एक दिन सब ऊब जाएंगे,
कबूतर ऊब जाएंगे दानों से, पर्वत चट्टानों से, प्रेमी बहानों से और ईश्वर ऊब जाएगा मिश्री-मखानों से
कौन नहीं ऊबेगा?
मैं नहीं उबूँगा, तुमसे! जैसे मां नहीं ऊबती चूल्हे से, चूल्हा नहीं ऊबता आग से, आग धुएं से और धुआं नहीं ऊबता मां की आंखों से...
अचानक हम मृत्यु पर हैरान होते है क्योंकि लोग हमे बताए बग़ैर मर जाते हैं, वरना मृत्यु कोई अचंभे की बात नहीं, प्रेम में दूर जाना कोई बड़ी बात नही, जाने से पहले कोई बता दे कि वो जा रहा है तो जाना इतना भी भयावह नहीं है हम मृत्यु पर नहीं अचानक पर हैरान होते हैं...!!!
मैं आज भी तुमसे प्रेम करता हूं पर ये प्रेम तुम्हें पाना नहीं चाहता, ये मेरे भीतर ही फल फूल रहा है मैंने चाहा कि इसको उजाड़ दूं , नए लोगों में इसको भुला दूं पर ये जाता नहीं बल्कि मैं ऊब जाता हूं दूसरों से पर ये वैसा ही है जैसा तुम्हारे साथ था,उतना ही गहन उतना ही निश्छल...!!!
सच कहूं तो मुझे सब पता था कि क्या होने वाला है जीवन में पर फिर भी छलता रहा हूं हृदय को अस्थाई लोगों के लिए, पर अब जब हृदय पर शोक पसरा हुआ तो सब याद आता है कि काश वैसा न करता...!!!
लोग बोले शादी कर लो, वरना अकेलापन खा जाएगा।
मैंने पूछा क्या मैं हज़ार बरस जियूँगा जो इतना आगे सोचूँ?जो मैंने शादी कर भी ली तो क्या सब लोग चौबीसों घंटे मेरे समीप बैठे रहेंगे?अकेलापन तो उन घरों में और लोगों में भी है, जो शादी कर चुके हैं और सबके बीच भी अकेले हैं...!!!