1. राजस्थान में हुये निकाय चुनाव में बी.एस.पी. ने भी इस बार 19 सीटों पर अपने पार्षद जिताकर भेजे हैं और काफी उम्मीदवार सरकारी मशीनरी की गड़बड़ी की वजह से दोबारा गिनती में ज़बरदस्ती थोड़े-थोड़े वोटों के अन्तर से हरा दिये गये हैं, वरना पार्टी का यहाँ और भी अच्छा रिज़ल्ट आ सकता था। इसके लिए पार्टी ने बी.एस.पी. के सभी छोटे-बड़े पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें दी हैं।
2. हालाँकि इससे पहले पंजाब सहित देश के कुछ और राज्यों में भी जो स्थानीय निकाय के चुनाव हुये हैं, तो वहाँ भी पार्टी का पहले से अच्छा नतीजा आया है और वे भी बधाई के पात्र हैं।
3. उम्मीद है कि अब वहाँ आगे होने वाले विधानसभा आमचनाव में व देश में लोकसभा आमचुनाव में भी वे सभी लोग अपनी पार्टी का बेहतर रिज़ल्ट ज़रूर लायेंगे।
शासन प्रशासन अनुशासन का उदाहरण क्या होता है अगर जानना है तो आदरणीय @mayawati जी का ये वीडियो देखिए। देखिए कि किस तरह परिवार के मुखिया की तरह अधिकारियों को ना सिर्फ़ आदेश बल्कि उन्हें मार्गदर्शन भी दे रही हैं की काम किस तरह होना चाहिए ताकि जानता को किसी तरह की मुश्किल ना होने पाए।
यूपी के ज़िला अम्बेडकरनगर में वरिष्ठ आईपीएस अफसर श्री आशुतोष मिश्रा के लगभग 91-वर्षीय बुजुर्ग माता की हुई हत्या अति-दुखद तथा प्रदेश में क़ानून-व्यवस्था के हिसाब से अति-चिन्तनीय। ऐसी घटना को लेकर लोगों की यह आशंका वाजिब है कि जब हत्या जैसी जघन्य घटना पुलिस अधिकारी के परिव���र के साथ हो सकती है तो आमजन की सुरक्षा का क्या होगा? सरकार इस घटना का उचित संज्ञान ले और दोषियों के ख़िलाफ सख़्त क़ानूनी कार्रवाई करे जो यह अत्यन्त ज़रूरी है।
1. उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा आमचुनाव सन् 2027 की तैयारियों के मद्देनज़र बी.एस.पी. के जनाधार को सर्वसमाज में बढ़ाने की ज़मीनी मज़बूती के साथ-साथ पार्टी उम्मीदवारों के चयन व उनके नामों की पार्टी के विधानसभा स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलनों में घोषणा करने आदि की प्रक्रिया भी चल रही है, जिसको लेकर विरोधी पार्टियों में का���ी बेचैनी है और सत्ताधारी पार्टी बीजेपी व अन्य विरोधी पार्टियों में भी अब अनवरत बदलाव होना भी स्वाभाविक है।
2. वैसे बी.एस.पी. ने, सर्वसमाज में से ख़ासकर ब्राह्मण समाज को भी पार्टी में उनकी सन् 2007 की तरह बी.एस.पी. की पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने की तैयारी के हिसाब से, उन्हें बी.एस.पी. उम्मीदवार बनाना जब से शुरू किया है तब से विरोधी पार्टियों में इसको लेकर चर्चा व चिन्तायें दोनों होना स्पष्�� हैं, जिनके हथकण्डों से ’बहुजन समाज’ के लोगों को लगातार सजग व सतर्क रहने की ज़रूरत है।
3. इसी क्रम में बहुजन समाज पार्टी के काफी लम्बे अरसे से चले आ रहे राष्ट्रीय महासचिव, वरिष्ठ अधिवक्ता व बी.एस.पी. शासनकाल में यूपी के महाधिवक्ता, उत्तर प्रदेश बार काउन्सिल के कई बार अध्यक्ष तथा बी.एस.पी. सरकार में कैबिनेट मंत्री एवं कई बार बी.एस.पी. के राज्यसभा सांसद रहे श्री सतीश चन्द्र मिश्र जी को, पार्टी द्वारा लीगल व मीडिया आदि के साथ-साथ अब चुनाव आयोग सम्बंधी कार्यों की भी महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी साैंपी गयी है, जो कि ख़ासकर आगामी विधानसभा आमचुनाव के दौरान कई मायने में इनकी अहम् भूमिका रहेगी।
1. जेन-अल्फा अर्थात् सन् 2013 के बाद जन्मे बच्चे-बच्चियों में भी ख़ासकर अपने थोड़े ’अच्छे दिन’ की उम्मीद लगाये स्कूली छात्���-छात्रायें व उनके माता-पिता भी सुखी भविष्य हेतु अच्छी शिक्षा को लेकर हमेशा चिन्तित ही नहीं बल्कि उसके लिये लगातार काफी जद्दोजहद भी करते रहे हैं, किन्तु देश भर में व विशेषकर यूपी एवं उत्तर भारत के राज्यों के स्कूलों के बदतर हालत की कड़वी ज़मीनी हक़ीक़त के कारण वे लोग अति-मुखर होे गये हैं।
2. वे लोग जेन-जी अर्थात् कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के देशव्यापी ’स्कूल ठीक करो’ अभियान में काफी बढ़चढ़ ��र व पूरे उत्साह के साथ भाग ले रहे हैं।
3. किन्तु यह बड़े दुख और चिन्ता की बात है कि जिन मासूम बच्चे-बच्चियों के हंसने-खेलने व पढ़ने-लिखने के दिन हैं, उन्हें अपनी प्रारम्भिक स्कूली शिक्षा हेतु बुनियादी सुविधाओं के लिये भी सड़कों पर संघर्ष करने को मजबूर होना प���़ रहा है।
4. वैसे परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के ’शिक्षित बनो’ आह्वान के कारण शिक्षा में भी ख़ासकर स्कूली शिक्षा ’बहुजन समाज’ के लोगों के लिये हमेशा विशेष चिन्ता की बात रही है, और इसी के तहत् हमारी पार्टी बी.एस.पी. ने इन दबे-कुचले व शोषित-पीड़ित समाज के लोगों की, जिनकी केन्द्र व राज्य में रही सरकारें लगातार उपेक्षा करती रहीं हैं, उनके हित व कल्याण एवं शिक्षा आदि के लिये यूपी में मेर�� नेतृत्व में बी.एस.पी. की सभी चारों रही सरकारों में पूरा-पूरा ध्यान दिया गया, ताकि बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर द्वारा निर्मित मानवतावादी एवं कल्याणकारी भारतीय संविधान के हिसाब से उन सभी परिवार वालों को रोटी-रोजी व शिक्षा-युक्त आत्म-सम्मान का समतामूलक जीवन नसीब हो सके।
5. किन्तु यह बड़े दुख व चिन्ता की बात है कि सरकारी स्कूल की व्यवस्था को बेहतर बनाने की तरफ समुचित ध्यान देने के बजाय सभी सर���ारों ने ज़्यादातर इसकी घोर अनदेखी ही की है तथा इस पूरी शिक्षा व्यवस्था को एक प्रकार से, इन वर्गों के ��रक्षण की तरह ही, काफी हद तक निष्क्रिय बनाने का कुचक्र चलाया हुआ है और इस प्रक्रिया में हज़ारों सरकारी स्कूल बंद भी किये जा रहे हैं, जिसका भी विरोध बी.एस.पी. ने लगातार किया है और अब स्कूलों के भवन, शिक्षक, पेयजल, शौचालय व साफ-सफाई आदि जैसी बुनियादी ज़रूरतों की अत्यन्त कमी को लेकर नन्हें जेन-अल्फा स्वंय अति-मुखर होने के साथ-साथ अब आन्दोलित भी हैं।
6. अतः यूपी सहित अन्य राज्यों की भी सभी सरकारें जेन-अल्फा के मासूम बच्चे-बच्चियों की बेहतर शिक्षा व्यवस्था सम्बंधी उनकी ज़रूरतों/माँगों पर पूरी सहानुभूति के साथ सही नीयत व नीति से तत्काल ध्यान देना प्रारंभ करें और उनके विरुद्ध कोई भी सरकार बल का प्रयोग करने से पूरी तरह से बचें तो यह उचित होगा।
1. ��हुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव व वरिष्ठ अधिवक्ता, उत्तर प्रदेश के पूर्व महाधिवक्ता, बार काउन्सिल, उत्तर प्रदेश के पूर्व अध्यक्ष, बी.एस.पी. सरकार में कैबिनेट मंत्री एवं कई बार बी.एस.पी. के राज्यसभा सांसद रहे श्री सतीश चन्द्र मिश्र जी को अब वकालत के पेशे में 50 वर्ष (स्वर्ण जयंती) पूरे होने के इस शुभ अवसर पर हार्दिक बधाई एवं ढेरों शुभकामनाएँ।
2. माननीय न्यायालय के गलियारों से लेकर जनसेवा की राजनीति तक, इनका यह सफर सदैव सत्य, न्याय और संविधान के प्रति अटूट निष्ठा से संचालित रहा है। न्याय को केवल अदालतों की चौखट तक सीमित ना रखकर समाज के अन्तिम व्यक्ति तक पहुँचाने का जो संकल्प इन्होंने निभाया है, विशेषकर दृष्टिबाधित एवं अन्य दिव्यांगजनों के अधिकारों के लिए किए गए इनके ऐतिहासिक कार्य भी अनुकरणीय हैं।
3. परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर द्वारा रचित भारतीय संविधान के मूल्���ों और लोककल्याण के इस संकल्प को वे आगे भी इसी ऊर्जा और समर्पण के साथ समृद्ध करते रहें, यही कामना है।
आज हाथरस के सादाबाद विधानसभा में डॉ. अविन शर्मा जी के समर्थन में बीएसपी के समर्पित कार्यकर्ताओं के बीच आदरणीय ब��न कु. मायावती जी का संदेश लेकर पहुंचा।
आदरणीय बहन जी को पांचवीं बार मुख्यमंत्री बनाने के संकल्प के साथ जुटे सभी बीएसपी कार्यकर्ताओं का हृदय से आभार।
फिर वापस लाना है शासन, प्रशासन, अनुशासन
जय भीम, जय भारत
आज हाथरस के सादाबाद विधानसभा में डॉ. अविन शर्मा जी के समर्थन में बीएसपी के समर्पित कार्यकर्ताओं के बीच आदरणीय बहन कु. मायावती जी का संदेश लेकर पहुंचा।
आदरणीय बहन जी को पांचवीं बार मुख्यमंत्री बनाने के संकल्प के साथ जुटे सभी बीएसपी कार्यकर्ताओं का हृदय से आभार।
फिर वापस लाना है शासन, प्रशासन, अनुशासन
जय भीम, जय भारत
1.जैसाकि सर्वविदित है कि बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की नीति व सिद्धान्त पर अमल करने वाली सर्वसमाज-हितैषी अम्बेडकर��ादी पार्टी है और यूपी में चार बार रही सरकार भी इसी के आधार पर चलायी है, जबकि समाजवादी पार्टी (सपा) अपनी संकीर्ण जातिवादी राजनीति व चुनावी स्वार्थ आदि की ख़ातिर जग ज़ाहिर तौर पर गिरगिट की तरह ही रंग बदलती रहती है।
2.इसी क्रम में सपा द्वारा प्रचारित इनका कथित ’पीडीए’ अर्थात् (पिछड़ा, दलित, अक्लियत) में पहले ’पी’ से ’पिछड़े’ प्रचारित करने के बाद अब, अपरकास्ट समाज में ख़ासकर ब्राह्मण समाज को बी.एस.���ी. से तेज़�� से जुड़ता हुआ देख व उसी के आधार पर ही पार्टी उम्मीदवार भी बनाये जाने से विचलित होकर, सपा ने अब ’पी’ से ’पण्डित’ कर दिया है, जो इनके राजनीतिक छल व छलावे का एक और जीता-जागता प्रमाण नहीं तो और क्या है?
3.ऐसे राजनीतिक छल व छलावे कि राजनीति से किसी व्यक्ति विशेष का कुछ समय के लिए वक़्ती तौर पर थोड़ा भला तो हो सकता है, किन्तु इससे उस सम्पूर्ण समाज का भला कभी नहीं हो सकता है। इसलिए सर्वसमाज के लोगों को ऐस��� छलावापूर्ण समाजवादी पार्टी (सपा) व उसकी ऐसी संकीर्ण जातिवादी राजनीति से ज़रूर सावधान रहना चाहिये, यह समय की माँग व सर्वसमाज के हित में भी है।
बहुजन समाज पार्टी के वरिष्ठ साथी और उत्तर प्रदेश विधानसभा में पार्टी की सशक्त आवाज़, आदरणीय श्री उमाशंकर सिंह जी के निधन का समाचार अत्यंत पीड़ादायक है।
उनका जाना क��वल बसपा परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि समाज के वंचित, शोषित और जरूरतमंद लोगों के लिए भी एक अपूरणीय क्षति है। बीमारी से संघर्ष करते हुए भी उन्होंने जिस साहस और समर्पण के साथ अपने लोगों और पार्टी के प्रति अपना दायित्व निभाया, वह सदैव स्मरणीय रहेगा।
आज हमने एक जनप्रतिनिधि ही नहीं, बहुजन मिशन का एक समर्पित सिपाही खो दिया है।
इस दुःख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार, समर्थकों और शुभचिंतकों ���े साथ हैं। प्रकृति उनके परिजनों को इस असहनीय दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करे।
बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) के कर्मठ, ईमानदार व पूरी तरह से वफादार बलिया की रसड़ा सीट से लोकप्रिय विधायक श्री उमाशंकर सिंह की आज शाम लम्बी बीमारी की वजह से इलाज के दौर���न देहान्त हो जाने की ख़बर अति-दुखद। उनके परिवार तथा उनके सभी चाहने वालों के प्रति मेरी गहरी शोक संवेदना। पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा की जितनी भी तारीफ की जाये वह कम है। उनका पूरा परिवार बी.एस.पी. परिवार की तरह है तथा उनके परिवार के सभी लोग मुझे बड़ी बहन की तरह ही पूरा आदर-सम्मान देते हैं।
उनके पुत्र से लगातार सम्पर्क बने रहने के दौरान ही आज शाम उनके देहान्त की ख़बर उनके पुत्र से ही मिली। इस दुख की घड़ी में मैं व पूरी पार्टी उनके व उनके परिवार के साथ है तथा उन्हें किसी भी प्रकार से हिम्मत नहीं हारना है बल्कि इस परिस्थिति का सामना करते हुये आगे बढ़ना है। कुदरत उन सभी लोगों को इस दुख को सहन करने की शक्ति दे।
1. देश में पेपर लीक के जघन्य अपराध व उसके कारण नौजवान छात्र-छात्राओं का उनका भविष्य अंधकार होता देख अनेकों द्वारा आत्महत्या जैसी अति-दुखद घटनाओं की रोकथाम की उपाय के रूप में संसद ने एक बार फिर से एक और सख़्त सज़ा के प्रावधान वाला क़ानून बनाने वाला बिल लोकसभा ने आज अन्ततः पास कर दिया है, लेकिन क्या केवल इससे समस्या का समाधान हो जायेगा, इसकी चिन्ता लोगों में बरक़रार है, क्योंकि लोगों को यह आपाधापी/जल्दबाज़ी में लिया गया एक और क़दम ज��्यादा लगता है, जबकि अन्य और भी उपायों को तत्काल सख़्ती से लागू करना ज़रूरी है।
2. वास्तव में यह कदम भी पेपर लीक होने के बाद सख़्त सज़ा का प्रावधान करता है, जबकि पेपर लीक का पूरा मामला इस महा अपराध को होने देने से पहले ही इसे रोकने का है, अर्थात् अपराध नियंत्रण ज़्यादा महत्वपूर्ण ��ै, जो कि अधिकतर मामलों में यहाँ कहीं भी प्रभावी होता हुआ नज़र नहीं आता है, और यह पेपर लीक के पिछले क़ानून के निष्प्रभावी होने से भी स्पष्ट है।
3. हकीकत में अन्य अपराधों की तरह पेपर लीक जैसे जघन्य अपराध के नियंत्रण के लिये सख़्त से सख़्त कानून से अधिक इसकी रोकथाम हेतु बेहतर से बेहतर उपाय करने की ज़रूरत है, जिसके तहत् शिक्षा के लिये शोषणकारी ऋण को सस्ता करके उसे कल्याणकारी बनाना, सरकारी स्कूलों ��ें अच्छी शिक्षा आदि सहित पूरी शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की ज़रूरत है, ताकि ग़रीबों, उपेक्षितों, शोषितों व अन्य मेहनतकश लोगों के बच्चे भी समता व समानता के साथ आगे बढ़ सकें, जो परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के कल्याणकारी संविधान का उद्देश्य तो है किन्तु इसका हर स्तर पर वर्तमान में घोर अभाव है।
4. दरअसल अमीर परिवारों के लोग तो धनबल के आधार पर अपनी मनमानी व मनचाही पढ़ाई आदि ��्राप्त कर लेते हैं, किन्तु करोड़ों ग़रीब परिवारों के बच्चे-बच्चियों का क्या जो होनहार होने के बावजूद अपना जीवन संवार नहीं पाते हैं।
5. वैसे भी पेपर लीक शिक्षा व्यवस्था में बिगाड़ का केवल एक उदाहरण है, जबकि शिक्षा व्यवस्था में बिगाड़ की जड़ काफी गहरी व अति-गंभीर है। इसके निदान के लिये दृढ़ इच्छाशक्ति व नेक नीयत के साथ अनवरत ईमानदार प्रयास की ज़रूरत है, तभी कुछ मुट्ठी भर लोगों के बजाय करीब 140 कर���ड़ लोगों का यह देश आगे बढ़ पायेगा।
6. लेकिन यह अति-दुखद है कि पेपर लीक रोकथाम सम्बंधी बिल पर भी बहस के दौरान अधिकतर पार्टियाँ दलगत राजनीति से ऊपर नहीं उठ पायीं अर्थात् संसद में चर्चा के दौरान पूरी गंभीरता कम व एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप ही ज़्यादा रहा। ऐसे में क्या नया बनने वाला यह पेपर लीक निरोधक क़ानून कितना सार्थक होगा इससे लोगों का शंकित होना उचित है।
7. ऐसे में मूल प्रश्न यही है कि क़ानू�� पर क़ानून क्या इस जटिल समस्या का सही समाधान कर पायेगा? सरकार इसके अलावा भी अन्य बेहतर उपायों पर भी ��़रूर विचार करे तो यह देश के उज्जवल भविष्य के लिये बेहतर होगा।