#jays#the_jays_EXPRESS
जयस प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक हुई सफल,
सभी जयस युवाओं को बधाई, यह पल है अद्भुत और फल।
हर युवा ने दिखाया अपना जोश और जज़्बा,
मिलकर चलते हैं, साथ में बढ़ते हैं, यही है हमारा मंज़िल का सफर।
आप सबकी मेहनत ने दी है नई पहचान,
इस संगठित प्रयास से हो रही है सच्चाई की बहार,
जयस के संग हम सब हैं, इस रंगीन संसार।
युवाओं की शक्ति से जुड़े हैं हम,
सपनों को साकार करने का है ये बंधन।
मिलकर हम लाएंगे बदलाव की नई लहर,
जयस के नेतृत्व में, हम सब हैं एक अद्भुत समर्पण।
आगे बढ़ते रहो, कभी ना हो पीछे,
जयस के नाम से लहराएं ये सपने।
डॉ. हिरालाल अलावा
राष्ट्रीय जयस संरक्षक
#जयस_की_शक्ति #बदलाव_की_लहर"
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नोटबंदी से नकली नोट मिटाने का था दावा,
पर देखो अब अनुपम खेर की फोटो नोटों पर छा गया तमाशा।
लाखों की धोखाधड़ी, सोने की लूट हो गई,
और ज्वेलर्स ने जब नोट देखा, तो सर पकड़ लिया हाय ये क्या हो गया।
कहां गए वो वादे, नकली नोट रोकने की सियासत,
अब तो खुद नोट पर ही है नया नायक की इमारत।
'काले धन' की सफाई का नारा लगा,
पर नकली नोटों ने फिर से बाजी मार लिया, क्या खूब खेल हुआ!
कहानी अब वही पुरानी,
असली बदल गया, और नकली बन गई कहानी!"
#नोटबंदी #नकलीनोट #धोखाधड़ी
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समय की सच्चाई बहुत गहरी होती है। जब किए गए कर्मों की सज़ा मिलती है, तो वकील, दलील, और अपील किसी काम नहीं आते। समय की अदालत में केवल कर्मों का लेखा-जोखा चलता है।
"जब वक्त हिसाब मांगता है,
तो हर शख्स बेबस सा खड़ा नजर आता है,
वकील, दलील, अपील सब व्यर्थ हो जाते हैं,
कर्मों का फल वही, जो समय सुनाता है।"
समय की शक्ति से बड़ा कोई न्याय नहीं, इसलिए हमेशा सही कर्म करना ही सबसे अच्छा रास्ता है।
"सीधी जिले में 'डिजिटल इंडिया' का असली चमत्कार!
जमीन पर नेटवर्क नहीं मिला, तो कार्यकर्ताओं ने पेड़ पर चढ़कर सदस्यता अभियान चलाया!
वाह रे 20 साल की मप्र की सत्ता और 10 साल की डबल इंजन की सरकार, जहां जनता को नेटवर्क के लिए भी आसमान छूना पड़े!
बीजेपी के कुशल मार्गदर्शन में ये भी 'विकास' की नई परिभाषा बन गई है— 'पेड़ पर नेटवर्क, ज़मीन पर सरकार की नीतियां!' 🌳📶
शायद अब अगला चुनाव भी आसमान से ही लड़ा जाएगा! 😉"
#डिजिटलइंडिया #डबलइंजनकागुण #विकास
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20 साल से मध्यप्रदेश में और 10 साल से केंद्र में बीजेपी की 'डबल इंजन' सरकार, लेकिन आदिवासी इलाकों में बेरोजगारी का "इंजन" रुकने का नाम ही नहीं ले रहा!
बड़वानी, धार, झाबुआ, खरगोन से लेकर बैतूल और मंडला तक—पूरे आदिवासी जिलों के गाँव खाली हो रहे हैं, लोग रोजगार की तलाश में गुजरात की ओर पलायन कर रहे हैं। लेकिन @DrMohanYadav51 जी की सरकार को लगता है कि बेरोजगारी 1% से भी कम है। क्या यह "आंकड़ों का जादू" है या आदिवासियों की दुर्दशा को छुपाने की कोशिश?
बीजेपी सांसद और मंत्री, संसद और विधानसभा में आदिवासियों के पलायन पर चुप्पी साधे हुए हैं। केवल चमचागिरी में व्यस्त हैं, लेकिन आदिवासी समुदाय के हितों की रक्षा के लिए आवाज उठाने का समय नहीं मिलता।
आज जरूरत है कि नई पीढ़ी के युवा आगे आएं, अपने हक के लिए लड़ें, और समाज की आवाज बनें।
आखिर कब तक यह सिलसिला चलता रहेगा?
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#बेरोजगारी_का_सच #आदिवासी_विकास #पलायन #BJPFail
"हमारी संस्कृति, हमारे पूर्वजों की धरोहर है,
इसे मिटाने का हर षडयंत्र अब बेअसर है।
मतभेद और पद-प्रतिष्ठा को छोड़ना होगा,
आदिवासी एकता के लिए एक मंच बनाना होगा।
जब तक साथ हैं, तब तक हर मुश्किल आसान है,
हमारे संघर्ष में छिपी जीत की पहचान है।
आओ मिलकर इस धरोहर को बचाएं,
अपनी जड़ों से जुड़े रहें, यही सबसे महान है।
जयस का सफर, एकता का संदेश है,
हर कदम पर समाज का हित, यही विशेष है।"
#संस्कृति_की_रक्षा #आदिवासी_एकता #जयस
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#jays#the_jays_EXPRESS#मिशन_युवा_नेतृत्व
मध्यप्रदेश के बड़वानी जिले मे रोजगार की तलाश मे पुरे गाँव के गाँव खाली होकर गुजरात चले जाते है बेरोजगारी के हालात सिर्फ बड़वानी जिले तक ही सिमित नहीं है ऐसे हालात मध्यप्रदेश के सभी आदिवासी बाहुल्य जिलों के है चाहे, धार झाबुआ,रतलाम, खरगोन, खंडवा, मंडला डिंडोरी, बैतूल सभी आदिवासी बाहुल्य जिलों मे बेरोजगारी के कारण भयंकर पलायन होता है लेकिन मध्यप्रदेश की बीजेपी सरकार की नजरों मे प्रदेश मे 1 प्रतिशत के कम बेरोजगारी है जबकि ग्राउंड रिपोर्ट कुछ और हकीकत बयां करती है सरकार की योजनाए आदिवासी क्षेत्रों मे सिर्फ कागजो तक सिमित है मध्यप्रदेश मे शासन प्रशासन को आदिवासी बाहुल्य जिलों मे हो रहे पलायन से कोई लेना देना नहीं कभी धार,झाबुआ, बड़वानी खरगोन के कालेक्टरों ने,कमिश्नर ने और प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव जी ने आदिवासी क्षेत्रों मे हो रहे आदिवासियों के रोजगार की तलाश मे पलायन को लेकर कोई समीक्षा मीटिंग नहीं ली और तो और बड़वानी जिले मे दो दो बीजेपी के सांसद एक राज्यसभा और एक लोकसभा दोनों ने कभी भी संसद के भीतर आदिवासियों के हो रहे पलायन को रोकने के लिए संसद के भीतर एक शब्द नहीं बोला सिर्फ बीजेपी की चमचागिरी करने से फुर्सत नहीं है ऐसे मे कैसे उनके संसदीय क्षेत्र और आसपास के जिलों के आदिवासियों का भला होगा मध्यप्रदेश की बीजेपी सरकार आदिवासी जिलों मे निजीकरण को बढ़ावा देकर हर सरकारी संस्था मे आउटसोर्स से तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों को अन्य वर्ग से भर कर संवैधानिक आरक्षण को धीरे धीरे ख़त्म कर रही है हमारे नेता जनप्रतिनिधि सब आम आदिवासियों को मुर्ख बना रहे है कभी उनके लिए संसद मे विधानसभा मे आवाज नहीं उठाते है ऐसे मे नई पीढ़ी के नये युवाओ को आगे आकर समाज की आवाज बनना चाहिए ताकि आजादी के 75साल से अंतिम पंक्ति मे खड़े वर्ग का भला हो सके
_डॉ हिरालाल अलावा
राष्ट्रीय जयस संरक्षक
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मध्यप्रदेश की बच्चियां सुरक्षित कब होंगी?
'मैं अब अपनी बच्ची को स्कूल भेजने से डरती हूं। डर लगता है कि कहीं वो लोग उसे किडनैप न कर लें। अभी तो बेटी के कोर्ट में बयान भी नहीं हो पाए हैं।'
ये दर्द है उस मां का, जिसकी बेटी के साथ 29 अप्रैल 2024 को भोपाल के एक प्रतिष्ठित स्कूल में रेप की कोशिश हुई थी। लेकिन, आरोपी स्कूल संचालक जमानत पर बाहर है। यह केवल एक मां का डर नहीं, बल्कि उन अनगिनत परिवारों की पीड़ा है, जो न्याय की आस में तिल-तिल कर मर रहे हैं।
मध्यप्रदेश में मौत की सजा पाए 41 अपराधियों में से 22 को रेप और हत्या का दोषी पाया गया है, फिर भी उनके मामले सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में लंबित हैं। पीड़ितों के परिवार ये सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर दरिंदों को फांसी कब मिलेगी? न्याय की प्रक्रिया इतनी धीमी क्यों है कि गुनहगार जेल से बाहर घूम रहे हैं जबकि पीड़ितों के परिवारों की जिंदगी ठहर गई है।
पिछले एक हफ्ते में राज्य में बच्चियों से रेप की कई घटनाएं सामने आई हैं। विपक्ष तो पहले से सवाल उठा रहा है, लेकिन अब सत्ता पक्ष के नेता भी इन अपराधियों को फांसी देने की मांग कर रहे हैं। आखिर यह पीड़ा कब समाप्त होगी?
क्या हम अपने बच्चों के लिए एक सुरक्षित भविष्य दे पाएंगे या ये खौफ हमेशा बना रहेगा?"
#मध्यप्रदेश #रेपकेस #न्याय_का_इंतजार #फांसी_की_मांग #ProtectOurChildren
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अव्वल मध्यप्रदेश या अव्वल जुमलेबाजी?
पीएम स्वनिधि, पीएम जनमन आवास, प्रधानमंत्री मातृ वंदना, और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के क्रियान्वयन में तो मध्यप्रदेश लगातार "कीर्तिमान" रच रहा है, लेकिन ज़मीन पर हालात कुछ और ही कहानी बयां करते हैं।
मुख्यमंत्री महोदय, कागज़ों पर तो योजनाएँ गगनचुंबी हैं, लेकिन ज़रा धरातल पर उतर कर देखिए:
🔸 पीएम आवास योजना: अभी भी लाखों लोग खुले आसमान के नीचे अपनी छत का इंतज़ार कर रहे हैं, लेकिन "आवास" सिर्फ़ घोषणाओं में रह गया है।
🔸 आयुष्मान भारत: स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत ये है कि अस्पतालों में डॉक्टरों और दवाइयों की कमी से जूझते लोग आयुष्मान कार्ड को लेकर भटकते रहते हैं। कीर्तिमान तो ऐसा कि इलाज से पहले अस्पताल ही ढूंढना पड़ता है।
🔸 पीएम स्वनिधि: स्वरोजगार के नाम पर भी बैंकों के चक्कर काटते आमजन, लोन के लिए तरसते रह जाते हैं, और सिस्टम के दलदल में योजनाएँ धंस जाती हैं।
महाशय, योजनाओं के नाम पर घोषणाएं और आंकड़े पेश करना आसान है, पर जमीनी सच्चाई से रूबरू होना मुश्किल! जब जनता जुमलों की हकीकत से सामना करती है, तो ये "अव्वल" मध्यप्रदेश सिर्फ एक छलावा ही नजर आता है।
"कीर्तिमान" रचना बंद करिए, ज़मीन पर हकीकत सुधारिए! @DrMohanYadav51@BJP4MP@akanshathakur7@milindkhandekar@jitupatwari@UmangSinghar@JaikyYadav16@digvijaya_28
मध्य प्रदेश कौशल विकास विभाग में फर्जी नियुक्तियों का खेल
मध्य प्रदेश कौशल विकास विभाग (MPSSDEGB) द्वारा अपात्र MGNF Fellows की नियुक्ति का खुलासा बेहद चौंकाने वाला है। जिन लोगों को इस अहम भूमिका के लिए चुना गया, उनकी पात्रता ही सवालों के घेरे में थी।
🔹 IIM Ahmedabad से प्रोजेक्ट किया गया, और भारत सरकार के MSDE (Ministry of Skill Development and Entrepreneurship) को रिपोर्ट भी सौंपी गई। पर सवाल ये है कि जब नियुक्तियाँ ही फर्जी हैं, तो रिपोर्ट और प्रोजेक्ट की गुणवत्ता कैसी रही होगी?
🔹 कौशल विकास, जो युवाओं के भविष्य को संवारने का कार्य करता है, वहां पर ऐसी धांधली यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या योग्य उम्मीदवारों को नजरअंदाज करके अपात्र लोगों की नियुक्ति से प्रदेश का कौशल विकास कैसे होगा?
🔹 फर्जीवाड़े से नियुक्त लोगों ने कितनी गंभीरता से अपने काम को अंजाम दिया होगा, इसका अनुमान लगाना मुश्किल नहीं है।
क्या ये लोग परियोजनाओं को धरातल पर लाने में सक्षम थे?
क्या इनकी रिपोर्ट्स वास्तविक समस्याओं को उजागर कर रही थीं, या सिर्फ कागजी खानापूर्ति की जा रही थी?
🔹 युवाओं के भविष्य से खिलवाड़:
जिन अपात्र लोगों ने जिम्मेदारी संभाली, उन्होंने प्रदेश के युवाओं को सही मार्गदर्शन और प्रशिक्षण देने की बजाय अपने पद का दुरुपयोग किया।
यह मामला प्रदेश में नौकरशाही और सरकारी तंत्र की विफलताओं को उजागर करता है।
जरूरत है जांच की: इस मामले की विस्तृत जांच की जानी चाहिए। फर्जी नियुक्तियों के दोषियों पर सख्त कार्यवाही होनी चाहिए, ताकि ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति न हो और योग्य उम्मीदवारों को सही अवसर मिल सके।
#कौशलविकास #नियुक्ति_फर्जीवाड़ा #MGNF #युवाओंका_भविष्य
@BJP4MP@IIM_I@IIMAhmedabad@CMMadhyaPradesh@DrMohanYadav51@The_Mooknayak@akanshathakur7@milindkhandekar@MPYuvaShakti@Chandra31067522
मध्य प्रदेश के 94,039 सरकारी स्कूलों में से 41,000 से ज्यादा बंद होने की कगार पर! 5,500+ स्कूलों में शून्य दाखिले, 25,000+ में सिर्फ 1 या 2, और 11,345 में 10 से कम छात्र। ये है शिक्षा का हाल! जब स्कूलों में बच्चे ही नहीं, तो शिक्षा नीति पर गर्व किस बात का?
सरकार का ध्यान इवेंट्स और नारों पर है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। बच्चों का भविष्य दांव पर, और स्कूल हैं 'खाली'।
"स्कूल हैं बंद, पर वादों की कतार,
कहाँ गईं वो शिक्षा की बड़ी-बड़ी सरकार?
शून्य दाखिले, फिर भी चुप्पी का हाल,
क्या यही है मप्र का 'शिक्षा' का कमाल?"
शिक्षा व्यवस्था सुधारने के वादे सिर्फ़ कागजों तक रह गए हैं। असल सवाल तो ये है—इन बंद होते स्कूलों का भविष्य कौन संवारेगा?
#MPEducationCrisis #EmptySchools #ShikshaKaBhram" @udaypratapmp@CMMadhyaPradesh@MPYuvaShakti@TribalArmy@Rahulkisanvansi@HansrajMeena
मध्य प्रदेश पटवारी भर्ती में फर्जीवाड़ा?
एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठते हैं। पटवारी भर्ती में टॉपर बनने वाले उम्मीदवारों को देखिए—सभी एक ही कॉलेज से, और जिनको इंग्लिश में सिग्नेचर करना नहीं आता, वे कैसे टॉपर बने? सबसे दिलचस्प बात ये है कि पूजा और कृष्णा के हस्ताक्षरों में हैरान कर देने वाली समानता है। क्या संयोग इतना शक्तिशाली हो सकता है?
अब आते हैं नंबरों की बात पर। 184 नंबर उस पेपर में, जिसमें व्यापम ने 15-16 प्रश्न निरस्त किए थे—कैसे संभव हुआ? क्या ये किसी जादू से कम है? या फिर वही पुरानी कहानी—अंदरूनी खेल, जहां मेहनती छात्रों का भविष्य दांव पर और चहेतों की बल्ले-बल्ले!
मध्य प्रदेश में इस तरह के फर्जीवाड़े का इतिहास नया नहीं है। व्यापम घोटाले की यादें अभी भी ताज़ा हैं, और अब ये नया कारनामा। सरकार कहती है पारदर्शिता उनकी प्राथमिकता है, लेकिन जब भर्ती प्रक्रियाओं में इतने सवाल उठें, तो जवाब कौन देगा? या फिर एक बार फिर से सिर्फ जांच का ढोल पीटा जाएगा और नतीजे गायब रहेंगे?
"बातें बड़ी-बड़ी, वादे हजार,
पर फर्जीवाड़े की चालाकी से कौन कराएगा पार?
टॉपर बने वो जिन्हें हस्ताक्षर भी नहीं आते,
किसानों के बेटे, मेहनतकश बच्चे, फिर कहाँ जाते?"
मध्य प्रदेश की शिक्षा और भर्ती प्रणाली में सुधार कब होगा? जब तक योग्यता के बजाय सिफारिशें और फर्जीवाड़ा चलता रहेगा, तब तक मेहनती युवाओं के सपनों का ऐसा ही मजाक उड़ता रहेगा।
@digvijaya_28@RahulGandhi@Rahulkisanvansi@MPYuvaShakti@TribalArmy@HansrajMeena
#जयस#jays#the_jays_express
डॉ हीरालाल अलावा एक बार फिर मनावर विधानसभा से विजय हुए। डॉ अलावा लगातार आदिवासियों के मुद्दों को विधानसभा में उठाते रहे है। डॉ अलावा आदिवासियों की आवाज बनकर हुंकार भरते रहेंगे। जोहार जिंदाबाद।
Dr.@HIRA_ALAWA