मैं पुनः कह रहा हूं।
हर्ष दुबे और राज शेखावत के साथ बैठक करने से बात नहीं बनेगी, जब तक सभी संगठनों और जमीन पर काम कर रहे लोगों से बातचीत नहीं की जाएगी।
महिपाल सिंह मकराना, सर्वेश पाण्डेय, ठाकुर शिवम सिंह, पंकज धवरैया, स्वामी आनंद स्वरूप जी, अभिनय पांडेय, नेहा दास, और ऐसे तमाम लोगों से भी बात करनी चाहिए। जो लगातार जमीनी स्तर पर सवर्ण समाज के मुद्दों के लिए काम कर रहे है। अगर सरकार इन लोगों से सीधे बातचीत नहीं कर रही है, तो जो टीम सरकार से मिलने जा रही है, उसे पहले इन सभी लोगों से बात करके और उनकी राय लेकर ही बैठक में जाना चाहिए।
प्रोफेसर ने दलित लड़के को चीटिंग करते हुए पकड़ लिया ChatGPT Ai से तो लड़के ने सुसाइड कर लिया फिर उसके माता-पिता के मन में लालच आया तो उसने सोचा बेटा तू मर गया अब एससी एसटी एक्ट लगाकर काम से कम 12 लख रुपए ही वसूल लेता हूं! ऐसे माता-पिता को भगवान नर्क में भी जगह ना दे #endSCSTAct
विवेकानंद को ऐसे ही पोस्टर से नहीं हटाया गया था। इनका पूरा वैचारिक तंत्र सड़ा हुआ है। UGC पर इनके मुँह से, समाज द्वारा लगातार गालियाँ पड़ने के बाद, एक ज्ञान निकला था कि 'समाज को ऐसा लगता है कि यह अनुचित हो सकता है'।
IITs में अब मोदी एक्ट धनिया की तरह छींटा जा रहा है। और हमारी राष्ट्रवादी, समाज के एकीकरण की डींग हाँकने वाली संस्था को एक चोरी करने पर पकड़े गए विद्यार्थी की चिंता है, ना कि उस मस्तिष्क की जिसने अमेरिका में नौकरी करने की जगह देश को चुना।
जो भी आशा है आपको इन जोकरों से त्याग दीजिए। ये साले देश को बेच देंगे अवसर मिलने पर।
बेचारा चटुआ सेल! आधा दिन भी नाच न सका और ABVP ने अगले ही दिन IIT बॉम्बे के प्रोफेसर के मोदी एक्ट में फँसने पर हग दिया।
नियति देखो! हमने तो केवल UGC से आरंभ किया था, पर NEET, CBSE सब होता चला गया। मोदी एक्ट में भी अब संशोधन नहीं, इसको हटाना ही एकमात्र विकल्प होना चाहिए।
ये लोग अवसर मिलते ही देश बेच देंगे। ये सावरकर, विवेकानंद को बेसमेंट के कोने में रख कर अम्बेडकर-फुले पर नाच रहे हैं। इनका मंत्री युवाओं को ‘चैलेंज’ दे रहा है इनोवेट करने को।
चार पैसे के लिए ये भी कुछ दिन में दलित-दलित का बाजा बजाने लगेंगे। आरक्षण पर दर्शन लिखने वाले पद पाते ही पलटी मार चुके हैं। ये शीघ्र ही अपने बिचला नाम फुले कर लेंगे। देखते जाइए।
प्रतिभा दमन का एक नमूना -
जिस IIT बांबे के प्रोफेसर पर SC ST एक्ट लगा उसकी अचीवमेंट्स तो देखिए। अवॉर्ड देखिए,
अब बताइए क्या ये देश कभी विकसित हो सकेगा?
@PMOIndia
अंबेडकर के नाम पर चुनाव नहीं जीते जा सकते यह दूसरी बार फिर सिद्ध हुआ 🔥 पहले दामोदर यादव ने अंबेडकर के नाम पर चुनाव लड़ा दतिया हार गया 😂
वही गलती विजय शंकर मीणा ने की और यह भी दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव हार गया 😂
अरे भाई जब आंबेडकर स्वयं कोई चुनाव नहीं जीत पाए फिर तुम लोग उनके नाम से चुनाव कहा जीत जाओगे
रचना गुप्ता 8 साल से लगातार Niva Bupa का प्रीमियम भर रही हैं,
अभी सर्जरी हुई तो कंपनी ने क्लेम रिजेक्ट कर दिया, खुद के पैसे से सर्जरी करवानी पड़ी।
सर्जरी दो बार इन्हीं की वजह से टली थी।
पहला कैशलेस क्लेम रिजेक्ट हुआ तो रीइम्बर्समेंट डाला,
वीडियो वेरिफिकेशन हुआ, होम वेरिफिकेशन हुआ, मेडिकल टीम वेरिफिकेशन भी हुआ,
जो डॉक्यूमेंट्स पहले दे चुकी थीं वही दोबारा मांगे गए,
हर सबमिशन के बाद 10 से 15 दिन का टाइम मांगा गया,
रचना ने हर स्टेज पर कोऑपरेट किया सब दिया इंतज़ार किया,
फिर रिजेक्शन आया कि पेमेंट का प्रूफ सबमिट ही नहीं किया,
जबकि वो प्रूफ पहले ही जमा हो चुका था,
रेफरेंस आईडी है रिजेक्शन मेल है पूरा मेल ट्रेल है,
फिर मेल आया कि पेमेंट डॉक्यूमेंट्स मेल में दिए ईमेल आईडी पर दोबारा भेजो,
वो ईमेल आईडी खुल ही नहीं रही थी,
रचना ने उसी मेल पर बताया और सारे डॉक्यूमेंट्स उसी थ्रेड में फिर भेज दिए,
न कोई एक्नॉलेजमेंट आया न कोई जवाब,
चार दिन बाद वही मेल दोबारा आ गया, वही इंस्ट्रक्शन, वही खुलने वाली नहीं आईडी,
रचना सोशल मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट हैं हर मेल हर डॉक्यूमेंट संभालकर रखा है,
अब वो एस्केलेशन चैनल्स और लीगल एक्शन तक जाने की बात कह रही हैं।
8 साल प्रीमियम भरो, सर्जरी खुद करवाओ, फिर क्लेम के लिए मेल मेल खेलो,
अगर क्लेम करना इतना मुश्किल है तो प्रीमियम आखिर किस चीज़ का भरा जा रहा है।
उत्तरप्रदेश सरकार इलाहाबाद हाईकोर्ट के 91% आरक्षण पर लगाये गए रोक को चैलेंज करने सुप्रीम कोर्ट जा रही है!
मतलब इनको 91% आरक्षण सही लग रहा है!
कहाँ गए वो ज्ञानचंद जो बोलते थे योगी जी ने नहीं किया, मायावती जी के टाइम का है??
अभी सुप्रीम कोर्ट में कौन जा रहा है 91% आरक्षण को बरकरार रखने??
ये है इनका सबका साथ, सबका विकास मॉडल?