सबसे बड़ी सन्तुष्टि इस बात की होती है कि ईश्वर साथ हैं, वे मार्ग दिखाते हैं, करुणा करते हैं एवं उन्होंने त्यागा नहीं है। लोग अपनी सीमित बुद्धि से कुछ भी कहें, कोई कहानी बनायें, लाँछन लगायें, चरित्र हनन करें ये उनकी अपनी मति है - पर हमें सन्तोष अपने आराध्य की उपस्थिति मात्र से है।
इनका जीवन भी स्पिरिचुअलिटी का गजब उदाहरण है,जहां एक अदद पार्षद की रिश्तेदारी मिल जाए तो लोग फॉर्च्यूनर के पीछे विधायक प्रतिनिधि लिखवाकर भौकाल मचाते हैं,वहां इन्होने देश के सबसे बड़े रसूख और चकाचौंध का हिस्सा बनने का खुला मौका होने के बाद भी मर्यादा और स्वाभिमान से जीवन गुजार दिया
@Vaibhavsingh008 party ki neeti bhim janta party wali h isiliye aalochana ho rha h. chahe brahman cm ho ya koi v wo party ki neeti ke tahat hi chalega. kuch v bakk de rhe ho
श्री मोहन जी भागवत से अनुरोध है कि आप एक 13वाँ ज्योतिर्लिंग भी स्थापित करें नीले पत्थर का। बंगाल में तो 'SC/ST ने जिताया' है, तो अब पंचतीर्थ के पश्चात् इतना तो कर हो सकते हैं।
'भारत माता' स्वयं मातृभूमि हैं, देवी हैं, उनको दुर्गा बनाने का कोई अर्थ नहीं। 'वंदे मातरम्' में ही उन्हें दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती कहा गया है। मैं कहता हूँ भागवत बौरा गया है तो लोग कहते हैं कि मेरी भाषा ख़राब है।
मेरा अनुमान गलत था. संघ सिर्फ बंगाल ही नहीं बल्कि पूरे भारत पर अपना बनाया धर्म थोप रहा है. ५१ शक्तिपीठों की संख्या ५२ करने का और कोई उद्देश्य नहीं है. अब भारत में धर्म की व्याख्या हमारे धर्मगुरु नहीं बल्कि खाकी चढ्ढी गैंग करेगा. शंकराचार्यों को अपमानित करने का उद्देश्य भी यही था.
कोई जीव किसी दूसरे जीव की नकल नहीं है इस धरा पर, सब अनुपम हैं। सबकी जीवन यात्रा अलग है, अपने जन्म का अलग ध्येय है। अतः किसी को भी एक दिशा में हाँका नहीं जा सकता है, हो सके तो उन्हें अपनी ओर से स्वतंत्रता दें; उन्हें अन्ततः अपना रास्ता मिल ही जायेगा। अत्यधिक हस्तक्षेप अक्षम्य है।
Welcome to India: 🇮🇳
-Where voters migrate from Bangladesh.
-Where slogans echo for Pakistan.
-Where the 2 child family pays the taxes.
-where the 12 child family enjoys the subsidies.
The irony of our system.
Imagine quitting a religion but keeping the entire aesthetic:
-The same Hindu wedding outfits.
-Murtis replaced with Buddha and Ambedkar portraits.
-Candles instead of a Yagna.
-A Buddhist monk instead of a Brahmin.
It’s not a new way of life, it’s a rebranding exercise with a 100% copy paste score.🥴
अगर एक ही जिले में एक ही व्यक्ति की 558 मूर्तियां एक ही दिन में लगाई जा रही हों तो ये स्पष्ट है कि एजेंडा उस स्थान की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को बदलने का है ताकि 20 साल बाद कोई दिलीप मंडल, रावण कह सके कि यह शिव, राम, कृष्ण का नहीं बाबासाहेब का देश है। रणनीति नई नहीं है। मुसलमान भी मजारों की स्थापना इसलिए ही करते हैं। परिणाम एक ही है। देश-प्रदेश की हिंदू पहचान की समाप्ति।
जिस देश का प्रधानमंत्री बस इवेंट मैनेजमेंट के भरोसे सत्ता में बना हुआ हो, वह सारे प्रशासन को बस इवेंट मैनेजमेंट में ही लगाकर रखेगा। आजकल विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में भी शिक्षकों को इवेंट मैनेजमेंट में ही लगाकर रखते हैं, या एग्जाम ड्यूटी होती हैं - अध्यापन ही गौण हो गया।