🌳॥ बरगद (वट वृक्ष) का पौराणिक, वैज्ञानिक और चमत्कारिक महत्व ॥🌳
बरगद एक विशाल और दीर्घजीवी वृक्ष है। हिन्दू परंपरा में इसे अत्यंत पवित्र और पूजनीय माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब अलग-अलग देवों से विभिन्न वृक्ष उत्पन्न हुए, तब यक्षों के राजा 'मणिभद्र' से वटवृक्ष की उत्पत्ति हुई थी।
आइए जानते हैं इस चमत्कारी वृक्ष के अद्भुत रहस्य और जीवन को सुखी बनाने वाले कुछ अचूक उपाय: 👇
🔸 पौराणिक और धार्मिक महत्व 🔸
त्रिमूर्ति का वास: बरगद का वृक्ष त्रिदेवों का प्रतीक है। मान्यता है कि इसकी जड़ों में ब्रह्मा जी, छाल में भगवान विष्णु और शाखाओं में महादेव (शिव) का वास होता है।
शिव का प्रतीक: जिस प्रकार पीपल को विष्णु जी का प्रतीक माना जाता है, उसी प्रकार बरगद को भगवान शिव का स्वरूप माना जाता है। यह प्रकृति के सृजन का प्रतीक है।
अक्षयवट: यह वृक्ष असीमित समय तक जीवित रहता है, इसलिए इसे "अक्षयवट" (जिसका कभी क्षय न हो) भी कहा जाता है। इसकी जड़ में जल देने से महान पुण्य की प्राप्ति होती है।
🔹 वैज्ञानिक और अनोखा महत्व 🔹
मन की शांति: इस विशाल वृक्ष की ठंडी छाया सीधे हमारे मन पर असर डालती है और उसे शांत बनाए रखती है।
अकाल में सहारा: भयंकर सूखे और अकाल में भी यह हरा-भरा रहता है। ऐसे समय में इसके पत्ते पशुओं के और इसके फल इंसानों के जीवन निर्वाह का साधन बनते हैं।
औषधीय गुण: इसकी छाल और पत्तों से कई प्रकार की आयुर्वेदिक औषधियां बनाई जाती हैं। इसके पत्तों और डालियों से निकलने वाले दूध का तांत्रिक और औषधीय प्रयोग भी किया जाता है।
✨ जीवन की समस्याओं को दूर करने के अचूक उपाय ✨
1️⃣ शनि व राहु की पीड़ा से मुक्ति के लिए:
नियमित रूप से भगवान शिव का ध्यान करते हुए वट वृक्ष की जड़ में जल अर्पित करें।
हर शनिवार इसके तने में 3 बार काला सूत लपेटें और वहां दीपक जलाकर कृपा की प्रार्थना करें।
वृक्ष के नीचे बैठकर 'शनि मंत्र' का जाप करें। यह प्रयोग करने वाले को कोई भी ग्रह कभी पीड़ा नहीं दे सकता!
2️⃣ संतान प्राप्ति की अभिलाषा के लिए:
जहाँ तक संभव हो, खाली स्थानों पर बरगद का वृक्ष लगायें या लगवाएं।
हर सोमवार को बरगद की जड़ में जल अर्पित करें।
वृक्ष के नीचे बैठकर रुद्राक्ष की माला से "ॐ नमः शिवाय" का कम से कम 11 माला जाप करें। महादेव की कृपा से आपकी मनोकामना शीघ्र पूर्ण होगी।
3️⃣ सुखद दाम्पत्य (वैवाहिक) जीवन के लिए:
किसी भी अमावस्या के दिन प्रातः काल पीला सूत, फूल और जल लेकर वट वृक्ष के पास जाएं।
सबसे पहले वृक्ष के नीचे शुद्ध घी का दीपक जलाएं, फिर जल और पुष्प अर्पित करें।
पीला सूत तने में लपेटते हुए वृक्ष की 9 बार परिक्रमा करें और अपने सुखद दाम्पत्य जीवन के लिए प्रार्थना करें।
रघुबर तुमको मेरी #लाज !
सदा सदा मैं शरण तिहारी
तुम हो ग़रीब-नेवाज़
रघुबर तुम हो ग़रीब-नेवाज़
रघुबर तुमको मेरी लाज !
~ गोस्वामी तुलसीदास
स्वर : भीमसेन जोशी
#भजन#भक्ति_गीत#लेखनी ✍️
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*🌿चार बच्चे पैदा करने के २७ सबसे बड़े लाभ :--*
*१-- पारिवारिक रिश्ते काका- काकी, ताऊ-ताईजी, मौसी-मौसाजी, जेठजी जेठानी जी, मामा-मामी जी, नाना-नानीजी बुआ-फूफाजी, देवर-देवरानी, भतीजा-भतीजी, भाणजा-भाणजी, दोहिता-दोहित्री आदि बने रहेंगे।*
*२-- घर में आए दिन कोई ना कोई उत्सव होते रहेंगे।*
*३-- घर में जब भी कोई बड़ा काम होगा तो घर में उसे करने के लिए पर्याप्त लोग होंगे।*
*४-- कोई एक बच्चा यदि गलत काम करेगा तो बाकी तीन बच्चों की उस पर नजर रहेगी।*
*५-- बुढ़ापे में मां बाप को किसी काम के लिए इधर उधर नहीं भागना पडेगा।*
*६-- ४ बच्चे होंगे तो कोई भी उनसे लड़ने से पहले ४ बार सोचेगा।*
*७-- ४ बच्चे होंगे तो मां बाप की ज़िम्मेदारी बढ़ जाएगी और वे फालतू का खर्च नहीं करेंगे।*
*८-- ४ बच्चे होने से सरकारी स्कूलों की अहमियत बढ़ेगी और प्राईवेट संस्थाओं की लूट बंद होगी।*
*९-- ४ बच्चे होने से मां बाप चारों बच्चों के लिए भविष्य में घर बनाने के लिए चार जगह चार भूमि के टुकड़े खोजेंगे और समय पर घर बनाएंगे।*
*१०-- चार बच्चे होने से पैतृक संपत्ति बची रहेगी।*
*११-- चार बच्चे होने से यदि दो बच्चों की मृत्यु २४ साल से पहले आकस्मिक हो जाती है, तो दो बच्चे बचें रहेंगे।*
*१२-- चार बच्चे होंगे तो बूढ़े मां-बाप को कंधे पर उठाकर श्मशान घाट तक ले जाने के लिए चार कंधे होंगे।*
*१३-- चार बच्चे होने से कोई भी आपके घर की महिलाओं पर कु-दृष्टि नहीं रखेगा।*
*१४-- चार बच्चे होंगे तो आपके गांव में आप सभी की अच्छी खासी जनसंख्या रहेगी और आप संगठित होकर लड़ सकते हैं।*
*१५-- इकलौते बच्चे के बिगड़ने के चांस ८०% होते हैं और चार बच्चे होने पर यह संभावनाएं केवल १०% रह जाती है, क्योंकि चारों बच्चे आपस में एक दूसरे की कमियां गिनाते रहते हैं।*
*१६-- चार बच्चों में यदि चारों राम - लक्ष्मण - शत्रुघ्न और भरत की तरह निकल गये तो रावण की लंका जलनी तय है।*
*१७-- यदि नो लड़कियां नव दुर्गा की तरह हो गयी तो महिषासुर और अधर्मी राक्षसों का अन्त तय है।*
*१८-- लड़कियां भी दो तीन रहेंगी तो मां को आराम मिलेगा और परिवार में साफ सफाई और शांति रहेगी।*
*१९-- बिना लड़की के परिवार में रौनक नहीं होती।*
*२०-- बच्चे खूब होंगे तो हर दो तीन वर्ष बाद घर में कोई ना कोई विवाह और शुभ कार्य होते रहेंगे और देश की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।*
*२१-- चारों बच्चे संगठित रहेंगे तो वंश वृद्धि भी होगी और समाज भी संगठित बना रहेगा।*
*२२-- एक बच्चा यदि गलत करेगा तो बाकी के तीन उसे थप्पड़ मारकर सही दिशा में लाएंगे।*
*२३-- अधिक बच्चे होने पर बड़े बच्चे को अपनी जिम्मेदारी का अनुभव होगा।*
*२४-- अधिक बच्चे होने पर महिलाएं जल्दी बीमार नहीं होगी और उन्हें ना ही गर्भ का कैंसर और ना ही स्तन कैंसर होगा।*
*२५-- अधिक बच्चे होने पर नवरात्रि में कन्या जिमाते समय पूरी नो कन्याएं उपलब्ध होंगी और माता की कृपा भी बनी रहेगी।*
*२६-- चार बच्चे होंगे तो एक बच्चा यदि मानसिक रूप से अपंग होगा तो तीन बच्चों में बारी बारी से जिम्मेदारी बंट जाएगी।*
*२७-- चार बच्चे पैदा करने पर ही दो मंजिला कोठी और आठ कमरे बनाने का लाभ है अन्यथा इकलौता बच्चा पैदा करने पर आलीशान कोठी यदि आप बनाते हैं, तो आप धरती के सबसे बड़े मूर्ख हैं।*
पुरानी कहावत है
चार भाई चौधरी
पांच भाई पंच
सात भाई ना तो चौधरी को मानते हैं और ना ही पंच को मानते हैं।
बाकी आपकी इच्छा ।
*वेद कहतें हैं कि, हे देवताओं हमारी संतानों की वृद्धि हो और सनातन कुल परम्परा बनी रहे , और हम सभी ऋषि शक्ति सम्पन्न और बलिष्ठ सैकड़ों संतानों की वृद्धि करें।*
*🚩यह संदेश सभी सनातनी तक पहुंचे*
*योग वासिष्ठ पढ़ें।*
*योग वासिष्ठ पढ़ने के लिए सबको प्रेरित करे 🚩🙏*
🙏🚩🇮🇳🔱🏹🐚🕉️
कुदरत का डेमोक्रेसी मॉडल सबकी आवाज़ अलग, सब आज़ाद"
एक आसमान 25 तरह के परिंदे और सबकी आवाज़ अलग।
कोई कूकता है, कोई चहकता है, कोई रात में बोलता है, कोई दिन में। कोई कर्कश, कोई सुरीला।
फिर भी लड़ते नहीं। एक-दूसरे की आवाज़ नहीं दबाते। सबको अपने सुर में गाने की आज़ादी है।
काश इंसान भी परिंदों से कुछ सीख लेता यहाँ तो एक जैसी आवाज़ न हो तो इंसान को ही पिंजरे में डाल देते हैं।
वीडियो में सुनो, कुदरत ने कैसे हर गले को अलग सुर दिया है 👇
सुबह-सुबह कान में हेडफोन लगाकर सुनना सुकून मिल जाएगा।
🥤 तांबे के बर्तन में पानी पीने के संभावित फायदे
तांबे के बर्तन में रखा पानी प्राचीन समय से स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है। सीमित मात्रा में इसका सेवन शरीर को कई तरह से सपोर्ट कर सकता है।
• खराब कीटाणुओं को कम करने में मदद • पाचन को बेहतर रखने में सहायक • दिमाग और शरीर को एक्टिव रखने में मदद • त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाए रखने में सहायक • एंटीऑक्सीडेंट गुण बुढ़ापे के असर को धीमा करने में मदद कर सकते हैं • शरीर में आयरन के उपयोग को सपोर्ट कर एनीमिया में मदद कर सकता है • जोड़ों और गठिया की परेशानी में राहत देने में सहायक माना जाता है • दिल की सेहत को सपोर्ट करने में मदद कर सकता है • थायराइड संतुलन में सहायक माना जाता है
✅ रातभर तांबे के बर्तन में रखा पानी सुबह पीना अच्छा माना जाता है। ✅ जरूरत से ज्यादा सेवन करने से बचें और बर्तन की नियमित सफाई करें।
👉 तांबे के बर्तन का पानी संतुलित मात्रा में पीना शरीर की overall हेल्थ को सपोर्ट करने वाला पारंपरिक तरीका माना जाता है।
अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) में पुराणों के अनुसार 33 की संख्या में वस्तुओं का दान (जैसे फल, मिठाई, या 33 वस्तुएं) श्रेष्ठ माना गया है, जो सोने के दान के बराबर पुण्य देता है। विशेष रूप से पीले वस्त्र, अन्न (खीर), घी, दीपदान और मालपुआ का दान भगवान विष्णु की कृपा और सुख-समृद्धि लाता है।
मालपुआ का दान क्यों अधिक उत्तम है
मालपुआ ही एक ऐसी मिठाई है जिसमें सबसे ज्यादा छिद्र होते हैं।
हमारे पाप भी छिद्रों के समान है। क्षय तिथियों से बनने वाला पुरुषोत्तम मास, छिद्र युक्त है। अतः इसमें मालपुये का दान सर्वाधिक प्रभाव शाली होता है।
जन्म से पंचम तक भाव के पाप छठे भाव मे। छठे, सप्तम के पाप अष्टम भाव में, अष्टम से एकादश भाव के पाप द्वादश भाव मे रहते है। यह तीनों भाव को छिद्र कहते है। अतः ज्योतिष के त्रिक भावों के लिए इससे सुंदर उपाय कुछ नहीं। पाप नष्ट होते ही वैकुंठ की प्राप्ति की ओर अग्रसर।
*“प्रत्यपूपं तु यावन्ति छिद्राणि पृथिवीपते। तावद्वर्षसहस्राणि वैकुण्ठे वसते नरः।।”*
हर एक मालपूआ में जितने छिद्र होते हैं मनुष्य उतने वर्ष पर्यन्त वैकुण्ठ लोक में जाकर वास करता है ।
निर्णयसिन्धु के अनुसार इस दान से पृथ्वीदान का फल मिलता है *“उद्दिश्यापूपदानेन पृथ्वीदानफलं लभेत्”*
इस ३३ संख्या के सम्बन्ध में २ मत हैं :
१. अधिक मास ३३ मास में एक बार आता है
२. अधिकमास में ३३ देवता प्रधान हैं - अष्टवसु (८), एकादश रूद्र (११), द्वादश आदित्य (१२), वषट्कार (१), प्रजापति (१)
शुगर (मधुमेह) क्या है?
शुगर (मधुमेह) एक ऐसी स्थिति है जिसमें रक्त में ग्लूकोज (शर्करा) का स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है।
यह तब होता है जब शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बनाता या इंसुलिन सही तरह काम नहीं करती।
ये संकेत बताते हैं कि आपको हो सकता है शुगर, साथ में देशी उपाय व सेवन का तरीका
1. बार-बार पेशाब आना
देशी उपाय: मेथी दाना
सेवन का तरीका: 1 चम्मच मेथी दाना रातभर 1 गिलास पानी में भिगो दें, सुबह खाली पेट पानी पिएं और दाने चबा लें।
2. बहुत ज्यादा प्यास लगना
देशी उपाय: धनिया पानी
सेवन का तरीका: 1 चम्मच साबुत धनिया रातभर भिगो दें, सुबह छानकर पिएं।
3. बार-बार भूख लगना
देशी उपाय: दालचीनी
सेवन का तरीका: 1 छोटा टुकड़ा दालचीनी 1 कप पानी में उबालकर दिन में 1 बार पिएं।
4. बिना कारण वजन कम होना
देशी उपाय: पौष्टिक संतुलित आहार
सेवन का तरीका: मूंग दाल, पनीर, दही, हरी सब्जियां नियमित लें।
5. बहुत थकान या कमजोरी
देशी उपाय: आंवला
सेवन का तरीका: 20–30 ml आंवला रस पानी में मिलाकर सुबह लें।
6. धुंधला दिखाई देना
देशी उपाय: शुगर नियंत्रण व जांच
तरीका: यह चेतावनी संकेत है; घरेलू उपाय पर निर्भर न रहें।
7. घाव का देर से भरना
देशी उपाय: हल्दी
सेवन का तरीका: भोजन में हल्दी का नियमित उपयोग; घाव की सफाई रखें।
8. त्वचा में खुजली/संक्रमण
देशी उपाय: नीम
सेवन का तरीका: नीम के पत्तों का उबला पानी ठंडा करके त्वचा साफ करने में उपयोग करें।
9. हाथ-पैरों में झनझनाहट
देशी उपाय: नियमित सैर
तरीका: रोज 30 मिनट तेज चाल से चलें।
10. मुंह सूखना
देशी उपाय: पर्याप्त पानी
तरीका: दिनभर थोड़ा-थोड़ा पानी पिएं।
11. बार-बार संक्रमण
देशी उपाय: गिलोय
सेवन का तरीका: 20 ml गिलोय रस दिन में 1 बार।
12. चिड़चिड़ापन/ध्यान में कमी
देशी उपाय: ब्राह्मी
सेवन का तरीका: ब्राह्मी चूर्ण 1/2 चम्मच गुनगुने पानी के साथ।
13. गर्दन/बगल काला पड़ना
देशी उपाय: वजन नियंत्रण + व्यायाम
तरीका: मीठा कम करें, रोज व्यायाम करें।
14. बहुत नींद आना/सुस्ती
देशी उपाय: करेला
सेवन का तरीका: 20–30 ml करेला रस सुबह (कुछ लोगों में शुगर बहुत गिरा सकता है)।
15. बार-बार फंगल इन्फेक्शन
देशी उपाय: स्वच्छता
तरीका: प्रभावित जगह सूखी रखें, सूती कपड़े पहनें।
शुगर नियंत्रण में सहायक सामान्य उपाय व सेवन
जामुन बीज चूर्ण: 1/2–1 चम्मच पानी के साथ
मेथी दाना: 1 चम्मच भिगोकर
दालचीनी: सीमित मात्रा में
करेला: सीमित मात्रा में
नियमित व्यायाम और संतुलित भोजन
The song that holds a unique record .
Film producer - Kishore Kumar,
Film director - Kishore Kumar,
Film lead - Kishore Kumar,
Song writer - Kishore Kumar,
Song composer - Kishore Kumar,
Singer - Kishore Kumar,
Song filmed on - Kishore Kumar,
The little boy here is Kishore Kumar's son - Amit Kumar,
Kishore Kumar, the greatest of all 👍👍