Krishna Consciousness, Daring Gryffindor, Numismatist, Philatelist ,Boddhisatvas of the Earth, liberal, foodie, blogger, Part Time Writer, Nam Myoho Rengey Kyo.
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An absolutely fantastic #Roman barge, "De Meern 1", lenght 25m. It was wrecked in a winding tributary of the Rhine around the year 190 AD, possibly due to navigational error. Much of the barge's interior and the captain's personal... 1/2
#RomanArchaeology
Despite the critical shortage of non clinical subject teachers, despite @NMC_IND 's proposal to bring busy clinical teachers to teach non clinical subjects, some people want to protest and remove the Medical MSc PhD teachers . Is it in the interest of the nation? @MoHFW_INDIA
रमाशंकर की कार जैसे ही सोसायटी के गेट में घुसी, गार्ड ने उन्हें रोक कर कहा..
“साहब, यह महिला आपके नाम और पते की चिट्ठी लेकर न जाने कब से भटक रही हैं।”
रमाशंकर ने चिट्ठी लेकर देखा, नाम और पता तो उन्हीं का था, पर जब उन्होंने चिट्ठी लाने वाली की ओर देखा तो उसे पहचान नहीं पाए।
चिट्ठी एक बहुत ही गरीब कमजोर महिला ले कर आई थी। उनके साथ बीमार सा एक लड़का भी था।
उन्हें देख कर रमाशंकर को तरस आ गया। शायद बहुत देर से वे घर तलाश रही थी।
उन्हें अपने घर लाकर कहा, “पहले तो आप बैठ जाइए।” इसके बाद नौकर को आवाज़ लगाई, “रामू इन्हें पानी ला कर दो।”
पानी पी कर महिला ने थोड़ी राहत महसूस की तो रमाशंकर ने पूछा, “अब बताइए किससे मिलना है?”
“तुम्हारे बाबा देवकुमार जी ने भेजा है। बहुत दयालु हैं वह। मेरे इस बच्चे की हालत बहुत ख़राब है।
गाँव में इलाज नहीं हो पा रहा था। किसी सरकारी अस्पताल में इसे भर्ती करवा दो बेटा, जान बच जाए इसकी।
इकलौता बच्चा है,” इतना कहते कहते महिला का गला रुँध गया।आंखे नम हो गई,
रमाशंकर ने उन्हें गेस्टरूम में ठहराया। पत्नी से कह कर खाने का इंतज़ाम कराया।
अगले दिन फ़ैमिली डॉक्टर को बुलाकर सारी जाँच करवा कर इलाज शुरू करवा दिया।
महिला कहती रही कि किसी सरकारी अस्पताल में इलाज करवा दो, पर रमाशंकर ने उनकी एक नहीं सुनी। बच्चे का पूरा इलाज अच्छी तरह करवा दिया।
बच्चे के ठीक होने पर महिला गाँव जाने लगी तो रमाशंकर को तमाम दुआएँ दीं।खूब आभार व्यक्त किया छोटे बच्चे ने भी रमा शंकर जी के पैर छुए
रमाशंकर ने दिलासा देते हुए कुछ पैसे दिए और एक चिट्ठी दे कर कहा, “इसे पिताजी को दे दीजिएगा।”
गाँव पहुँच कर देवकुमारजी को वह चिट्ठी दे कर महिला बहुत तारीफ़ करने लगी
“आप का बेटा तो देवता है। कितना ध्यान रखा हमारा! अपने घर में रख कर इलाज करवाया।”
देवकुमार चिट्ठी पढ़ कर दंग रह गए..
उसमें लिखा था, “अब आप का बेटा इस पते पर नहीं रहता ... कुछ समय पहले ही मैं यहाँ रहने आया हूँ। पर मुझे भी आप अपना ही बेटा समझें। इनसे कुछ मत कहिएगा।
आपकी वजह से मुझे इन अतिथि माता से जितना आशीर्वाद और दुआएँ मिली हैं, उस उपकार के लिए मैं आपका सदैव आभारी रहूँगा। .. आपका रमाशंकर।”
देवकुमार जी के हाथ अनायास ही उस अनजान देवता के सम्मान में जुड़ गए,
100 years of Brahma equals to one day of Shiva. 100 years of Shiva equals to one wink to the eye of Vishnu. When Vishnu is awake the universe becomes Conscious, when he reposes the universe gets annihilated
~Matsya purana Chapter (291)
As their father, I've always tried to protect them and their beautiful minds from any and all harm.
Yet they still feel pain. They still feel sadness. But to be human is to feel all range of emotions. Silly daddy.
शानदार शताब्दी का ईश्वर चरणों में विराम... मां में मैंने हमेशा उस त्रिमूर्ति की अनुभूति की है, जिसमें एक तपस्वी की यात्रा, निष्काम कर्मयोगी का प्रतीक और मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध जीवन समाहित रहा है।