@nisprah एकदम सही बोले स्वप्न तो बिलकुल नही होता सारी समझ होती है विचार भी सही चलते है,बस कर कुछ नही पाते ,,,कही पढ़ा था वही याद आता है ,इतना होश में जीना की स्वप्न में भी होश में रहो
कभी-कभी मध्यरात्रि में न जाने क्या हो जाता है अचानक नींद खुल जाती है, शरीर बेहद भारी लगने लगता है ऐसा महसूस होता है मानो किसी ने मुझे जकड़ लिया हो हिलने-डुलने की लाख कोशिश करता हूँ,करवट तक बदला नही जाता चीखकर किसी को बुलाने का मन करता है कोई मुझे हिला कर उठा दे+
@sim_sagittarius@heyyy_anant सब अच्छा है सिर्फ एक के साथ,बहुत अच्छा है जीवन भर वहीं साथ रहे,यह है ठहराव प्रेम का,अगर वही साथ नही तो फिर बाद आने वाले को जिसके साथ बुढ़ा होना है समय प्रेम भरपूर दे सकोगे अपना शरीर अनछुआ नही दे सकते शायद पूर्णता किसी एक को समर्पण इसी को कहते है..
@ani_tyaa@heyyy_anant सही बात है,मगर खुदपर इतना कंट्रोल है की कपड़े खोलकर कोई परोस दे तो भी वहा से ठुकरा कर लौट सकता हूं,किसी के पल्लू गिराने से नाडा ढीला हो ये हो ही नही सकता,अगर ऐसे हों तो कुत्ते में खुदमे असमानता नही दिखती फिर मुझे
@Roshni_6001 भूत भी हो सकता है पता नही लेकिन आप पढ़कर उतना ही समझ सकोगे जितना लिखा है,बहुत ही खतरनाक होता है ये हालत बस इतना कह सकता हूं वो भी समझो मैं जो लिख ही नही पाया..