I had a heart attack at 52. I was on the standard advice. Low fat. Whole grains. Margarine instead of butter. Statins recommended seven times.
I am 58 now. No statins. No blood thinners. No pharmaceutical drugs. My metabolic age is 43. My body fat is 12%. My fasting insulin is optimal. My inflammation is low.
Same body. Same genes. Completely different inputs.
I have told you what is making us sick. Today I am going to tell you exactly what I do every day to stay well. No theory. No supplements I sell. Just what actually works.
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1. नैनीताल जिले में स्थित देवगुरु पर्वत पर देवगुरु बृहस्पति खुले आसमान में विराजमान हैं।
2. मैं 2 साल पहले वहां गई थी और मैंने पुजारियों के द्वारा बताई गई सारी मर्यादाओं का पालन किया था। देवगुरु बृहस्पति जहां विराजमान हैं उसका मैंनें स्पर्श भी नहीं किया था, सिर्फ परिक्रमा की थी और दूर से हाथ जोड़कर प्रणाम करके शाम को 4 बजे से पहले वहां से चली आई थी।
3. उत्तराखंड के सभी देवस्थानों की मर्यादा का मैं पालन करती हूं, कही सुनी बातों पर न जाएं सच्चाई को स्वयं परखते रहें।
4. आज फिर जाने की कोशिश कर रही हूं रास्ते में ही हूं वहां पर तपस्यारत एक संत स्वामी प्रेमानंद जी ने अक्षय तृतीया से वैशाख पूर्णिमा तक विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ एवं अर्चना रखी है, उसमें स्थानीय लोग एवं स्थानीय ब्राह्मण ही शामिल हैं, अंतिम दिन वैशाख पूर्णिमा को भंडारा है एवं समस्त मर्यादाओं का पालन करते हुए आसपास के सभी स्त्री पुरुषों को आमंत्रित किया गया है।
5. आज के बाद हो सकता है कि मैं भंडारे में ही आऊं, तब तक पूज्य कल्याण दास बाबा की छत्रछाया में डोल आश्रम में रहूंगी। डोल आश्रम घने जंगल में बहुत ही सुरम्य स्थान पर स्थित है। पूज्य कल्याण दास बाबा अमरकंटक में भी निवास करते हैं और उन्होंने वर्षों वहां साधना की है और लोक कल्याण के कार्य किए हैं। पूज्य कल्याण दास बाबा की छत्रछाया में रहना माता-पिता के सानिध्य में रहने जैसा लगता है।
6. जय हिमालय, जय गंगा माई, जय नर्मदा माई। @BJP4India@BJP4MP@BJP4UK
हँसा ज़ोर से जब, तब दुनिया
बोली इसका पेट भरा है
और फूट कर रोया जब
तब बोली नाटक है नखरा है
जब गुमसुम रह गया, लगाई
तब उसने तोहमत घमंड की
कभी नहीं वह समझी इसके
भीतर कितना दर्द भरा है
दोस्त कठिन है यहाँ किसी को भी
अपनी पीड़ा समझाना
दर्द उठे तो, सूने पथ पर
पाँव बढ़ाना, चलते जाना l
यह बड़े दुख व चिन्ता की बात है कि पिछले कुछ समय से अकेले यू.पी. में ही नहीं बल्कि अब तो फिल्मों में भी ’पंडत’ को घूसखोर आदि बताकर पूरे देश में जो इनका अपमान व अनादर किया जा रहा है तथा जिससे समूचे ब्राह्मण समाज में इस समय ज़बरदस्त रोष व्याप्त है, इसकी हमारी पार्टी भी कड़े शब्दों में निन्दा करती है। ऐसी इस जातिसूचक फिल्म (वेब सीरीज) ’घूसखोर पंडत’ पर केन्द्र सरकार को तुरन्त प्रतिबन्ध लगाना चाहिये, बी.एस.पी. की यह माँग। साथ ही, इसको लेकर लखनऊ पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज करना उचित कदम।
अपने दिल्ली प्रवास के दौरान मुझे उत्तराखंड के संदर्भ में कुछ चिंताजनक और अजीब-सी जानकारी मिली।
उत्तर प्रदेश से सेवानिवृत्त हुए एक अधिकारी ने बातचीत के दौरान बताया कि उत्तराखंड के भीतर उत्तर प्रदेश से लंगूर, बंदर और भालू पकड़कर जंगलों में छोड़े जा रहे हैं। ऐसे बंदर और लंगूरों के झुंड उत्तराखंड में दिखाई दे रहे हैं, जो सामान्य तौर पर वहाँ नहीं पाए जाते। इसी तरह भालू भी—भारी-भरकम, लंबे अथवा छोटे बालों वाले—ऐसे देखे जा रहे हैं, जो उत्तराखंड की प्राकृतिक प्रजाति से भिन्न प्रतीत होते हैं। उत्तराखंड में सामान्यतः छोटे कद के और घने बालों वाले भालू पाए जाते हैं, जो आजकल ग्रामीण अंचलों में आतंक का पर्याय बने हुए हैं।
मैं यह जानकारी इसलिए साझा कर रहा हूँ ताकि संबंधित लोग सतर्क होकर इस संभावना का आकलन कर सकें और भविष्य के लिए आवश्यक बचाव के उपाय किए जा सकें।
#WildlifeConcern #UttarakhandAlert #EnvironmentalSafety #PublicAwareness
हारे हुए लोग कहाँ जायेंगे ? ?
हारे हुए लोगों के लिए कौन दुनिया बसाएगा ?
उन पराजित योद्धाओं के लिए ,
तमाम शिकस्त खाए लोगों के लिए।
प्रेम में टूटे हुए लोग,
सारी जिंदगी को कहीं दांव लगाकर हारे हुए लोग
थके-हारे लोग, गुमनाम लोग
वो बूढ़े पिता जो अब अकेले रह गए हैं
वो कल्पनाओं में खोया रहने वाला बच्चा
जो परीक्षा में फेल हो गया है
वो लड़की जो तेज कदमों से घर की तरफ लौट रही है
वो बूढ़ा गुब्बारे वाला जो कांपते हाथों से पैसे गिनता है
एक असफल लेखक
मैच हार गया खिलाड़ी
इंटरव्यू से वापस लौटा युवा
और ऐसे तमाम लोग
जिन्हें पता था कि वे सफल हो सकते हैं
मगर उन्होंने असफलताओं से भरा रास्ता चुना,
वो लोग जिन्होंने
हमेशा गलत राह पर चलने का जोखिम उठाया
वो लोग जिन्होंने
गलत लोगों पर भरोसा किया
वो जिन्होंने
चोट खाई, धोखा खाया, ठोकर खाई
गिरे और धूल झाड़कर खड़े हुए
वे कहां जाएंगे ?
क्या कोई ऐसी दुनिया होगी
जहां दो हारे हुए इंसान
एक-दूसरे की हथेलियां थामे
कई पलों तक खामोश रह सकते हों
अपनी चुप्पी में तकलीफ बांटते हुए।
जिन्होंने इकारस की तरह
सूरज की तरफ उड़ान भरी
और उनके पंख पिघल गए
हारे हुए लोगों के लिए कोई जगह नहीं है
न किसी घर में, न समाज में, न किसी देश में।
क्या जो विजेता थे
वो इनसे बेहतर हैं? बेहतर थे?
नहीं, वही हारा जिसने जिंदगी की अनिश्चितता पर यकीन किया
वही जिसने अनजान रास्तों पर चलने का जोखिम उठाया
जिसने गलती करनी चाही , जो मक्कार चुप्पियों के पीछे छिपा नहीं।
जो बोल सकता था मगर बोला नहीं
उसने वो चुना जिसे चुनने का कोई तर्क नहीं था
सिवाय उसकी आत्मा के
जो हारा आखिर वो भी एक नायक था।
एक पराजित नायक के दर्द को
कौन समझना चाहेगा?
जाएंगे कहाँ सूझता नहीं
चल पड़े मगर रास्ता नहीं
क्या तलाश है कुछ पता नहीं
बुन रहे हैं दिल ख़्वाब दम-ब-दम।
~ दिनेश श्रीनेत
Tharali’s tragedy is a heartbreaking reminder of what reckless development can cost. As a native of Uttarakhand, I stand in solidarity with those affected. It’s time to respect and protect our fragile mountain ecosystem.
#Uttarakhand#tharali
"You were given the choice between war and dishonor. You chose dishonor and you will have war."
This was Winston Churchill's statement after Neville Chamberlain returned from signing the Munich Pact with Hitler.