ग्राम पंचायत अधिकारी, मलवां- फतेहपुर
स्वच्छ पेयजल , स्वच्छ वातावरण, स्वच्छ समाज एवं सबका विकास हमारा लक्ष्य
ईश्वर हमारी सदैव हमारे कर्तव्य पालन में सहायता करे
मेरा सौभाग्य रहा कि सेवा के प्रथम दो कार्यक्षेत्र( बहुआ, असोथर )माँ यमुना की गोद में व्यतीत कर मां गंगे की गोद में मलवा के उपरांत भिटौरा में भी सेवा का अवसर प्राप्त हुआ है।
विकास खंड मलवां के सभी साथियों, उच्चाधिकारियों, सम्मानित जनप्रतिनिधियो, जनता सभी का हृदय से धन्यवाद।
सादर
अपनी ग्राम पंचायत अधिकारी की 9 वर्ष की सेवा में लगभग 5 वर्ष 9 माह के विकास खंड मलवा में कार्यकाल के उपरांत विकास खण्ड भिटौरा में सेवा करने का अवसर प्राप्त हुआ है।
एक फौजी बिना हेलमेट के बाइक चला रहा था।
पुलिस वाले ने रोका, "हेलमेट कहाँ है?"
उसने बोला, "भूल गया।"
पुलिस : क्या नाम है? काम क्या करत�� हो?
बाइक सवार: केहर सिंह नाम है और मैं एक फौजी हूँ।
पुलिस : अच्छा कोई बात नहीं, जाओ, आगे से हेलमेट पहन कर बाइक चलाना।
केहर : नहीं भाई, आप अपना काम करो। मैंने गलती की है, मेरा चालान काटो।
पुलिस : ठीक है, अगर ऐसी ही बात है , तो निकालो 100 रु और पर्ची लेकर जाओ।
केहर : नहीं, यहाँ नहीं भुगतना चालान। मैं अदालत में ही जाकर चालान भुगतुंगा।
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अदालत में :
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संतरी: केहर सिंह को बुलाओ।
जज: हांजी, मिस्ट�� केहर सिंह, आप 100 रु का चालान भर दीजिये।
केहर: नहीं जनाब, यह कोई तरीका नहीं हुआ। आपने मेरी "दलील" तो सुनी ही नहीं ?
जज: अच्छा बताओ, क्यों तुम्हें 100 रु का फाइन न किया जाए?
केहर: जनाब, 100 रु का फाइन थोड़ा कम है इसे आप 335 रु का कर दीजिए।
जज: क्यों? और 335 का ही क्यों?
केहर: क्योंकि मुझे 100 रु कम लगता है और 336 रु ज्यादा ही नाइन्साफ़ी हो जाएगी।
(वहाँ खड़ी भीड़ हंसती है)
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जज: (काठ का हथौड़ा मेज पर मारते हुए) शांति, शांति बनाए रखिये।
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केहर: जनाब एक और सलाह है, ये हथौड़ा 'काठ' की बजाए "स्टील" का होना चाहिए , आवाज ज्यादा होगी। एक और बात, यहाँ इस कमरे में भीड़ बहुत ज्यादा है। आप एक आर्डर पास कर दीजिए की कल से यहाँ ज्यादा से ज्यादा बस 127 लोग ही आएं।
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जज: are you lost your mind Mr. Kehar Singh? आप यहाँ अदालत में जोक्स क्रैक कर रहे हैं। आप एक जज को सिखा रहे हैं कि अदालत कैसे चलानी है? कानून क्या होना चाहिए? फैसला क्या करना है? आपको पता भी है हम किस परिस्थिति में काम करते हैं? हमारे ऊपर कितना प्रेशर होता है? और....
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केहर: जनाब! मैं एक फौजी हूँ। अभी कश्मीर में पोस्टेड हूँ। with all due respect , sir, आपको 'घण्टा' नहीं पता कि "प्रेशर" क्या होता है। आपका प्रेशर ज्यादा से ज्यादा आपको एक दो घंटे ओवरटाइम करवा देगा। हमारा प्रेशर हमारी और सैंकड़ो और लोगों की जान ले सकता है।
जनाब, क्षमा कीजिये कि मैंने आपको सलाह दी। जिस काम के लिए आपको ट्रेनिंग दी जाती है, जिस काम में आप माहिर हैं उस काम में मैंने आपको सलाह दी। परन्तु आप भी तो यही करते हैं हमार��� साथ.....मसलन...बन्दुक को 90 डिग्री से नीचे कर के चलाओ, असली गन मत चलाओ, पेलेट गन चलाओ, बस घुटनों के नीचे निशाना लगाओ, प्लास्टिक की गौलियाँ इस्तेमाल करो, प्लास्टिक की गोली भी खोखली होनी चाहिए, उसका वजन xyz ग्राम से ज्यादा नो हो। ये क्या "*****" है , जज साब? क्या आप यहाँ ac रूम में बैठ कर हमें सिखाओगे कि हमें अपना काम कैसे करना है? जिस काम के लिए हम trained हैं, जिन situations का हमको firsthand experience है, आप हमें बताओगे कि उस situation में हमें कैसे react करना चाहिए?
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(कोर्ट में सन्नाटा)..
#जय_हिन्द #Repost
भारत युगों-युगों से अनेक संस्कृतियों को खुद म���ं समेटे, तहज़ीब और परंपरा के महीन धागों से बुनी हुई सांझी विरासत है। यह वह शक्ति है जो दुनिया के हर पंथ और धर्म का घर है।
इस गौरवशाली संस्कृति को आने वाली पीढ़ी के लिए सहेज कर रखना हमारा संवैधानिक कर्तव्य है। इसलिए, हम अपनी परंपरा का महत्व समझें और किसी भी ऐतिहासिक स्मारक को नुकसान न पहुँचाएँ। ऐसा करना अशोभनीय होने के साथ-साथ एक दंडनीय अपराध भी है।
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कोई ये न कहें कि मुझे इससे ये उम्मीद न थी, या फिर ये ऐसा कैसे कर सकता है?
हम सभी ऐसे आवरण लिए है मै भी।
आवश्यक भी है ये आवरण मगर जब ये हमारी अंतरात्मा पर बोझ बनने लगे तो उतार फेंकने की जरूरत है। क्योंकि एक स��य के बाद खुद से जरूरी कुछ नहीं होता है।
शुभ प्रभात
अक्सर हम अपने ऊपर एक आवरण ले लेते है मित्र, परिवार और समाज के लिए।
ऐसा आवरण जो प्रारम्भ में तो हमारी हकीक़त होता है मगर एक समय के बाद बोझ प्रतीत होने लगता है, दिखावा लगने लगता है।
हमारे अंदर कुछ और होता है जबकि बाहर कुछ और। हम अंदर से चीख रहे होते है मगर बाहर से ऐसे शांत दिखते है
कि हमको कुछ फर्क नहीं पड़ता।
अपने आवरण को बचाने के लिए हम अपनी वर्तमान परिस्थितियों के विपरीत सब कुछ करते है।
हम अपनी जरुरत, परेशानी, उम्मीद, प्रेम, स्वभाव आदि सबकी अनदेखी करते है सिर्फ इसीलिए कि हमें कोई जज न करें।
मैंने सबसे सुंदर काम ज़्यादातर तब किए जब उनके बदले कोई अपेक्षा नहीं की, पर कोई मुझे ये कहने तो मत ही आना कि मुझे इनसे रहित ही होना चाहिए।
मैं इंसान हूँ प्रेम के बदले में मुझे प्रेम तो चाहिए ही।
इंसान हूँ, फ़रिश्ता नहीं, जो ताउम्र बस देता रहूँ,
थोड़ा सा प्यार मैं भी तो महसूस करूँ।
येन बद���धो बलि राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वाम् प्रतिबद्धनामि रेसे माचल माचलः।।
प्रेम, त्याग, कर्तव्य एवं मानवीय भावों से बंधे भाई-बहन के पवित्र एवं अटल रिश्ते का प्रतीक पावन पर्व की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई।
#रक्षाबन्धन
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