मेहनत, पारदर्शिता और न्याय — तीनों जरूरी हैं
JSSC CGL परीक्षा को लेकर छात्रों द्वारा किए जा रहे आंदोलन को मैं सकारात्मक दृष्टि से देखता हूँ। परीक्षा व्यवस्था में सुधार, पारदर्शिता और अपने अधिकारों के लिए छात्रों का आवाज़ उठाना बिल्कुल सही एवं जायज है। यदि किसी परीक्षा में कहीं भी अनियमितता हुई है, तो निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वालों पर कठोर कार्रवाई भी होनी चाहिए।
लेकिन कुछ लोगों की गलती के आधार पर पूरी परीक्षा और पूरी चयन प्रक्रिया को गलत ठहराना या बिना प्रमाण के अफवाह फैलाना भी उचित नहीं है।
हम जैसे अभ्यर्थियों ने भी इसी परीक्षा को अपनी मेहनत, तैयारी और संघर्ष के दम पर पास किया है। हमने वर्षों तक मेहनत की है और अपने चयन एवं नियुक्ति के लिए न्यायालय तक की लड़ाई लड़ी है। उसके बाद हमें यह नौकरी मिली है।
हमने एक बार नहीं, बार-बार परीक्षा होने पर भी अपनी मेहनत और योग्यता के दम पर परीक्षा निकालने का हौसला रखा है। इसलिए हमारी मेहनत और योग्यता पर बिना प्रमाण के सवाल उठाना उचित नहीं है।
और अगर किसी को लगता है कि इस पूरी वैकेंसी को खत्म कर देंगे, तो मैं स्पष्ट कहना चाहता हूँ—
उन्हें यह खुशी कभी नहीं मिलेगी।
हमने यह नौकरी किसी की कृपा से नहीं, बल्कि अपनी मेहनत, योग्यता और संघर्ष के दम पर हासिल की है। जिस मेहनत और हिम्मत से हमने यह मुकाम हासिल किया है, उसी हिम्मत के साथ आगे भी अपने अधिकारों और अपनी मेहनत से मिली इस नौकरी को सुरक्षित रखने के लिए हर लोकतांत्रिक और कानूनी लड़ाई लड़ने की क्षमता रखते हैं। @JharkhandCMO@HemantSorenJMM@VinodPandeyJMM@The_FollowUp@ndtvindia@prabhatkhabar@aajtak
मैं Tejnarayan pandit (कुम्हार _प्रजापति, श्रेणी EBC)JSSC CGL selected हूं, मुझे अभय तिवारी का रिश्तेदार बता कर मेरी छवि को धूमिल किया जा रहा है।। कृपया कर तथ्यों को जॉच ले
@ABPNews@aajtak@ndtvindia@TheLallantop@The_FollowUp@ANI
मैं Tejnarayan pandit हूं जो कुम्हार _प्रजापति (EBC श्रेणी) से आता हूं ।अभय तिवारी न तो मेरा कोई रिश्तेदार है और न ही उससे मेरा दूर _दूर तक उससे कोई संबंध नहीं है।
कृपा मेरी छवि धूमिल नहीं करे, इससे मैं मानसिक रूप प्रताड़ित हो रहा हूं
@aajtak@ndtvindia@Lallntop1@ABPNews
झारखंड के मेरे सभी युवा साथियों,
जोहार,
“छात्रों की बात - छात्रों के साथ” अभियान
(https://t.co/1Tf2OisNV9)
के तहत अब तक झारखंड के 8,500 से अधिक युवा साथियों ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर अपने महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं।
OMR से लेकर परीक्षा कैलेंडर, स्कोरकार्ड, प्रश्नपत्र, परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता, तकनीक के बेहतर उपयोग और JPSC सहित दोनों आयोगों में संवैधानिक दायरे में आवश्यक और जरूरी सुधारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुझाव हमारे पास आ रहे हैं।
जैसा मैने पहले भी कहा हमारा उद्देश्य केवल समस्याओं पर चर्चा करना ही नहीं है। हम वर्तमान की चुनौतियों का समाधान करते हुए ऐसी परीक्षा व्यवस्था का निर्माण करना चाहते हैं, जो वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए और पारदर्शी, निष्पक्ष, सुरक्षित, विश्वसनीय और जवाबदेह हो।
इसलिए मैं झारखंड के अपने सभी युवा साथियों से फिर अपील करता हूँ कि आप सभी अपने सुझाव देना जारी रखें।
आपका एक सुझाव केवल आज की परीक्षा व्यवस्था नहीं, बल्कि झारखंड के हजारों-लाखों युवाओं का भविष्य बेहतर बनाने में योगदान देगा।
यह सुधार राज्य सरकार का अकेला प्रयास नहीं होगा। यह झारखंड के मेरे युवाओं साथियों की जनभागीदारी से होने वाला सुधार होगा।
छात्रों की बात... छात्रों के साथ...
जोहार!
परजीवी भाजपा ने कल भी युवाओं के आंदोलन को अपना राजनीतिक मंच बनाने की कोशिश की।
छात्रों की बात...छात्रों के साथ होगी और झारखंड के मेरे युवा साथियों को न्याय मिलकर रहेगा।
अभिनय जी, जोहार!
JSSC CGL का मामला माननीय हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक गया। लंबी सुनवाई हुई, दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं और उपलब्ध साक्ष्यों पर न्यायालय ने अपना निर्णय दिया। न्यायालय के आदेश के आलोक में ही परीक्षाफल का प्रकाशन हुआ और परीक्षा को रद्द नहीं किया गया।
अब सवाल यह है कि जब मामला न्यायालय में गया, पूरी कानूनी प्रक्रिया हुई और सर्वोच्च न्यायालय तक से निर्णय सामने आया, तो सरकार उस न्यायिक आदेश की अवहेलना कैसे कर सकती है?
राजनीतिक बयानबाजी और सोशल मीडिया के नैरेटिव से न्यायालय का फैसला नहीं बदला जा सकता। अगर किसी को फैसले पर आपत्ति है, तो उसका रास्ता भी कानून और न्यायपालिका ही है, न कि युवाओं को भ्रमित करना।
झारखंड के युवाओं के भविष्य को राजनीतिक स्वार्थ की भेंट चढ़ाने के बजाय तथ्यों और न्यायालय के फैसले का सम्मान किया जाना चाहिए।
@JmmJharkhand@abhinaymaths