शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा, NEET पेपर लीक मामले में न्याय की मांग कर रहे लाखों छात्रों और इस दबाव में अपनी जान गंवाने वाले विद्यार्थियों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि ।
जयपुर पुलिस से विनम्र अपील....
ये जयपुर के जवाहर सर्किल के पास पत्रिका गेट पर कौनसी भीड़ बैठी है? कौन लोग बैठे हैं ये, क्या डिमांड कर रहे हैं...क्या इन्हें पता भी है?
बदतमीज लफंगों की भीड़ जमा हो गई बस...अभी कवरेज करने गई हमारी महिला रिपोर्टर के साथ बदतमीजी हुई, कैमरामैन के साथ बदतमीजी हुई...बेवजह की हुल्लड़ बाजी चल रही है.
दिल्ली के जंतर-मंतर वाली फीलिंग लेकर बैठी इस भीड़ को कुछ पता नहीं.
The Litmus के जरिए हमनें इनसे बात करने की कोशिश की लेकिन कोई बात करने को तैयार नहीं.
फिर कोई क्यों ही अपने संसाधन खर्च करके इस अनगाइडेड भीड़ के पास जाएगा.
@jaipur_police@PoliceRajasthan से निवेदन है कि उस भीड़ से ऐसे एलीमेंट को बाहर करें, आइडेंटिफाई करें...क्योंकि ऐसे ये कोई आंदोलन या प्रोटेस्ट नहीं रहेगा.
सादर
अवधेश पारीक
The Litmus Media
Jaipur
लड़ाई शिक्षा और युवाओं के भविष्य की है, फिर भी बड़े-बड़े बॉलीवुड सितारे, क्रिकेट खिलाड़ी और सुपरस्टार खामोश हैं। जब इन्हें किसी मुश्किल का सामना करना पड़ता है, तो सबसे पहले यही युवा इनके समर्थन में आवाज़ उठाते हैं। आज जब युवाओं के भविष्य का सवाल है, तो आखिर ये सभी मौन क्यों हैं?
जंतर मंतर पर आंदोलन का समर्थन अगर कर रहे लोग तो वो सिर्फ ओर सिर्फ सोनम वांगचुक जी की वजह से @abhijeet_dipke तेरी वजह से नहीं तू तो एक नंबर का फर्जी आदमी है जंतर मंतर से निकल जा फायदे में रहेगा । सोनम वांगचुक जी की जीत हो जाएगी वो बिना किसी राजनीति के देश के भविष्य के लिए बैठे ।
सोनम वांगचुक जी को इस कॉकरोच पार्टी को अलग करना चाहिए़ सोनम वांगचुक के साथ है लेकिन हमें तो यह कॉकरोच फर्जी लग रहा है इतने साल विदेश में मजे ले रहा था अब एक दम से भारत के बच्चों के भविष्य की चिंता होने लगी ।
कभी ऐसा भी होगा,जब तुम चेहरों के पीछे छिपे मुखौटों को साफ देख पाओगे,न किसी का झूठ पकड़ोगे,न सच का आइना दिखाओगे,रिश्तों के बदलते रंगों को,मौसम की तरह स्वीकार कर,अपनी ही धुन में बह जाओगे।और तब समझ आएगा,कि किसी को जीतना जीत नहीं,बल्कि खुद में सिमट कर शांत हो जाना ही सच्ची विजय है...
सिस्टम में अंधेरा बहुत है, पर तुम वो सूरज बनना जो सिर्फ रसूखदारों के आँगन में नहीं, बल्कि
उस झुग्गी में भी रोशनी करे जहाँ हकों की जानकारी तक नहीं पहुँचती।
तुम्हारी शक्ति का असली उपयोग किसी की बेबसी दूर करना है।"
नियत और नियति से बड़ा कुछ नहीं होता।
यदि आपकी नीयत साफ़ है, मेहनत ईमानदार है और प्रयास पूरे मन से किए हैं, तो परिणाम की चिंता छोड़ दीजिए।
राजस्थान वरिष्ठ अध्यापक (Second Grade) परीक्षा देने वाले सभी अभ्यर्थियों को हार्दिक शुभकामनाएँ।
आपका आज का दिन शुभ हो और आपका चयन निश्चित हो।
डॉ. धीर सिंह धाभाई
#RPSC #rpsc_सैकेंड_ग्रेड_शिक्षक_भर्ती
नौकरी लगे हुए अधिकारियों से एक विनम्र निवेदन 🙏
बेरोज़गार छात्रों के साथ अन्याय मत कीजिए।
एक बेरोज़गार युवा अपने जीवन में कितनी परेशानियाँ, मजबूरियाँ और संघर्ष लेकर चलता है, यह वही जानता है। कभी आप भी इसी रास्ते से गुज़रे हैं।
सब कुछ तुम्हारे नियंत्रण में नहीं है
तुम बीज तो बो सकते हो, लेकिन फूल कब खिलेगा, यह तुम्हारे हाथ में नहीं है।
तुम पूरी ईमानदारी से प्रयास कर सकते हो, लेकिन हर प्रयास तुरंत परिणाम दे, यह आवश्यक नहीं।
इसलिए जो तुम्हारे हाथ में है, उसे पूरी निष्ठा से करो। और जो तुम्हारे हाथ में नहीं है, उसे शांत मन से समय पर छोड़ दो।
याद रखो—
"हर बंद दरवाज़ा दुर्भाग्य नहीं होता।
कई बार अस्तित्व तुम्हें उस रास्ते से बचा रहा होता है, जिसे तुम अभी समझ नहीं पा रहे।
विश्वास रखो, जो तुम्हारे लिए है, वह तुम्हें सही समय पर अवश्य मिलेगा।"
डॉ. धीर सिंह धाभाई
#success
यह घटना केवल कलयुग की पराकाष्ठा नहीं, बल्कि संबंधों के सबसे निचले स्तर को उजागर करने वाली और भीतर तक झकझोर देने वाली त्रासदी है।
वर्षों तक हम ऐसे अपराधों में बेटों के उदाहरण सुनते रहे, लेकिन अब जब बेटियाँ भी इस प्रकार की घटनाओं में सामने आने लगी हैं, तो यह किसी एक लिंग का नहीं, बल्कि पूरे समाज की नैतिक और सांस्कृतिक गिरावट का संकेत है।
मानव मनोविज्ञान के अनुसार यदि बचपन से व्यक्ति में सहानुभूति (Empathy), कृतज्ञता (Gratitude) और नैतिक चेतना (Moral Development) का विकास नहीं होता, तो वह धीरे-धीरे अपने ही संबंधों को उपयोग की वस्तु समझने लगता है। तब संपत्ति, पैसा और व्यक्तिगत स्वार्थ, माँ-बाप के त्याग से भी बड़े दिखाई देने लगते हैं।
सबसे बड़ा संकट यह नहीं कि अपराध बढ़ रहे हैं। सबसे बड़ा संकट यह है कि मनुष्य के भीतर का मनुष्य छोटा होता जा रहा है।
आज आवश्यकता केवल कठोर कानूनों की नहीं, बल्कि ऐसी शिक्षा और ऐसे संस्कारों की है जो बुद्धि के साथ-साथ हृदय को भी शिक्षित करें। क्योंकि जिस दिन मनुष्य अपने भीतर की करुणा, कृतज्ञता और संवेदना खो देता है, उसी दिन वह सबसे बड़ा निर्धन बन जाता है।
सभ्यता केवल ऊँची इमारतों, आधुनिक तकनीक और आर्थिक प्रगति से नहीं बचती; वह तब तक जीवित रहती है, जब तक घरों में माता-पिता के प्रति सम्मान, त्याग और प्रेम जीवित रहता है।
डॉ. धीर सिंह धाभाई
#रिश्ते #परिवार #कलयुग #viral
@SARITA_BISHNOI2 ऐसे भी बहुत विद्यार्थी थे जिनका तीन या चार नौकरी में पहले से नंबर आया हुआ है सिर्फ ओर सिर्फ उनको अपना रिकॉर्ड बनाना था इसलिए उन्होंने DV कर्तव्य चतुर्थ श्रेणी में ज्वाइन नहीं करेंगे वो , अगर वो DV नहीं कराते तो दूसरे किसी ओर का नंबर आ जाता किसी के घर खुशिया आ जाती ।