसीय प्रशिक्षण शिविर प्रारंभ
चित्तौड़गढ़ जिले के नेतावल खेड़ा गांव में श्री क्षत्रिय युवक संघ का चार दिवसीय प्रशिक्षण शिविर 18सितंबर को प्रारंभ हुआ। तारेंद्रसिंह झिनझिनयाली के संचालन में इस शिविर में 86 शिविरार्थी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं