NIA ने एक अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैनडाइक और 6 यूक्रेनी नागरिकों को गिरफ्तार किया था.
ये लोग टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे. उसके बाद बिना अनुमति के मिजोरम गए और वहां से म्यांमार की सीमा पार कर गए.
वहां म्यांमार की सेना के खिलाफ लड़ रहे कुछ स्थानीय सशस्त्र समूहों (जैसे काचिन और चिन ग्रुप) को ड्रोन चलाने, बनाने और जैमिंग की ट्रेनिंग देने का आरोप है.
NIA को शक था कि इन समूहों का भारत के पूर्वोत्तर के कुछ उग्रवादी संगठनों से भी कनेक्शन हो सकता है, इसलिए शुरुआत में आतंकवाद कानून (UAPA) के तहत केस चलाया गया.
बाद में NIA ने चार्जशीट में UAPA नहीं लगाया, सिर्फ वीजा और अवैध एंट्री वाले छोटे इमिग्रेशन कानून के तहत चार्ज किया.
अब कोर्ट ने इन्हें एक महीने के लिए अपने देश (अमेरिका और यूक्रेन) परिवार से मिलने जाने की अनुमति भी दे दी है. शर्त यह है कि एक महीने बाद वापस आना होगा. ये सब अभी तिहाड़ जेल में हैं.
क्या अमेरिका जाने के बाद ये अपराधी वापस भारत आएगा? क्या मोदी सरकार में दम है कि वो अमेरिकी नागरिक को वापस भारत ला सके.
पहले ही NIA ने UAPA वाला मामला हटा लिया था.
मोहतरमा का नाम सीमा खन्ना है । ये चुनाव आयोग में IT director हैं और SIR के जरिए नाम हटाने की खुराफात इन्हीं की दिमागी उपज थी ।
ये राष्ट्रद्रोह की प्रबल दावेदारों में शामिल हैं ।
दिल्ली के राजीव चौक मेट्रो स्टेशन पर “नरेंद्र मोदी हाय हाय” के नारे लग रहें हैं। खास बात ये है कि ये कोई नेता या एक्टिविस्ट नहीं बल्कि आम लोग ये नारा लगा रहें हैं। देश का गुस्सा आसमान छू रहा है।
ये जंतर मंतर 2.0 की आहट है।
Double relief for Gyanesh Kumar by the same SC judge! He first disagrees with Justice Dipankar Datta, who held that the law made by the Modi govt for selecting ECs by committee of the PM, other minister of his choice & the LoP was unconstitutional. He then passes this order to stay the outstanding judgement of Allahabad HC & give relief to Ganesh Kumar’s daughter!
ये हमला अचानक से नहीं हुआ, बल्कि पूरी तरह से प्लान करके देश की मुख्य विपक्षी पार्टी के नेताओं पर हमला किया गया।
ऐसा पहले भी हुआ है और ये एक पैटर्न है कि लीडरशिप पर हमला करो, ताकि दूसरे कार्यकर्ता और वोटर डर कर चुनाव से दूरी बना लें।
जब भी ऐसा होता है, तो डर से लोग वोट डालने बाहर नहीं निकलते और वोटिंग प्रतिशत गिरता है, जिसका सीधा फायदा सत्ता पक्ष को मिलता है।
नकाब पहने लोग हाथ में पत्थर, डंडा, बैट, हॉकी स्टिक लेकर खड़े थे, तो पुलिस प्रशासन क्या कर रहा था?
वहां पत्रकारों पर भी हमला किया गया, जिससे घटना की रिपोर्टिंग न हो, फोटो और वीडियो शूट न कर पाएं।
ऐसे में चुनाव आयोग पर सवाल खड़े होते हैं कि क्या चुनाव आयोग Free and fair elections करवा रहा है?
कांग्रेस और विपक्षी पार्टियां लगातार चुनाव आयोग पर सवाल खड़े कर रही हैं। कैंडिडेट्स और विपक्ष के नेताओं पर हमला हो रहा है। पोलिंग बूथ पर हमला होता है लेकिन कोई कार्रवाई क्यों नहीं होती?
: @NasirHussainINC जी
📍 दिल्ली