#न_जन्म_हुआ_न_मरा_कबीरा
ऋग्वेद मण्डल 9, सूक्त 93, मंत्र 2 के अनुसार परमात्मा सशरीर पृथ्वी पर आता है, वही साक्षात् रुप कबीर साहेब का है, जिनका जन्म नहीं हुआ बल्कि सशरीर प्राकट्य हुआ।
इसी ऐतिहासिक सत्य के उपलक्ष्य में संत रामपाल जी महाराज की पावन उपस्थिति में 1/2
वेदों में पूर्ण परमात्मा को अजन्मा बताया गया है। कबीर साहेब के प्राकट्य से जुड़ी मान्यताओं पर विचार करना और शास्त्रों का अध्ययन करना हम सभी के लिए महत्वपूर्ण है।
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2Days Left Kabir Prakat Diwas
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संत गरीबदास जी महाराज ने भी अपनी अमरवाणी में स्पष्ट किया है कि जिसके जन्मदाता कोई माता-पिता नहीं हैं और जिसके जन्म का कोई प्रमाण नहीं है वह केवल पूर्ण ब्रह्म कबीर साहेब है।
गरीब, मात पिता जाके नहीं, नहीं जन्म प्रमाण।
#संतरामपालजी_का_वरदान 1500 फुट गहरे सरकारी ट्यूबवेल के हानिकारक खारे व गर्म पानी से चर्म रोगों से पीड़ति ग्रामीणों के लिए संत रामपाल जी महाराज द्वारा शुद्ध पेयजल अभियान के तहत नहर पर मीठे पानी के ट्यूबवेल का प्रबंध किया गया।
#शुद्ध_जल_पियेगा_हिंदुस्तान
कबीर वो, जो कभी जन्मे न मरे अर्थात अजन्मा ओर अविनाशी जिसके कोई माता पिता नहीं अर्थात सब के जनक सबसे प्रथम प्रभु, स्वयं प्रकट होने वाला अर्थात स्वयंभू काल के बंधनों से छुड़ाने वाला अर्थात बंदीछोड पापों के नाश करने वाला अर्थात संकटमोचन।।
#SantRampalJiMaharaj#kabirprakatdivas
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आज से लगभग 600 वर्ष पहले, काशी के लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर परमेश्वर कबीर जी का सशरीर प्राकट्य हुआ था।
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ऋग्वेद मंडल 9, सूक्त 93, मंत्र 2 इस बात की पुष्टि करता है कि ईश्वर पृथ्वी पर शारीरिक रूप से प्रकट हुए। यह कबीर साहब के सच्चे इतिहास से मेल खाता है, जिन्होंने कभी जन्म नहीं लिया बल्कि भौतिक रूप में प्रकट हुए
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600 साल पुराना रहस्य आज भी काशी की धरती गवाह है!
कबीर साहेब वह अविनाशी परमात्मा हैं जो हर युग में जन्म नहीं लेते बल्कि सशरीर प्रकट होते हैं।
पांच तत्व की देह ना मेरी, ना कोई माता जाया। जीव उदारन तुम को तारन, सीधा जग में आया। कबीर साहेब ही पूर्ण परमात्मा हैं।✨🪴🙏🏻
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कबीर साहेब प्रकट दिवस"वह पावन दिन है,जब सर्व ब्रह्मांडों के रचनहार स्वयं कबीर परमेश्वर सत्यलोक से चलकर,हम भटकती हुई जीवात्माओं को तारने के लिए पृथ्वी पर सशरीर अवतरित हुए।
पांच तत्त्व की देह ना मेरी,ना कोई माता जाया।
जीव उदारन तुम को तारन,सीधा जग में आया।
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इसी ऐतिहासिक सत्य के उपलक्ष्य में संत रामपाल जी महाराज की पावन उपस्थिति में 629वां कबीर साहेब प्रकट दिवस 27-29 जून को मनाया जा रहा है।
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जिनका नहीं जन्म का कोई प्रमाण, वह है 3 कबीर भगवान
बदीछोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज
की पावन उपस्थिति में 629 वां कबीर परमेश्वर प्रकट दिवस, 29 जून
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ना मेरा जन्म, ना गर्भ बसेरा, बालक बन दिखलाया। काशी नगर जल कमल पर डेरा तहाँ जुलाहे ने पाया।
ऋग्वेद मण्डल 10, सूक्त 4, मंत्र 3 में स्पष्ट उल्लेख है कि परमात्मा का जन्म नहीं होता वह सशरीर प्रकट होता है, और वही परमेश्वर कबीर जी हैं।
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अजन्मा परमेश्वर, ** जन्म-मृत्यु से परे कबीर साहेब
कबीर साहेब के न कोई माता-पिता हैं, न उनका जन्म-मृत्यु का कोई बंधन है। वे अविनाशी और सर्वशक्तिमान पूर्ण परमात्मा हैं, जो हर युग में जीवों के उद्धार हेतु सशरीर धरती पर
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वेद कहते हैं, परमात्मा सशरीर आता है!
ऋग्वेद मण्डल 9, सूक्त 93, मंत्र 2 के अनुसार परमात्मा सशरीर पृथ्वी पर आता है, वही साक्षात् रूप कबीर साहेब का है, जिनका जन्म नहीं हुआ बल्कि सशरीर प्राकट्य हुआ।
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Kabir Sahib Prakat Diwas is the auspicious day when the Sover-eign Creator of all universes, Supreme Lord Kabir, descended in His divine physical form from Satyalok to this Earth, with the purpose of redeeming and liberating all wandering souls
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वे सन् 1398, विक्रमी संवत् 1455 में, काशी के पवित्र लहरतारा तालाब में खिले कमल के पुष्प पर शिशु रूप में सशरीर प्रकट हुए थे।
यह कोई सामान्य जन्म नहीं, बल्कि साक्षात् परमात्मा का प्राकट्य था।
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