हरियाणा चुनावों के कल के मतदान से पहले हर मतदाता तक यह विडियो पहुंचाओ।
किसान मजदूर और हर मतदाता से अपील है कि मतदान से पहले यह वीडियो जरूर देखें।
Jai Hind 🇮🇳
21 फरवरी 2024 को हरियाणा सरकार ने किसानों पर गोलियां चलाई, किसान MSP गारंटी कानून मांग रहे थे, कोई चांद नहीं मांग रहे थे, उस MSP की गारंटी मांग रहे थे, जिसकी घोषणा सेंटर सरकार ही करती है; शुभकरण सिंह की शहीदी, 5 किसानों का आंखें गंवाना भूलेंगे नहीं, कल BJP को करारा जवाब मिलेगा...
पत्रकार का हरियाणा कृषि मंत्री जे पी दलाल से सवाल: किसान आंदोलन में अब तक 200 किसान मर गए, क्या कहेंगे ?
कृषि मंत्री:हंसते हुए, अगर ये किसान घर पे होते तो भी मरते
किसान आंदोलन में 750+ किसान शहीद हुए लेकिन BJP सरकार ने संवेदना भी प्रकट नहीं की
कल वोट की चोट से इनको जवाब देंगे.
शंभू और खन्नौरी बॉर्डर पर किसानों के ऊपर चली हर लाठी, हर गोली, हर आंसू गैस के गोले का हिसाब कल अपनी वोट की चोट से देगी किसान कौम, गांव देहात से BJP का सूपड़ा साफ, और ये नतीजे सब पार्टियों के लिए एक सबक होना चाहिए की किसान कौम को उसका हक दे दो नहीं तो किसान तुम्हारी गद्दी छीन लेगा
दिल्ली के बॉर्डर पर 750 #किसान शहीद हो गए, और इनसे काले कानूनों को काला नहीं बोला गया, BJP के विरोध का एजेंडा लेकर जिन किसानों की वोट ली उनका ही साथ नहीं दिया उल्टा BJP की गोद में बैठ कर सत्ता की मलाई खाई, आज देख लो कोई पार्टी का नाम लेने वाला नहीं बचा, ये सब नेताओं के लिए सबक है
5 अक्टूबर को हरियाणा में वोटें पड़ेगी, जो किसान का बीज हुआ वो किसान कौम की पीठ पर पड़ी हर लाठी का हिसाब जरूर लेगा, हजारों आंसू गैस के गोलों को भी याद रखेगा, गंदे पानी की बौछारों का हिसाब भी जरूर करेगा, 5 अक्टूबर को ऐसा करारा जवाब देना है की सत्ता आसीन याद रखे की किसान भूलते नहीं
ये दिग्विजय चौटाला हैं, अपने आपको किसान बता रहे हैं और बाकी सब को कांग्रेसी, ये पहले किसान हैं जो 750 किसानों की शहीदी के बाद भी खट्टर साहब के साथ सत्ता की मलाई दबा के खा रहे थे, पहला किसान है जिसके परिवार को किसान आंदोलन बीमारी लगा था, इस बार पूरा सूपड़ा साफ है इनकी पार्टी का !
जब किसान आंदोलन में रोज 2 किसान शहीद हो रहे थे तो हरियाणा C.M और मंत्री कह रही थे की किसानों का इलाज बांधने खातिर डंडे उठा लो,कोई मंत्री आंदोलन को गदर बता रहा था, कोई मंत्री किसान शहीदों का मजाक उड़ा रहा था, कोई विदेशी ताकतों का पिट्ठू बता रहा था
इस चुनाव में सब याद रखा जाएगा
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भाजपा सरकार ने हरियाणा में किसानों से 52 लाख प्रति एकड़ जमीन खरीदी और कंपनियों को 63 करोड़ प्रति एकड़ में बेच दी। प्रति एकड़ 62 करोड़ से ज्यादा मुनाफा। ये सरकार नहीं चला रहे, दलाली खा रहे।
2013 में कांग्रेस सरकार कानून लाई कि जमीन अधिग्रहण होगा तो किसानों से अनुमति लेनी होगी। मोदी ने इसे तीन बार बदलने का प्रयास किया।
अंततः राज्यों से अलग कानून बनवाया। हरियाणा ने कानून बनाया कि जमीन अधिग्रहण के लिए किसान से कोई अनुमति नहीं ली जाएगी।
काले दिल वालों को कानूनों में कुछ काला नजर नहीं आता था। जब खा पीकर छीक लिए तो झोला उठाकर चल दिए।
अब मुंह धोकर फिर आ गए कि एक मौका और दो, एक और धोखे की प्लानिंग है।
@anuragdhanda@NayabSainiBJP@AamAadmiParty The Aam Aadmi Party government in Punjab has done the same thing with the government employees of Punjab. Isn't Punjab pay scale the right of Punjab employees? Apply Punjab pay scale to Punjab employees. Some pictures of Punjab from outside the Aam Aadmi Party office Jalandhar(W)
ये हीरू ओनेडा हैं।
जापान की इम्पीरियल आर्मी का सिपाही, जिसने जिंदगी के "30 साल" दूसरा विश्वयुद्ध लड़ते हुए गुजार दिए।
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दूसरे विश्वयुद्ध के पूर्व जापान में राजशाही, वस्तुतः एक फासिस्ट किस्म के सिस्टम पर शासन करती थी।
जनता को देश के लिए मरने, और मारने की घुट्टी मिली होती है। कामिकाजे एक प्रथा है, जिसमे बचने का कोई मार्ग न मिलने पर समुराई, (या कहिये फौजी) अपनी मौत को उद्देश्य बनाकर लड़ता है।
सुदूर समुद्र में जापानी बमवर्षक बम गिराने के बाद, अपना प्लेन भी अमेरिकी नेवल शिप से भेड़ देते, क्योकि प्लेन में वापस एयरस्ट्रिप तक जाने का फ्यूल न होता था।
इन तरीकों से जापान, जर्मनी के सरेंडर के बाद भी युद्ध कुछ महीने खींच सका, और अंत मे एटम बम से दो शहरों के एल्हिनेशन के बाद ही सरेन्डर को तैयार हुआ।
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तो हीरू ओनेडा ने 1944 में आर्मी जॉइन की। इन्हें फिलीपींस के एक द्वीप पर अमरीकी हवाई अड्डे पर कब्जा करना था।
दल असफल रहा, अमरीकी फ़ौज पूरी ताकत से टूट पड़ी, और हीरू के साथी बेतहाशा मारे गए। हीरू और उनके 3 साथी पहाड़ों में जा छुपे।
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कुछ दिनों बाद हवाई जहाज से पर्चे गिरे, लिखा था, तुम लोग समर्पण कर दो। क्योकि जापान ने हार मान ली, युद्व खत्म हो गया है।
जापान देश महान, उगते सूरज का देश, वीरों की धरती, राजा स्वयं भगवान का अवतार। जापान तो कभी हार मान ही नही सकता। जाहिर है ये प्रोपगंडा था।
तो हीरू एंड कम्पनी का सँघर्ष जारी रहा। छह साल बाद उनका एक साथी भाग गया। फिर पर्चे गिरे,जिसमे साथी के सरेंडर की जानकारी थी। फिर सरेंडर करने को कहा गया।
हीरू के गुस्से का पारावार न रहा। गद्दार निकले साथी को गालियां दी गयी। फिर सबने, अपनी मौत तक, प्यारे देश के लिए सँघर्ष की कसम खायी। और तय किया कि अब कोई भागे, तो दूसरे उसे गोली मार दें।
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पर्वत की तलहटी पर किसानी शुरू हो गयी थी। सारे दल ने चर्चा की, प्रस्ताव यही तय हुआ कि ये सारे किसान नही, अमरीकी जासूस थे, जो भेस बदलकर उनकी टोह लेने आये थे।
इसलिए अब वे किसानों को मारते, फसलें जला देते, खाने भर लूट लेते। ऐसी ही एक रेड में उनका एक साथी मारा गया।
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अब 2 बचे।
दस बारह साल बाद एक साथी मर गया। अकेले हीरू ने सँघर्ष जारी रखा।
एक दिन पहाड़ पर टहलने आया युवक दिखा। हीरू ने उसे जासूस समझकर पकड़ लिया। जापानी भाषा मे बातचीत हुई। बंधक ने बताया कि युद्ध तो 30 साल पहले ख़त्म हो चुका।
जापान के सरेंडर, एटम बम और आधुनिक जापानी सोसायटी की जानकारी दी। हीरू अब भी यकीन न कर पाया। उसे कमांडिंग अफसर का आदेश था, सरेंडर नही करना है।
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युवक को उसने छोड़ दिया। उस युवक जापान जाकर हीरू के कमांडिंग अफसर को खोज निकाला। फिलीपींस लाया।
हीरू के पहाड़ पर कमांडिंग अफसर अकेले गया। उसे शाबासी दी। कहा- युद्ध खत्म हो गया है। सरेंडर कर दो।
ये 1974 था।
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फटी हुई वर्दी पहने हीरू ने हथियार रख दिये। भूमि पर लोट गया। जार जार रोया। जो जीवन वो जीता रहा, जवानी खपा दी, सब झूठ था। बेकार था। इल्लीगल था।
कमांडिंग अफसर ने सांत्वना दी। फिलीपीन सरकार को सौपा। हीरू नें अपनी एसाल्ट गन, कुछ कारतूस और समुराई तलवार के साथ फिलीपींस के राष्ट्रपति के समक्ष समर्पण किया।
उस पर 30 से ज्यादा हत्या के केस थे। मगर पार्डन (माफी) दी गईं। हीरू अपने देश लौटा। अपना देश उसे पहचान नही आ रहा था।
उसकी कल्पना तो 1944 में फ्रीज थी।
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हीरू का किस्सा आपको अजब लगेगा। एक जीवन ख्याली युद्ध मे बर्बाद हो गया, 30 जो हत्याएँ उसने की, उसे भी जोड़िये। लेकिन हीरू को पागल, या इतिहास का अकेला इवेंट मत समझिये।
आसपास देखिए। लाखों हीरू ओनेडा मिलेंगे। वे लड़ रहे हैं, समय काल से परे, एक ख्याली युद्ध। उम्र महज 20-30-50 साल है मगर कोई 80 साल पहले जिन्ना से, 100 साल पीछे गांधी से, 400 साल पीछे औरंगजेब से, कोई 600 साल पीछे बाबर से, कोई 1000 साल पीछे गजनवी से, कोई 1400 पीछे कासिम से.. लोहा ले रहा है।
खंदक खोद रहा है, हमले कर रहा है। दिमाग मे "मां भारती की गोलियों से आरती" की तस्वीरें बना रहा है।
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युद्ध ख्याली हैं। मौतें असली, जिंदगियों की बर्बादी असली,
देश का गर्त में जाना असली।
हम सब हीरू ओनेडा है। धर्म, जाति और इतिहास के इन्फिरियरटी कम्प्लेक्स, और नफरत से लैस होकर आम हिंदुस्तानी, हीरू बने फिर रहे हैं।
जिस किसी दिन (और वो दिन आएगा) हम अपने हथियार फेंककर अपनी आंखें खोलेंगे, अपने देश को पहचान नही पाएंगे।