आप चाहे जितने भी धनवान हों उच्च पदासीन हों,या सम्मानीय हों,
यदि आप हिन्दू होकर भी हिंदुत्व का हिन्दू धर्म का,
सनातन आस्थाओं का विरोध👈 करते हैं या सनातन संस्कृति का सम्मान नहीं करते हैं,
तो ,यकीन मानिए आप निहायती निकृष्ट 👈व्यक्ति हैं।😡
@SushantBSinha झारखंड पर कोई कुछ नहीं बोलेगा
ओर भाजपा का IT सेल एक नम्बर का निकम्मा है
नैरेटिव सेट करने में तो इन नालायको का निकम्मापन जगजाहिर है वरना झारखंड पर बीजेपी IT सेल दीपके फिपके नामक बीमारी को कब का एक्सपोज कर देता ।
#झारखंड
फिर से फ़र्ज़ी SC/ST।
मेडिकल का टैलेंटेड छात्र वैभव जैन।
>> कक्षा की एक लड़की ने कहा — मेरी बहन का स्कोरर बन जा। वैभव ने मना कर दिया।
— नतीजा? >> फर्जी फेसबुक प्रोफाइल बनाकर अश्लील फोटो अपलोड किए।
>> फिर SC-ST एक्ट + 354 का केस ठोक दिया। 50 दिन जेल।
>> सेकंड ईयर की परीक्षा हथकड़ी में दी।
>> MBBS पास करने के बाद सरकारी नौकर�� नहीं मिली।
>> सदम में पिता को पैरालिसिस हो गया।
>> छह साल बाद कोर्ट ने सब झूठा पाया और बरी कर दिया। >> लड़की खुद अवैध एडमिशन के कारण पहले ही कॉलेज से निकाली जा चुकी थी।
>> जाति प्रमाण पत्र की फोटोकॉपी तक कोर्ट ने मानने से इनकार कर दिया।
एक इनकार। एक झूठा केस। एक पूरा करियर और परिवार तबाह।
SC-ST एक्ट अब सुरक्षा नहीं, हथियार बन चुका है। और सरकार अभी भी चुप है।
झारखंड का छात्र पीठ पर पड़ी लाठी के निशान दिखा रहा है।
मासूम है बेचारा, उ���को इतना भी नहीं पता कि इस देश के नेता, उनका इकोसिस्टम और पालतू मीडिया ऐसे किसी ज़ख़्म को ज़ख़्म नहीं मानते जो मोदी को घेरने के काम ना आ सके।
अमन @AmanChopra_ आपको सकुशल देखकर सचमुच अच्छा लगा।
अब ‘लोकतंत्र की हत्या’ का रट्टा लगाने वाले पालतू पत्रकार कहीं दिखाई नहीं देंगे। कंठ से आवाज़ भी नहीं निकलेगी।
ये पूरा ecosystem नितांत कपटाचारी है..सुविधा से नैरेटिव गढ़ता है और अपने ही बनाए शोर में सच को दबा देता है।
सोनम वांगचुक पर बहुत पोस्ट करने वालों, झारखंड के प्रोटेस्ट में भी 'देवेंद्र नाथ महतो' भूख हड़ताल पर है।
इनकी हालात लगातार बिगड़ रही है, इन पर भी स्टोरी या पोस्ट कर दीजिए।
Unbelievable ! Where is Free Speech Gang
We are literally seeing Emergency style mindset dished out to @AmanChopra_ for just doing his job
Reporting on GenZ & students of Jharkhand is a crime?
Pl note @PMOIndia@AshwiniVaishnaw
अमन नाश्ता कर रहे थे
रांची पुलिस उन्हें लेकर चली गई।
छात्रों का आंदोलन कवर करना पाप हो गया है क्या इस देश में?
जंतर मंतर पर छात्रों को गाली देते/अश्लील हरकतें करते दिखाना पत्रकारिता था लेकिन झारखंड के शालीन छात्��ों की आवाज़ उठाना अपराध है क्या?
लेकिन “तानाशाह” तो मोदी हैं।गजबे है
देश की पहली ग्रीन रिफाइनरी - आस पास हजारों नहीं लाखों पौधे लगाये गए है CSR फण्ड से जो अब वृक्ष का रूप ले चुके है और इस प्रदूषण को सोख रहे है।
आस पास तीन किलोमीटर तक ग्रीन क्षेत्र इसलिए बनाया था शायद ताकि प्रदूषण का असर आम जनता पर नहीं पहुँचे।
(यह सब दिल्ली की फाइलों में लिखा होगा!)
@HRRL_Rajasthan
आरक्षण पर चर्चा किसी भी पार्टी को असहज करेगी, और अब वही करना पड़ेगा। पटरी उखाड़ कर आरक्षित हो जाना, सामाजिक न्याय नहीं, राजनैतिक गिरोहबाज़ी है। अब जबकि प्रताड़ित वर्ग इस पर लामबंद हो रहा है, तो सत्ता के चाटुकारों को समस्या होने लगी है कि ये 'मूर्खता' है।
UGC, NEET, CBSE पर बोलना भी सबको मूर्खता और षड्यंत्र ही लग रहा था, फिर एक भीड़ आई, आप पर थूका और आपको चाटना पड़ा। अंततः, हुआ वही जो हम आपको बता रहे थे।
अब आरक्षण पर भी एक संगठित, सघन और गंभीर चर्चा होगी। इसके चक्कर में चुनावों पर असर पड़ना चाहिए कि कौन इन विषयों पर चर्चा से भाग रहे हैं, कौन इसे नकार रहे हैं, और कौन एक ही श्वास में 'विकसित भारत' और निजी क्षेत्र में आरक्षण ढूँढ रहे हैं।
अब मुझे यह मैटर नहीं करता कि कौन सत्ता में है और किसको होना चाहिए, मैंने पिछले 7 महीनों में जो देखा और फिर गत शनिवार को जो हुआ, उस से में आश्वस्त हूँ कि बिखरा हुआ, बिका हुआ नैरेटिव काम नहीं आता। सत्ता में रहने या निकाले जाने की चिंता राजनैतिक दलों को होनी चाहिए, आम नागरिक को नहीं।
आरक्षण की पूर्ण समाप्ति लक्ष्य है, जो की संविधान का भी लक्ष्य है, तो हम तो वही कर रह��� हैं जो संविधान निर्माताओं ने सोचा था। ठीक है, समय सीमा नहीं थी, पर OBC आरक्षण भी तो नहीं था? उस समय के वंचित-पीड़ित-शोषित यदि आज भी वंचित-पीड़ित-शोषित ही हैं, तो इस पर सर्वेक्षण होना चाहिए कि तथाकथित सामाजिक न्याय तक पहुँचने के लिए कोई और मार्ग है क्या?
मेरा उद्देश्य प्रथम चरण में चर्चा का है, सरकार से इस पर संसद में आँकड़े रखवाने का है कि किस जाति समूह कि किन जातियों में कितनों को आरक्षण मिला, उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति क्या है, उन्हीं जाति समूहों में कौन ऐसे लोग हैं जो अभी तक घिसट कर जीने को विवश हैं?
सामान्य वर्ग के लोगों में कितने लोग आर्थिक रूप से विपन्न हैं, उनके लिए सरकार की क्या नीतियाँ हैं, उन्हें फॉर्म भरने से ले कर हॉस्टल और कोर्स की फीस में छूट क्यों नहीं है? यदि आरक्षण EWS से दिया है तो यह इतना घटिया रूप में क्यों है कि निर्धन सामान्य वर्ग का विद्यार्थी लोन चुकाने में ही जवान�� खपा देता है?
इसके बाद, हर राजनैतिक व्यक्ति को, दल को हम चुनावों के समय पूछेंगे कि उन्हें सामान्य वर्ग वोट क्यों दे? उनका मेरिट को ले कर क्या स्टैंड है, विकसित भारत में मेरिट की कितनी जगह है और शिक्षा व्यवस्था में आरक्षण के कारण राष्ट्र को कब तक नकारात्मक दिशा में ले जाया जाता रहेगा?
यही आरम्भ है, और यदि आवश्यकता पड़ी तो हम और भी विकल्प देखेंगे। हमें इस से अब मतलब नहीं है कि कौन आ जाएगा तो क्या ह��� जाएगा, उसका ��ोड वो लें जिनकी विधायकी और सांसदी जाएगी। हमें अपने बच्चों और इस समाज की चिंता हैं। हम बस अपने हिस्से की चिंता कर रहे हैं।
Mrunal Thakur instagram story on Dharmedra Pradhan resignation 🚨
>She said that the reason behind Dharmendra Pradhan's resignation is not CJP but Harsh Dubey
>Harsh dubey exposed the reality of reservation
>Everyone wants fair education but does not want to remove the reservation
>No one is listening to GC students but they are listening to Those protesters who attack the police.
She is really a queen man, It takes courage to stand for General Category in an era where everyone from system to government is biased towards SC/ ST.🙏
Keep politics aside. I don't care which party you support.
I want to raise an important issue.
Narendra Modi is our sitting Prime Minister.
He is a man.
But the way hundreds of girls abused and sexually harassed him at the CJP protest is not okay.
All of them should be punished.
Imagine if a woman were the Prime Minister. Would any boy use such words against her?
And even if they did, would they face no punishment?
Who gave these girls the right to abuse a man, sexually harass him, and make jokes about his marriage and sexuality?