तभी तो कहा जाता है सर
कि
लाखों रुपये खर्च करके भी संस्कार नहीं खरीदे जा सकते, ये तो वो मूल्य हैं जो हमें विरासत में हमारे माता-पिता और पूर्वजों से मिलते हैं |
इन्हें बनाए रखना और अगली पीढ़ी में हस्तांतरित करना सबके
बस की बात नहीं है जी |
कप्तान SSP अविनाश पांडेय को पुलिस वैन में जाकर आंदोलन में डिटेन किए गए लोगों को थप्पड़ नही मारना चाहिए था.
पुलिस को Crowd Control की बाकायदा ट्रेनिंग दी जाती है.
पुलिस भीड़ पर हल्का बल प्रयोग कर सकती है. लेकिन पुलिस कस्टडी में किसी को भी पीटने का अधिकार पुलिस के पास नही है.
जब मामला शांत हो चुका था. आंदोलनकारियों पकड़कर पुलिस वैन बंद कर दिया, तो वैन का दरवाजा खोलकर थप्पड़ क्यों मारा ?
UPSC को भंग करना चाहिए. इस देश को आईएएस आईपीएस से कभी कोई भला नही हुआ है. आईपीएस आईएएस आम जनता से मिलते भी हैं तो एक राजा की तरह. आम नागरिक को थप्पड़ मारना कोई बहादुरी नही है.
यह कोई दरोगा या इंस्पेक्टर नहीं,बल्कि मेरठ एसएसपी अविनाश पाण्डेय है। इसकी भाषा देखिए।
मेरठ एसएसपी कह रहा है कि यह रोड इनके (दलितों) पिता जी की नहीं है। रोड गन्दा कर दिया,सालों ने।
एसएसपी अविनाश पाण्डेय द्वारा दलितों गाली देने का अधिकार किसने दिया?
स्वीडन के बाद ऑस्ट्रेलिया पत्रकार
कह रहे है
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अनस्क्रिप्टेड
प्रेस कॉन्फ्रेंस से बचते है
वहीं पर जाते है
जहां पर स्टेज मैनेज होता है
यह मुर्दों का देश है साधो।।
सोनम वांगचुक की हालत और ज्यादा गंभीर। अब तो खङे होने में भी मुश्किल हो रही है ।
पेपर लीक जैसे गंभीर मसले पर वांगचुक प्रोटेस्ट कर रहे हैं पर क्या मजाल जो सरकार पर असर पङे।
नगीना सांसद @BhimArmyChief चंद्रशेखर आजाद जी मेरठ पीड़ित परिवार से मिलने जाते हुए
मेरठ जाते हुए रास्ते में मेरठ के टोल प्लाजा पर पुलिस अधिकारियों ने चंद्रशेखर आजाद जी को पीड़ित परिवार से मिलने से रोक लिया गया!
सरकार चंद्रशेखर आजाद जी को पीड़ित परिवार से मिलने क्यों नहीं दे रही
मुझे क्यों आना पड़ा क्योंकि आप गाली बक रहे हो - चंद्रशेखर आज़ाद
कल बहुजन समाज को गालियाँ देने वाली पुलिस, आज चंद्रशेखर आज़ाद के सामने हाथ जोड़ती नज़र आ रही है।
SSP अविनाश पांडेय को बर्खास्त करो।
मेरठ में ललिता गौतम हत्याकांड में पुलिस ने दलितों के साथ जिस तरह का अपमानजनक एवं तानाशाही से भरा हुआ रवैया अपनाया है, इसे कतई स्वीकार नहीं किया जाऐगा।
CM योगी से हमारी मांग है कि SSP अविनाश पांडेय को तत्काल बर्खास्त किया जाए। @myogiadityanath
ऐसे सम्मानित व्यक्तित्व को इस स्थिति में देखकर मन व्यथित हो जाता है।🥺
लोकतंत्र की पहचान संवाद और जवाबदेही से होती है, उपेक्षा से नहीं।😳
इस्तीफा मिलने तक यही डटे रहेंगे।🤯
ये लोग ये सारा ज़हर बचपन से अपने परिवार में ही सीखते हैं। इनके ड्रॉइंग रूम और डिनर टेबल पर यही बातचीत होती है।
इस लड़की के दिमाग़ में यह ज़हर उसके परिवार की ट्रेनिंग से आया है। वरना 10-12 साल के सवर्ण बच्चों को कौन सिखाता है
मुख्यमंत्री Fadnavis जी! सवाल पूछना कब से गाली देना हो गया?
जो जवाबदेही तय करेंगे उन्हें अनाप-शनाप कहा जाएगा? जो गड़बड़ हुई है उसका जवाब ना देकर ऐसा बयान? सरकार की आलोचना राज्य की आलोचना कैसे हो गई?
मेरठ में दलित बेटी को न्याय दिलाने की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों के साथ जो हुआ, उसने पूरे देश को झकझोर दिया है।
यदि पुलिस हिरासत में बैठे व्यक्ति के साथ भी कथित मारपीट होती है, तो यह कानून के शासन, लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान की भावना पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
हम उत्तर प्रदेश सरकार से मांग करते हैं कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए और SSP अविनाश पांडे ने जो कृत्य किया है उनके विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
संविधान ने हमें न्याय मांगने, शांतिपूर्ण विरोध करने और अपनी बात रखने का अधिकार दिया है। इन अधिकारों की रक्षा होना ही लोकतंत्र की असली पहचान है।
🚨 अगर यह फैसला पूरी तरह लागू होता है, तो मरीजों और उनके परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी।
अनावश्यक ICU भर्ती, मौत के बाद भी बिल वसूली जैसी शिकायतों पर सख्ती—यह स्वास्थ्य व्यवस्था में जवाबदेही की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।