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बूँद बराबर बौना-सा भन्नाकर लपका
पैर के अँगूठे से उछला
टख़नों से घुटनों पर आया
पेट पे कूदा
नाक पकड़ कर
फन फैला कर सर पे चढ़ गया ग़ुस्सा!
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~गुलज़ार
@GulzarPoem
���ुश्किलें पड़े तो हम पे, इतना कर्म कर
साथ दें तो धर्म का चलें तो धर्म पर
ख़ुद पर हौसला रहें बदी से न डरें
दूसरों की जय से पहले ख़ुद को जय करें
#gulzar
जिंदगी आप की वजह से 'गुलज़ार' है ।
The one who pens emotions in his beautiful words ✍🏻 ..
#HappyBirthdayGulzar Sahab.
May you be blessed with good health, joy & more poetry..
"Hoti daulat toh sab
tum par luta deta,
Ab toh sirf mohabbat bachi hai,
Jitni marzi le lo.." - #Gulzar
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वक़्त की आँख पे पट्टी बाँध के खेल रहे थे आँख-मिचोली
रात और दिन और चाँद और मैं
जाने कैसे काएनात में अटका पाँव
दूर गिरा जा कर मैं जैसे
रौशनी से धक्का खा के, परछाईं ज़मीं पर गिरती है!
धय्या छूने से पहले ही
वक़्त ने चोर कहा और आँखें खोल के मुझ को पकड़ लिया!
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~गुलज़ार
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समस्याओं को इस देश में झाड़-फूँक, टोना-टोटका से हल किया जाता है। सांप्रदायिकता की समस्या को इस नारे से हल कर लिया गया -हिंदू-मुस्लिम,भाई-भाई!
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~हरिशंकर परसाई
(@Parsaivyangy )
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लब हिले तो मोगरे के फूल खिलते हैं कहीं
आपकी आँखों में क्या साहिल भी मिलते हैं कहीं
आपकी खामोशियाँ भी, आप की आवाज़ हैं
आपकी आँखों में कुछ महके हुए से राज़ है
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~गुलज़ार साहब
@GulzarPoetry@GulzarPoem#tmplyrics#lyricswelove